25 November 2019

WISDOM -----

    श्रीमद भगवद्गीता   में  भगवान   कहते  हैं  --- ज्ञानी  का  लक्षण  यह  है   कि  वह  जीवन  के  प्रत्येक  दुःख , प्रत्येक  कष्ट  में  दूसरों  के  नहीं  , अपने  दोष  ढूंढता  है  l   वह  सोचता  है  कि   जरूर  हमने  कोई   दोष  किया ,  कोई  भूल  हुई  हमसे  ,  जिसका  परिणाम  हम    भोग  रहे  हैं  l
  लेकिन  अज्ञानी  हमेशा  दूसरों  को  दोषी  ठहरता  है   इसलिए  वह  अपने  दोषों  से  मुक्त  नहीं  होता  है  l
        यदि  अपने  हर  दुःख , कष्ट , पीड़ा  और  हर  रोग  में   हमें  अपनी  कमियां  , अपने  दोष  समझ  में  आने  लगें    तो  हम  आगे  ऐसी  गलतियां  नहीं  करेंगे   जिनके  कारन  जीवन  दुःखमय   हो  गया  l
  जब  मन  में  यह  सत्य  गहराई  से  बैठ  गया   कि   सभी  दुःख  हमारे  अपने  ही  कारण   पैदा  हुए  हैं  ,  ऐसा  होश  आने  पर  हम  उन  कारणों   को  हटाने  लगेंगे  l   और  हमारा  मन  संस्कारित  होने  लगेगा  l

23 November 2019

WISDOM ----- सकारात्मक सोच जीवन को ऊर्जा से भर देती है

    राजर्षि   पुरुषोत्तम  दास  टंडन   उन  दिनों  बीमार  थे  l  उन्हें  देखने  के  लिए  उनके  एक  पुराने  साथी  प्रयाग  गए  l   तब  राजर्षि   ने  बातों  ही  बातों  में  अपना  एक  संस्मरण  सुनाया  ----- " किसी  समय   मैं 
 देशी  रियासतों  में   राजाओं  का  सुधार  करने  के  लिए  एक  आदर्श  योजना  बना  रहा  था   ताकि  यह  दिखाने   का  अवसर  मिले  कि   भारतीय  अंग्रेजों  से  अच्छा  शासन  कर  सकते  हैं  l   इसी  उद्देश्य   के  लिए  बनाई  गई  योजना  को  क्रियान्वित   करने   मैंने   नाभा  रियासत  में  नौकरी  की  ,  परन्तु  मैं  असफल
   रहा  l  "  उनके  मित्र  ने  कहा  --- "  यह  तो  बड़ा  अच्छा  रहा  l  '
 टंडन जी  बोले ---- " यही  तो  मैं  भी  कहना   चाहता  था  l  अंग्रेजों  के  कारण   मैं  असफल  हुआ   तो  मैंने  अपना  ध्यान   अंग्रेजों  को  यहाँ  से  हटाने  में  लगाया  l   ईश्वर  के  प्रति  मैं   धन्यवाद  से   भर  गया  हूँ  l   नाभा  में  सफल  होने  पर  संभव  था  मैं  कूपमंडूक  बना   रह  जाता   l  इस  असफलता  ने  मेरे  लिए   सफलता   और  साधना  का  नया  द्वार  खोल  दिया  l  '
  अपने  कार्यों  मिली  सफलता - असफलता  के  प्रति  समान   दृष्टि   और  सकारात्मक  सोच  अपनाने  से  ही   वे  राजर्षि    उपाधि  के  अधिकारी    सिद्ध  होते  रहे  l   यह  प्रसंग  हर  उस  व्यक्ति  के  लिए  प्रेरणा दायक  है   जो  असफलताओं  से  जूझ  रहे  हैं ,  आगे  बढ़ने  को  प्रयत्नशील  हैं  l 

22 November 2019

WISDOM ------ कर्मयोग

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  था  ---- ' कर्मयोग  परिश्रम  की  पराकाष्ठा  का  नाम  है   और  जो  परिश्रम  को  ही  त्याग  बैठते  हैं  ,  वे  जीवन  के  किसी  भी  आयाम  में   न  तो  उन्नति  कर  पाते  हैं   और  न  ही  व्यक्तित्व  की   समग्रता  को  प्राप्त  कर  पाते  हैं   l   श्रम  की  उपेक्षा  ही  हमारे  समाज  में   दरिद्रता  का  कारण   है  l   वे  कहते  हैं  कि   भारतीय  समाज  ने  विकास  के  दोहरे  मानदंड  तय  कर  लिए  हैं   l   हम  श्रम  करने  वालों  से  तो  घृणा  करते  हैं    और  बिना  मेहनत ,  आराम  का  अन्न   खाने  वालों  को    ऊँचा  स्थान  देते  हैं  ,  इसलिए  यह  देश  दरिद्रता  के  गर्त  में   गिरता  चला  गया  और  अपनी  समृद्धि  गँवा  बैठा  l 
 आचार्य जी  कहते  हैं --- अध्यात्म  का  पहला  पाठ   परिश्रम  और  ईमानदारी  से  प्राप्त  समृद्धि  है   और  यह  कर्मयोग  से  ही  प्राप्त  होती  है   l '
  

21 November 2019

WISDOM ------ गोस्वामी तुलसीदास जी

  राम  कथा  उनसे  पहले  भी  प्रचलित  थी ,  लेकिन  संस्कृत  में  ही  l   जान साधारण  को  उससे  न  तो  प्रेरणा  मिलती  थी  और  न  ही  दिशा  l   गोस्वामी जी  ने   रामकथा  के  इर्द - गिर्द  खींची  गई  इन  रेखाओं  को  मिटाया  और  उसे  सार्वजनीन  बनाया  l   तुलसीदास जी  ने  मध्यकाल  के  उस  अंधकार  युग  में    रामकथा  को  संबल   बनाया   और  उसमे  आश्रय  ग्रहण  करने  की  प्रेरणा  दी  l  लोगों  ने  उस  आश्रय  को  ग्रहण  भी  किया  l   तुलसी  की  राम कथा  किसी  भी  समय , परिस्थिति  और  समस्या  में  उपचार  की  तरह  सामने  आती  है  l 
  हिंदू   और  इस्लाम   दोनों  ही  धर्मों  के  लोग  उनका  सम्मान  करते  थे  l   अब्दुर्रहीम  खानखाना   से  उनकी  मित्रता  विख्यात  थी   l  रहीम  ने  मानस  के  संबंध   में  कुछ  पद  भी  रचे    और  कहा  यह  काव्य  हिन्दुओं  के  लिए  वेद  और  मुसलमानों  के  लिए  कुरान  है  '  हिन्दुआन   को  वेदा सम , तुरुकहि   प्रगट  कुरान  l '
 अकबर  के  नवरत्नों  में  से  टोडरमल  तुलसीदास जी  के  प्रति  अगाध  श्रद्धा  रखते  थे  l   उनके  सहयोग  से  ही   गोस्वामी जी  ने   राम जन्म  भूमि   स्थल  के  दक्षिण द्वार   के  पास    बैठकर   राम कथा  कही  थी  l 
  उनके   कुछ  विरोधियों  ने  मानस  को  नष्ट  करने  की  चेष्टा  की ,  चुराने  के  लिए  चोर  भेजे  l   जन  श्रुति  है  कि  चोर  जब  उनकी  कुटिया  में  घुसने  लगे    तो  दो  धनुर्धारियों  को  पहरा  देते  देख  वापस  चले  गए  l   ये  धनुर्धारी  राम  और  लक्ष्मण  ही  थे  l   अपने  इष्ट  को  पहरा  देते  देख   उन्हें  कष्ट  नहीं  होने   देने  के  लिए    गोस्वामी जी  ने  मानस  की  प्रति    राजा  टोडरमल  के  यहाँ  रखवा  दी  l   ऐतिहासिक  तथ्य  है  कि   विरोध  का   समाहार  करने  के  लिए   गोस्वामी जी  को  टोडरमल , रहीम ,  आचार्य  मधुसूदन  आदि   विद्वद्जनों  ने  सहायता  की  थी  l
एक  स्थान  पर  तुलसीदास जी  नाथपंथियों  की  आलोचना  भी  करते  हैं  l  उनका  कहना  था  कि   योगतंत्र  और  शरीर  साधनाओं  में  ऊर्जावान  चित , स्थिर  मन: स्थिति  और  सुदृढ़  मनोभूमि  चाहिए   l  सौ   में  से  एक - दो  साधक  ही  यह  स्थिति  अर्जित  कर  पाते  हैं   l   इसलिए  जन  सामान्य  भक्ति मार्ग  अपनाकर  ही   अपना  आत्मिक  विकास  कर  सकता  है  l
  तुलसीदास जी  का  यह  दोहा  प्रख्यात  है ----
      हम  चाकर  रघुवीर  के ,  पट्यौ   लिख्यौ   दरबार 
      तुलसी  अब  का  होहिंगे ,  नर  के  मनसबदार   l

20 November 2019

WISDOM ---- स्वयं को सार्थक कार्यों में संलग्न रख चिंता से दूर रहें

  चिंता  घुन  की  तरह  होती  है  ,  यदि  यह  घुन  लग  जाये  तो  व्यक्ति  को   अंदर  से  खोखला   कर  देती  है  l  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  थे --- ' चिंता  मनुष्य  को  वैसे  ही  खा  जाती  है  ,  जैसे  कपड़ों  को  कीड़ा  l  बहुत  चिंता  करने  वाले   व्यक्ति  अपने  जीवन  में   चिंता  करने  के   सिवा  और  कुछ  सार्थक  नहीं  कर  पाते   और  चिंता  से  अपनी  चिता     की  और  बढ़ते  हैं   l '
  चिंता  की  घुन  क्या  होती  है  इसे  समझाने   वाला  एक  आख्यान  है  ----  दो  वैज्ञानिक -- एक  वृद्ध  एक  युवा  --- आपस  में  बात  कर  रहे  हैं  l   वृद्ध  वैज्ञानिक  ने  कहा --- चाहे  विज्ञान   कितनी  ही  प्रगति    क्यों  न  कर  ले  ,  लेकिन  वह  अभी  तक  कोई  ऐसा  उपकरण  नहीं  ढूंढ  पाया , जिससे  चिंता  पर  लगाम  कासी  जा  सके  l "  युवा  वैज्ञानिक  ने  कहा --- 'चिंता  तो  बहुत  साधारण  बात  है  , उसके  लिए   उपकरण   की  क्या  आवश्यकता  l '
 वृद्ध  वैज्ञानिक  ने  कहा --- ' चिंता  बहुत  भयानक  होती  है   l '  इसे  समझने  के  लिए   वे  उस  युवा  वैज्ञानिक  को  जंगल  ले  गए  l   एक  विशालकाय  वृक्ष  के  सामने  खड़े  हुए   और  कहा --- देखो  , इस  वृक्ष  की   उम्र  चार सौ   वर्ष  है  l   इन  चार  सौ   वर्षों  में   इस  वृक्ष  ने  कितने  आंधी - तूफान  झेले ,   अनेकों  बार  इस  पर  बिजली  गिरी ,  लेकिन  इन  सबसे  यह  धराशायी  नहीं  हुआ  l   लेकिन  इसकी  जड़ों  को  देखो  उन्हें  दीमक   ने  खोखला  कर  दिया  है  l   इसी  तरह   चिंता   दीमक   की  तरह    सुखी , समृद्ध  और  ताकतवर   व्यक्ति  को  खोखला  कर  देती  है  l
  आचार्य श्री  का  कहना  है --- ' स्वयं  को  सदा  सार्थक  कार्यों  में  संलग्न  रखें ,  ,  मन  को   अच्छे विचारों  से  ओत - प्रोत  रखें   और  जीवन   के  प्रति  सकारात्मक    दृष्टिकोण    रखने  से    मन    को  चिंता मुक्त  रखा  जा  सकता  है  l  

19 November 2019

WISDOM -----

  गाँधी जी  ने  राम - नाम  जपा  l   कोई  अनुष्ठान  नहीं , कोई  विशिष्ट  तप - व्रत  नहीं  l  जो  भी  उनके  उपवास  हुए  , वे  राष्ट्रहित  में  किये  गए   l   गाँधी जी  विश्व  भर  में  अहिंसा  के  पुजारी  के  रूप  में  ,  असहयोग  एवं   सविनय  अवज्ञा    के  पालन  कर्ता   के  रूप  में   तथा  सत्य  के  प्रयोगों  के  लिए  जाने  जाते  हैं   l   विश्व  के  अनेक  देशों  के  लोग  यह  मानते  हैं   कि   आज  की  सभी  समस्याओं  का  समाधान   गाँधी  की  अहिंसा  में  निहित  है   l
  अहिंसा  के  लिए  कहा  जाता  है  कि   यदि  योगी  अहिंसा  में  सम्पूर्णतया  प्रतिष्ठित  हो   तो  उसके  आस - पास  निर्वैरता   व्याप्त  हो  जाती  है   l   सांप  और  नेवला  भी    अपना  वैर  भुलाकर  साथ  बैठते - खेलते  हैं  l   पं  .  श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है --- '  मनुष्य   में  प्राकृतिक  वैर  नहीं  है   उस   का  वैर  विकृतियों  से  उपजा  है   l  '  इसलिए  ईसा मसीह , सुकरात   प्रकृति  एवं   प्राणियों  के  द्वारा  नहीं  ,  बल्कि  विकृत  मनुष्यों  द्वारा  मारे  गए   l   अहिंसा  के  पुजारी  महात्मा   गाँधी   के   सीने    पर  हिंसा  ने  गोली  बरसाई   l     यदि  हृदय  में  संवेदना  हो  तो  संसार  की   समस्त  समस्याएं  हल  हो  जाएँ  l

18 November 2019

WISDOM

    पं.  श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  का  कहना  है  ---- " विपरीत  परिस्थितियों  में  जो  साहस ,  ईमान  और  धैर्य   को  कायम  रख  सके  , वस्तुत:  वही  सच्चा  शूरवीर  है  l "
मनोविज्ञान  के  प्रोफेसर  रिचर्ड  वाइजमैन  का  कहना  है --- " बाधाएं  मनुष्य  के  रवैये  के  अनुसार  अपना  रंग  दिखाती   हैं  l  यदि  व्यक्ति  सकारात्मक  सोच  वाला  है  तो  बाधाएँ   स्पीड  ब्रेकर  से  अधिक   कुछ  नहीं  होतीं  ,  जिन्हे  थोड़ा  संभलकर   आसानी  से  पार  किया  जा  सकता  है   और  यदि  सोच  नकारात्मक  है   तो  बाधाएं  पहाड़  की  तरह  बड़ी  प्रतीत  होती  हैं  ,  जिन्हे  पार  करना  आसान  नहीं  दीखता  l "
       एक  बार  जब  विख्यात  खोजी  यात्री  डेविड  लिविंगस्टोन   अफ्रीका  के  घने  जंगलों  में   जांबेजी  नदी  के  मुहाने  की  खोज  के  लिए   निकल  रहे  थे  ,  तब  उनके  एक  दोस्त  ने   उन्हें  जंगल  के  मुश्किल  हालातों  का  जिक्र  करते  हुए    उन्हें  जाने  से  रोकना  चाहा  l   लेकिन  लिविंगस्टोन  ने  कहा --- ' जब  नदी  वहां  रास्ता  बना  सकती  है  ,  पेड़ - पौधे  व  जीव - जंतु  वहां  रह  सकते  हैं  ,  तो  मुझे  वहां  जाने  से  कौन  रोक  सकता  है  l  "  वे  उस  भयंकर  वन  में  गए    और  उन्होंने  उस  समय  की  जटिल  परिस्थितियों   में  भी  अनेक  खोजी  यात्राएं   कीं ,  जो  अफ्रीका  के  इतिहास  में  अभी  भी  दर्ज  है  l