9 October 2026

WISDOM -----

   वर्तमान  समय  कुछ  ऐसा  है  कि  लोगों  के  मन  बहुत  अशांत  हैं  l  इसका  एक  ही  कारण  समझ  में  आता  है  कि   व्यक्ति  धन  के  पीछे  भाग  रहा  है  , ईश्वर  से  दूर  हो  गया  है   इसलिए  जीवन  का  संतुलन  बिगाड़ गया  है  l  धन  जीवन  के  लिए  बहुत  जरुरी  है  ,  धन  के  बिना  तो  जीवन  संभव  ही  नहीं  है  लेकिन  जीवन  की  इस  भाग -दौड़  में  हम   प्रार्थना  के  माध्यम  से  ईश्वर  से  जुड़  जाएँ  तो   मन  की  यह  अशांति  दूर  हो  सकती  है  l  ईश्वर  सर्वशक्तिमान  हैं  , उनके  पास  कोई  कमी नहीं  हैं  l  फूल -माला   और  भोग  -प्रसाद  से  , कोरे  कर्मकांड  से  उन्हें  प्रसन्न  नहीं  किया  जा  सकता  l  जब  हम  सच्चे  ह्रदय  से  ईश्वर  को  पुकारते  हैं  , प्रार्थना  करते  हैं  तब  हमारे  मन  के  तार  ईश्वर  से  जुड़  जाते  हैं  ,  हमारी  प्रार्थना  ईश्वर  तक  पहुँच जाती  हैं   और  हमारी  समस्याओं  का  समाधान  हमें  हमारी  अंतरात्मा  में  ही  मिल  जाता  है  l  प्रार्थना  के  साथ  अपनत्व  का  भाव  जुड़  जाए  तो  प्रार्थना  को  बल  मिल  जाता  है  जैसे  हम  उन्हें  अपना  मित्र , सखा , माता , पिता , भाई  जैसे  किसी  भी  रिश्ते  से  जोड़कर  पुकारें  तो  उससे  मन  में  एक  विश्वास  पैदा  हो  जाता  है  कई  प्रार्थना  अवश्य  सुनी  जाएगी  l  भगवान  श्रीकृष्ण  के  एक  मित्र  थे  --- सुदामा '  बहुत  निर्धन  थे  l  जब  उनकी  पत्नी  को  पता  चला  कि  द्वारकाधीश  भगवान  श्रीकृष्ण  उनके   मित्र  हैं  तो  उन्होंने  सुदामा जी  को  विवश  किया  कि  वे  द्वारका जाएँ  , मित्र  से  कुछ  मदद  अवश्य  मिलेगी  l  पोटली  में  कुछ  चावल  लेकर  सुदामा जी  चल  दिए  l  रास्ते  भर  वे   मित्र  भाव  से   उनका  स्मरण  करते  रहे   l  द्वारका  पहुंचे  , द्वारपालों  को  तो विश्वास  ही  नहीं  हुआ  कि  ऐसा  फटेहाल  भगवान  का  मित्र  भी  हो  सकता  है  लेकिन  जैसे  ही  श्रीकृष्ण  को  पता  चला  कि  सुदामा  आए  हैं  तो  दौड़कर  उन्हें  गले  लगा  लिया  ,  उनकी  निर्धनता  देखकर  भगवान  की  आँखों  में  आँसू  आ  गए  l  सुदामा जी  की  पोटली  से  तीन  मुट्ठी  चावल  खाकर  उन्हें  तीन  लोकों  की  संपदा  दे  दी  ,  उनकी  निर्धनता  दूर  हो  गई  l  इस  कथा  का  सार  यही  है  कि  जब  हम  ईश्वर  से  किसी  भाव  से  जुड़  जाते  हैं  तभी  हमारा  कल्याण  होता  है  l  संपदा  मिलनेका  अभिप्राय  यही  है  कि  जब  हम  अपनी  किसी  भी  समस्या  के  समाधान  के  लिए  ईश्वर  से  प्रार्थना  करते  हैं  तो  किसी  न  किसी  माध्यम  से   या  अपने  अंत:करण  की  प्रेरणा  से  जीवन  को  सही  मार्गदर्शन  मिल जाता  है , कहीं  भटकते  नहीं  हैं  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं  ----- " अपना  अस्तित्व  और  भविष्य  ईश्वर  के  हाथों  सुरक्षित  मानने की  भावना  ऐसी  है  ,  जिसे  अपनाये  रहने  और  बढ़ते  चलने  से  हर  कोई  निश्चिंतता   प्राप्त  कर  सकता  है  l "