17 September 2026

WISDOM ----

 प्रकृति  में  क्षमा  का  प्रावधान  नहीं  है  l  जैसे  कर्म  किए हैं  वैसा  ही  फल  अवश्य  मिलेगा  लेकिन  यह  कब  और  किस  रूप में  मिलेगा  , इसे  काल  निश्चित  करता  है  l   अब  वर्तमान  समय  में  लालच , स्वार्थ  , अहंकार  , महत्वाकांक्षा  ----- आदि  बुराइयाँ  इतनी  बढ़  गईं  हैं  कि   किसी को  अपराधी  घोषित  करने  और  दंड  देने  से  पहले  अपना  स्वार्थ  आड़े  आ  जाता  है  l  सामान्य  जन  भी   अपने  स्वार्थ  और  डर  की  वजह  से  भी  अपने  परिवार  और  समाज  के  अपराधियों  को  सहर्ष  स्वीकार  करते   है  l  यह  सब  कुछ  नया  नहीं  है  , महाभारत  में  भी  धृतराष्ट्र   पुत्र  मोह  में  अंधे  थे  l  दुर्योधन  बाल्यकाल  से  ही  पांडवों  के  विरुद्ध  षडयंत्र करता  रहा   लेकिन  धृतराष्ट्र  ने  , भीष्म  पितामह  ने  उस  पर  कोई  नियंत्रण  नहीं  रखा   l  उसे  उसकी  गलतियों  की  कभी  कोई  सजा  नहीं  दी , उसकी  उद्दंडता  बढ़ती  ही  गई  l    लेकिन  ईश्वरीय  विधान  ऐसा  नहीं  है   l  ईश्वर  को  संसार  के  प्रत्येक  व्यक्ति  के  हर  पल  की , उसकी  उठती -गिरती  सांसों  की  जानकारी  है  l  सबका  लेखा -जोखा  ईश्वर  के  पास  है  l  संसार  के  नियम -कानून  अपराधी  को  दंड  दें  या  न  दें  ,  ईश्वर  की  लाठी  से  कोई  बच  नहीं  सकता  l  पुण्य  किए  हैं  तो  उनका  फल  सुख -वैभव   के  रूप  में  अवश्य  मिलता  है  l  जिस  स्तर  का  पाप  व्यक्ति  करता  है  , वैसा  ही  दंड  उसे  मिलता  है  l  छल , कपट  षड्यंत्र  , धोखा , लोगों  को  योजना  बनाकर  शारीरिक  और  मानसिक  रूप  से  उत्पीड़ित  करना  --ऐसे  अपराध  हैं   जिनकी  क्षमा  नहीं  होती  , ईश्वरीय  दंड  इतना  कठोर  होता  है  कि  देखने  वालों  की  रूह  काँप  जाए  l  ईश्वरीय  विधान  में  एक  विशेष  बात  यह  है  कि  हमारे  लिए  हमारा  यह  एक  जन्म  है   लेकिन  ईश्वरीय  विधान  में  यह  मनुष्य  की  एक  यात्रा  है  ,  यात्रा  के  किस  पड़ाव  पर   पाप  और  पुण्य  के  फल  मिलेंगे  ,  यह  मालूम  करना  मनुष्य  के  वश  में  नहीं  है  l  ऋषि  कहते  हैं  --होश  में  रह  कर  जीवन  जिओ  , किसी  का  अच्छा  नहीं  कर  सकते  तो  कोई  बात  नहीं  , किसी  का  बुरा  मत  करो  l  और  इस  सत्य  को  स्वीकार  करो  कि  जब  हम  किसी  का  बुरा  नहीं  कर  रहे  तो  हमारा  भी  बुरा  नहीं  होगा  l 

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