25 June 2020

WISDOM ------

  सामान्य  जनता  श्रेष्ठ  लोगों  का  अनुकरण  करती  है   l   उनके  द्वारा  कही  गई  बात  को  मानती  है  l   जो  कुछ  वे  कहते  हैं  ,  यदि  उसको   अपने  आचरण  से  भी  प्रस्तुत  करें  तो  सामान्य  जनता   उनकी  कही  गई  बात  को  हृदय  से  स्वीकार  करती  है  l   यही  बात  उनके  द्वारा  प्रयोग  में  लाई  गई  वस्तुओं  के  सम्बन्ध  में  है  ,  इसलिए  विज्ञापन  और  प्रचार  द्वारा  कंपनी  अपनी  वस्तु   को  श्रेष्ठ   बताने  का  प्रयास  करती  हैं   l   जीवन  रक्षक  दवाइयां  या  वैक्सीन  वास्तव  में  कितनी  उपयोगी  हैं  ,  श्रेष्ठ  लोग  और  जिसने  इसका  अविष्कार  किया  ,  उसके  लिए  वित्त व्यवस्था  की   , प्रबंध  किया   वे    जनता  के  सामने    स्वयं  पर   और  अपने  परिवार  पर  उनका  उपयोग  कर  के  बताएं  ,  तो  उसका  प्रभाव  अमिट    होगा  ,  ऐतिहासिक  होगा  ,  युगों  तक  याद  रखा  जायेगा  l   हमारे  आयुर्वेदिक  औषधि   और  प्राकृतिक  चिकित्सा  में  काम  आने  वाली  जड़ी - बूटियों  का  कोई  साइड इफेक्ट  नहीं  होता  ,    वे  फायदा  ही  करती  हैं , पुरानी   भी   हो जाएँ  तो   भी   उनसे  जीवन  को  खतरा  नहीं  होता   l   लेकिन    ऐलोपैथी  में  यह  गुण   नहीं  है   l
  हर  चिकित्सा  पद्धति  की  अपनी  विशेषताएं  हैं  l     स्वस्थ  होने  के  लिए   विश्वास  जरुरी  है  l 

WISDOM ----- वैज्ञानिक प्रगति ने मनुष्य को नास्तिक बना दिया है

  वैज्ञानिक  प्रगति  के  कारण  मनुष्य  अपने  को  सर्वशक्तिमान  समझने  लगा  है  l   इस  विकास  से  पहले  लोग  ईश्वर  के  प्रति  आस्था  को  आवश्यक  समझते  थे  l  मनुष्यों  को  एक  अज्ञात  शक्ति  के  प्रति  आस्था  थी  कि   कोई  एक  शक्ति  है  जो  सब  जड़ - चेतन  का  नियमन  करती  है  l   लेकिन  इस  विकास   से  बढ़ते  अहंकार   ने  मनुष्य  की  आस्था  को  समाप्त  कर  दिया  l  अब  वह   प्रकृति  में  हस्तक्षेप  कर  स्वयं  को  सर्वशक्तिमान  समझने  लगा  है    और   अपनी  तृष्णा , लोभ - लालच   के  कारण    प्रकृति  के    शुद्ध  और  पवित्र    अनुदान   में    भी  मिलावट  कर   प्रकृति  को  चुनौती  देने  लगा  है  l   मिटटी  में  रसायन  मिल  गया   तो  उसकी  उपज  खाकर  नियम - संयम  से  रहने  वाला  भी  बीमार  हो  गया  l   हमारी  श्वास  पर  ईश्वर  का  नियंत्रण  है  ,  हमारे  ऋषियों  ने  हमें  तरीका  भी  सिखाया  कि   खुली  हवा  में    गहरी  श्वास  लेनी  चाहिए  लेकिन  अपने  को  सर्वशक्तिमान  समझने  वाला  मनुष्य  इस  पर  भी  अपना  नियंत्रण  चाहता  है  l
  प्रकृति  ने ,  ईश्वर  ने  हमें  जो  अनुदान  दिए  वे  सब  हमारे  कल्याण  के  लिए  हैं  ,  इसमें  ईश्वर  का  कोई  स्वार्थ  नहीं  है   लेकिन  शक्ति  और  साधन  संपन्न  अहंकारी  मनुष्य   लोगों  की  भलाई  का  कोई  कार्य  करता  भी   दीखता  है  तो  उसमे  उसका  बहुत  बड़ा  स्वार्थ  छिपा  होता  है  l 
पुराणों  में  कथा  है  कि   हिरण्यकश्यप   ने  बहुत  शक्ति व  साधन  एकत्र   कर  लिए  और  स्वयं  को  भगवान   कहने  लगा  l   सब  प्रजाजनों    को  आदेश  दे  दिया  कि   उसी  को  भगवान   मानकर  पूजें  l  मनुष्य  की  महत्वाकांक्षा  का  चरम  स्तर  यही  है  l   सत्य  और  धर्म  की  राह  पर  चलकर   मनुष्य  राम  और  कृष्ण  बनता  है ,  युगों  तक  पूजा  जाता  है  लेकिन  अनीति  की  राह  पर  चलकर   रावण , कुम्भकरण  और   हिरण्यकश्यप  बनता  है  और  धिक्कारा  जाता  है  l 

23 June 2020

WISDOM -----

    जब  मनुष्य  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  होता  है   तो  वह   दूसरों  को  अपने  से  श्रेष्ठ  समझता  है  l   जब  यह  दुर्बुद्धि  पूरे   समाज  पर  हावी  हो  जाती  है  तब  व्यक्ति   अपनी  संस्कृति , अपनी  शिक्षा  ,   अपनी  जीवन  शैली  ,   अपनी  चिकित्सा   पद्धति   को  भूलकर  गलत  दिशा  में  भागने  लगता  है  l   जहाँ  राह  गलत  होती  है  वहां  सफलता  का  प्रश्न  ही  नहीं  होता  l   हमारे  पास   ऋषियों  की  बताई  गई  आयुर्वेदिक  चिकित्सा  है , प्राकृतिक  चिकित्सा  है   लेकिन  हम  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  है  इसलिए  हम  अपने  तरीके  को  छोड़कर  दूसरों  के  पीछे  भागते  हैं  ,  लाखों  रूपये  खर्च  कर  अपना  बजट  बिगाड़ते   हैं  l   इससे  एक  तो  स्वस्थ  ही  नहीं  होते  और  यदि  ठीक  भी   हो गए  तो  दूसरी  बीमारी  गिफ्ट  में  लेकर  आते  हैं  l ----
  दो  बहने  थीं  ,  छोटी  बहन    ऐलोपैथी  में  विश्वास  रखती  थी   और  बड़ी  बहन     अपनी  देशी  चिकित्सा  में  l   यह  एक  संयोग  ही  था  कि   दोनों  के  दांत  में  भयंकर  दर्द  हुआ  l  जो   ऐलोपैथी  में  विश्वास  रखती  थी  उसे  तुरंत  आराम  चाहिए  था   इसलिए  डॉक्टर   के  पास  गई  ,  डॉक्टर   ने  देखा , दाँत   निकलना  जरुरी  था  अत:  दांत  निकाल   दिया  ,  वह  बड़ी  खुश,  घर  आ  गई  l
दूसरी  बहन   ने   आयुर्वेदिक  मंजन  लिया ,  फिटकरी  के  पानी  से  कुल्ला  किये ,  दर्द  की  जगह  पर  लौंग  को  रखा  ,  इस  तरह  देशी  तरीके  से  एक - दो  दिन  में  उसका  दर्द  ठीक  हुआ  l  फिर  दुबारा  नहीं  हुआ  l   लेकिन  छोटी  बहन  के    कुछ  दिनों  बाद   जो  दाँत   निकाला   था  ,  उसके  पास  वाले    दाँत   में  दर्द  हुआ  l   इस  तरह  एक - एक  कर  के  उसने   अपने  तीन  दाँत   खो  दिए   और  हजारों  रूपये  खर्च  हुए  सो  अलग  l   अब  यह  बुद्धि  का  ही  फेर  है  l   संसार  में  सब  कुछ  है ,  लेकिन  चुनाव  हमें  करना  है  l
  यदि  हम  कमजोर  हैं ,  हम  में  आत्मविश्वास  नहीं  है    तो  संसार  में  फायदा  उठाने  वाले  सब  जगह  हैं  l   मनुष्य  की  इसी  कमजोरी  का  फायदा  उठाकर    वे  उसे  मानसिक  रूप  से  अपना  गुलाम  बना  लेते  हैं  ,  अपनी  इच्छानुसार  उन्हें  जीवन  जीने  को  विवश  कर  के  अपने  अहंकार  को  पोषित  करते  हैं  l   आज  के  युग  की  समस्याओं   का  हल  वाद - विवाद  से  नहीं  है  l   जब  हम  जागरूक  होंगे ,  हमारा  स्वाभिमान  जागेगा  ,  हमारे  जीवन  की  दिशा  सही  होगी    तभी  हमारा  मानव  जीवन  सफल  होगा  l 

WISDOM ------ दुष्ट की भलाई और अनाचारी का संग करने वाले सज्जन पुरुष का भी कल्याण नहीं होता

  हमारे  इतिहास  में  अनेकों  ऐसी  घटनाएं  हैं  जो  हमें  शिक्षा  देती  हैं   कि   शत्रु  का  कभी  विश्वास  नहीं  करे  l   ऐसा  शत्रु  जो  हमें  धोखा  दे   चुका    हो  ,  उस  पर  कभी  विश्वास  नहीं  करे ,  उसे  अपने  घर  में  घुसने  न  दे ,  अन्यथा  वह  कभी  भी  उचित  अवसर  पाकर   अपना  स्वार्थ  सिद्ध  करेगा  l   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने   वाङ्मय  ' मरकर  भी  जो  अमर  हो  गए  '  में  लिखा  है  -----   लोभी  और  दुष्ट  -- इन  दो  के  लिए  संसार  में  कोई  भी  घात   अकरणीय  नहीं  होती  l   साहसी  शत्रु  की  अपेक्षा   कायर  शत्रु  से   अधिक  सतर्क  और  सावधान  रहने  की   नीति   का  निर्देश  दिया  गया  है  l  ' 
   जोधपुर    के  महाराज  जसवंतसिंह   ने  औरंगजेब   का  हर  तरह  से  साथ  दिया ,  अपनी  वीरता  और  बुद्धिमत्ता   से    उसे  निर्भय  रखा  लेकिन  औरंगजेब  मन  ही  मन  उनसे  ईर्ष्या  रखता  था  ,  उनकी  वीरता  ,  उनका  प्रखर  व्यक्तित्व  उससे  सहन  नहीं  होता  था   l   कहते  हैं -- कायर  की  जब    वीर  से   विसाती   नहीं  तो  वह  कुटिलता  पर  उतर  आता  है  l  '    कुटिल    औरंगजेब  ने  उनके  पुत्र  पृथ्वीसिंह  को   धोखे  से  मर  वा  दिया  और  जोधपुर  पर  अपना   अधिकार  कर  लिया  l
आचार्य श्री  ने  लिखा  है ---- ' वीर  और  बर्बर  के  आदर्शों  में  अन्तर   होता  है  l   हमें  हमेशा  सतर्क  रहना  चाहिए  l 

21 June 2020

WISDOM ----- जैसा खाए अन्न , वैसा हो मन

हमारे  आचार्य  ने , ऋषियों  ने  बताया  है  कि   हम  अपने  शरीर  के  पोषण  के  लिए  जो  कुछ  भी  ग्रहण  करते  हैं  ,  न  केवल  उसका   बल्कि  उसे  बनाते   समय  ,  बनाने  वाले  की  भावना  का  भी  हमारे  शरीर  व  मन   अर्थात  स्वास्थ्य  पर  प्रभाव  पड़ता  है  l   यदि  हमारी  अज्ञानता  में    हमारा  भोजन  बनाने  वाला  कोई  अपराधी  है ,  हत्यारा  है  तो  हमारे  मन  में  भी  वैसे  ही  बुरे  ख्याल  आएंगे  l   यदि  हम  किसी  ऐसी  महिला  से  खाना  बनवाते  हैं  , जो  हमेशा  अपने  घर  में  पति  से  कलह  करती  है    तो  उसके  बनाये  भोजन   को   खाने  का  प्रभाव  हमारे  पारिवारिक  जीवन  पर  भी  पड़ेगा  l
  यदि  हम  रासायनिक  खाद , बीज , कीटनाशक  आदि  से  उपजा  अन्न , फल , सब्जी  खाते   हैं   तो  बीमारी  हमारा  पीछा  नहीं  छोड़ेंगी  l
  जो  लोग  मांसाहार  करते  हैं    तो  इसमें    बड़ी  बात  यह  है   कि   वे  जिस  जानवर  का  मांस  खाते   हैं   तो  उस  जानवर   की  विशेषताएं  भी  धीरे - धीरे  उनमे  आ  जाती  हैं  l   यह  सब  एक  दिन  में  नहीं  होता ,   बचपन  से    मांसाहार  करते  रहने  से   बड़े  होने  पर  उस  जानवर  की  विशेषता   उनकी  बुद्धि  में  आ  जाती  है  l   यह  स्पष्ट  रूप  से  देखा  जा  सकता  है  कि   जो  लोग  विभिन्न  तरह  के  जानवर ,  कीड़े - मकोड़े  , पशु - पक्षी  आदि  न  खाने  योग्य  भी  सब  कुछ  खाते   हैं    तो  उन  सब  विभिन्न  जीव - जंतुओं  की  विशेषताओं  का  संयोग  उनकी  मानवी   बुद्धि  के  साथ    हो  जाता  है  ,  इसलिए  ऐसे  लोग  बहुत  क्रूर ,   चालाक   ,  धोखेबाज ,  खूंखार   अदि  दुर्गुणों  से  युक्त  होते  हैं  l   शास्त्रों  में  लिखा  है   ऐसे  लोगों  का  कभी  विश्वास  न  करे  ,  उनसे  दूरी   बना  कर  रहे  l 
  जब  हम  जागरूक  होंगे ,  शांत  रहकर    अपने  स्वाभाव , स्वास्थ्य ,  अपने  आचार - विचार  में  होने  वाले  परिवर्तनों  का   अध्ययन - मनन   करेंगे    तभी  हम  समझेंगे  कि   हम  क्या  थे  ? और  कैसे  हो  गए   ?
  जिस  भोजन  और  जल  से  हम  जीवित  रहते  हैं    उसकी  पवित्रता  जरुरी  है  l 

WISDOM ----- आपसी फूट से बुद्धि मूर्छित हो जाती है

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  वाङ्मय  ' महापुरुषों  के  अविस्मरणीय जीवन  प्रसंग  '  में  लिखा  है ----- '  सिकन्दर   ने  भारत  पर  आक्रमण  से  पहले   यहाँ  की  आंतरिक  दशा  का  पता  लगाने  भेदिये   भेजे  ,  जिन्होंने  आकर  समाचार  दिया  कि   इसमें  कोई  संदेह  नहीं  कि   वीरता  भारतीयों   की  बपौती  है  ,  किन्तु  उनकी  सारी   विशेषताओं  को  एक  नागिन   घेरे  हुए  है  जिसे  ' फूट '  कहते  हैं  l   इसी   फूट   रूपी  नागिन  के  विष  से   भारतीयों   की  बुद्धि  मूर्छित  हो  चुकी  है  l
 सिकन्दर   ने  भारतीयों   में  फैली  इस  फूट   की  विष बेल  का  फायदा  उठाया   और  उसने  शीघ्र  ही    उस  तक्षक  का  पता  लगा  लिया  ,  जो  प्रोत्साहन  पाकर   भारत  की  स्वतंत्रता  पर  फन  मार  सकता   है  l   और  वह  था  ---- तक्षशिला  का   दम्भी    राजा  आम्भीक  l    यह  महाराज  पुरु  से  द्वेष  रखता  था  और  ईर्ष्या - द्वेष  में  अँधा  था  l
सिकन्दर   ने  अवसर  का   लाभ  उठाया  और  लगभग  पचास  लाख  रूपये  की  भेंट  के  साथ   सन्देश  भेजा  ,  यदि  महाराज  आम्भीक   सिकन्दर   की  मित्रता  स्वीकार  करे  तो  वह  उन्हें   पुरु  को  जीतने  में  मदद  करेगा  और  सारे  भारत  में  उनकी  दुन्दुभी   बजवा   देगा  l   सिकन्दर   द्वारा  भेजी  भेंट  और  सन्देश  पाकर  द्वेषान्ध ,  अहंकारी   आम्भीक    होश  खो  बैठा    और  वह  देश  के  साथ  विश्वासघात  कर  के   सिकन्दर   का  स्वागत  करने  के  लिए  तैयार  हो  गया  l   भारत  के  गौरवपूर्ण  चन्द्र - बिम्ब  में  एक  कलंक  बिन्दु   लग  गया  l
  आचार्य श्री  लिखते  हैं --- ' जब  कोई  पापी  किसी  मर्यादा   की  रेखा   का  उल्लंघन   कर  उदाहरण  बन  जाता  है  ,  तब  अनेकों  को  उसका  उल्लंघन  करने  में   अधिक  संकोच  नहीं  रहता  l   आम्भीक   की 
 देखा  देखी    अनेक  राजा    सिकन्दर   से  जा  मिले  l   किन्तु  अभागे  आम्भीक   जैसे  अनेक    देश - द्रोहियों  के  लाख  कुत्सित  प्रयत्नों  के  बावजूद   भी  एक  अकेले  देशभक्त  पुरु   ने   भारतीय  गौरव  की  लाज  रखकर   संसार  को  सिकन्दर   से  पद - दलित   होने  से  बचा  लिया  l   भारतीय  इतिहास  में  महाराज  पुरु  का  बहुत  सम्मान  है  ,  केवल  वही  एक  ऐसे  वीर  पुरुष  हैं  ,  जिसने  पराजित  होने  पर  भी   विजयी  को  पीछे  हटने  पर  विवश  कर  दिया  l   

WISDOM ----- जीवन का विनाश करना एक अपराध है

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  वाङ्मय  ' मरकर  भी  अमर  हो  गए  जो '  में  लिखा  है ---- "  आत्मघात  तो  एक  पाप  है  ही  ,  साथ  ही  अन्य  प्रकार  से   भी  जीवन  का  विनाश  करना   एक  अपराध  है  ---- जो  मनुष्य  अज्ञानवश   विषय - वासनाओं  और  भोग - विलास  में  पढ़कर  इस  मानव  जीवन  का  दुरूपयोग  करते  हैं   और  लोभ , मोह , क्रोध  व  अहंकार   में  पढ़कर  ऐसे  काम  किया  करते  हैं  , जिससे  अन्य  मनुष्यों  व  प्राणियों   को  कष्ट  होता  है  , तो  ऐसा  कर  के   वे  अपने  मानव  जीवन  का  विनाश  करते  हैं  l
    लोभ  के  वशीभूत  होकर   प्राय:  लोग  अपनी  शारीरिक , बौद्धिक  तथा  व्यावहारिक  शक्तियों  का  दुरूपयोग  कर   धन - सम्पति  का  संचय  करते  हैं  l   इसके  लिए  वे  शोषण , छल - कपट  का   सहारा  लेते  हैं  और  चोरी , डकैती , भ्रष्टाचार   आदि  न  जाने  कितने  घृणित  कर्म  करते  हैं   l   उनके  इन  लोभ  प्रेरित  कार्यों  से   कितने  लोगों  को  कष्ट ,  हानि  और  भयंकर  शोक  सहन  करना  पड़ता  है  l   ऐसे  दुष्परिणाम  देने  वाले   कार्यों  को  करना  जीवन  का  दुरूपयोग  और  उसको  नष्ट  करना  है  l
  इसी  प्रकार  लोग  मोह  में  पड़कर   और  अहंकार  के  वशीभूत  होकर  अधर्म  के  पथ  पर  चलने  लगते  हैं  l   अपने  स्वार्थ  में  लिप्त  रहते  हैं , समाज , राष्ट्र  अथवा  संसार  के   प्रति  भी  उनका  कुछ  कर्तव्य  है ,  इसे   भूल  जाते  हैं    और  अपने  स्वार्थों  में  व्यवधान पड़ने  पर   अपराधों  में  प्रवृत  हो  जाते  हैं  l   इस  प्रकार  का  जीवन  चलना  उसे  नष्ट  करना  ही  है  l '