16 May 2018

WISDOM ---- राजनीति में धन को स्थान मिल जाने से प्रजातंत्र का महत्व नहीं रहा

 धन  के  कारण  प्रजातंत्र  के सिद्धांतों  की  दुर्दशा  होती  है  ,  चुनाव  सम्बन्धी  नैतिक  सिद्धांतों  की  रक्षा  का  तो  प्रश्न  ही  नहीं  उठता  l 
  राजनीतिक  जीवन  में  सत्य  का  व्यवहार   महात्मा  गाँधी  में   पाया  जाता  था   और  इसी  के  कारण   वे  25  वर्षों  तक  इस  हलचल पूर्ण  क्षेत्र  में  टिके  रहे  और  अपने  नाम  को  अमर  कर  गए   l   राजनीति  में  धूर्तता , बहानेबाजी , असत्य  वादा  करना , रंग  बदल  लेना   आदि  चलता  है  लेकिन  ये  कार्य  निम्न  स्तर  के  और  तत्काल  लाभ  उठा  लेने  वाले  लोगों  के  ही  माने  जा  सकते  हैं   l  ऐसे  व्यक्ति  स्वार्थ  साधन  अवश्य  कर  लेते  हैं   पर  कोई  बड़ा  और  स्थायी  काम  उनके  बूते  का  नहीं  l
  लिंकन   राजनीति   में  भी  अपनी  आत्मा  के  आदेश  का  ध्यान  रखकर  सच्चाई  के  सिद्धांत  का  पालन  करते  थे   l   इस  कारण    इतने  वर्ष  बीत  जाने  पर  भी   उनका  सबसे  अधिक  सम्मान  है  l   इन  दोनों  महामानवों  में  यह  सत्य   और  आत्मशक्ति  का  ही  प्रभाव  था   जिसने  उन्हें  अमर  कर  दिया  l  

15 May 2018

WISDOM ------ अच्छी तरह जाने बिना किसी के सम्बन्ध में कोई धारणा बना लेना बहुत बड़ा अन्याय है

 डॉ.  राजेन्द्र प्रसाद   का   सादगी  का  जीवन  था  , उन  सादे  कपड़ों  में  भी  उनके  चेहरे  पर  एक   अनोखा  तेज  था ,  आकर्षण  था ,  जो  देखता  था  उनकी  तरफ  खिंचा  जाता  था  l   जब  वे  6-7  वर्ष  के  थे   तब  उनको   पढ़ने  के  लिए  गाँव  के  ' मकतब '  में  भेजा  गया  जहाँ  एक  बुड्ढे  मौलवी  उन्हें  पढ़ाया  करते  थे  l  राजेन्द्र  बाबू  ने  अपनी  आत्मकथा  में  लिखा  है  -- " मौलवी  साहब  बहुत  अच्छे  आदमी  थे  l '  इसी  प्रकार  वकालत  की  परीक्षा  में  प्रथम  वर्ष  में  उत्तीर्ण  हो  जाने  पर   उसकी  व्यावहारिक  शिक्षा  के  लिए   वे  सैयद  शम्सुल  हुदा  के  शागिर्द  बने  और  उन्ही  के  यहाँ  रहते  थे  l   उनकी  प्रशंसा  करते  हुए  राजेन्द्र  बाबू  ने  लिखा  है ----- " एक  बार  बकरीद  के  अवसर  पर   मैं  यह  समझकर  कई  उनके  यहाँ  इस  अवसर  पर  गाय  की  कुर्बानी  होती  है  ,  अपने  गाँव  को  चला  गया   और  दो - तीन  दिन  बाद  वापस  आया  l  वकील  साहब  ने  मेरे  चले  जाने  का  कारण  पूछा   और  जब  उनको   मेरे  उत्तर  से  संतोष  नहीं  हुआ   तो  स्वयं  ही  असली  कारण  को  समझ  लिया   और  कहने  लगे  --- "  मैं  समझ  गया  कि  तुम  बकरीद  के  कारण  चले  गए  l  तुमने  सोचा  कि  यहाँ  गाय की  कुर्बानी  होगी  इसलिए  इस  समय  यहाँ  नहीं  रहना  चाहिए  l  लेकिन  ऐसा  ख्याल  कर  के  क्या  तुमने  मेरे  साथ  बेइन्साफी  नहीं  की  ?  तुमने  कैसे  समझ  लिया  कि  मैं  तुम्हारी  भावनाओं  का  आदर  नहीं  करूँगा   ?  तुम  तो  खास  आदमी  हो ,   मेरे  बगीचे  का  माली ,  गाय  की  देखरेख  करने  वाला  सब  हिन्दू  हैं   l  क्या  उनका  दिल  नहीं  दुखेगा  ?   मेरे  घर  में  कभी  गाय  की  कुर्बानी  नहीं  होती  l  "
  डॉ.  राजेन्द्र  प्रसाद  ने  अपनी  आत्मकथा  में  लिखा  है  --- "  मुझे  अपनी  गलती  पर  बहुत  दुःख  हुआ  और  शिक्षा  मिली  कि अच्छी  तरह  जाने  बिना  किसी  के  सम्बन्ध  में  कोई  धारणा  बना  लेना  बहुत  बड़ा  अन्याय  है  l   "    सज्जन  और  बुरे  लोग  हर  समाज  में  होते  हैं  l  जाति  या  धर्म  के  कारण  किसी  को  बुरा  या  भला   नहीं  समझा  जा  सकता  है   l   

9 May 2018

WISDOM -------- राजा हो या प्रजा , चिरस्थायी कल्याण और जीवन के सार्थक होने का एकमात्र मार्ग स्वार्थ का त्याग और कर्तव्यनिष्ठा है

  ' संसार  में  केवल  सफलता  को  ही  सम्मान  नहीं  मिलता  बल्कि  उससे  भी  ज्यादा  मान्यता   किसी  ऊँचे  आदर्श  के  लिए  त्याग , बलिदान  और  समर्पण  की भावनाओं  को  दी  जाती  है   l  महाराणा  प्रताप  में  ये  गुण   इतने  अधिक  मात्रा  में  थे  कि  अनेक  लेखकों  ने   उनके  जन्म  को  किसी  महान  दैवी - विधान  का  अंग  मान  लिया  है   l  '
राणा  प्रताप  ने  जातीय  सम्मान  और  कर्तव्य निष्ठा  के  क्षेत्र  में  जो  आदर्श उपस्थित किया  उसका प्रभाव  बहुत  समय  तक  जनमानस  पर पड़ता  रहा  l 

8 May 2018

WISDOM ----- महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर केवल कवि और कलाकार ही नहीं थे , वे एक सच्चे कर्मयोगी थे

 महात्मा  गाँधी  के  अहिंसा  के  विचार  को  वे  पसंद  करते  थे    किन्तु  जब  उन्होंने  असहयोग   की  घोषणा  कर  के   लड़कों  को  स्कूल  और  कॉलेज  छोड़ने  को  कहा  , विलायती  कपड़ों  की  होली  जलाने  का  कार्यक्रम  आरम्भ  किया   तो  महाकवि  ने  उसका  विरोध  किया   l  वे  कहते  थे  कि  इस  प्रकार  लड़कों  को  भड़काने  से  वे  आवारा  बन  जायेंगे   l  वस्त्र  बहिष्कार  और  चरखा  के  सम्बन्ध  में  वे  कहते  थे ----- "  गांधीजी  मशीनों  के  खिलाफ  हैं  तो  मेरी  भी   वही   सम्मति  है   पर  हमारी  बुराइयों  की  जड़  तो  भीतरी  कमजोरी  है    l  हम   चलने ,  बोलने   और  हंसने  में  भी  डरते  हैं   l  अंग्रेज  सरकार  के  हुक्म  पर  उठते  बैठते  हैं   l  हमारी  अपनी  ताकत  कुछ  भी  नहीं   l  हम  कायर  हैं  ,  सरकार  से  हर  बात  में  डरते  रहते  हैं   l  इस  जबरदस्ती  के  मैं  विरुद्ध  हूँ   l  लोगों  के  विचारों  पर  नियंत्रण   ठीक  नहीं  है   l  इस  तरह  यदि  हमको  स्वतंत्रता  मिल  भी  जाएगी    तो  भी  हम  सच्चे  अर्थों  में  स्वतंत्र  न  हो  सकेंगे    l  "

4 May 2018

WISDOM ---- क्रांति उनका धर्म था किन्तु उन्होंने साधन और साध्य की पवित्रता पर जोर दिया ----

 प्रिंस  क्रोपाटकिन   जीवन  भर  अन्याय  से  लड़ते  रहे  l   क्रांति  उनका  धर्म  था   लेकिन  उन्होंने  सदा  ही  साधन  और  साध्य  की  पवित्रता  पर  जोर  दिया   और  अपनी  कलम  और  वाणी  के  माध्यम  से   उन्होंने  ऐसी  ही  पद्धतियों  का  प्रचार  किया   जो  मानवता  से  सीधा  सम्बन्ध  रखती  थीं  l 
  प्रिंस  क्रोपाटकिन   का  जन्म  रूस  के  एक  कुलीन  राजवंशीय  परिवार  में  हुआ  था   l  उन्होंने  सैनिक   स्कूल   में  शिक्षा  प्राप्त  की  l  एक  बार  जब  वे  गवर्नर  जनरल   के ए.डी. सी.  बन कर  साइबेरिया  गए   वहां  उन्होंने  जार  के  कोपभाजन  बने  लोगों  के  नारकीय  जीवन  को  देखा   तो  उनका  ह्रदय  विद्रोह  से  भर  गया  और  उन्होंने  तुरंत  शासकीय  सेवा  से  त्यागपत्र  दे  दिया   l   उन्होंने  निरंकुश  जारशाही  के  विरुद्ध  आवाज  उठाई  l   अब  क्रांति  ही  उनका  धर्म  था  l  उनके  जीवन  चरित्र  लेखक  मेरी  गोल्ड  स्मिथ  ने  लिखा  है  ---- " भले  ही  प्रत्येक  ईमानदार  और  उत्साही  व्यक्ति  के  प्रति  उनका  व्यवहार  उदारता पूर्ण  रहा  हो   लेकिन  साधनों  का  चुनाव  करते  समय  वे   बहुत  कठोर  हो  जाया  करते  थे  l  प्रचार  के  कुछ  ढंगों  को  क्रोपाटकिन  असह्य  मानते  थे   l  चाहे  जैसे  भले - बुरे  साधनों  द्वारा  अपने  लक्ष्य  की  प्राप्ति  के  सिद्धांत  से  उन्हें  नफरत  थी   l  चाहे  संगठन  का  काम  हो , चंदा  इकठ्ठा  करने  का  ,  विरोधियों  से   व्यवहार  करना  हो  या  दूसरी  पार्टियों  से  सम्बन्ध  बनाना  ,  किसी  भी  काम  में   अनुचित  साधनों  का  प्रयोग   वे  किसी  भी  दशा  में  सहन  नहीं  कर  सकते  थे  l  "  

3 May 2018

WISDOM ----- प्रतिकूल परिस्थितियों में स्थिर बुद्धि और संतुलित मन ही व्यक्ति को संतुष्ट और शांत रखता है l

   ' व्यक्ति  किसी  विशेष  योग्यता  से  संपन्न  हो   तो  भी  कोई  जरुरी  नहीं  है  कि  लोग  उसे   तत्काल   ही    जानने  लगें   l  प्रकृति  की  दीर्घ  क्रिया    व्यवस्थाओं  से  हीरे  का  निर्माण   होता  है  l  सदियों  और  सहस्त्र  शताब्दियों   तक   वह  धरती  की  परतों  में  ही  छुपा  रहता  है  ,  तब  कहीं  जाकर   लोगों  की  निगाह  में  आता  है   l  और  उसका  मूल्यांकन  होता  है   l   कई  बार  प्रतिभाशाली  व्यक्ति  भी  बरसों  तक  उपेक्षित  रहते  हैं   l  शंकालु  और  आत्म निर्बल  व्यक्ति  इस   उपेक्षा  और  अवमूल्यन  से  अपनी  ही  योग्यता  को   संदेह  की  द्रष्टि  से  देखते  हैं   और  निराश  होकर  अपने  जीवन  को  नरक  बना  लेते  हैं   l 
  लेकिन  जिनमे  धैर्य  और  संघर्ष  की  क्षमता  होती  है   वे    कठिनाइयों  से  जूझते  रहने  पर  भी निराश  नहीं  होते    और  जीवन  में  सफलता  प्राप्त  करते  हैं   l 

1 May 2018

WISDOM ----- अहंकारी व्यक्ति अत्याचार को वीरता और अनीति को चातुर्य मानता है

 ' वास्तव  में  अधिकार  पद  बड़ा  विडम्बना पूर्ण  होता  है   l  जब  तक  वह  सक्षम  और  समर्थ  है  ,  लोग  उसकी  झूठी  चाटुकारी  किया  करते  हैं  और  जब  वह  असहाय  और  विवश  होता  है   तो  तुरंत  आँखें  ही  नहीं  फेर  लेते   बल्कि  फिर  से  न  उठ  पाए  इस  हेतु  दो  धक्के  और  दे  देते  हैं  l  '
  इसलिए  दूरदर्शी  व्यक्ति   अपनी  शक्ति  और  अपने  धन  का  सदुपयोग  करते  हैं  , न्याय  व्यवस्था   और  सुशासन  बनाये  रखने  में  सहयोग  देते  हैं  और  निष्काम  भाव  से   निर्धनों ,  पीड़ितों  और  शोषित  व्यक्तियों  के  कल्याण  के  लिए  कार्य  करते  हैं  l   जीवन  में  विपरीत  परिस्थितियां  आने  पर  ये  पुण्य  कार्य  ही  उन्हें  संबल  देते  हैं  l