25 December 2025

WISDOM -----

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- " व्यक्ति  का  चरित्र  और  उसकी  उच्च  भावनाएं  ही  उसे  महान  और यशस्वी   बनती  हैं  , पद , सम्मान  नहीं  l  "    अथाह  धन -संपदा  जोड़  लेने  से , उच्च  पद  प्राप्त  कर  लेने  से ,  प्रवचन  से   कोई व्यक्ति  महान  नहीं  बनता  l  महत्वपूर्ण  यह  है  कि  इस  स्थिति तक  पहुँचने का  सफ़र  कैसे तय  किया   ?   आचार्य जी  लिखते  हैं  - ' गलत   रास्ते  से  प्राप्त  की  गई  सफलता  अंत  में कलंकित  हो  जाती  है   l '    कलियुग  की  सबसे  बड़ी  त्रासदी  यही  है  कि   समाज  को  सही  दिशा  देने   वाले  ही  दिशा भ्रमित  हैं  l  तृष्णा , कामना , वासना  , महत्वाकांक्षा  ----का  जाल  इतना  घना  है  कि  व्यक्ति  उसमें  एक  बार  फँस  गया  तो  निकलना  मुश्किल  है  !  लेकिन  इस  संसार  में  असंभव  कुछ  भी  नहीं  l  व्यक्ति  की  आत्मा  में  इतनी  शक्ति  है   कि  वह  संकल्प  ले  तो  असंभव  को  भी  संभव  कर  सकता  है  l  आचार्य श्री कहते हैं  ---भूल समझ  आने  पर  उल्टे  पैरों  लौट  आने  में  कोई  बुराई  नहीं  l  ' विचारों  में परिवर्तन  और  परिमार्जन  से  जीवन की  दिशा  कैसे  बदल जाती  है   इसका  उदाहरण  लियो टालस्टाय  का  जीवन  है  l  l  वे  रूस  के  सामंती  वंश  के  राजकुमार  थे  l सामंत  सेनापतियों  की  सारी  बुराइयाँ  उनमें  भरी  पड़ी  थीं  लेकिन  सत्य  का  प्रकाश  आते  ही , विचारों  में  परिवर्तन  होते  ही   उनके जीवन  की  दिशा  धारा ही  बदल  गई  l   मद्यपान , क्रूरता , हत्या  , व्यसन  और  विलासिता  का  जीवन  जीने  वाले   टालस्टाय   अब  प्रेम , करुणा , सह्रदयता , सहानुभूति  और  त्याग , तपस्या  की  मूर्ति   महात्मा टालस्टाय  बन  गए  l  लियो टालस्टाय  कहते  हैं --- "  दुनिया  की  हर  बुराई  और  बेइंसाफी  की  अधिकतम  जिम्मेदारी से  विद्वान , साहित्यकार  और  कलाकार  बच  नहीं  सकता  l  आरम्भ  में  मैं  भी  साहित्यकार  की  जिम्मेदारी को  नहीं  समझा  था  l  मैं  नहीं  जानता  था  कि  मैं  क्या  लिख  रहा  हूँ   और  क्या  शिक्षा  दे  रहा  हूँ  l  मेरी  एक  ही  अभिलाषा थी  कि  अधिक  से  अधिक  धन  और यश  का   संपादन  किया  जाए  l  यह  मेरा  पागलपन  था   और  इस  पागलपन  को  दूर  करने  में   मुझे  पूरे  छह  वर्ष  लग  गए  l "   टालस्टाय  ने  जब  अपने  साहित्यिक  दायित्व  को  समझा  तो  वे  महात्मा  बन  गए  l  

21 December 2025

19 December 2025

WISDOM ------

   बर्नार्ड  शा  एक  प्रसिद्ध  आलोचक  और  नाटककार  थे  l    उनका  एक  प्रसिद्ध  नाटक  था   ' मिसेज  वारेंस  प्रोफेशन '    इसमें  समाज  में  फैली  विकृतियों  पर  आक्रमण  किया   गया  था  l   इसमें  दिखाया  गया  था  कि  जो  लोग  समाज  में  ऊपर  से  ' सज्जन  और  सभ्य '  बने  रहते  हैं   , उनमे  से  कितनों  का  ही  भीतरी  जीवन   कितना  पतित  होता  है  l  यह  रचना  प्रकाशित  होते  ही  अश्लील  बताकर जब्त  कर  ली  गई  l  लेकिन  बाद  में  यह  प्रतिबन्ध  हटा  लिया  गया   और  इसे  सच्चरित्रता   की  शिक्षा  देने  वाला  माना  गया   l                                                                                                                     मनुष्य  नाम  का  प्राणी  जब  से  इस  धरती  पर  आया  तभी  से  विकृतियां  उसमें  हैं  , मनुष्य  ने  उन्हें  दूर  करने  का  , अपने  मन  पर  नियंत्रण  करने  का  कभी  प्रयास  नहीं  किया   इसलिए  मानव  चेतना  परिष्कृत  नहीं  हो  सकी  ,  भौतिक  रूप  से  मनुष्य  सम्रद्ध  होता  गया  लेकिन  चेतना  के  स्तर  पर   पशु  से  भी  निम्न  स्तर  का हो  गया  l  पशु  तो  अपनी  आयु  और  मौसम  के  अनुसार  आचरण  करते  हैं  लेकिन  बुद्धिमान  होने  के  कारण   और  सद्बुद्धि  न  होने  के  कारण   मनुष्य     मनुष्यता  को  ही  भूल    जाता  है   और  समाज  से  छिपकर  , मुखौटा  लगाकर   अपनी  विकृतियों  को  पोषण  देता  है  l   मनुष्य  की  सबसे  बड़ी  भूल  यह  है  कि   वह  सोचता  है  कि  समाज  से  , परिवार  से  छिपकर  वह  जो  कुकृत्य  करता  है  उसे  कोई  भी  नहीं  जान  सकेगा  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- ' सत्य   को   कभी   छुपाया  नहीं  जा  सकता  l  मनुष्य  के  व्यक्तित्व  में  इतने  छिद्र  हैं  कि  सत्य  उनमें  से  होकर  बाहर  आ  ही  जाता  है  l  '  फिर   परमात्मा  हजार  आँखों  से  देख  रहा  है  , यह  सम्पूर्ण  प्रकृति  , यूनिवर्स  व्यक्ति  के  प्रत्येक  कार्य  का  , उसके  मन  में   छिपे  अच्छे-बुरे  विचारों  का  गवाह  है  l  यदि  मनुष्य  प्रकृति  के  हर  कण  में  ईश्वर  की  सत्ता  को  स्वीकार  कर  ले   तभी  वह  पापकर्म  करने  से  डरेगा  ,   ईश्वर  के  न्याय  से उसे  भय  होगा   और  यहीं  से  उसकी  चेतना  के  परिष्कृत  होने  का  मार्ग  खुल  जायेगा  l   

17 December 2025

WISDOM ------

   जरथुस्त्र  जब  जन्में  तो  हँसते  हुए  पैदा  हुए  l  अन्य  बालकों  की  तरह  रोए  नहीं  l  सभी  आश्चर्यचकित  थे  कि  यह  रोए  क्यों  नहीं  l  जब  जरथुस्त्र  बड़े  हुए  तो  तो  लोगों  ने  जन्म  के  समय  हँसने  का  वृतांत  उन्हें  सुनाया   और  इसका  रहस्य  जानना  चाहा  l  वे  बोले  ---- "  हम  तो  मर  रहे  थे  ,  तब  भी  हँस  रहे  थे  l  तब  से  ही  परदे  के  पीछे  से  हँसते  चले  आ  रहे  हैं  l  हम  जन्म  के समय ही  नहीं  हँसे  ,  हर परिवर्तन   हँसकर  ही  झेला  जाता  है  l  "  जरथुस्त्र  अंतिम  समय  भी  हँसे   तो  लोगों  की समझ  में  नहीं  आया  कि  अब  क्यों  हँसे  ?  पूछा  गया  तो  बोले  ----- "  लोगों  को  रोते  देखकर    हँसी  आ  गई  कि  कितने  नादान  हैं  ये  ,  हम  मकान  बदल  रहे  हैं  ,  तो  इन्हें  क्यों  परेशानी  हो  रही  है  l "  आचार्य श्री  कहते हैं  ----' यदि  हम  परिवर्तन  को   इसी  तरह  मुस्करा कर  स्वीकार  कर  लें   तो  जीवन  जीने  का  मन्त्र  आ  जाए  l '

14 December 2025

WISDOM -----

    पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- " संसार  में  बुराई  और  भलाई  का  , हानि -लाभ  का  , प्रिय -अप्रिय  का  और  सुख -दुःख   अस्तित्व  है  और  वह  बना   ही  रहेगा  l  हमें  किसी  का  भी  प्रभाव  अपने  ऊपर  ऐसा  नहीं  पड़ने  देना  चाहिए   जो  मानसिक  संतुलन  बिगाड़  कर  रख  दे  l  यदि  हमारा  द्रष्टिकोण  सकारात्मक  है   तो  विपत्ति  का प्रत्येक  धक्का   हमें  अधिक  साहसी , बुद्धिमान   और  अनुभवी  बनाता  है  l "  आचार्य श्री  कहते  हैं  ---- " जीवन  एक  कला  है   और  इसे  आनंदपूर्वक   सीखना  एवं  जीना  चाहिए  l  जो  जीवन  जीना  जानता  है  वही  सही  मायने  में  कलाकार  एवं  प्रतिभावान है  l  "   विभिन्न  सर्वेक्षणों  से  यह  तथ्य  प्रकट  होता  है   अपने  विषय  के   विद्वान , प्रतिभावान ,  धन-वैभव  संपन्न  , , उच्च पदों  पर  बैठे  व्यक्ति  ---- अनेक  ऐसे  हैं  जिनका  निजी  जीवन  विखंडित  और  विभाजित  है   l  उन्हें  अपनी  सामान्य  सी  जिन्दगी  को  चलाने  के  लिए   नशा , मादक  द्रव्य ------ आदि  का  सहारा  लेना  पड़ता  है  l  कारण  यही  है  कि  लोगों  की  सोच  सकारात्मक  नहीं  है  ,  जो उन्हें  मिला  है  वे  उसमें  खुश  नहीं  हैं  ,  उनका  मन  कामनाओं  , वासना  के  पीछे  भाग  रहा  है   ऐसे  में  दुःख  का  ,  कष्ट    का  एक  छोटा  सा  झटका  भी  उन्हें  विचलित  कर  देता  है  l  हमें  इस  सत्य  को  स्वीकार  करना  होगा  कि  ईश्वर  कभी  किसी  को  पूर्ण  रूप  से   दुःख  नहीं  देते  l  अपने  मन  के  तराजू  में तोल  कर  देखें  कुछ न कुछ  सुख  तो  होता  ही  है  l  और  यदि  हम  ध्यान  से  देखें  तो  उस  दुःख  में  भी  कोई  सुख  अवश्य  छिपा  होता  है  l  यदि  हम  उस  सुख    पर  अपनी  द्रष्टि  केन्द्रित  करेंगे   तो  हमारा  मन  शांत  रहेगा ,  तनाव  नहीं  होगा  l    संत  तुकाराम  ने  लिखा  है ------ "  हे  भगवान  !  अच्छा  ही  हुआ  ,  मेरा  दिवाला  निकल  गया  l  अकाल  भी  पड़   गया  ,  यह  भी  अच्छा  ही  हुआ  l  स्त्री  और  पुत्र  भी  भोजन  के  अभाव  में  मर  गए   और  मैं  भी  हर  तरह  से  दुर्दशा  भोग  रहा  हूँ  ,  यह  भी  ठीक  ही  हुआ  l  संसार  में  अपमानित  हुआ  ,  यह  भी  अच्छा  हुआ  l  ग्राम , बैल , द्रव्य  सब  चला  गया  ,  यह  भी  अच्छा  ही  हुआ  l  लोक -लाज  भी  जाती  रही  ,  यह  भी  अच्छा  हुआ   क्योंकि  इन्ही  सब  कारणों  के  फलस्वरूप   तुम्हारी  मधुरिमामय ,  शांतिपूर्ण  गोद  मुझे  मिली  l  "  

12 December 2025

WISDOM -----

महान  दार्शनिक  संत  अगस्तीन  के  पास    एक  जिज्ञासु   पहुंचा  l  उसे  अपने  जीवन  के  सत्य  को  समझने  की  बहुत जिज्ञासा  थी  l  उसने  संत  से  कहा  -- आप  मुझे  बहुत  कुछ  कहने -समझाने  की  बजाय  ,  केवल  एक  शब्द  में  उपदेश  दें  l  संत  अगस्तीन  उसकी  ओर  देख  रहे  थे  ,  वह  व्यक्ति  उनसे  कहे जा  रहा  था  कि  आप  मुझे  बहुत  आज्ञाएँ  न  देना  ,  क्योंकि  मैं  भूल  जाऊँगा  l  आप  तो  मुझे  एक  शब्द  में  ही  सार  की  बात  बता  दें  l  मैंने  शास्त्रों  को  भी  नहीं  पढ़ा  है   और  न  ही  पढ़ने  की  इच्छा  है l  संत  अगस्तीन मुस्कराते  हुए  बोले  ---- "  तुम्हारे  लिए  वह एक  शब्द  है  ' प्रेम  ' l  पर  यह  तथ्य  ध्यान  रखना  कि  प्रेम  वही   कर  सकते  हैं  ,  जिन्होंने   स्वार्थ , वासना  और  अहंता  की  क्षुद्रता  का   पूरी  तरह  से  त्याग  कर  दिया  है  l  यदि  तुम  सचमुच  ही  प्रेम  कर  सको  ,  तो  शेष  सब  अपने  आप  ही  हो  जायेगा  l "  

11 December 2025

WISDOM ------

  मनुष्य  के  जीवन  में  ' मौन  ' का  बहुत  महत्त्व  है  l  इमर्सन  कहते  हैं --- "  आओ  हम  चुप  रहें  , ताकि  फरिश्तों  के  वार्तालाप  सुन  सकें  l  "   पं . श्रीराम   शर्मा   आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " शांत  और  एकाग्र  मन  से  ही   ईश्वर  से  वार्तालाप  संभव  है  l  मौन  रहकर  ही   अपने  अन्तराल  में  उतरने  वाले  ईश्वर  के  दिव्य  संदेशों  , प्रेरणाओं  को  सुना  समझा  जा  सकता  है  l  "  मानव  जीवन  में  अनेक  समस्याएं  हैं  ,  इन  समस्याओं  का  कभी  अंत  नहीं  होता    क्योंकि  मनुष्य  इनके  समाधान   बाहर  खोजता  है   और  बाहर  के  संसार  में  स्वार्थ  है  , कामनाएं , वासना , लालच , अहंकार  सभी  बुराइयाँ   हैं   l  इन  बुराइयों , विकृतियों  से  घिरा  व्यक्ति  आपको  कभी  सच्चा  समाधान  दे  ही  नहीं  सकता  l  इसलिए  हमारे  आचार्य , ऋषियों  ने  कहा  है  --- यदि  समाधान  चाहिए  तो  उसे  अपने  भीतर  ही  खोजो  l  संसार  में  ऐसी  कोई  समस्या  नहीं ,  जिसका  समाधान  न  हो  l  यदि  अपने  प्रश्नों  का  उत्तर  चाहिए   तो  कुछ  समय  मौन  रहो  ,  सच्चे  ह्रदय  से  ईश्वर  को  पुकारो  ,  प्रत्येक  समस्या  का  समाधान अपने  भीतर  से  ही  आएगा  l  ईश्वर  हमें  कभी  स्वप्न  में या  किन्ही  भी   माध्यम  से  संकेत  देते  हैं   , जब   हमारा  मन  शांत  होगा  तभी  हम  उन  संकेतों  को  समझ  पाएंगे  ,  फिर  उन्हें   उन  संकेतों  को  समझकर  स्वीकार  करना , उसके  अनुरूप  आचरण  करना  हमारी  इच्छा  पर  निर्भर  करता  है  l  ---- महाभारत  का  महायुद्ध  होना  निश्चित  हो  गया  , उसे  रोकने  के  सारे  प्रयत्न  असफल  हो  गए  थे  l  महारथी  कर्ण   दुर्योधन   के  पक्ष  में  था  l   सूर्य  देव  को  अपने  पुत्र  की  चिंता  थी  ,  उस  समय  तक  कर्ण  स्वयं  को  सूत पुत्र  ही  समझता  था  l  लेकिन  पिता  तो  अपनी  संतान  को   नहीं    भूलते  l  एक  रात्रि   सूर्य  देव  कर्ण  के  स्वप्न  में  आए   और  उससे  कहा  ---- 'तुम्हारे  शरीर  पर  जन्मजात  कवच -कुंडल  है  ,  इन  कवच -कुंडल  के  रहते  किसी  भी  अस्त्र -शस्त्र  से  तुम्हारा  अहित  नहीं  होगा  l  कल  देवराज  इंद्र  तुमसे  यह  कवच -कुंडल  मांगने  आयेंगे ,  तुम उनकी  बातों  में  न  आना  l  मैं  जानता  हूँ  तुम  महादानी  हो  लेकिन  इन  कवच -कुंडल  का  दान  मत  करना  l  l इतना  कहकर  सूर्य देव  चले  गए  l    कर्ण  ने  उनकी  बात  नहीं  मानी   और  दूसरे  दिन  जब  ब्राह्मण  वेश  में   देवराज  इंद्र  उसके  पास  आए   तो  वह  यही  सोचकर  खुश  हुआ  कि  आज  स्वर्ग  उसके  द्वार पर  भिक्षा  मांगने  आया  है  ,  उसने  व्यवहारिक  पक्ष  को  समझा  ही  नहीं   और   बड़ी  प्रसन्नता  से   तलवार  से  अपने कवच -कुंडल  को  शरीर  से  अलग  कर  इंद्र  को  सौंप  दिया  l   यह  उसके  अंत  की   एक  और कील  थी  l   इसी  तरह  परम  पिता  परमेश्वर  हम  सभी  को   समय -समय  पर  विभिन्न  संकेत  देते  हैं  ,  हमें  जीवन  जीने  का  सही  मार्ग  सुझाते  हैं  l  ईश्वर  ने  हमें  चयन  की  स्वतंत्रता  दी  है  ,  हम  सही  राह  चुने  या  खाई  में  गिरें , यह  हमारा चुनाव  है  l  आज  जब  घोर कलियुग  है  l  देवत्व  को  मिटाकर ,  असुरता  अपना साम्राज्य स्थापित  करने  को  बेताब  है  ,  ऐसे  में  सुरक्षा  का  एक  ही  मार्ग  है  ---- स्वयं  को  ईश्वर  के  प्रति  समर्पित  करें और  प्रार्थना  करें  कि  वे  हमें  सद्बुद्धि  दें  ताकि  हम  ईश्वर  के  दिए  संकेतों  को  समझ  कर    सही  मार्ग  का  चयन  करें  l  संसार  में  आकर्षण  का  मायाजाल  इतना  घना  है  कि  मनुष्य  उस  आकर्षण  के  पीछे  दिन -रात  भागता  है  l  जब  मौन  रहकर   ईश्वर  से  प्रार्थना  करते  हैं  उस  समय  यदि  पल  भर  के  लिए  भी   यह  माया  का   परदा  हट  जाए   तो   हमारी  आत्मा  , हमारा  ईश्वर  हम  से  क्या  कहना  चाहते  हैं  ,  उसे हम  समझ  सकते  हैं  l