12 April 2018

कायरता समाज का कलंक है

 ' जब  कोई  पापी  किसी  मर्यादा   की  रेखा   का  उल्लंघन  कर   उदाहरण  बन  जाता  है  ,  तब  अनेकों  को  उसका  उल्लंघन  करने  में  अधिक  संकोच  नहीं  रहता   l  '
  जब  सिकन्दर  ने  भारत  पर  आक्रमण  किया  तब  ईर्ष्या - द्वेष  में  अन्धे  होकर  तक्षशिला  के  राजा  आम्भीक  ने  देशद्रोह  कर  सिकन्दर    से  मित्रता  कर  ली  l   आम्भीक   की  देखा - देखी  अनेक  राजा  देशद्रोही  हो  गए  l   महाराज  पुरु  को  छोड़कर   लगभग  सारे  राजा   या  तो  हारकर  मिट   चुके  थे  अथवा  देशद्रोह  कर  के  सिकन्दर  के  झंडे  के   नीचे  आ  चुके  थे    l  यह  भारत  के  गौरव  में  कलंक  था  l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 

11 April 2018

WISDOM ---- गृहस्थ - योगी ------ राष्ट्रमाता कस्तूरबा

 गृहस्थ - योग  भी  योगशास्त्र  की  एक  शाखा  माना  जाता  है  और  पौराणिक  कथाओं  के  अनुसार  प्राचीन  काल  में  अनेक  नारियों  ने  इसी  के  द्वारा  महान  सिद्धियाँ  प्राप्त  की  हैं  l   बा  की  सेवा - भावना   और  परिचर्या   भी  लगभग  निष्काम  कर्मयोग  की  श्रेणी  में  जा  पहुंची  थी  l   एक  बार  जब  गांधीजी  ने  बा  से  कहा --- " मैंने  तुझे  गहने  पहनने  या  अच्छी  रेशमी  साड़ियाँ  पहनने  से  कब  रोका  ? 
बा  ने  कुछ  गंभीर  होकर  कहा --- "  आपको  साधु - संन्यासी  बनना  है  l  तब  भला  मैं  मौज - शौक  से  रहकर  क्या  करती  ?  आपका  मन  जान  लेने  के  बाद   मैंने  भी  अपने  मन  को  मोड़  लिया   और  दुनिया  का  रास्ता  छोड़  दिया  l  "
 ऐसा  था  बा  और  बापू  का  दाम्पत्य  जीवन  l 
   यद्दपि  प्रकट  में  बा  और  बापू  में  कहा - सुनी  होती  जान  पड़ती  थी  , पर  आंतरिक  रूप  से  दोनों  एक  थे  , एक  दूसरे  के  गुणों  को  समझते  थे   l 
  एक  बार  अन्य  किसी  प्रान्त  का  युवक  आश्रम  में  आया  और  आलोचक  की  तरह  गांधीजी  से  कहा --- "  आप  सब  किसी  को  तो  चाय  आदि  पीने  से  रोकते  हैं  पर  बा  तो  प्रतिदिन  दो  बार  काफी  पीती  हैं  l  "  तो  गांधीजी  ने  उत्तर  दिया  ---- " तुमको  मालूम  है  बा  ने  कितना  अधिक  त्याग  किया  है  ?  कितनी  वस्तुओं  और  आदतों  को  छोड़ा  है  ?  अब  अगर  यदि  मैं  उसकी  इस  अन्तिम  छोटी  सी  आदत  को  भी  छुड़ाने  की  कोशिश  करूँ   तो  मुझसा  निर्दयी  पति  और  कौन  होगा   ?  "
  मेहमानों  की  व्यवस्था   करने  में  बा   गांधीजी  के  नियमों  को  भी  ढीला  कर  देती  थीं  l  दीनबंधु  एंड्रूज  का  काम  चाय  के  बिना  चल  ही  नहीं  सकता  था  l  पर  गांधीजी  के  पास  किसी  को  चाय  कैसे  मिलती  l  इसलिए  बा  उनको  बुलाकर  चाय  पिलाती  थीं  l  बा के  आश्रम  में  रहने  से  ही   श्री  राजगोपालाचारी  को  चाय  मिलती  थी  l  पं. नेहरु  भी  खास  स्वाद  वाली  चाय  बा  के  कारण  ही  पा  सकते  थे   l 
 अपने  गुणों  के  कारण  ही   गांधीजी  के  साथ  बा  ने  अपना  भी  नाम  अमर  कर  लिया   l  

10 April 2018

WISDOM ----- जबतक कोई व्यक्ति अच्छा नागरिक न हो तब तक वह अच्छा जन - प्रतिनिधि या अच्छा राजनीतिज्ञ कैसे हो सकता है ?------ बंट्रेंड रसेल

  रसेल  कहते  थे  कि  राजनीतिक  प्रतिनिधि  आमतौर  पर  ऐसा  मानने  लगते  हैं  कि  राजनीति  में  सज्जनता  और  नैतिकता   की  कोई  गुंजाइश  नहीं  है   l  रसेल  ने  लिखा  है --- "  संसद  और  विधान  सभाओं  के  सदस्य  आराम  से  रहते  हैं,   मोटी - मोटी  दीवारें  और  असंख्य  पुलिस  जन  उनको  जनता  की  आवाज  से  बचाए  रखते  हैं  l  जैसे - जैसे  समय  बीतता  जाता  है   उनके  मन  में  उन  वचनों  की  धुंधली  सी  स्मृति  ही  रह  जाती  है   जो  निर्वाचन  के  समय   जनता  को  दिए  थे   l  दुर्भाग्य  यह  है  कि  समाज  के  व्यापक  हित   वास्तव  में  अमूर्त  होते  हैं    और   विधायकों  के   निजी  संकीर्ण  हितों  को  ही   जनता  का  हित  मान  लिया  जाता  है    l  "
  रसेल  लोकतंत्र  और  स्वतंत्रता  की  रक्षा  के  लिए   निरंतर  संगठित  प्रतिरोध  को  अनिवार्य  मानते  थे  l  इससे  समाज  में  अव्यवस्था  का    खतरा  पैदा  हो  सकता  है   परन्तु    यह  सर्वशक्तिमान   राजसभा  से  उत्पन्न  होने  वाली   जड़ता  की  तुलना  में   यह  खतरा  नगण्य  है  l 
 रसेल  गांधीजी  की  तरह  साम्राज्यवाद,  आर्थिक - विषमता  और  राजनीतिक  सत्ता  के  केन्द्रीकरण  के  प्रबल  विरोधी  थे  l   

9 April 2018

WISDOM----- अच्छी सरकार किसे कहते हैं ?

   एक  बार  कन्फ्यूशियस  से  किसी  शिष्य  ने  पूछा --- " अच्छी  सरकार  किसे  कहते  हैं  ? " 
कन्फ्यूशियस  ने  उत्तर  दिया ---- " जिसके  पास  पर्याप्त  अन्न  हो , पर्याप्त   अस्त्र - शस्त्र  हों  और  जिस  पर  जनता  का  विश्वास  हो   ? "
 शिष्य  ने  पुन:  पूछा ---- " मान  लीजिए  तीनो  बातें  न  मिल  सकें  ? "
गुरु  ने  कहा --- " इनमे  से  हथियार  निकाल  सकते  हो  l "
शिष्य  की  जिज्ञासा  शान्त  नहीं  हुई  और  उसने  फिर  प्रश्न  किया  --- " यदि  इन  तीनो  में  से  एक  ही  रखना  हो  तो    कौन  सी   पसंद  करेंगे   ? "
 कन्फ्यूशियस  ने  गम्भीर  मुद्रा  में  उत्तर  दिया ---- "  जनता    का    विश्वास   l  "
  चीन  के  एक  अत्याचारी  शासक  ने  कन्फ्यूशियस  की  मृत्यु  के  दो  सौ  वर्ष  बाद  ही   उनकी  लिखी  सब  पुस्तकों  को  जला  दिया  था   और  उनके  अनुयायी  विद्वानों  को   फाँसी  पर  लटकवा  दिया  था  ,  फिर  भी  उनके  सिद्धान्त  आज  भी  चीन  ही  नहीं   सारे  संसार  में  आदर  की  द्रष्टि  से  देखे  जाते  हैं   l 

8 April 2018

WISDOM ----- जीवन में सच्चाई हो तो प्रकृति रक्षा करती है

    यदा - कदा  मनुष्य  का  मोह  और   मानसिक   दुर्बलताएं   प्रवंचना  के  जाल  में   फंसा  कर   उसको  गलत  दिशा  की  ओर  प्रेरित  कर  देती  हैं   l  इस  मनोसंकट  के  समय  मनुष्य  को   सावधानीपूर्वक  विवेक  का  ही  अवलम्ब  लेकर   और  अपने  को  तटस्थ  बना  कर    परिणाम  की  महत्ता  के  प्रकाश  में   किसी  निर्णय  का  निर्धारण  करना  चाहिए    l  किंचित  कमजोरी  से  मनुष्य  का  व्यक्तिगत  मोह   ' सर्वजन  हिताय '  की  महानता   पर   आच्छादित    हो  जाता  है  l   लेकिन   जो  अपने  जीवन  में  सच्चे  होते  हैं   और  जिसका  संग  उत्तम  होता  है   उसके  डगमगाते   कदम  को  रोकने  वाले  संयोग  आ  ही  जाते  हैं   l  

6 April 2018

WISDOM ----- कर्म ही ईश्वर की सच्ची पूजा है ----- संत वसवेश्वर

   कर्नाटक  के  महान  संत  वसवेश्वर  ने   व्याख्यान  शैली  नहीं  अपनाई ,  वे  सुकरात  की  तरह  विचार विमर्श  और  मंत्रणा  करने  का  क्रम  अपनाकर  चले  l  उनके  सम्पर्क  में  आने  वाले  सच्चे  धर्म परायण  बनते  चले  गए ,  यह  संख्या  इतनी  बढ़ती  गई   कि  उनका  समूह   ' लिंगायत '  के  नाम  से  प्रसिद्ध  हुआ  l   सन्त  वसवेश्वर  ने  बताया  कि  केवल  पूजा - प्रार्थना , कर्मकांड  के  आधार  पर  भगवान  का  अनुग्रह  प्राप्त  नहीं  किया  जा  सकता  l  कर्तव्यहीन  व्यक्ति  ही  तथाकथित  धर्म - कृत्यों  को  सब  कुछ  मान  लेते  हैं  l 
 ईश्वर  की  प्राप्ति  उच्च  चरित्र ,  उदार  प्रकृति  और  परमार्थ परायणता  पर  निर्भर  है  l   उनका  कहना  था  कि  जो  व्यक्ति  अपने  व्यक्तिक  और  सामाजिक  कर्तव्यों  का  पालन   निष्ठापूर्वक  करता  है  वही  सच्चा  धर्म परायण  है   l  वे  पूजा - पाठ  द्वारा  पाप - फल  न  मिलने  का  बहकावा  नहीं  देते  थे   l  '
  उनका   कहना  था   कि  भक्ति  की  पूर्णता  और  सार्थकता  के  लिए   मनुष्य  का  व्यक्तिगत  और  सामाजिक  आचरण  शुद्ध ,  सच्चरित्र ,  ईमानदार ,  नेक  और  पवित्र   होना  चाहिए  l 

5 April 2018

WISDOM ----- जनता सदैव जागरूक रहे ----- कन्फ्यूशियस

  कन्फ्यूशियस  का  कहना  था  कि  अत्याचारी  शासक  चीते  से  भी  अधिक  भयंकर  होता  है  l  अत्याचारी  शासन  में  रहने  की  अपेक्षा   अच्छा  है  कि  किसी  पहाड़ी  अथवा  वन  में  रह  लिया  जाये  l  किन्तु  यह  व्यवस्था  सार्वजनिक  नहीं  हो  सकती   l  इसलिए  जनता  को  चाहिए  कि  वह  अत्याचारी  शासन  का  समुचित  विरोध  करे   और  सत्ताधारी  को   अपना  सुधार  करने  के  लिए   विवश  करने  का  उपाय  करे  l '
 कन्फ्यूशियस   का  स्पष्ट  मत  था  कि   --- अत्याचारी  शासन  को  भय  के  कारण  सहन  करने  वाला  समाज   किसी  प्रकार  की  उन्नति  नहीं  कर  पाता  l  विकासहीन  जीवन   बिताता  हुआ   वह  युगों  तक  नारकीय  यातना  भोगा  करता  है   तथा  सदा  सर्वदा   अवनति  के  गर्त  में  पड़ा  रहकर  जिस - तिस  प्रकार   जीवन  व्यतीत  करता  रहता  है   l   अत:  दु:शासन  को  पलटने  के  लिए  जनता  सदैव  जागरूक  रहे  l  '