10 February 2018

WISDOM ---- कुकर्मी को दंड देना अनिवार्य है , अन्यथा उसका दुस्साहस बढ़ जाता है

 जार्ज  विलियम  प्रतिदिन  गिरजाघर  जाते  थे   और  गरीब  व  असहायों  की  भरपूर   सेवा  भी    करते  थे  l  एक  दिन  वे  प्रार्थना  कर  लौट  रहे  थे  कि  उन्होंने  देखा  कि   एक   दुष्ट  व्यक्ति  किसी  असहाय  को  सता  रहा  है  l  उन्होंने  उसे  समझाया  कि  किसी  कमजोर  को  प्रताड़ित  करना  पाप  है  ,  तो  उसने  गुस्से  में  आकर  उनके  गाल  पर  एक  तमाचा  मार  दिया  l  जार्ज  ने  दूसरा  गाल  भी  उसकी  और कर  दिया  l  उसने  उस  गाल  पर  भी  प्रहार  कर  दिया  l    ऐसा  होते  ही  जार्ज  विलियम  ने  उसे  उठाकर  जमीन  पर  पटक  दिया  l  भीड़  में  खड़े  चर्च  के  पादरी  ने  यह  द्रश्य  देखा  तो  बोले ---- "जार्ज !  तुम  तो  ईसा  के  महान  भक्त  हो  ,  फिर  इस  व्यक्ति  पर  प्रहार  क्यों  कर  रहे  हो   ? " 
  जार्ज  बोले ---- "  प्रभु  ईसा  ने  कहा  है  कि  कोई  तुम्हे  एक  चांटा  मारे  तो   दूसरा  गाल  उसके   सामने  कर   दो   l  मैंने  इसका  पालन  करते  हुए   अपना  दूसरा  गाल  भी  इसके  आगे  कर  दिया     किन्तु  मैंने  यह  भी  पढ़ा  है   कि   अत्याचार  सहन  करना  किसी  पाप  से  कम  नहीं  है   l  इससे  ज्यादा  कुकर्म  करने  की   छूट   देने  पर  इसका  दुस्साहस    बढ़   जाता  ,  इसलिए  मैंने  इसे  सबक  सिखाना  उचित  समझा   l  कुकर्मी  का  प्रतिकार  करना  भी  धर्म  के  समान  ही  है  l  

9 February 2018

WISDOM -----

    कैकेयी  मंथरा  के  बहकावे में  आ  गई  और   भरत  को  राज्य  तथा  राम  को   वनवास  मांग  बैठी   l   दशरथ जी  ने  शरीर  त्याग  दिया ,  कौशल्या  पर  दुःख  का  पहाड़  टूट  पड़ा   परन्तु  एनी  माताओं  के  सम्मान  का  उन्हें  पूरा  ध्यान  था  l   राजा  जनक  ने  सुना  कि  जानकी  भी  साथ  गईं  हैं  l  उन्होंने  दूतों  द्वारा  सही  स्थिति  का  पता  लगाया  और  भरत  का  समर्थन  करने  चित्रकूट  पहुँच  गये   l  भरत  के  कारण  राम - सीता  को  वनवास  हुआ  ,  इस  नाते  उनको  अपमानित  करने  का  भूलकर  भी  प्रयास  नहीं  किया  l    ऐसे  एक  दूसरे  के  सम्मान  के  भाव  ने   विकट  परिस्थितियों  में  भी  अयोध्या  का  संतुलन  बनाये  रखा   l  भूल  सिर्फ  भूल  रह  गई  ,  उससे  परस्पर  स्नेह   और  पारिवारिक  सद्भाव  में  कोई  फर्क  नहीं  पड़ा   l  
  इसके  विपरीत   महाभारत  एक - दूसरे  को  सम्मान  न  दे  पाने  की   भीषण  प्रतिक्रिया  के  रूप  में  उभरा  था   ---  बचपन    में  दुर्योधन  राजमद  में  पांडवों    सम्मान  न  दे  सका   l  भीम   सहज   प्रतिक्रिया   के  रूप  में   अपने  बल  का  उपयोग  कर  के  उन्हें    अपमानित   करने   लगे  l    द्रोपदी  सहज  परिहास  में  भूल  गई  कि   दुर्योधन  को  ' अंधों  के  अंधे  '  संबोधन  से  अपमान  का  अनुभव  हो  सकता  है   l 
  दुर्योधन  ईर्ष्या - द्वेष वश   नारी  के  शील  का  महत्व  ही  भूल  गया   तथा  द्रोपदी  को  भरी  सभा  में  अपमानित  करने  पर  उतारू  हो  गया   l 
  यही  सब  कारण  जुड़ते  गए  तथा  छोटी - छोटी  शिष्टाचार  की  त्रुटियों  की   चिनगारियां  भीषण  ज्वाला  बन  गईं,  महाभारत  हो  गया  l
  यदि  परस्पर  सम्मान  का  ध्यान  रखा  जा  सका  होता  ,  अशिष्टता  पर  अंकुश  रखा  गया  होता   तो  स्नेह  बनाये  रखने  में   कोई  कठिनाई  नहीं   होती  l  छल - कपट  और  षड्यंत्रों  में  वक्त  बरबाद  न  होता ,  भीष्म  पितामह  और   श्रीकृष्ण  जैसे  युग - पुरुषों  के  प्रभाव  का  लाभ  मिल  जाता  l  

8 February 2018

WISDOM ------

        तानसेन  के  गुरु  हरिदास  महाराज  थे  l  उनकी  प्रसिद्धि  सुनकर  अकबर  ने  भी  उनसे  मिलने  की  और  उनका  संगीत  सुनने   की   इच्छा  प्रकट  की  l    तानसेन  मित्र  बनाकर   अकबर  को  ले  गए  l  गुरु  ने  कहा ---- " मैं  कन्हैया  के  सिवाय  किसी  के  लिए  नहीं  गाता  l  "  अकबर  ने  छिपकर  उनका  वंदना -भक्ति  गायन  सुना   और  फिर  समर्पित  भाव  से  उनके  चरणों  में  बैठ  गए   और  बोले  ---- " मैं    हिंदुस्तान  का  सम्राट  होने  के  नाते  ,  इस  वृन्दावन  के  लिए  और  यमुना  नदी  के  घाटों  के  लिए   क्या  कर  सकता  हूँ  ,  कृपया  आज्ञा  दें  l " 
  अकबर  के  सिर  पर   अपना    हाथ  रखकर   हरिदास  महाराज  ने  वह  दिव्य  धाम  दिखाया  ,  जहाँ  श्रीकृष्ण  की  नित्य  लीलाएं  होती  हैं   l   भावसमाधि  से  निकाल कर  कहा --- "  तुम  क्या  निर्माण  कराओगे  ?  क्या  इस  दिव्य  धाम  को  तुम  जैसा  लौकिक  व्यक्ति  ठीक  कराएगा  l   जाओ  ,  सत्ता  संभालो  l  "    अकबर  वापस  आ  गया  ,  उसने  जो  देखा  वह  अद्भुत  था   l 

7 February 2018

WISDOM ------ कर्म तभी शुभ है जब वह धर्मयुक्त है , कर्मक्षेत्र ही धर्मक्षेत्र है l

    आज  मनुष्य  का  जीवन    धर्म  के  मार्ग  से  भटक  गया  है  , वह  गलत  कामों  को  भी  धर्मसंगत  समझता  है   l  आज  मनुष्य  ने  अपने   कर्मों    से  प्रकृति  को  क्षुब्ध  कर  रखा  है   l  पर्यावरण  को  प्रदूषित  कर  रखा  है  l  जीवन  असंतुलित  हो  गया  है   और  इसका  परिणाम  है  कि  नित  नई  बीमारियाँ  पैदा  हो  रहीं  महीन ,  प्रकृति  चक्र  गड़बड़ा  गया  है   l   भगवद्गीता  का  सन्देश  है  कि  हम   अपने  कर्मक्षेत्र  को  ही  धर्मक्षेत्र  बनाये   l   समर्पित  भाव  से  कर्म  करें  l 

6 February 2018

WISDOM --------- अहंकार से विवेक का नाश होता है

  अहंकारी  को  कभी  शान्ति  नहीं   मिलती  l  अहंकार  को  पोषण देने  वाला  इसे  प्रिय  होता  है  l  जो  व्यक्ति  अहंकार  के  साथ  जीता  है  , वह  हमेशा  चिंतित  रहता  है   l  उसे  हमेशा  परेशानी  बनी  रहती  है  कि  कौन  प्रशंसा  कर  रहा  है  ?  कौन  अपमान  कर  रहा  है ?  कौन  सम्मान  कर  रहा  है  ?   उसका  व्यक्तित्व  दूसरों  पर  निर्भर  है  l  अहंकार  हमेशा  औरों  पर  निर्भर  होता  है  l
  अहंकार  को  समाज  छीन  सकता  है  l  संसार  जिसको  आज  महामानव  बता  रहा  है  ,  कल  उसी  को  पापात्मा ,  दुरात्मा  कह  सकता  है  l  संसार  में  ऐसे  अनेकों  महामानव  हैं  ,  जिन्हें  कल  पूजा  जा  रहा  था ,  आज  वे  जेल  में  बंद  हैं  l  लोग  उन्हें  गाली  देते  हैं  ,  उनके  ऊपर  जूते  फेंकते  हैं  l  वही  समाज  है ,  वही  लोग  हैं   l  जरुरी  नहीं  कि   समाज  पहले  सही  था  या  अब  सही  है  l  बात  सिर्फ  इतनी  है  कि  समाज  दोनों  काम  कर  सकता  है   l  इसलिए  अहंकारी  को  चैन  नहीं  है  l 
   लेकिन  जो  ईश्वर  पर  विश्वास  रखते   हैं ,   भगवान  के  शरणागत  हैं  ,  उन्हें   इस  बात  की  चिंता  नहीं  रहती   कि  लोग  क्या  कहते  हैं  ,  कहते  रहें   l  वह  तो  निष्काम  भाव  से   अपना  कर्तव्य  करते  हुए  ईश्वर  की  शरण  में  श्रद्धाभाव  से  रहता  है   l   

5 February 2018

WISDOM ----- जीवन जीने का ढंग बदलना होगा

 सुखी  और  स्वस्थ  रहने  के  लिए  दुष्प्रवृत्तियों  का  त्याग  कर   सन्मार्ग  पर  चलना  होगा   l '
     मनुष्य  अपने  जीवन  जीने  के  ढंग  को  रूपांतरित  करे  ---- इसे  समझाने  वाली  एक  कथा  है -----
   '  एक  गाँव  पहाड़ियों  के  नीचे  की  घाटियों  में  बसा  था  l  वर्षा  होती  तो  नदियाँ  उफनती   और  लोगों  के  घर  बह  जाते  l  खेती - बारी  नष्ट हो  जाती , जानवर  बह  जाते  l  बच्चे  प्राय:  डूबते  रहते  l  आंधियां  आतीं  तो  पहाड़  से  पत्थर  गिरते ,  अनेक  लोग  उसमे  दबकर  मर  जाते  l   उस  गाँव  की  जिन्दगी  बड़े  कष्ट  में  थी  ,  लेकिन   उस  पहाड़ी  गाँव  के  लोगों  ने  मान  लिया  था   कि  जीने  का  यही  ढंग  है  l   उनके  पुरखों  ने  यही  जीवन  जिया  था  l  अब  उनके  बाद  उनके  बच्चे  भी  यही  जीवन  जीने  वाले  हैं  l   बाढ़ ,  आंधी ,  पत्थर  गिरना --- इन  कष्टों  को  सहना  और  फिर  मर  जाना  l
     एक  यात्री  उस  पहाड़ी  गाँव  में  पहुंचा   l  उसने  उन्हें  समझाने  की  कोशिश  की  कि  तुम  सब  नासमझी  का  जीवन  जी  रहे  हो  l  यहाँ  रहते  हुए  तुम्हारी  समस्या  कभी  हल  न  हो  सकेगी   l   इस  खाईनुमा  घाटी  को   छोड़ो,  देखो  इतने  अच्छे  पहाड़  तुम्हारे  चारों  और  हैं  ,  इनके  ढलान  पर  अपने  मकान  बनाओ  l   गाँव   के  लोगों  ने  अनेक  तर्क  किए---  क्या  इससे  ऊँचे   पर    मकान   बनाने  से   हमारी  समस्या  हल  हो  जाएगी ,  वर्षा  तो  तब  भी    आएगी ,  आंधियाँ   भी   उठेंगी  l
  मुसाफिर  ने  हँसते  हुए  कहा  --- उंचाई  पर  मकान  बनाने  से  ये  खाई  वाली  समस्याएं  नहीं  रहेंगी  ,  समस्याओं   का     यह  असहनीय  रूप  नहीं  रहेगा  l 
  पुराने  जीवन  के  ढंग  को  बदलने  के  लिए  बड़ी  हिम्मत  चाहिए  l  उस  गाँव  के  लोगों  ने  हिम्मत  जुटा  ली   l  उन्होंने  अपने  जीवन  में ,  अपने  मकानों  की  स्थिति  में  परिवर्तन  कर  लिया  l    इस बदली  हुई  स्थिति  से  उन्हें  बड़ा  आश्चर्य  हुआ  l  वर्षा  तो  खूब  हुई ,  नदी  भी  उफनी ,  र  अब  उनके  मकान  न     बहे    बच्चे  न   डूबे l  आंधियां  भी  आईं,  पत्थर  भी  गिरे  ,  लेकिन  अब  उनमे  से  कोई  दबा  नहीं   क्योंकि  उन  सबने  मिलकर    अपने   जीने     का  ढंग  बदल लिया   l  उनका  जीवन  जीने     ढंग  अब  रूपांतरित  हो  चुका  था  l  उन्होंने  अपने  इस  जीवन   का  भरपूर  आनंद  मनाया ,  उत्सव  मनाया  l  

4 February 2018

WISDOM ------

    एक  बार    भारत    के  महामहिम  राष्ट्रपति    ए. पी. जे. कलाम  से  एक  बच्चे  ने  पूछा  कि  क्या  उन्होंने  महाभारत  पढ़ा  है  ?   उन्होंने  कहा -- हाँ  l  तब  उस  बच्चे  ने  अगला  प्रश्न  किया  कि   इसमें  कौन  सा  चरित्र   उन्हें  सबसे  ज्यादा  प्रिय  है   l  तब  राष्ट्रपति  महोदय  ने  उस  बच्चे  को  बताया  कि   वे  महात्मा  विदुर  के  चरित्र  से  खासा  प्रभावित  हुए   l 
  बच्चे  ने  उनसे  फिर  पूछा ---- ' क्यों  ?   उत्तर   में    उन्होंने  कहा ---- "  क्योंकि  महात्मा  विदुर  ने   सत्ता  की  गलत  हरकतों  के  खिलाफ  आवाज  उठाई   और  अधर्म  की  ज्यादतियों  के  विरुद्ध  उस  स्थिति  में  भी  मोरचा  खोलने  का  साहस  किया  ,  जब  अतिरथी  पितामह   भीष्म ,   आचार्य  द्रोण,   महावीर कर्ण  आदि  सब  वीरों  ने  हथियार  डाल  दिए   थे  l  "   महामहिम  के  इस  उत्तर  में  उनका  स्वप्न शामिल  था  l