' प्रचुर मात्रा में सरकारी सहायता के बावजूद दलित एवं पिछड़े समाज में कोई विशेष परिवर्तन क्यों नहीं नजर आता है ? ' ----- यह पूछे जाने पर पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने कहा ---- " किसी भी पिछड़े समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए केवल सरकारी सहायताएं ही पर्याप्त नहीं हैं l मुख्य बात तो यह है कि उस समाज के लोगों की जीवनशैली में परिवर्तन करना आवश्यक है , और जीवनशैली में परिवर्तन करना आसान कार्य नहीं है l यह अत्यंत धैर्यपूर्वक और दीर्घकाल तक की जाने वाली प्रक्रिया है l आप गहराई से सोचें तो पाएंगे कि इंसान या समाज की वर्तमान दुरवस्था का कारण उनके अतीत के कर्मों में सन्निहित है l शुभ एवं सत्कर्मों के माध्यम से इस वर्ग की स्थिति में वांछित एवं आशातीत परिवर्तन लाया जा सकता है l ' उन्होंने आगे कहा ---- ' समाज की महिलाओं एवं पुरुषों को केवल सहायता या पैसा देना पर्याप्त नहीं है l उस सहायता से उनकी क्षमता के आधार पर स्वावलम्बन का कार्य प्रारम्भ करना चाहिए , उन्हें शुभ कर्मों से जोड़ना चाहिए और सेवा कार्यों में संलग्न करना चाहिए l इससे उनकी जीवनशैली में परिवर्तन आएगा , नकारात्मक विचार बदलेंगे l शिक्षा एवं विभिन्न प्रकार के सेवा एवं स्वावलम्बन कार्य करने से उनमे आत्मविश्वास जागेगा l जीवनशैली एवं विचारों में परिवर्तन किए बगैर पिछड़े , दलित या ऐसे किसी समाज का उत्थान संभव नहीं है l
3 October 2020
2 October 2020
WISDOM ----
महापुरुषों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम उनके विचारों को अपने जीवन में उतारें , उनके आदर्शों पर , उनके बताए रास्ते पर चलें l महापुरुष कोरे विचार नहीं देते , अपने आचरण से हमें शिक्षा देते हैं l उनके विचारों में , सिद्धांतों में उनकी साधना का , उनकी तपस्या का बल होता है l ईश्वर ने हमें चयन की स्वतंत्रता दी है --- ---
1 October 2020
WISDOM ------
इस संसार में भाँति - भाँति के लोग हैं l जब लोगों पर दुर्बुद्धि हावी हो जाती है तो उनके कार्य अपने - अपने विचार और संस्कारों के अनुसार भिन्न - भिन्न होते हैं जैसे --- रावण ने अपनी लंका सोने की बनाई , और लंका से बहुत दूर वन से सीताजी का अपहरण किया l सिकंदर ने विश्व विजय का संकल्प लिया , अपने राज्य को नहीं लूटा , दूसरे राज्यों में तबाही मचाई l इस अभियान में वह भारत भी आया l यहाँ के राजाओं ने दिल खोलकर उसकी मदद की l दुर्बुद्धि की कहानी बहुत लम्बी है मीरजाफर , जयचंद इन्होने अपने ही देश को लुटवा दिया l नादिरशाह भारत आया , यहाँ खूब लूटा , कत्ले आम किया , यहाँ का धन वैभव वह अपने देश ले गया l दुर्बुद्धि का असर ऐसा होता है कि कुछ लोग दूसरों का बगीचा लूटते हैं , कुछ अपना ही बगीचा लूटते हैं l अपने अहंकार , अपनी पशुता को पोषित करने के लिए जाति , धर्म , ऊंच - नीच के आधार पर कमजोर पर , नारी पर अत्याचार कर के , उन्ही को मार कर रौब से रहते हैं l आज सबसे बड़ी जरुरत सद्बुद्धि की है l जियो और जीने दो l
30 September 2020
WISDOM ----
नारी पर अत्याचार की गाथा कोई नई नहीं है , विभिन्न देश , विभिन्न समाज अपने अपने तरीके से नारी पर अत्याचार करते हैं l लेकिन हम जब संसार में शांति की बात करते हैं , अहिंसा की बात करते हैं , स्वयं को शांति प्रिय कहकर अन्य देशों पर आक्रमण नहीं करते , ऐसे में नारी पर अत्याचार की अनेक घटनाएं जो मनुष्य को पशु से भी निम्नतर स्तर पर ले जाती हैं , समाज के लिए कलंक हैं l नारी को अत्याचार सहते - सहते एक युग बीत गया l जिन जातियों ने स्वयं को श्रेष्ठ कहा उन्होंने ही सती - प्रथा के नाम पर नारी को जिन्दा जलाया l कन्या - वध के नाम पर बच्ची के पैदा होते ही उसे मार डाला l फिर बालिका भ्रूण हत्या l दहेज़ - प्रथा के नाम पर नारी पर अत्याचार , पारिवारिक हिंसा - उत्पीड़न ! पहले नारी पर अत्याचार एक सामाजिक बुराई थी लेकिन अब उसमे राजनीति भी जुड़ गई l बड़े - बड़े अपराधी अपनी अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए छुटभैया लोगों की मदद लेते हैं , इसके बदले में उन्हें पैसा भी देते हैं और समाज में अपराध करने की खुली छूट l इसलिए पकड़े जाने पर भी अपराधी बच जाते हैं l इस तरह की घटनाएं कभी - कभी समाज में अपने वर्चस्व को स्थापित करने के लिए , लोगों में आतंक पैदा करने के लिए प्रायोजित भी होती हैं l समस्याएं जब बढ़कर एक वृक्ष की तरह विशाल हो गई हों , तब उसे समाप्त करने के लिए जड़ को ही काटना पड़ता है l इसके लिए समाज का संगठित और जागरूक होना जरुरी है l
WISDOM -----
गुरु नानक प्रव्रज्या पर थे l मुखमण्डल का तेज छिपाने के लिए उनने चेहरा ढँक लिया एवं कुछ फटे - पुराने कपड़े पहन लिए l सिपाहियों ने उन्हें बेगार में पकड़कर सेनापति के सम्मुख प्रस्तुत किया l वह उनका तेज देखकर उन्हें बाबर के पास ले गया l बाबर समझ गया कि यह खुदापरस्त फकीर है l कहीं कोई बददुआ न दे दे , यह सोचकर वह उठा और आदरपूर्वक उन्हें गद्दी दी l शाही सम्मान की रीति से उन्हें शराब परोसी गई l नानक देव बोले --- " बाबर ! हमने वह आला शराब पी है , जिसका नशा जन्म - जन्मांतर तक नहीं उतरता l " बाबर ने शर्मिंदा होकर हीरे - जवाहरात जड़े कपड़े मंगवाए l गुरु नानक ने कहा ---' इन्हे तू गरीबों में बंटवा दे , जिनका धन चूस - चूसकर तू सम्राट बना है l मेरे पास तो भगवान के नाम का धन है l सारी दौलत मिटटी है l " बाबर ने कहा --- ' मैं आपकी सेवा कैसे करूँ ? ' इस पर नानक देव ने कहा --- " तेरे यहाँ जितने कैदी हैं , उन्हें छोड़ दे और लूटपाट बंद करवा दे --- यही हमारी सबसे बड़ी सेवा है l ' बाबर ने तुरंत आदेश दिया l
29 September 2020
WISDOM -------
इनसान बनना बहुत कठिन है , लेकिन पशु बनना , पाशविक कार्य करना बहुत सरल है l और ऐसा कर के मनुष्य अपनी ही जाति, अपनी ही संस्कृति और अपने ही देश के गौरव को कलंकित करता है l
लंदन प्रवास में एक सभा के बीच जब स्वामी विवेकानंद भारत के गौरव का वर्णन कर रहे थे , तब एक आलोचक ने उठकर पूछ लिया ---- " भारत के हिन्दुओं ने क्या किया है ? वे आज तक किसी जाति पर विजय प्राप्त नहीं कर सके l " तब स्वामीजी ने कहा --- " नहीं कर सके नहीं , कहिए कि उन्होंने की नहीं l यही हिन्दू जाति का गौरव है कि उसने कभी दूसरी जाति के रक्त से पृथ्वी को रंजित नहीं किया l वे दूसरों के देश पर अधिकार क्यों करेंगे l भारत को भगवान ने दाता के महिमामय आसन पर प्रतिष्ठित किया l वह देगा की छीनेगा ? भारतवासी आप लोगों की तरह रक्तपिपासु दस्यु नहीं थे l इसलिए मैं अपने पूर्वजों के गौरव से स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूँ l " ऐसा जवाब योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद ही दे सकते थे l
WISDOM ----- प्राणी का आंतरिक स्तर उठाए बिना उसे उत्तम स्थिति में नहीं पहुँचाया जा सकता ----- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
भौतिक प्रगति के साथ चेतना का स्तर भी उच्च हो l एक कथा है --- देवर्षि नारद सबका सुख - दुःख जानने के लिए संसार में भ्रमण करते हैं l उनकी इच्छा हुई कि पृथ्वी पर जो प्राणी घिनौना , नारकीय जीवन जीवन जी रहे हैं , उन्हें स्वर्ग पहुंचा दें l इस क्रम में उन्होंने सबसे पहले कीचड़ में लोटते , गंदगी चाटते सुअर को देखा , उन्हें बड़ी दया आई l नारद जी ने उससे कहा --- ' ऐसा जीवन किस काम का ! चलो हम तुम्हे स्वर्ग पहुंचा देते हैं l ' नारद जी की बात सुनकर वाराह तैयार हो गया l रास्ते में उसने पूछ ही लिया ---- " वहां खाने , भोगने और लोटने के क्या साधन हैं l " नारद जी वहां के सब सुख बताने लगे , वह बीच में ही पूछ बैठा --- " महाराज ! वहां खाने के लिए गंदगी , लोटने के लिए कीचड़ और साथ में क्रीड़ा - कल्लोल हेतु वाराह कुल वहां है या नहीं l ' महर्षि ने कहा ---- " मूर्ख ! इन चीजों की वहां क्या जरुरत है l वहां तो देवताओं के अनुरूप स्वर्ग का वातावरण है l " वाराह ने आगे बढ़ने से मना कर दिया और कहा -- 'जहाँ ये सब नहीं , वहां जाकर मैं क्या करूँगा l " देवर्षि ने अपना सिर पीट लिया , वे समझ गए कि जब तक आंतरिक स्तर उच्च नहीं है , प्राणी को उच्च स्थिति में पहुँचाना व्यर्थ है l