15 January 2013

"संयमित जीवन बिताकर भी मैं रोगी हूँ ,महात्मन ,ऐसा क्यों ?"एक व्यक्ति ने कन्फ्यूशियस से प्रश्न किया ।कन्फ्यूशियस ने थोड़ा विचार किया और बोले -"भाई ,तुम शरीर से संयमित हो ,पर मन से नहीं ।अब जाओ ईर्ष्या करना बंद कर दो तो तुम्हें संयम का पूर्ण लाभ मिलेगा ।"

JEALOUS /POISON

समुद्र मंथन हुआ तो उसमे से अनेक रत्नों के साथ विष भी निकला ।उस हलाहल विष की कुछ बूंदे मिट्टी पर गिर पड़ीं ।संयोगवश वह मिट्टी वही थी जिसे लेकर ब्रह्माजी मनुष्यों की देह बनाया करते थे ।उन्होंने उन विष की बूंदों को हटाया नहीं और उस विषैली मिट्टी से ही मनुष्यों की देह बनाते रहे ।विष की बूंदें ईर्ष्या की अग्नि बनकर मनुष्यों को जलाने लगीं और तभी से मनुष्य दूसरों को बढ़ता देखकर प्रसन्न होने के स्थान पर अकारण जलने और अपनी विषपान जैसी हानि करता चला आ रहा है ।

14 January 2013

SUCCESS

नदी में बाढ़ आई ।लहरें तट की मर्यादा को तोड़ती हुईं चारों  ओर फैलने लगीं ।प्रवाह में भारी प्रचंडता थी ।तटवर्ती वृक्ष उसकी लपेट में आकर धराशायी होने लगे ।किनारे पर शमी का एक विशाल वृक्ष मुद्दतों से अकड़ा खड़ा था ।वह सोचता था -"मेरी जड़ें गहरी हैं ,मैं परिपक्व भी हूँ और सुद्रढ़ भी ,इन लहरों की क्यों परवाह करूं ?"उसका सोचना चल ही रहा था कि लहरों ने जड़ के नीचे की मिट्टी काटनी शुरु कर दी ।हर लहर के साथ मिट्टी खिसकने लगी ।मजबूत तने से प्रवाह टकराया ।वृक्ष की निश्चिन्तता काम न आई ।देखते -देखते वह उखड़ गया ।देखने वालों ने आश्चर्य से देखा कि नदी तट का पुरातन शमी वृक्ष लहरों पर उतरता  हुआ ,बहा चला जा रहा है ।पास ही बेंत का एक छोटा सा गुल्म खड़ा था ।उसने सोचा विपत्ति आने से पूर्व सुरक्षा का उपाय कर लेना चाहिये ।वह झुका और मिट्टी की सतह पर लेट गया ।गरजती हुई पानी की लहरें उसके ऊपर होकर गुजरती रहीं ।बाढ़ उतरी तो देखने वालों ने देखा कि बेंत का पौधा सुरक्षित है और खतरा टलते ही अपना मस्तक ऊँचा उठाने की तैयारी कर रहा है ।पूछने वालों ने पूछा -"विशाल शमी वृक्ष क्यों उखड़ गया और बेंत का छोटा पौधा बाढ़ से कैसे बचा रहा ?बताने वालों ने बताया -"अहंकारी ,अक्खड़ और अदूरदर्शी समय की गति को नहीं पहचानते और ढिठाई उन्हें ले बैठती है ।किन्तु जो नम्र हैं ,वे झुकते हैं ,टकराने से बचते हैं और अपनी सज्जनता का सुफल देर तक प्राप्त करते रहते हैं ।-

10 January 2013

मनुष्य के ह्रदय का द्वार खोलने वाली ,निम्नता से उच्चता की ओर ले जाने वाले गुणों का विकास करने वाली यदि कोई वस्तु है तो प्रसन्नता ही है ।प्रसन्न और संतुष्ट रहने वाले व्यक्तियों का जीवन ज्योति पुंज बनकर दूसरों का मार्गदर्शन करने में सक्षम होता है ।प्रसन्नता ऐसा टॉनिक है जिसका नित्य पान करके व्यक्ति तन्दरुस्त हो जाता है ,मनुष्य के अन्दर के घाव ठीक हो जाते हैं और व्यक्ति के मन पर जमी विषाद की धूल झड़ जाती है ।दिल खोल कर हँसना सीखो ताकि बुढ़ापे की झुर्रियों में भी जवानी की झलक चमकती रहे

9 January 2013

REGULARITY

नियमितता ही जीवन है ।सूर्य एक नियमितता लिये हुए उदय एवम अस्त होता है ।पृथ्वी ,चन्द्रमा ,ग्रह ,तारे सभी निश्चित गति से सुसंचालित हैं ।कीड़े मकोड़े और पक्षियों में यह विशेषता पाई जाती है वे अपने भीतर की किसी अज्ञात घड़ी के मार्गदर्शन से अपनी गतिविधियाँ व्यवस्थित रखते हैं ।मुर्गा समय पर बांग देता है ,चमगादड़ रात को ही उड़ता है ।चींटियों की प्रणय केलि नियत निर्धारित मुहूर्त पर होती है ।वर्ष में एक दिन एक ही समय उनका नियत रहता है ।यदि हम इन छोटे प्राणियों से समय पालन की नियमितता सीख सकें तो जीवन को व्यवस्थित रखकर वांछित दिशा में प्रगति कर सकते हैं ।
तितली और मधुमक्खी दोनों एक फूल पर आकर बैठती ।दोनो झगड़ने लगीं कि फूल पर मेरा अधिकार है ।फैसला फूल ने सुनाया ।उसने मधुमक्खी के पक्ष में निर्णय दिया और कहा ,"यह बैठने का श्रम सार्थक करती है और दूसरों के लिये शहद निकालती है इसलिये इसी का अधिकार है ।

BEAUTY

आत्मा की प्रसन्नता में अक्षय सौन्दर्य निहित है ।भव्य विचारों से सुन्दर बनिये ।हम सबका मुख -मंडल आंतरिक सद्गुणों से आकर्षक बनता है ।यदि हमारे मन में प्रेम ,दया ,सज्जनता ,ईमानदारी आदि सद्गुण हैं तो इन्ही भावों की गुप्त तरंगे हमारे शरीर में सर्वत्र दौड़ जायेंगी ।आत्मा प्रसन्न हो जायेगी और मुख मुद्रा मोहक बन जायेगी ।अच्छे और बुरे विचारों की धारा मानसिक केन्द्र से चारों ओर बिखरकर खून के प्रवाह के साथ चमड़ी की सतह तक एक विद्दुत -धारा के समान आती है और वहां अपना प्रभाव छोड़ जाती है ।यदि कोई व्यक्ति श्रेष्ठ दैवी गुणों का निरंतर मानसिक अभ्यास कर सके ,तो वह कितना ही कुरूप हो ,मोहक -मादक आकर्षण -शक्ति से परिपूर्ण हो सकता है ।