वर्तमान समय में श्रेष्ठ व्यक्तित्व संपन्न मनीषियों और विचारकों के अभाव के कारण समाज रुग्ण और जर्जर हो चुका है l यदि वातावरण मूल्यहीनता रूपी प्रदूषण से ओत-प्रोत हो तो समाज में अनैतिक और स्वार्थी व्यक्तियों की भरमार होती है l आज स्वार्थ सर्वोपरि हो गया है और मूल्य , नीति, आदर्श व परम्पराएँ बीते दिनों की बातें बन गई हैं l ऐसे श्रीहीन समाज में अनीति , आतंक और अत्याचार पनपते हैं l समाज में शूरवीरों की संख्या घटने लगती है और लोगों में कायरता बढ़ने लगती है l इस जर्जर समाज को पुनर्जीवित करने के लिए समर्थ मार्गदर्शकों की आवश्यकता है l
11 November 2017
10 November 2017
WISDOM ------ दुःख को सकारात्मक भाव से लिया जाये तो मन सशक्त होता है
यदि दुःख को सकारात्मक भाव से लिया जाये तो मन धुलता है , सशक्त होता है l महर्षि अरविन्द पांडिचेरी तो पहुँच गए , पर वहां उनकी 21 दिन तक खाने की कोई सही व्यवस्था नहीं हो पाई l कई बार तो मात्र पानी पीकर ही रह जाते थे l उनने मोतीलाल राय को उन दिनों एक पत्र में लिखा था ---- " भगवान को अंतिम समय में मदद करने की आदत पड़ गई है l मेरे साथ आये सभी कष्ट में हैं , पर यह भी तप है , यह मानकर सभी मेरे साथ प्रसन्न भाव से रह रहे हैं l " उन दिनों भी श्री अरविन्द अपनी दिनचर्या के अंतर्गत नित्य चार मील टहलते थे l छ: घंटे साधना करते थे l
सोच सकारात्मक हो और ईश्वर पर अटूट विश्वास हो तो दुःख को ईश्वरीय विधान मानकर खुशी से स्वीकार करने से मन शान्त रहता है l
सोच सकारात्मक हो और ईश्वर पर अटूट विश्वास हो तो दुःख को ईश्वरीय विधान मानकर खुशी से स्वीकार करने से मन शान्त रहता है l
8 November 2017
WISDOM ----- कृपण नहीं उदार बने
कृपणता एक ऐसी बुद्धिहीनता है कि व्यक्ति सारी सुविधाएँ होते हुए भी स्वयं क्षुद्रता के साथ जीता है और साथ ही किसी अन्य का भी कोई लाभ नहीं कर पाता , संसाधनों के होते हुए भी कृपण व्यक्ति अभाव के मार्ग का चयन करता है l कृपणता एक ऐसी मानसिकता है जो धन का संग्रह तो करवाती है , लेकिन उसका उपयोग करना नहीं सिखाती l
इस सम्बन्ध में एक कथा है ---- एक गाँव में एक वृद्ध महिला थी जो अपने छोटे से परिवार के साथ रहती थी l उसके पास इतना खेत था कि एक वर्ष की फसल तैयार हो जाती थी l एक बार उसने धान का चावल करवाया तो ज्ञात हुआ कि वर्ष के 365 दिनों में से 364 दिन का ही चावल है , एक दिन के लिए चावल कम पड़ रहा है l उसे बड़ी चिंता हो गई कि इस एक दिन की कमी कैसे पूरी करे l बहुत सोच कर उसने तय किया कि आज पहले दिन भूसी खा लें , ताकि शेष 364 दिन सुख पूर्वक कट जाएँ l यह सोचकर वह भूसी खाकर , पानी पीकर सो गई l वृद्ध महिला के पेट में भूसी इतनी फूल गई कि वह पचा न सकी और वहीँ मर गई l
संग्रहकर्ता की सोच बहुत संकीर्ण होती है लेकिन जिन्हें ईश्वर पर विश्वास है वे उदार बनकर जीते हैं l जो कुछ अपने पास है उसे जरुरतमंदों को देना उदारता है l उदार रहने पर व्यक्ति को आंतरिक संतोष प्राप्त होता है और वह बाहरी सम्पदा से ओत-प्रोत रहता है l
इस सम्बन्ध में एक कथा है ---- एक गाँव में एक वृद्ध महिला थी जो अपने छोटे से परिवार के साथ रहती थी l उसके पास इतना खेत था कि एक वर्ष की फसल तैयार हो जाती थी l एक बार उसने धान का चावल करवाया तो ज्ञात हुआ कि वर्ष के 365 दिनों में से 364 दिन का ही चावल है , एक दिन के लिए चावल कम पड़ रहा है l उसे बड़ी चिंता हो गई कि इस एक दिन की कमी कैसे पूरी करे l बहुत सोच कर उसने तय किया कि आज पहले दिन भूसी खा लें , ताकि शेष 364 दिन सुख पूर्वक कट जाएँ l यह सोचकर वह भूसी खाकर , पानी पीकर सो गई l वृद्ध महिला के पेट में भूसी इतनी फूल गई कि वह पचा न सकी और वहीँ मर गई l
संग्रहकर्ता की सोच बहुत संकीर्ण होती है लेकिन जिन्हें ईश्वर पर विश्वास है वे उदार बनकर जीते हैं l जो कुछ अपने पास है उसे जरुरतमंदों को देना उदारता है l उदार रहने पर व्यक्ति को आंतरिक संतोष प्राप्त होता है और वह बाहरी सम्पदा से ओत-प्रोत रहता है l
7 November 2017
WISDOM ---- दुष्कर्म और अहंकार का परिणाम भीषण और भयावह होता है l
' सत्ता होती ही ऐसी है कि व्यक्ति को यथार्थ से परे सांतवें आसमान में पहुंचा देती है , परन्तु जब वह वहां से गिरता है तो उसके अस्तित्व का भी पता नहीं चलता है l '
औरंगजेब के क्रूर अत्याचार से सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ था l वह स्वयं खुदा बन बैठा था l जो कोई उसकी खुदाई को सलाम न करे , उसके सामने न झुके , वह उसका समूल नाश कर देता था l वह अपने बड़े भाई दाराशिकोह को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता था l उसने दाराशिकोह तथा उससे संबंधित सभी फकीरों को मृत्यु या भीषण दंड दिया था l अब इसी क्रम में वह लाल बाबा के पास आया और अपने अहंकार में चूर होकर बोला ---- " बाबा ! तुम तो अपने आप को बड़ा महान कहते हो , देखो मैंने दाराशिकोह और उसके बेटे की हत्या कर दी , उसके गुरु शरमन को भी मार गिराया l सुना है शर्मन के पास अपार शक्ति थी फिर भी वह मेरा बाल बांका भी नहीं कर सका l अब तुम्हारी बारी है l "
लाल बाबा फ़क़ीर थे और भगवान के भक्त थे l अति निडर थे , उन्होंने औरंगजेब के सिर पर एक छड़ी मारी जिससे वह कुछ क्षणों के लिए दिव्य और सतरंगी दुनिया में चला गया l उसने देखा कि दाराशिकोह एक ऊँचे सिंहासन पर बैठा है, उसके चेहरे पर दिव्य प्रकाश है l जन्नत की पवित्र आत्माएं उसकी (औरंगजेब ) की और इशारा कर कह रहीं हैं कि यह कौन सा घिनौना , बदबूदार इन्सान यहाँ आ गया , इसे यहाँ से रुखसत करो l दाराशिकोह के सामने उसे उपेक्षा , अपमान और तिरस्कार की द्रष्टि से देखा जा रहा है l " बाबा ने यह सब औरंगजेब के गरूर और दंभ को तोड़ने तथा दाराशिकोह के सत्कर्मों के प्रभाव को दिखाने के लिए किया था l यह सब देख औरंगजेब छटपटाने लगा l बाबा ने उससे कहा --- तुम षड्यंत्र रचते हो , हत्या करते हो , तुम्हे दोजख की आग में जलने से कोई नहीं रोक सकता l
औरंगजेब के क्रूर अत्याचार से सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ था l वह स्वयं खुदा बन बैठा था l जो कोई उसकी खुदाई को सलाम न करे , उसके सामने न झुके , वह उसका समूल नाश कर देता था l वह अपने बड़े भाई दाराशिकोह को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता था l उसने दाराशिकोह तथा उससे संबंधित सभी फकीरों को मृत्यु या भीषण दंड दिया था l अब इसी क्रम में वह लाल बाबा के पास आया और अपने अहंकार में चूर होकर बोला ---- " बाबा ! तुम तो अपने आप को बड़ा महान कहते हो , देखो मैंने दाराशिकोह और उसके बेटे की हत्या कर दी , उसके गुरु शरमन को भी मार गिराया l सुना है शर्मन के पास अपार शक्ति थी फिर भी वह मेरा बाल बांका भी नहीं कर सका l अब तुम्हारी बारी है l "
लाल बाबा फ़क़ीर थे और भगवान के भक्त थे l अति निडर थे , उन्होंने औरंगजेब के सिर पर एक छड़ी मारी जिससे वह कुछ क्षणों के लिए दिव्य और सतरंगी दुनिया में चला गया l उसने देखा कि दाराशिकोह एक ऊँचे सिंहासन पर बैठा है, उसके चेहरे पर दिव्य प्रकाश है l जन्नत की पवित्र आत्माएं उसकी (औरंगजेब ) की और इशारा कर कह रहीं हैं कि यह कौन सा घिनौना , बदबूदार इन्सान यहाँ आ गया , इसे यहाँ से रुखसत करो l दाराशिकोह के सामने उसे उपेक्षा , अपमान और तिरस्कार की द्रष्टि से देखा जा रहा है l " बाबा ने यह सब औरंगजेब के गरूर और दंभ को तोड़ने तथा दाराशिकोह के सत्कर्मों के प्रभाव को दिखाने के लिए किया था l यह सब देख औरंगजेब छटपटाने लगा l बाबा ने उससे कहा --- तुम षड्यंत्र रचते हो , हत्या करते हो , तुम्हे दोजख की आग में जलने से कोई नहीं रोक सकता l
6 November 2017
WISDOM ------ जो ईश्वर से भय खाता है उसे दूसरा भय नहीं सताता l
भय का सबसे घ्रणित पहलू अपने स्वार्थ के लिए , दूसरों पर छाये रहने की भावना से अधीनस्थ लोगों का शोषण करना है l वैराग्य शतक में भतृहरि ने भय की स्थिति का बड़ा सूक्ष्म विश्लेषण किया है ---- ' भोग में रोग का भय है , सत्ता में गिरने का भय , धन में चोरी होने का भय , सौन्दर्य में बुढ़ापे का भय , शरीर में मृत्यु का भय l इस तरह संसार में सब कुछ भय से युक्त है l उनके अनुसार त्याग का मार्ग ही निर्भयता की अवस्था की ओर ले जाता है l
5 November 2017
धर्म की सार्थकता इसमें है कि वह उन्नत और सदाचारी जीवन यापन की पद्धति को दर्शा सके ----- खलील जिब्रान
उनका कहना था कि ऐसा धर्म जो गरीब और असहाय लोगों का गला काटता है ---- धर्म नहीं कुधर्म है l उन्होंने आडम्बर का जमकर विरोध किया l जिस पूजा पाठ में मानवता को विकसित होने के द्वार ही बंद कर दिए गए हों , वहां भला ईश्वर की अनुभूति कहाँ संभव थी l धर्म का जो आडम्बर युक्त स्वरुप आज चल रहा है वह उस विनाश और धरती पर निरंतर बढ़ते नारकीय वातावरण को रोक नहीं सकता क्योंकि उसमे उस वैचारिक सम्पदा और अध्यात्म की प्रेरणा शक्ति का अभाव होता है l
4 November 2017
गुरु नानक का व्यवहारिक अध्यात्मवाद
गुरु नानक ने लोगों को समझाया कि बाह्य पूजा , कर्मकांड , परम्पराएँ धर्म नहीं है , धर्म का वास्तविक तत्व है ---- अपने आपको जीतना , इन्द्रियों को वश में रखना , सुख - दुःख , हानि - लाभ में एक सा भाव रखना l धर्म का सबसे बड़ा लक्षण है --- सबके साथ सेवा , नेकी और सच्चाई का व्यवहार करना और इन सबके साथ भगवन को याद करते रहना l
उस समय हिन्दुओं में अनगिनत देवी - देवताओं की पूजा और छुआछूत का जंजाल बढ़ गया था , उसका खंडन उन्होंने वाणी और कर्म रूप में किया l उन्होंने जातिगत भेदभाव और ऊँच - नीच का खंडन किया l
उस समय हिन्दुओं में अनगिनत देवी - देवताओं की पूजा और छुआछूत का जंजाल बढ़ गया था , उसका खंडन उन्होंने वाणी और कर्म रूप में किया l उन्होंने जातिगत भेदभाव और ऊँच - नीच का खंडन किया l
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