26 July 2020

WISDOM -----

  शिष्यों  ने  गुरु  से  पूछा ---  बड़े  आदमी  में  और  महान  आदमी  में  क्या  अंतर  है   ? '
 गुरु  बोले ---- " लोग  पैसे  वाले  को  बड़ा  आदमी  समझते  हैं  ,  जबकि  व्यक्ति  महान   पैसों  से  नहीं  ,  अपितु  शिष्ट , शालीन   और  विनम्र  होने  से  कहलाता  है  l   जैसे  फलों  के  आने  पर  वृक्ष  झुक  जाते  हैं ,  पानी  से  भर  जाने  पर  बादल   नीचे  आ  जाते  हैं  ,  वैसे  ही  महापुरुष   समस्त  ज्ञान   का  भंडार  होते  हुए  भी   विनम्र  होते  हैं  l  "

25 July 2020

WISDOM ------- मनुष्य अपने कार्य और विचारों से प्रकृति को अपनी पसंद बताता है

  प्रकृति  मनुष्य  को  वही  देती  है  ,  जो  उसे  पसंद  है  l  यह  मनुष्य  की   अयोग्यता  ही  कही  जाएगी  कि   वह  अपनी  पसंद  भी  ठीक  तरह  से  बता  नहीं  पाता  l   व्यक्तिगत  पसंद  के  साथ  सामूहिक  पसंद  भी  होती  है   l   यदि  समाज  में , संसार  में  अधिकांश  लोग   किसी  तरह  का  एक  जैसा  व्यवहार  कर  रहे  हैं  ,  तो  प्रकृति  में  यह  सन्देश  जाता  है  कि   लोगों  को  यही  पसंद  है  , फिर  प्रकृति  किसी  न  किसी  माध्यम  से   वैसा  ही  वातावरण   संसार  को  देती  है  l ----  जैसे --- संसार  में  किसी  देश  में  जातिगत   छुआछूत  है ,  जो   लोग  अपने  को  श्रेष्ठ  समझते  हैं    वे  अपने  से  निम्न  जातियों  के  लोगों  के  साथ  उपेक्षा  का , अपमान  का  व्यवहार  करते  हैं  l   जिन  देशों  में  रंग भेद  है  ,  वहां  गोरे   लोग  ,  काले   लोगों  के  साथ  उपेक्षित  व्यवहार  करते  हैं  l   शिक्षित  होने  के  बावजूद  भी   अब  तक  पुरुष   स्वयं  को  नारी  से  श्रेष्ठ  समझता  है  l ---- मनुष्य  ऐसा  व्यवहार  युगों  से  करता  आ  रहा  है  l   इस  कारण  प्रकृति  को  यह  बात  स्पष्ट  हो  गई    कि   मनुष्य  को  ऐसा  उपेक्षा  ,  अपमान  का  व्यवहार  अच्छा  लगता  है  l
  वर्तमान  में  इस  महामारी  ने   संसार  से  संवेदना  समाप्त  कर  दी     और   इस  महामारी  का  लक्षण  होने  पर    उपेक्षा , अपमान ,  ' दूर  रहो ' की  स्थिति   पैदा  कर  दी  l   दुःख - दर्द  और  गरीबी    के  मारे   लोगों  के  प्रति  सहयोग   की  भावना  को  ही  ग्रहण  लग  गया  l
  इस  महामारी  का  कारण   कोई  वायरस  हो  या  ' कुछ  और  हो '  l   जो  छूतछात ,  भेदभाव  मनुष्य  करता  आ  रहा  है  ,  वैसी  ही  स्थिति  संसार  में   पैदा  हो  गई  l
  इस  स्थिति  से  मनुष्य  को  सबक  लेना  चाहिए  l   जब  जागो  तब  सवेरा  l   हम  संवेदनशील  बने  l   प्रेम ,  आत्मीयता  ,  अपनत्व , सहृदयता  , भाईचारा , सहयोग , सहानुभूति     के  व्यवहार  को   संसार  में  फैलाएं  l   ईश्वर  में  विश्वास  रखें  ,  ईश्वर  ने  हमें  जितनी   श्वास    दी  हैं  ,  उन्हें  कोई  नहीं  छीन  सकता  l 

24 July 2020

WISDOM ----

  श्रीमद्भगवद्गीता   में  भगवान   कहते  है --- सामान्य जन  के  जीवन  में  जब  कोई  दुःख  आता  है  ,  कोई  बीमारी  आती  है , कोई  असफलता  घटित  होती   है   तो  सामान्य - जन  यही  सोचते  हैं  कि   किन्ही  दूसरे  लोगों  की  शरारत ,  षड्यंत्र  के  कारण  हम  कष्ट  पा  रहे  हैं  l   अज्ञानी  हमेशा  दूसरों  को  दोषी  ठहराता   है  l   लेकिन  जो  ज्ञानी  है   वह  जीवन  के  प्रत्येक  दुःख  में   दूसरों  के  नहीं  अपने  दोष  ढूंढ़ता   है  l
  यदि  दुःख , पीड़ा   और रोग  आदि  में   हमें  अपनी  कमियां ,  अपने  दोष   समझ  में  आने  लगें  ,  हम  इन्हे  खोज  सकें   तो  फिर  हम   आगे  ऐसी  गलतियाँ   नहीं  करेंगे  l   जिन  दोषों  की  वजह  से  हमारा  जीवन  दुःखों   से  भर  गया  ,  हम  पुन:  वे  गलतियां  नहीं  करेंगे   और  हमारा  मन  संस्कारित  होने  लगेगा  l
   लेकिन  अज्ञानी  जो  अपने   दुःखों   के  प्रत्येक  कारण  को   दूसरों  में  ढूंढ़   रहा  है  ,  उसके  लिए  दुःखों   के  कारणों  को  हटाना  असंभव  होगा  l 

WISDOM ---- संसार की समस्त समस्याओं का एकमात्र हल है ---- संवेदना

   संवेदना  का  अर्थ  यही  है  कि   हम  दूसरे  का  दुःख ,  उसकी  पीड़ा  को  समझें  और  निःस्वार्थ   भाव  से   उसकी  पीड़ा  को  दूर  करने  का  प्रयत्न  करें  l -----  एक  किसान  अत्यंत  गरीब  था  l   एक  रात  वह  अपने  बच्चों  को  भूख  से  पीड़ित  न  देख  सका   तो  वह  पड़ोस  के  किसान  के  बाड़े   से  एक  गाय  खोलकर  ले  आया  l   सवेरा  होने  से  पहले  उसने   गाय  का  दूध  दुहकर  बच्चों  को   पिला   दिया   l
 सवेरे  पड़ोसी   किसान  ने  देखा  कि   एक  गाय  कम  है   तो   उसने  जांच - पड़ताल  की  l   ढूंढ़ने   पर  गाय   गरीब  किसान  के  आंगन  में  बंधी  मिली  l  वह  किसान  द्वारपाल   को  बुला  लाया  l   द्वारपाल  ने  पूछताछ  आरम्भ  की   तो  गरीब  किसान  ने  कहा   कि   गाय  उसी  की  है  ,  पर  ऐसा  कहते  हुए   उसकी  आँखें  नीची  हो  गईं  l   पड़ोसी   किसान  ने  देखा  कि   गरीब  किसान  के  घर  खाने  को  कुछ  भी  नहीं  है    तो  वह  बोला ---- गाय  उसकी  नहीं  है  ,  शायद  गरीब  किसान  की  ही  होगी  l   '  उसके  साथ  आए   लोगों  ने   उससे  झूठ  बोलने  का  कारण  पूछा   तो  वह  बोला  --- " मैं  सच  बोलता  तो  मेरी  गाय   मुझ  तक  लौट  आती  ,  पर  वह  किसान  और  उसके  बच्चे   भूखे  रह  जाते   l "
  किसी  की  भलाई  के  लिए  कहा  गया  झूठ  सच  से   बढ़कर  होता  है   l 

23 July 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  लिखा  है --- ' जिन्हे  हम  बुरी  वस्तुएं  समझते  हैं  ,  जिन  बातों  को  हम  अप्रिय  समझते  हैं ,  उनमे  हमारी  जागरूकता ,  चेतना  और  विवेक - बुद्धि  को  जाग्रत  करने  की  शक्ति  होती  है   l   उससे  अनुभव  बढ़ता  है , समझदारी  आती  है  l  यदि  बुरी  बातें  दुनिया  में  न  हों   तो  अच्छी  को  , श्रेष्ठता  को  अनुभव  करने  का  अवसर  लोगों  को  न  मिले   और  निष्क्रियता  अवं  जड़ता  बढ़ने  लगे  l   इस  प्रकार  जब  हम  गंभीरता पूर्वक  विचार  करते  हैं   तो  हमें  बुराई  के  गर्भ  में  भी    श्रेष्ठता  प्रतीत  होती  है  l   उसके  कारण  हमारी  अच्छाइयों  को   विकसित  होने  का  अवसर  मिलता  है   l   इस  प्रकार  वह  बुराई  भी    हमारी  श्रेष्ठता  को  बढ़ाने  का  हेतु  बनती  है  l "

WISDOM -----

  " सत्य  अकेला  नहीं ,  प्रेम  और  न्याय  को  भी  साथ  लेकर  चलता  है  l  इसी  प्रकार  असत्य  के  साथ   पतन  और  संकट  के  सहचरों  की  जोड़ी  चलती  है   l  "
      "  निर्भय  और  सबल  व्यक्ति  हिंसा  नहीं  करता  l   वह  अहिंसा  पर  विश्वास  करता  है  ,  क्योंकि  इसके  मूल  में  प्रेम  की  भावना  कार्य  करती  है  l   प्रेम  में  हिंसा  का  स्थान  कहाँ  ?  "
      हजरत  उमर   ने  एक  व्यक्ति  को  किसी  प्रदेश  का  शासक  नियुक्त  किया  l  इसके  बाद  खलीफा  एक  पड़ोसी   के  बच्चे  को  खिलाने   लगे  l   उसे   हँसाने   के  लिए  मुँह   बिचकाने   और  तरह - तरह  की  जानवरों  की  बोलियाँ   बोलने  लगे  l
  नव - नियुक्त  शासक  आश्चर्य  में  पड़   गया   l   उसने  कहा ---- " मेरे  पांच  बच्चे  हैं  l   उनमें   से  मैंने  किसी  को  भी   इतने  प्यार  से  नहीं  खिलाया  ,  जितना  कि   आप  पड़ोसी   के  बच्चे  से  लिपट  रहे  हैं  l "
  खलीफा  ने  नियुक्ति  पत्र  वापस  ले  लिया    और  कहा ---- "  जब  तुम  अपने  बच्चों  को  प्यार  नहीं  कर  सकते   तो  मेरी  प्रजा  को   प्रसन्न  रखने  की  बात  कैसे   सोच  सकोगे  ?  "

22 July 2020

WISDOM ----- जिसके भीतर जो भाव है , वही उसकी क्रिया में प्रकट होता है l

  आज  के  समय  में  जब   मनुष्य  का  दोहरा  व्यक्तित्व  है  ,  सामने  कुछ  और  दिखाई  देता  है  लेकिन  उसकी  वास्तविकता  कुछ  और  है  l   ऐसे  में   उसके  द्वारा ,  या  उसके  संरक्षण  या   आदेश  द्वारा     किए   जाने  वाले  कार्यों   और  उनके  परिणामों  का  गहराई  से   अवलोकन   करें    तो  हम   उस  व्यक्ति  की  वास्तविकता  को  समझ  सकते  हैं  l
यह  संसार  ईश्वर  का  बगीचा  है   इसमें  गंदगी  से  लेकर  मनोहर  पुष्प  तक  सभी  पदार्थ  होते  हैं  l   कोयल  इस  बाग़  में  पहुंचकर   उस  पर  मुग्ध  हो  जाती  है  ,  अपनी  सुरीली  आवाज  में  कूकती  है  ,  उस  बाग   की  मनोहरता  को  और  बढ़ा  देती  है    l   लेकिन  दूसरी  ओर   चमगादड़   उस  बाग   में  घुसता  है   तो  उसके  उत्तम  फल - फूलों  को  कुतर - कुतर  कर   जमीन   पर  ढेर  लगाता   है    और  उस  बगीचे  को  कुरूप  बनाता   है  l   हम  बगीचे  में  ऐसी  कुरूपता  देखते  ही  समझ  जायेंगें   कि   यह  चमगादड़  का  काम  है  l
 कोयल  और  चमगादड़   अपने - अपने  भाव  के  अनुसार  क्रिया  प्रकट  करते  हैं  l   जिनके  भीतर  जो  है  ,  वही   उसकी  क्रिया  में  प्रकट  होता  है  l
पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  विचार  क्रांति   की  बात  कही  है  ,  जब  हमारा  चिंतन ,  हमारे  विचार  श्रेष्ठ  होंगे  ,  परिष्कृत  होंगे  ,    तभी  हमारे  द्वारा  किए   जाने  वाले  कार्य  श्रेष्ठ  होंगे  और  श्रेष्ठ  परिणाम  देंगे   l