29 September 2019

WISDOM -----

  एक  राजा  अत्यंत  दयालु  एवं  धर्मात्मा  था  ,  किन्तु  उसका  पुत्र  अत्यंत  दुष्ट  स्वभाव  का  था  l  राजा  ने  उसे  सुधारने  का  बहुत  प्रयत्न  किया  ,  परन्तु  सारे  प्रयत्न  विफल  ही  सिद्ध  हुए   l  सभी  उससे परेशान  रहते  थे  l  कुलगुरु  को  जब  इस  सन्दर्भ  में  ज्ञात  हुआ   तो  वे  राजकुमार  से  मिलने  गए  l  वे  उसे  राजभवन  में  घुमाते  हुए  एक  नीम  के  वृक्ष  के  पास  ले  गए   और  उसका  एक  पत्ता  तोड़कर  राजकुमार  को  चखने  को  दिया   l  पत्ता  चखने  पर  राजकुमार  का  मुंह  कडुआहट   से  भर  गया  l  उसने  कुलगुरु  से  तो  कुछ  नहीं  कहा  ,  परन्तु  उसने  क्रोधित  होते  हुए    सेवकों  को  बुलवाकर   उन्हें  आदेश  दिया  कि  वे  उस  पेड़  को  जड़  से  उखाड़  डालें  l
कुलगुरु  ने  पूछा ---- " उसने  ऐसा क्यों  किया   ? "  राजकुमार ने  उत्तर  दिया  ---- " गुरुवर  !  यह  पेड़  इतना  कडुआ  है  ,  इसका  कडुआपन  अनेकों  तक  पहुँचता  ,  इसलिए  मैंने  इसे  सदा  के  लिए  नष्ट  कर  दिया  l   कुलगुरु  बोले  ---- वत्स  !  जो  प्रजा  तुम्हारे  व्यवहार  के   कड़वे पन  से  दुःखी   है  ,  यदि  वह  भी  प्रत्युत्तर  में  ऐसा  ही  व्यवहार  तुम्हारे   साथ  करे  तो  तुम्हे  कैसा  लगेगा   ? "  राजकुमार  को  अपनी  भूल  का  एहसास  हुआ   और  उसने  अपना  व्यवहार  सदा  के  लिए  बदल  दिया  l

28 September 2019

WISDOM-------

 एक  बार  एक  व्यक्ति  ने  संत  सुकरात  से  पूछा  ---- " मानवी  जीवन  में  सबसे  मूल्यवान   वस्तु   कौन  सी  है  ?  "  सुकरात  का  उत्तर  था ---- ' प्रेम  l '    प्रेम  संसार  में   अकेली  ऐसी  अपार्थिव  चीज  है  , जिसे  हर  कोई  प्राप्त  करना  चाहता  है  , चाहे  वह  अमीर  हो  या  गरीब ,  शिक्षित  हो  या  अशिक्षित -- सब  समान  रूप  से  इसकी  अपेक्षा  दूसरों  से  करते  हैं    l  परम  सत्ता  - ईश्वर  भी  प्रेमरूप  है  l  हमारे भीतर  जितना  प्रेम , जितनी  संवेदना  होगी  हम  उतना  ही  ईश्वर  के  सन्निकट  होंगे  l-----
    बात  उन  दिनों  की  है   जब  अमेरिकी   अफ्रीका  से    लोगों  को  पकड़  लाते  थे   और  उनसे  पशुओं  जैसा  व्यवहार  करते  थे  l  बहुत  से  लोगों  ने  यह  धंधा  ही  अपना  लिया  था  कि  अफ्रीका  निवासियों  को  पकड़  कर  लायें  और  उन्हें  अमेरिका  में  बेचें  l  ऐसा  ही  एक  जहाज  अफ्रीकी  महिलाओं  का  आया  l  उसकी  भी  बोली  लगी   l  फिलिप  हिट्ले   नामक  एक  गोरी  महिला  ने   अपनी  सारी  सम्पति  बेचकर  बदले  में  वह  जहाज  खरीद  लिया   l  फिलिप  ने  उन  सभी महिलाओं  को  पढ़ाया  l  सभ्यता  सिखाई ,  स्वावलंबी  बनाया  और  इस  काम  के  लिए  तैयार  किया  कि  वे  दासों  की  दशा  सुधारने  और  उस  प्रथा  का  अंत  कराने  के  लिए  आन्दोलन  में  जुट  पड़ें  l  यह  आन्दोलन  तेजी  से  चला  और  कालान्तर  में  सफल  भी  हुआ   l

27 September 2019

WISDOM ----- प्रकृति में क्षमा का प्रावधान नहीं होता l

  प्रकृति  अनुशासन  से  आबद्ध  है   l  जो  भी  अनुशासन  को  तोड़ेगा  उसे   क्षमा  नहीं  मिल  सकती  l  भगवान  राम  करुणाकर  थे ,  लेकिन  असुरों  को  क्षमा  नहीं  किया   l  दुर्योधन , दु:शासन  को  उनकी  उद्दंडता  के  लिए  क्षमा  नहीं  किया  गया  और  उनकी  अनीति ,  अत्याचारों  को  चुपचाप  देखने  वाले ,  उनके  पक्ष  में  खड़े  होने  वाले  भीष्म  पितामह , द्रोणाचार्य, कृपाचार्य ,  कर्ण  और  सभी कौरव  मारे  गए  l पं.  श्रीराम  शर्मा  आचार्य   ने  लिखा  है ---- '' अनीति , अत्याचार का  विरोध  होना  चाहिए  l अनीति  का  साथ  देना  अनीति  करने  जैसा  है  l  परन्तु  दंड  देने  का  अधिकार  सभी  को  नहीं  होता   l  इसकी  व्यवस्था  होती  है   और  व्यवस्था  पर  दंड  का  निर्णय  छोड़कर   हमें  उसका  प्रबल  विरोध  करना  चाहिए  l  अत:  हमें  स्वयं  अनुशासन  में  रहते  हुए   प्रकृति  एवं  ईश्वर  के  विधि - विधान  के  अनुरूप  श्रेष्ठ  कर्म  करना  चाहिए   l

26 September 2019

WISDOM -----

  वन्य  पशु  एक  दूसरे  का  अनुकरण  करते  हुए  जीवन  भर  भटकते  और  विचरते  रहते  हैं  l  उनका  कोई  निश्चित  लक्ष्य  नहीं  होता   l  भेड़ें  इस  आदत के  लिए  बुरी  तरह  बदनाम  हैं  l  आगे  चलने  वाली  भेड़  का  मुंह जिस  ओर  भी  उठ  जाता  है    उसी  दिशा  में  उनका  पूरा  समूह  चल  पड़ता  है  l  किसी   गड्ढे  में  अगली  भेड़  के  गिरते  ही   पीछे  वाली  भी  सब  उसी  में  गिरती  चली  जाती  हैं   l  किसी  को  यह  नहीं  सूझता  कि  यह  अनुकरण  उचित  है  या  नहीं   l
  इसी  तरह    मनुष्यों  में  भी   विरले  ही  होते  हैं   जो   स्वतंत्र  चिन्तन    और  विवेक  बुद्धि  से  काम  लेते  हैं  l  अपने   से  भारी - भरकम   लगने  वाले  लोगों   का  अन्धानुकरण  करने  लगते  हैं  l  जल्दी  धनवान  बनना ,  सुविधा - संपन्नता  का  प्रलोभन  ,   लालच ,  लाभ  की  लालसा   आदि   विभिन्न  सुख - वैभव , विलासिता  को  समय  से  पहले  पा  लेने  की  लालसा  में  व्यक्ति  उन  लोगों  का  अंधानुकरण  करने  लगते  हैं  जिन्होंने  गलत  तरीके  से  यह  सब  हासिल  किया  है  l  कुछ  समय  बाद  जब  आँख  खुलती  है  तब  प्रतीत  होता  है  कि  भटकाव  के  कुचक्र  में  फंसकर  कितना  अनर्थ  कर  लिया  l
मनुष्य  की  अदूरदर्शिता  उसकी  विपत्ति  का  सबसे बड़ा  कारण  है   l

24 September 2019

WISDOM---- वैचारिक प्रदूषण एक बड़ी समस्या है !

    यदि  विचार  परिष्कृत  होंगे  ,  दुष्प्रवृतियों  के  स्थान  पर  सद्प्रवृतियों  की  स्थापना  होगी  तो  संसार  की  जटिल  से  जटिल  समस्याएं  स्वत:  ही  हल  हो  जाएँगी   l
  आज  के  वातावरण  में  आसुरी  तत्व  बड़ी  मात्रा   में  उत्पन्न  हो  रहे  हैं  l  अनीति , अन्याय , अधर्म  और  अकर्म  का  चारों  ओर  बोलबाला  है  ल  स्वार्थ , पाप , वासना ,  तृष्णा  और  अहंकार  की   तूती  बोल  रही  है  l  एक  दूसरे  का  शोषण  कर  के  ,  सताकर  अपना  स्वार्थ  सिद्ध  करने  को  लोग  कटिबद्ध  हैं  l  प्रेम , उदारता ,  सह्रदयता ,  संवेदना  ,  सेवा  और  सज्जनता  की  मात्रा  दिन - दिन  घटती  जा  रही  है  l  फलस्वरूप  ऐसी  घटनाओं  की  बाढ़  आ  रही  है     जिनमे  चीत्कार  और  हाहाकार  की  भरमार  रहती  है  l  इस  से  पूरा  वातावरण  प्रदूषित  हो  गया  है  l  ये  दुष्प्रवृत्तियां   इसी  प्रकार  बढ़ती  रहीं  तो  प्रकृति के  सामूहिक  दंड  से   बचना  मुश्किल  है  ,  मानव  सभ्यता  खतरे  में  पड़  जाएगी   l
  विज्ञान  ने  भी   मनुष्य  के  हाथ  में  विनाश  की  बड़ी  शक्ति  ' एटमी  शक्ति '  दे  दी  है   l  किसी  सिरफिरे  का  छोटा  सा  पागलपन   कुछ  ही  क्षणों  में  संसार  के  लिए  तबाही  उत्पन्न  कर  सकता  है  l
  पं.  श्रीराम  शर्मा  आचार्य  ने  कहा  है  --- लोक  मानस  में  से  दुष्प्रवृत्तियों  को  हटाकर  उनके  स्थान  पर  सत्प्रवृत्तियों  की  स्थापना  अनिवार्य  है   l  यह  कार्य  आत्मशक्ति  से  संपन्न  लोकनायक  और  मार्गदर्शक  ही  कर  सकते  हैं  l  मस्तिष्क  की  वाणी  मस्तिष्क  तक  पहुँचती  है  और  आत्मा  की  आत्मा  तक  l
 अंत:करण  में  जमी  हुई  आस्था  में  हेरफेर  करने  का कार्य  ज्ञान  से  नहीं    आत्म  शक्ति  से  ही  संपन्न  होना  संभव  हो  सकता  है  l  आचार्य  श्री  ने  कहा  है --- लोकमानस  की  शुद्धि का  महान  भार   वाचालों  के  नहीं ,  तपस्वियों  के  कन्धों  पर  रहेगा  l  युग  की  आवश्यकता  ऐसे  तपस्वियों  की  प्रतीक्षा  कर  रही  है  l

23 September 2019

WISDOM ---- जीवन अनमोल है

    हुसैन  नामक  एक  बड़ा  जौहरी   था  l  एक  समय   वह    व्यापार   हेतु  रामनगर  गया  l  वहां  उसकी  मित्रता  देश  के मंत्री  से  हो   गई  l  एक  दिन  वह  मंत्री  के  साथ  भ्रमण  पर  निकला    तो  रास्ते  में  उसे  एक  विशाल  तम्बू  नजर  आया    और  एक  सुसज्जित  सेना  उस  तम्बू  की  परिक्रमा  कर  रही  थी   l  फिर  क्रमशः  विद्वान्  पुरुष ,    दो - तीन   सौ  सेवक  जवाहरात  भरे  थाल  के  साथ    और  फिर  अंत  में  राजा  आये  और  ये  सब  भी  परिक्रमा  कर  के  चले  गए   l
जौहरी   ने  मंत्री  से    इस  अद्भुत  लगने  वाली   घटना  के  बारे  में  जिज्ञासा  की  तो  मंत्री  ने  बताया   कि  राजा  का  एक   अत्यंत  गुणवान  पुत्र  था  l  राजा  उस  से  अत्याधिक  स्नेह  करता  था  l   एक  दिन  अकस्मात  उसका  निधन  हो  गया   l  इस  तम्बू  में  उसकी  कब्र  बनी  है    प्रतिवर्ष  राजकुमार  की  मृत्यु - तिथि  के  दिन   राजा  सेना  व  परिवार  सहित  यहाँ  आता  है   और  प्रदक्षिणा  कर  के  लौट  जाता  है   l  हुसैन  ने  मंत्री  से  पूछा  --- "  तो  क्या  राजा  अपने  पुत्र  की  कब्र  पर  कुछ  चढ़ाता  नहीं  l "    मंत्री  ने  उत्तर  दिया --- "  नहीं  !   इस  पूरे  प्रयोजन  का  उद्देश्य  मात्र  इतना  है  कि --  सेना  की  वीरता ,  विद्वानों  का  ज्ञान    और  पूरे  राज्य  की  धन - सम्पति   सब  व्यर्थ  है  l  यह  सब  देकर  भी   मनुष्य  आयु  नहीं  प्राप्त  कर  सकता   l  "   यह  सुनकर  हुसैन  के  मन  में  भी  तीव्र  वैराग्य  उत्पन्न  हुआ  और  अत्यधिक  सम्पति  संग्रह  करने  का  लालच  छोड़  कर  वह  भगवद  भजन  और  लोक कल्याण  के  कार्यों    में    स्वयं  को  व्यस्त  रखने  लगा   l

22 September 2019

WISDOM ---- श्रम के साथ भावना और मनोयोग तथा बुद्धि और विवेक जुड़ जाये --

 
पं.  श्रीराम  शर्मा  आचार्य  ने  अपने  जीवन  के  अंतिम  दिनों  में  सभी  लोगों  की  गोष्ठी  बुलाई  और  कहा   कि  आज  हम  तुम  लोगों  को  अपने  जीवन  का  सार  बताएँगे  ,  उन्होंने  कहा --- "  मैं  जीवन  भर  तुम  लोगों  से  गायत्री  की  बातें  करता  रहा  ,  अब  मैं  तुम  लोगों  से  गायत्री  माता  की माता  के  बारे  में  कहता  हूँ  l  गायत्री  माता  की माता  का  नाम  है ----' श्रम  '  l  जो  श्रम  करता  है  ,  उसे  गायत्री  माता वरदान  देती  है  ,  जो  श्रम  नहीं  करता ,  उस  निठल्ले  को  कोई  वरदान  नहीं  देता  l  "
उन्होंने  आगे  कहा ---- "  यह  श्रम  तब  और  भी  व्यापक  एवं  आध्यात्मिक  बन  जाता  है  और  व्यक्तित्व  की  प्रगति  के  द्वार  खोलता  है   ,  जब  श्रम  सेवा  में  तब्दील  हो  जाता  है   l  जब हम   सेवा  के  माध्यम  से  श्रम  करते  हैं   तो  हम  निजी  जीवन  को  समृद्ध  बनाते  हैं    और  अपने  व्यक्तित्व  को  व्यापक  बनाते  हैं   l  "