13 June 2020

WISDOM ------

   एक  साधु   वर्तमान  शासन  तंत्र  की  आलोचना   कर  रहा  था  ,  तब  एक   तार्किक  ने  उनसे  पूछा  --- "  कल  तो  आप  संगठन  शक्ति  की  महत्ता  बता  रहे  थे  l   आज  शासन  की  बुराई  !  शासन  भी  तो  एक  संगठन  ही  है  l  "  इस  पर  महात्मा  ने  एक  कहानी  सुनाई -----
 "  एक  वृक्ष  पर  एक  उल्लू  बैठा  हुआ  था  ,  उसी  पर  आकर  एक  हंस  भी  बैठ  गया   और  स्वाभाविक  रूप  में  बोला ---- "  आज  सूर्य  प्रचंड  रूप  में  चमक  रहे  हैं ,  इसलिए  गर्मी  तीव्र  हो  गई  है  l  "
  उल्लू  ने  कहा ---- "  सूर्य  कहाँ  है  ?  गर्मी  तो  अंधकार  बढ़ने  से   होती  है  ,  जो  इस  समय  भी  हो  रही  है   l  "  उल्लू  की   आवाज   सुनकर   एक  बड़े  वट वृक्ष  पर  बैठे  हुए   अनेक  उल्लू  वहां  आकर  हंस  को   मूर्ख   बनाने  लगे   और  सूर्य  के  अस्तित्व  को  स्वीकार  न  कर   हंस  पर  झपटे  l   हंस  यह  कहता  हुआ  उड़  गया   क़ि  --- " यहाँ  तुम्हारा  बहुमत  है  , बहुमत  में  समझदार  को   सत्य  के  प्रतिपादन  मे   सफलता  मिलना    दुष्कर  ही  है   l "    बहुमत  के   महत्व  को    समझते  हुए   हंस  चुप  हो  गया  l 

11 June 2020

WISDOM ---

 राजा  जनक  की  शोभा  यात्रा  निकल  रही  थी  ,  उस  अवधि  में  राज  कर्मचारी  सारा  रास्ता  पथिकों  से  शून्य  बनाने  में  लगे  थे  l  अष्टावक्र  को  हटाया  गया  तो  उन्होंने  हटने  से  इनकार   कर  दिया   और  कहा  प्रजाजनों  के  आवश्यक  कार्यों   को  रोककर  अपनी  सुविधा  का  प्रबंध  करना  राजा  के  लिए  उचित  नहीं  है  l   यदि  राजा  अनीति  करे  तो  विवेकवानों  का  कर्तव्य  है   कि   वे  उन्हें  रोके  और  समझावें  l   आप  राजा  तक  मेरा  संदेश   पहुंचाएं   और  कहें  कि  अष्टावक्र  ने  अनुपयुक्त  आदेश  को  मानने  से  इनकार   कर  दिया  l   वे  हटेंगे  नहीं  राज - पथ  पर  ही  चलेंगे  l
राज्य अधिकारियों   ने  अष्टावक्र  को  बंदी  बना  लिया   और  राजा  के  पास  पहुंचे  l  राजा  जनक  ने  सारा  किस्सा  सुना  तो  वे  बड़े  प्रभावित  हुए   और  कहा ---" इतने  तेजस्वी  और  विवेकवान  लोग  जहाँ  मौजूद  हैं   जो  राजा  को  भी  ताड़ना   कर  सकें  ,  तो  वह  देश  धन्य  है  l   नीति   और  न्याय  के  पक्ष  में  आवाज  उठाने  वाले   सत्पुरुषों  के  द्वारा  ही   जान - मानस  की  उत्कृष्टता  स्थिर  रह  सकती  है  l   राजा  जनक  ने  अष्टावक्र  से  माफी   मांगी   और  कहा ---- " मूर्खतापूर्ण  आज्ञा  चाहे  राजा  की  ही  क्यों  न  हो   तिरस्कार  के  योग्य  है  l   आपकी  निर्भीकता  ने  हमें  अपनी  गलती  समझने  और  सुधारने  का  अवसर  दिया  l  "

8 June 2020

WISDOM ----- प्रकृति के सन्देश को समझें

  महाभारत  में  एक  प्रसंग  है  ----  महारथी  कर्ण   के  पास  जन्मजात  कवच  और  कुण्डल  थे  ,  जिनके  रहते  उसे  परास्त  करना  असंभव  था  l   अर्जुन   की  सुरक्षा  के  लिए  देवराज  इन्द्र   ने   कर्ण   से  दान  में  उसके  कवच - कुण्डल  मांगने  का  निश्चय  किया  l   कर्ण   महादानी  और  सूर्यपुत्र  था  l  अत:  रात्रि  में  सूर्यदेव  कर्ण   के  पास  आये  और  कहा -- पुत्र  !  प्रात:  देवराज  इंद्र  वेश  बदलकर  तुम्हारे  पास  कवच - कुण्डल  मांगने  आएंगे  ,  तुम  उन्हें  मना  कर  देना ,  इनके  रहते  तुम्हे  कोई  पराजित  नहीं  कर  सकता  ,  इसलिए  तुम  उन्हें  कवच - कुण्डल  नहीं  देना  l "   लेकिन  कर्ण   ने  उनकी  बात  नहीं  मानी   और  अर्जुन  के  साथ  युद्ध  में  पराजित  हो  वीरगति  को  प्राप्त  हुआ   l
  आज  भी  ईश्वर  हमें  समय - समय  पर  विभिन्न  रूपों  में  समझाने   आते  हैं , सचेत  करने  आते  हैं   लेकिन  मनुष्य  अपने  अहंकार ,  लालच , तृष्णा  में  इतना  डूबा  हुआ  है  कि   प्रकृति  के  संदेश   को ,  उसकी  चेतावनी  को  नहीं  समझ  रहा   और  स्वयं  अपना  अंत  करने  पर  उतारू  है  l
  महामारी  का  कहर ,  दो  बार  समुद्री  तूफान ,  कई  बार  भूकंप ,  फिर  टिड्डी  दल  का  आक्रमण  ---  यह  सब   बड़े  खतरे  की  चेतावनी  है  ,  प्रकृति  हमें  समझा  रही  है  कि   विज्ञान   अपनी  मर्यादा   में  रहे , प्रकृति  को  जीतने  का  प्रयास    न  करे   l   मनुष्य  अपने  लोभ - लालच  पर  नियंत्रण  रखे   l   अति  हर  चीज  की  बुरी  है  ,  धन  का  अति  लालच  ,  गुलाम  बनाने  की  प्रवृति ,  अत्याचार - अन्याय -- इन  सब  की  अति  प्रकृति  को  बर्दाश्त  नहीं  है  l   मनुष्य  जागे ,  अन्यथा   शिवजी  के  तीसरे  नेत्र  को  खुलने  से  कोई  नहीं  रोक  सकता  l 

7 June 2020

WISDOM ------ निर्भय होकर जिएं

  आज  संसार  में  अधिकांश  समस्याएं   और  आपा - धापी  इसलिए  है  कि   हर  व्यक्ति  भयभीत  है ,  चारों  और  ' भय  का  कारोबार  है  '  l   यह  कारोबार  एक  दिन  में  नहीं  हुआ  है   l   मानवीय  कमजोरियों  से  फायदा  उठाने  के  लिए  आसुरी  प्रवृतियां   योजनाबद्ध  तरीके  से  यह  कारोबार  करती  हैं  l   बच्चों  के  कई  खेल - खिलौने   ऐसे  बनते  हैं  कि   छोटे - छोटे  दूध  पीते   बच्चे  उन  खिलौने   से  भयभीत  हो  जाते  हैं  l   इससे  उनके  कोमल  मन  पर  दुष्प्रभाव  पड़ता  है  ,  उनका  मन  कमजोर  हो  जाता  है  l   जो  माताएं  इस  सत्य  को  जानती  हैं , वे  गर्भावस्था  में  ही   अत्याधिक   शोर , भयभीत  करने  वाली  फिल्म  आदि  नकारात्मक  चीजों  से  दूर  रहती   हैं  l  भयभीत  करने  वाली  फ़िल्में , सीरियल  ,  खेल  आदि  को  लोग  बहुत  देखते  हैं  l   इन  सबसे  क्षणिक  मनोरंजन  होता  है   लेकिन   ये  भी  मन  को  कमजोर  कर  देती  हैं  l
   वैसे   ही   तो व्यक्ति  के  जीवन  में  अनेक  भय  हैं --- सौंदर्य  है  तो  बुढ़ापे  का  भय , धन  है  तो  उसके  चोरी  का   भय ,  सत्ता    है  तो  उसके  खोने  का  भय   l   इस  भय  से  मुक्ति  पाने  के  लिए  व्यक्ति    सौंदर्य  सामग्री ,  धन  की  सुरक्षा ,   सत्ता  को  बनाये  रखने  के  लिए  हजारों - करोड़ों  रूपये  खर्च  कर  देता  है  l   इन  सबसे  ऊपर  है --- मृत्यु  का  भय  l   हर  व्यक्ति  जीना  चाहता  है  ,  संसार  का  आकर्षण  ही  कुछ  ऐसा  है  l    अपनी  जिंदगी  पर  थोड़ा  सा  भी  खतरा   व्यक्ति    को    बेचैन  कर  देता  है  ,  इसी  का  फायदा  व्यवसायी  उठाते  हैं  l   गीता  में  कहा  गया  है --- निर्भय  होकर  जिओ  l  लेकिन  जब  बचपन  से  ही  डराने   वाली  सामग्री  से  मन  कमजोर  हो  जाये   तो  क्या  करें  ?  हर  समस्या   से   जागरूक   रहकर  ही   निपटा  जा  सकता  है  l 

WISDOM ------

  जब  बाबर  ने  अमीनाबाद  को  जीतकर  अपने  राज्य  में  मिला  लिया    तो  गुरु  नानक  और  उनके  शिष्य  मरदाना  को  भी  जेल  की  हवा  खानी   पड़ी  l   जब  बाबर  को  अपने  अधिकारियों   से  गुरु  नानक  की   आध्यात्मिक  शक्ति  का  पता  चला  तो  वह  उनसे   जेल  में  मिलने  गया  l
नानक  ने  बादशाह  को  देखकर  कहा --- " मनुष्य  का  धर्म  तो  लोगों  की  सेवा  करना  है  ,  और  आप  अपने  राज्य  की  प्रजा  पर  शासन  कर  रहे  हैं  l "  बाबर     ने  अपनी  भूल  स्वीकार  करते  हुए  कहा  --- " बाबा  ! यदि  आप  कुछ  मांगना  चाहते  हों  तो   नि:संकोच  मांग  लीजिए  l "
 गुरु  नानक  ने  कहा --- " राजा  से  तो  मूर्ख   मनुष्य  ही  मांगते  हैं  l  मुझे  यदि  किसी  वस्तु   की  आवश्यकता  भी  होगी   तो  ईश्वर  से  मांगूंगा  l   आपसे  मांगने  का  लाभ  भी  क्या  है  ?  देने  वाला  तो  दाता   एक  राम  है  ,  जो  मनुष्यों  को  तो  क्या  राजाओं    तक  को  देता  है  l "
 इतना  सुनकर  बाबर  ने  कहा --- " तो  आप  ही  मुझे  कुछ  प्रदान  कीजिए  l  "
 नानक  ने  एक  उपदेश  दिया ---- " बाबर  ! इस  संसार  में  किसी  भी  वस्तु  का  स्थायित्व  नहीं  है   l  ध्यान  रखो  !  आपका  या  आपके  पुत्रों  का  शासन  तब  तक  चलेगा   जब  तक  उसका  आधार   प्रेम  और  न्याय  बना  रहेगा  l  "  इस  उपदेश  से  बाबर  के  जीवन  की  दिशा  बदल  गई  l 

6 June 2020

WISDOM ------

 ब्रह्मा जी  ने  सृष्टि  की  रचना  की  l  बढ़ती  हुई  जनसँख्या  से  उन्हें  चिंता  हुई  तो  उन्होंने   अपने  तपोबल  से   मृत्यु   को  बनाया   और  उसे  आदेश  दिया  कि ---- ' मनुष्यों  की  बढ़ोत्तरी  न  हो  पाए  ,  इसलिए  तुम  उन्हें  मार - मारकर   परलोक  भेजती  रहो  l  '
यह  सुनकर  मृत्यु  रोने  लगी  कि   यह  निर्दयतापूर्ण  कार्य  मुझसे  न  हो  पायेगा   l   तब  प्रजापति  ने  उससे  कहा  ----  "  मैं  आठ  काल - दूतों  को   पृथ्वी  पर  भेजता  हूँ   l   वे  आदमी  के  मन  में  प्रवेश  कर   उन्हें  भीतर  ही  भीतर  खोखला  करते  रहेंगे  l   इनके  चंगुल  में  फँसे   रहने  के  कारण  वे  मरणासन्न  हो  जायेंगे    और  इस  क्लेश  से  मुक्ति  पाने  के  लिए   वे  स्वयं  ही  तुम्हारे  आश्रय  को  ढूंढने  लगेंगे  l   फिर  तुम्हारा  कार्य  निष्ठुरता  का  नहीं  दया  और  सांत्वना  का  होगा  l  '  मृत्यु  संतुष्ट  हो  गई  l   अब  ब्रह्मा जी  ने  काल - दूतों  से  उसका  परिचय  कराया ---- इनके  नाम  हैं  ---- असंयम ,  आवेश , ईर्ष्या ,  लोभ ,  निष्ठुरता ,  अशिष्टता ,  तृष्णा  और  आलस्य  l
  ये  जहाँ  रहेंगे   वहां  तीव्र  और  मंद  गति  से  आदमी  मरणासन्न  होते  रहेंगे  l 

WISDOM -----

  किसी  भी  समस्या  का  समाधान  करना  है  तो  उसकी  जड़  में  जाकर  मूल  कारण  को  समाप्त  करना  होगा   l  समस्या  कुछ  ऐसी  होती  है  कि   बच्चा  अपनी  माँ  की  गोद   में  ,  आँचल  में  छुपा   सो  रहा  है  ,   इस  बात  से  बेखबर  माँ   सारे  घर , मोहल्ले  में  बदहवास  होकर  अपना  बच्चा  ढूंढ  रही   कि   उसका  बच्चा  कहीं  खो  गया  l   थक - हार  कर  वह  पुलिस  थाने   पहुँचती  है  और  रो - रोकर   बच्चे   के    गुम   होने  की  रिपोर्ट  लिखाती   है  कि   उसका  एक  ही  बेटा   है  , मिल  नहीं  रहा   l    पुलिस वाला  पूछता  है -- यह  गोद   में  किसका  बच्चा  लिए  हो   ?  वह  औरत  बहुत  खुश  होती  है  कि   बच्चा  मिल  गया  l
  आज  सारा  संसार  एक  महामारी  से  पीड़ित  है  ,  चारों  ओर   इसका  इलाज  ढूंढा  जा  रहा  है  l  जब  सक्षम   माननीय  लोगों  ने  पहले  से  ही   भविष्यवाणी   कर  दी  थी  कि   एक  वायरस  फैलेगा  ,  तो  यह  निश्चित  है  कि   उन्हें  इसका  कारण  भी  पता  होगा  कि  ऐसा  क्यों  होगा  ?  बस  !  उस  कारण  को  दूर  कर  दिया  जाये   तो  सारे   संसार  को   मुसीबत  से  छुटकारा  मिल  जाये  l
  जैसे  कोई  मीठा  बहुत  खाता   है ,  दिनचर्या  अनियमित  है  ,  इस  कारण  के  आधार  पर  ही  भविष्यवाणी  की  जाएगी  कि  उसे  डाइबिटीज  होने  की  संभावना  है  l   इस  कारण  को  दूर  कर  दिया  जायेगा   तो  व्यक्ति  स्वस्थ  हो  जायेगा  l
पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है  कि   यदि  हमारे  मन  में  लोभ  नहीं  है ,  लोक - कल्याण  का  भाव  है   तो  दैवी  शक्तियां  मदद  करती  हैं ,  हर  समस्या  का  समाधान  संभव  है  l