29 October 2022

WISDOM ----

   लघु -कथा ---- ' खुदा  क्या  करता  है  l '------- एक  सुल्तान  के  पास  एक  काजी  पहुंचा  l  उसका  धर्म -आडम्बर  देखकर   सुल्तान  ने  सोचा  कि  उसकी  परीक्षा  ली  जाए  l  सुल्तान  ने  काजी  से  पूछा  --- 'खुदा  कहाँ  रहता  है  ?  और  क्या  करता  है  ?  ' और  कहा  --इन  प्रश्नों  का  संतोषजनक  उत्तर  देने  पर   तुम्हे  ऊँचा  पद  दिया  जाएगा  अन्यथा  दंड   l   काजी  ने  आठ  दिन  की  मोहलत  मांगी  ,  उसे  कोई  उत्तर  नहीं  सूझ  रहा  था  l  बहुत  परेशान  था  ,  चिंता  के  कारण  खाना -पीना  भी  छूट  गया  l   उसके  नौकर  की  हैसियत  तो  साधारण  थी  किन्तु  वह  वेदांत  का  पंडित  था  l  उसने  काजी  से  कहा  आप  मुझे  बताएं  , मैं  आपकी  मदद  करूँगा  l  काजी  ने  उसे  सुल्तान  की  कही  सब  बात  बताई  तब  नौकर  ने  कहा  --- 'आप  मुझे  सुल्तान  के  पास  भेज  दें , मैं  सब  संभाल  लूँगा   और  न  संभाल  सका  तो  दंड  मुझे  ही  मिलेगा  , आप  बच  जायेंगे  l  इसी  बीच  सुल्तान  के  सिपाही  आ  गए  तो  काजी  ने  बीमारी  का  बहाना  कर  के  नौकर  को  भेज  दिया  l  वह  निडर  होकर  सुल्तान  के  पास  पहुंचा  और  बोला  --- फरमाइए  जहाँपनाह  , क्या  पूछना  चाहते  हैं  ?  सुल्तान  ने  कहा --- 'क्या  तुम  उन  सवालों  के  जवाब  दे  सकते  हो  , जो  तुम्हारे  मालिक  से  पूछे  गए  हैं  ? '  नौकर  ने  कहा --- "जरुर  दे  सकता  हूँ  , लेकिन  आप  एक  सच्चे  मुसलमान  की  तरह  मुझे   बाइज्जत  ऊँची  जगह  बख्शें   और  खुद  नीची  जगह  बैठें   क्योंकि  मजहब  के  मुताबिक   जो  पूछता  है  , वह  शागिर्द  होता  है   और  जो  बताता  है  वह  उस्ताद  होता  है  l '  सुल्तान  ने  उसे  बेशकीमती  पोषक  पहनवाकर   अपना  तखत  पेश  किया  और  स्वयं  सीढ़ियों  पर  बैठ  गया  l  अब  सुल्तान  ने  पूछा --- ' खुदा  कहाँ  रहता  है  ?  नौकर  ने  दूध  मंगवाया  और  सुल्तान  से  पूछा  -- क्या  इस  दूध  में  मक्खन  है  ?  सुल्तान  ने  हामी  भरी  l  फिर  उसने  पूछा --- यह  मक्खन  कहाँ  है   ?  इस  प्रश्न  का  सुल्तान  कोई  जवाब  नहीं  दे  सका  , तब  नौकर  ने  कहा ---- ' जिस  प्रकार  दूध  में  मक्खन  है  पर  वह  दीखता  नहीं  है  , उसे  पाने  के  लिए  दूध  को  मथना  पड़ता  है  ,  इसी  तरह  जर्रे -जर्रे  में  मौजूद  है  , उसे  पाने  के  लिए  साधना  करनी  पड़ती  है  , अपने  विचारों  को , ह्रदय  को  परिष्कृत  करना  पड़ता  है  l  " इस  उत्तर  से  सुल्तान  संतुष्ट  हुआ   और  उसे  बहुत  आनंद  हुआ  l  अब   उसने  दूसरा  प्रश्न  पूछा  ---" खुदा  क्या  करता  है  l "  अब  नौकर  ने  काजी  को  बुलाया   और   और  सुल्तान  को  काजी  के  स्थान  पर  बैठने  को  कहा  और  काजी  को  सीढ़ियों  पर  बैठने  को  कहा   l  नौकर  बोला  अब  ध्यान  से  सुनो --- " खुदा  भी  यही  करता  है  l  वह   रंक    को  राजा , राजा  को  काजी   और  काजी  को  रंक  बना  सकता  है  l  वह  लगातार  परिवर्तन   करता  रहता  है  l  किसी  को  ऊपर  उठाता  है ,  किसी  को  नीचे  गिराता  है  ,  किसी  को  बनाता  है , किसी  को  मिटाता  है  l  यह  काल  चक्र  है   और  वह  इस  चक्र  का  नियंत्रण  करता  है  l "

28 October 2022

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " अशांति  से  आज  सभी  परेशान  हैं  l  एक  मनुष्य  के  पास  पर्याप्त  साधन , संपत्ति , जीवन  निर्वाह  की  वस्तुएं  हैं  , फिर  भी  वह  अशांत , परेशान  है  l  उच्च  शिक्षा  संपन्न , अच्छे  पद  पर  प्रतिष्ठित  होकर  भी   भूला -भटका  सा  दिखाई  देता  है  l  "  आचार्य श्री  लिखते  हैं --- अभिमान , अहंकार   चाहे  वह  किसी  भी  गुण ,  रूप  व  वस्तु  का  क्यों  न  हो  , मनुष्य  को  वास्तविक  सुख  और   आत्मिक  आनंद  से  दूर  रखता  है  l '   पुराण  की  एक  कथा  है -----  एक  बार  देवता  भी  भोग - विलास  में  डूब  गए  जिससे  उनकी  सामर्थ्य  नष्ट  हो  गई   l  उस  समय  असुरों  ने  उन  पर  आक्रमण  किया  ,तब  प्रजापति  ब्रह्मा  ने     पृथ्वी  के  प्रतापी  और  बलशाली  महाराज  मुचकुंद   को  सेनापति  बनाया  l  ब्रह्माजी  का  कहना  था  ---संयमी  और  सदाचारी  व्यक्ति  मनुष्य  तो  क्या   देव -दानव  सभी  को  परस्त  कर  सकता  है  l  अब  देवताओं  की  सेना  का  सञ्चालन  महाराज  मुचकुंद  कर  रहे  थे  l  एक  माह  तक  घनघोर  युद्ध  हुआ  l  असुर  बुरी  तरह  पराजित  हुए  ,  उन्होंने  बीसियों  सेनापति  बदल  डाले   लेकिन  मुचकुंद  की  वीरता  के  आगे  वे  सब  परस्त  हो  गए  l   धरती  और  देवलोक  सब  तरफ  मुचकुंद  की  जयकार  हो  रही  थी   l  अपनी  प्रशंसा  सुनते -सुनते  मुचकुंद  के  मन  में  अहंकार  जाग  गया   और  अब  वे  अपनी  शक्ति  भोग -विलास  में   नष्ट  करने  लगे  l  प्रजापति  ब्रह्मा  ने   इस  बात  को  देख  लिया  और  देवराज  इंद्र  को  बुलाकर  कहा  कि   मनुष्य  में  अहंकार  आ  जाने  से  उसका  पतन  होने  लगता  है   इसलिए  तुम  अब  शिवजी  के  पुत्र  स्वामी  कार्तिकेय  को  सैन्य  संचालन  के  लिए  राजी  कर  लो  l  प्रजापति  का  कहना  सही  था  ,  विलासिता  के  कारण   मुचकुंद  की  शक्ति  कम  हो  गई  और  असुरों  ने  उन्हें   बंदी  बनाकर  धरती  पर  पटक  दिया  l  ब्रह्माजी  ने  उन्हें  समझाया  कि ---- संयमी  और  पराक्रमी  होने  के  साथ   निरहंकारी  भी  होना  चाहिए  l  संयम  से  ही  स्वर्ग  जीते  जाते  हैं  l  

27 October 2022

WISDOM ----

   कबीरदास जी  का  दोहा  है ---- धीरे -धीरे  रे  मना ,  धीरे  सब  कुछ  होय  l  माली  सींचै  सौ  घड़ा , ऋतु  आए  फल  होय   l    अर्थात  माली  किसी  पौधे  को  सौ  घड़े  पानी  से  भी  सींचे  ,  पर  उसमें  फल  तो  समय  आने  पर  ही  होंगे  l    आचार्य श्री  लिखते  हैं  --"- सत्कर्मों  का  बीज  बोते  ही  हमें  फल प्राप्ति  नहीं  हो  सकती  ,  समय  आने  पर  ही  हमें  सत्कर्मों  का  फल  मिलता  है  l  इसलिए  हमें  कुशल  किसान  की  तरह   सत्कर्मों  की  खेती  निरंतर  करनी  चाहिए  l  " एक  कथा  है -----  देव  नामक  एक   लड़का  बहुत  गरीब  था  ,  जीविका  और  स्कूल  की  फीस  भरने  के  लिए  वह  फेरी  लगाता  था  l  एक  दिन  वह  दिन  भर  घूमा  लेकिन  उसका  कोई  सामान  नहीं  बिका  l  वह  बहुत  थक  गया   और  उसे  बहुत  भूख  भी  लागी  l  बहुत  व्याकुल  था  वह  ,  कुछ  खाना  मांगने  के  लिए  उसने  एक  घर  का  दरवाजा  खटखटाया  l  एक  लड़की  बाहर  आई   l  संकोचवश  उसने  खाना  तो  नहीं  माँगा  , एक  गिलास  पानी  माँगा  l   उसे  देखकर  लड़की  समझ  गई  कि  वह  बहुत  भूखा  है , वह  एक  बड़ा  गिलास  दूध  भरकर  ले  आई  l  लड़के  ने  दूध  पी  लिया  और  इसके  पैसे  के  लिए लिए  पूछा  l  लड़की  ने  मना  कर  दिया  कि  हम  इस  तरह  पैसे  नहीं  लेते  l  लड़का  धन्यवाद  देकर  चला  गया  l  वर्षों  बीत  गए  l  वह  लड़की  गंभीर  रूप  से  बीमार  पड़ी  , स्थानीय  चिकित्सक  सफल  नहीं  हुए  तो  उसे  शहर  के  बड़े  अस्पताल  भेज  दिया  l  वहां  विशेषज्ञ  चिकित्सक  को  बुलाया  गया  ,  उन्होंने  उस  लड़की  को  देखा  , रोग  की  जांच  की  , उनकी  मेहनत  रंग  लाई  और  कुछ  ही  दिनों  में  वह  पूर्ण  स्वस्थ  हो  गई  l  उसने  किसी  सहायक  से  कहकर  अस्पताल   के  कार्यालय  से  बिल  बिल  मंगवाया  l  बिल  को  देखकर  लड़की  को  लगा  कि  वह  बीमारी  से  तो  बच  गई  लेकिन  अब  बिल  कैसे  भरेगी  ?   तभी  उसकी  द्रष्टि  बिल  के  कोने  पर  लिखे  एक  सन्देश  पर  गई  ,  वहां  पर  लिखा  था  ---- ' आपको  भुगतान  करने  की  कोई  आवश्यकता  नहीं  l  एक  गिलास  दूध  द्वारा  इस  बिल  का  भुगतान  वर्षों  पहले  किया  जा  चुका  है  l  '  उसे  याद  आया  कि  वर्षों  पहले  उसने  जिस  बालक  को  एक  गिलास  दूध  देकर  उसकी  सहायता  की  थी  ,  उसी  ने  उसे  संकट  से  बचाया  है  l   हमें  सत्कर्मों  का  सुफल  अवश्य  मिलता  है  चाहे  वह  संसार  में  कहीं  से  भी  मिले  l  

WISDOM ----

   एक  बार  एक  अपराधी  पकड़ा  गया  , उसे  फाँसी  की  सजा  मिली  l  फाँसी  की  कोठरी  में  जाने  से  पूर्व  , वह  राजा  को  बुरी -बुरी  गाली  और  दुर्वचन  कहने  लगा  l  वह  विदेशी  था  , उसकी  भाषा  को   सभा  के  एक -दो  सरदार  ही  जानते  थे  l   राजा  ने  विदेशी  भाषा  जानने  वाले  एक  सरदार  से  पूछा  --- " यह  अपराधी  क्या  कह  रहा  है  ? "  उसने  उत्तर  दिया  --- " आपकी  प्रशंसा  करते  हुए  ,  अपनी  दीनता  बताता  हुआ  ,  यह  दया  की  प्रार्थना  कर  रहा  है  l "  इतने  में  दूसरा  सरदार  उठ  खड़ा  हुआ  ,  उसने  कहा --- " नहीं  सरकार  !  यह  झूठ  बोलता  है  l  अपराधी  ने  आपको  गाली  दी  है  और  दुर्वचन  बोले  हैं  l  राजा  तो  विदेशी  भाषा  जानता  न  था   और  कोई  तीसरा  आदमी  फैसला  करने  वाला  नहीं  था  l  इसलिए  सत्य  का  कैसे  पता  चले  ?  राजा  ने  स्वयं  विचार  किया   और  पहले  सरदार  को  ही  सत्यवादी  कहा   तथा  अपराधी  की  सजा  कम  कर  दी   l  दूसरे  सरदार  से  राजा  ने  कहा --- "  चाहे  तुम्हारी  बात  सत्य  अवश्य  ही  हो  ,  पर  उसका  परिणाम  दूसरों  को  कष्ट  मिलना   तथा  हमारा  क्रोध  बढ़ाना  है  ,  इसलिए  वह  सत्य  होते  हुए  भी  असत्य  जैसी  है  l     और  इस  पहले  सरदार  ने   चाहे  असत्य  ही  कहा  हो  ,  पर  उसके  फलस्वरूप   एक  व्यक्ति  के  जीवन  की  रक्षा  होती  है   तथा  हमारे  ह्रदय  में  दया  उपजती  है   , इसलिए  वह  सत्य  के  ही  समान  है  l "  

26 October 2022

WISDOM ---

   मानव  जीवन  अनमोल  है , ईश्वर  ने  सबको  कोई  न  कोई  विभूति  अवश्य  दी  है  l  किसी    के  पास  धन -वैभव  है , किसी  के  पास  अच्छा  स्वास्थ्य , किसी  के  पास  बुद्धि , विद्या ----- l  जो  कुछ  मनुष्य  को  मिला  है  , वह  उसका  महत्त्व  नहीं  समझता   और  दुर्बुद्धि  के  कारण  उसका  दुरूपयोग  करता  है  ----- एक  बार  पांच  असमर्थ  , अपंग  लोग  एकत्र  हुए  और  कहने  लगे   कि  यदि  भगवान  ने  हमें   समर्थ  बनाया  होता   तो  हम  परमार्थ  के  कार्य  करते  , पर  क्या  करें  !  अँधा  बोला ---- मेरी  आँखें  होतीं  तो  जहाँ  कहीं  बिगाड़  दिखाई  देता  ,  उसे  सुधारने  में  लग  जाता  l  लंगड़े  ने  कहा --- मेरे  पैर  होते  तो  दौड़ -दौड़  कर  भलाई  के  कार्य  करता  l  निर्बल  ने  कहा --- मेरे  पास  ताकत  होती   तो  अत्याचारियों  को  मजा  चखा  देता  l  निर्धन  ने  कहा --- मेरे  पास  धन  होता  तो  दीन -दुखियों  के  लिए  लुटा  देता  l  मूर्ख  ने  कहा --- विद्वान  होता   तो  संसार  में  ज्ञान   की  गंगा  बहा  देता   चारों  ओर  विद्या  ही  विद्या  दिखाई  देती  l    वरुण  देव  ने  उनकी  बातें  सुनी   और  सच्चाई  परखने  के  लिए   उन्होंने  सात  दिन  के  लिए   उन्हें  सशर्त  आशीर्वाद  दिया  l  जैसे  ही  रूप  बदला  ,  पाँचों  के  विचार  भी  बदल  गए   l  अंधे  ने  कामुकता  की  वृत्ति  अपना  ली  l  लंगड़ा  घूमने  निकल  पड़ा  l  धनी  ठाठ -बाट   एकत्र  करने  में  लग  गया  l  बलवान  दूसरों  को  सताने  लगा   l  विद्वान्  ने  सबको  उल्लू  बनाना  शुरू  कर  दिया  l  वरुण  देव  लौटे   तो  देखा  वे  स्वार्थ  सिद्धि  में  लगे  थे  l  देवता  नाराज  हुए  और   वरदान  वापस  ले  लिए  l   उन्हें  जो  अनमोल  वक्त  मिला  था  वह  बीत  गया ,  अब  पछताने  से  क्या   होता  है  ?

25 October 2022

WISDOM -----

     चीन  का  एक  अमीर  च्यांग  भेड़  पालने  का  धंधा  करता  था  l  एक  बार  उसने  दो  लड़के   नौकर  रखे   और  चराने  के  लिए  भेड़ें  बाँट  दीं  l   देखने  पर  पता  चला  कि  भेड़ें   दुबली  भी  हो  गईं  और  कुछ  मर  भी  गईं  l  अमीर  ने  चरवाहों  को  जिम्मेदार  ठहराया  और  जाँच  की  कि   किस  कारण  इतनी  हानि  हुई  l  पता  लगा  कि  दोनों  अपने -अपने  व्यसनों  में  लगे  रहे  l  एक  को  जुआ  खेलने  की  आदत  थी  ,  जब  भी  दाँव  लगता  जुए  में  जा  बैठता  l  भेड़ें  कहीं -से -कहीं  जा  पहुँचती  और  भूखी -प्यासी  कष्ट  पातीं  l  यही  बात  दूसरे  की  थी  ,  वह  पूजा -पाठ  का  व्यसनी  था  l  वह  भेड़ों  पर  ध्यान  न  देता   और  अपनी  रूचि  के  काम  में  लगा  रहता  l  दोनों  पकड़े  गए  और  न्याय  के  लिए   कन्फ्यूशियस  के  सामने  प्रस्तुत  किए  गए   l  दोनों  के  कारणों  में  भेद  था  ,  पर  कर्तव्यपालन  की  उपेक्षा  करने  के  लिए  दोनों  समान  रूप  से  दोषी  थे  l  न्यायधीश  ने  दोनों  को  समान  रूप  से  दंड  दिया   और  कहा --- " कर्तव्य  भाव  के  बिना  जो  किया  जाता  है   वह  व्यसन  है  ,  व्यसन  में  जुआ  खेला  या  पूजा  की  l  कर्तव्य  की  तो  उपेक्षा  की  l  उसी  का  दंड  दिया  गया  है  l  "  'कर्तव्य  ही  धर्म  है  l '

23 October 2022

WISDOM

     हमारे  महाकाव्य  हमें  जीवन  जीना  सिखाते  हैं  l  महाभारत  में   प्रसंग  है --- चक्रव्यूह  l  उस  युग  में  वीरता  का  एक  मापदंड  यह  था  कि  युद्ध  के  लिए  कोई  ललकारे , चुनौती  दे  तो  उसे  स्वीकार करना  अनिवार्य  था  l  उस  दिन  के  युद्ध  में  अर्जुन  को  एक  अन्य  राजा  ने  ललकारा   और   जहाँ  द्रोणाचार्य  ने  चक्रव्यूह  रचा  था  , उस  स्थान  से  काफी  दूर  युद्ध  के  लिए  ले  गए  l  अब  शेष  चारों  पांडवों  को  चक्रव्यूह  बेधना  नहीं  आता  था  तब  अर्जुन  के  पुत्र  अभिमन्यु  ने  कहा  ,  उसने  यह  विद्या  माँ  के  गर्भ  में  सीखी  है  , उसे  छह  दरवाजे  पार  करना  आता  है   ,  फिर  आप  सभी  पांडव  और  सेना  साथ  होगी  तो   हम  आज  के  युद्ध  में  विजय  श्री  प्राप्त  होगी  l  इसकी  पूरी  कथा  है  कि   सात  महारथियों  ने  मिलकर   सत्रह  वर्षीय  अभिमन्यु  का  वध  कर  दिया  l  यह  प्रसंग  हमें  बहुत  महत्वपूर्ण  शिक्षा  देता  है  --- उस  युग  में  जब  भगवान  श्रीकृष्ण  स्वयं  इस  धरती  पर  थे  और  अभिमन्यु   उनकी  बहन  सुभद्रा और  अर्जुन  का  पुत्र  था  ,  जब  उसे  सबने  मिलकर  युद्ध  के  नियमों  के  विपरीत  छल  से  मारा  तो  फिर  इस  कलियुग  की  बात  क्या  कहें  ?  इस  युग  में   जब  मानसिक  विकृतियाँ  अपने  चरम  पर  हैं  तो  यह  प्रसंग  हमें  शिक्षा  देता  है  कि  ---दुश्मन  के   और  कुटिल   व्यक्ति  के   खेमे  में  जाने  का  जोखिम  न  लो  l  यदि  किसी  से  दुश्मनी  रहने  के  बाद  सुलह  हो  गई  हो  , मित्रता  हो  गई  हो  तब  भी  उसका  विश्वास  न  करो  क्योंकि  बिच्छू  अपना  स्वाभाव  नहीं  बदलता  है  l  इतिहास  में  ऐसे  अनेकों  प्रसंग  है   और  अनेकों  घटनाएँ  हम  वर्तमान  में  भी  देखते -सुनते  हैं  कि  मित्रता  की  आड़  में   छल -कपट , धोखा मिलता  है  ,जीवन  को  भी  खतरा  रहता  है  l  इतिहास  की  एक  घटना  है ---- ओरंगजेब  ने  जोधपुर  के  महाराज  जसवंतसिंह  से  मित्रता  की   और  उनके  पराक्रम  का  जी  भर  कर  लाभ  उठाया  l  वह  मन  ही  मन  उनकी  वीरता  से  डरता  था  और  जोधपुर  पर  कब्ज़ा  करना  चाहता  था  l  औरंगजेब  ने  महाराज  जसवंतसिंह  को  निरंतर  युद्धों  में  उलझाए  रखा  जिससे  उनका  शरीर  जर्जर  हो  गया  l  काबुल  के  पठानों  के  साथ  युद्ध  में  उनके  दो  पुत्र  मारे  गए  l  औरंगजेब  बहुत  कुटिल  और  लोभी  था  उसने  उनके  अंतिम  पुत्र  पृथ्वीसिंह  को  अजमेर  का  विद्रोह  दबाने  भेजा  , उसने  सोचा  था  की  ये  अनुभवहीन  है , मारा  जायेगा  लेकिन  पृथ्वी सिंह  विजयी  होकर  लौटा  l  आचार्य श्री  लिखते  हैं --- दुष्ट  की  भलाई  और  अनाचारी  का  संग  करने  वाले  का  कल्याण  नहीं  होता  l '  औरंगजेब  ने  विजय  के  उपलक्ष्य  में  खिल्लत  देने  के  बहाने   पृथ्वी सिंह  को  बुलाया   और  विष बुझे  कपड़े  पहनाकर   आदर पूर्वक  विदा  किया   l  कुमार  पृथ्वीसिंह  दरबार  से  अपने  निवास  स्थान  तक  भी  न  जा  सके  , रास्ते  में  ही  कपड़ों  में  लगे  घातक  विष  ने  अपना  काम  कर  दिया   और  जसवंत सिंह  का  दीप्तिमान  दीपक  अस्त  हो  गया  l    ऐसे  इतिहास  में  अनेकों  प्रसंग  हैं   जहाँ  हमने  जिसका  विश्वास  किया  , उन्ही  ने  धोखा  दिया , छल  किया  l   ऐसे  प्रसंग  ही  हमें  सिखाते  हैं  कि  कलियुग  में  जब  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  है   तो  अपने  सामान्य  जीवन  में  भी  ऐसे  जोखिम  न  लें  जहाँ  अपने  सम्मान  और  जीवन  को  खतरा  हो  l  किसी  विद्वान्  ने  कहा  भी  है ---प्रेम  सब से  करो  , पर  विश्वास  किसी  का  न  करो  l