संकल्पवान व्यक्ति एक दीपक की तरह छोटा ही क्यों न हो , देर - सवेर भगवान किसी न किसी रूप में उसे सहारा देने पहुँच ही जाते हैं l ------- यज्ञ होना था l उसके लिए समिधाओं का ढेर लगा था l ऋषि ने डीप प्रज्वलन का क्रम किया l दीपक को टिमटिमाता देख समिधाओं का ढेर हँसा और बोला ---- " ये छोटा सा दीपक भला हमारा क्या बिगाड़ेगा ? " अग्नि स्थापना का क्रम आया तो दीपक से निकली छोटी सी लौ ने यज्ञ-अग्नि की स्थापना कर दी l आहुतियों के साथ एक - एक कर सभी समिधाएं होम हो गईं l सारी घटना को अंतर्दृष्टि से देखते हुए ऋषि अपने शिष्यों से बोले ---- " प्रखरता चाहे एक लौ के बराबर ही क्यों न हो , वो अकेले तमस के साम्राज्य से टकराने में सक्षम है l हमें भी अपनी तपस्या का प्रकाश इतना प्रबल और उज्ज्वल करना चाहिए कि हम गहन अंधकार के बीच भी अपना मार्ग बना सकें l
15 January 2021
14 January 2021
WISDOM -----
सबसे समर्थ कालपुरुष है l समर्थ होते हुए भी भगवान राम ने वनवास का कष्ट सहा l श्रीकृष्ण के यादव कुल का नाश हुआ , नल को राज्य से हटना पड़ा , काल ने किसी को नहीं छोड़ा , भगवान कृष्ण स्वयं दुर्योधन को समझाने गए , वो कुछ समझने को तैयार ही नहीं था , आखिर महाभारत हुआ l ' काल बड़ा बलवान है ' ---- यदि कोई इस सत्य को समझ जाये तो उसमें क्रांतिकारी परिवर्तन आ जाता है l --------- बेताल अवंतिका ( उज्जैन ) के महामात्य थे , बहुत बड़े तांत्रिक थे l उनका जीवन कभी तांत्रिक साधनाओं में बीता , कभी रणभूमि में l सम्राट विक्रमादित्य उनके बिना स्वयं को असहाय महसूस करते थे l लेकिन आज वे स्वयं में लीन थे , अपने आप को विवश महसूस करते हुए सोच रहे थे कि इतने षड्यंत्र - कुचक्र आखिर किसके लिए ? दूसरों को पराजित करने वाला आज महसूस कर रहा था कि सबसे सशक्त कालपुरुष है l मृत्यु से आज तक कोई नहीं बच पाया है l उनके विवेक - चक्षु खुल गए l सांसारिक मोह टूट गया , दंभ मर गया , जीवन भर के पाप आँखों के समक्ष आ रहे थे , मस्तिष्क में मानों हथौड़ों की चोट लग रही थी l उन्होंने राजसी परिधान उतारे , साधारण वेशभूषा पहनी l हाथ में लाठी और उत्तरीय कंधे पर डालकर निकल गए l क्षिप्रा नदी के तट पर खड़े होकर उन्होंने अवंतिका नगरी , भगवान महाकाल को प्रणाम किया और चल पड़े l अभी बीस कदम ही चले थे कि एक ओर से महाकवि कालिदास आ रहे थे l वे पूछ बैठे ---- " बेताल भट्ट ! आज किस कूटनीति के तहत वेश बदलकर जा रहे हैं ? " बेताल बोले ---- " अब मैं अंतिम और निर्णायक युद्ध अपने आप से करने जा रहा हूँ l " कालिदास ने फिर प्रश्न किया --- " किन्तु इस अवंतिका का क्या होगा ? " बेताल बोले ----- " सब व्यर्थ का मोह है l मनुष्य अहंकारवश सोचता है और भावी पीढ़ी के मार्ग में बाधक बनता है l " बेताल आगे बढ़ गए और देश में खबर फ़ैल गई कि महातांत्रिक , राज्य के महामात्य ने वानप्रस्थ लेकर स्वयं को समाजसेवा हेतु समर्पित कर दिया है l
13 January 2021
WISDOM -----
विवेक शक्ति मूर्च्छित हो जाने के कारण ही लोग धर्म के नाम पर आपस में झगड़ते हैं l सच्चे भक्त हों तो भगवान स्वयं उन्हें समझाने आते हैं l एक कथा है ----- एक बार हनुमान जी की भेंट अर्जुन से हुई l हनुमान जी भगवान राम के भक्त थे और अर्जुन श्रीकृष्ण के l हनुमान जी कहने लगे -- मेरे भगवान राम बली हैं , अर्जुन कहते श्रीकृष्ण बली है l दोनों भक्तों में बहस छिड़ गई , बहस का अंत न होते देख परीक्षा करने का निश्चय हुआ और शर्त तय हुई कि जो हारे , वह आत्महत्या कर ले l अर्जुन ने श्रीकृष्ण का ध्यान किया और तुरंत समुद्र में एक विशाल पुल बाँध दिया और हनुमान जी से बोले --- " अब यदि तुम्हारे राम बली हैं तो इस पुल को तोड़ दो l यदि न तोड़ सके तो श्रीकृष्ण की तुलना में श्रीराम का पराक्रम कमजोर माना जायेगा l हनुमान जी जोश में भर गए l उन्होंने शरीर का शतयोजन विस्तार किया और पुल पर कूद पड़े l भक्तों के इस झगड़े का पता भगवान को हुआ तो वे बहुत चिंतित हुए l यदि हनुमान जी की रक्षा करते हैं तो अर्जुन का अंत होता है l यदि अर्जुन जीतते हैं तो हनुमान जी का अंत निश्चित है l सोच -विचारकर भगवान ने स्वयं ही अपना शरीर पुल के नीचे लगा दिया l हनुमान जी जैसे ही पुल पर कूदे , उनके भार से भगवान का शरीर फट गया और खून बहने लगा l हनुमान जी ने भगवान राम को पहचाना और कूद कर उनके पास पहुंचे और दुःख करने लगे l अर्जुन ने कृष्ण रूपी भगवान को पहचाना , वे भी विलाप करने लगे l भगवान ने समझाया ---- " अच्छा होता , आप लोग विवेक से काम लेते l मैं एक हूँ , मेरे ही अनेक रूप संसार में फैले हैं l इसलिए किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए l कोई विवाद आए तो उसे विवेक से हल कर लेना चाहिए l " हम सच्चे भक्त बने l यदि हृदय में सच्चाई है , विवेक है तो कभी झगड़ा होगा ही नहीं l
12 January 2021
WISDOM ----- विद्वानों की ईर्ष्या अन्यों की अपेक्षा अधिक घातक और व्यापक परिणाम उत्पन्न करती है
पुराणों में एक कथा है ---- एक बार वैशाली क्षेत्र में दुष्ट - दुराचारियों का उत्पात - आतंक इतना बढ़ा कि उस प्रदेश में भले आदमियों का रहना कठिन हो गया l लोग घर छोड़कर अन्यत्र सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करने लगे l इन भागने वालों में ब्राह्मण समुदाय का भी बड़ा वर्ग था l वैशाली के ब्राह्मणों ने महर्षि गौतम के आश्रम में चलकर रहना उचित समझा l महर्षि गौतम के तप का प्रभाव था कि वहां गाय और सिंह एक ही घाट पर पानी पीते थे l ब्राह्मणों को वहां आश्रय मिल गया , वे सुखपूर्वक रहने लगे l एक दिन देवर्षि नारद वहां से निकले , कुछ समय महर्षि गौतम के आश्रम में रुके l इस समुदाय के संरक्षण की नई व्यवस्था देखकर वे बहुत प्रसन्न हुए और उदारता की भूरि -भूरि प्रशंसा करने लगे l ब्राह्मण समुदाय से महर्षि गौतम की यह प्रशंसा बर्दाश्त नहीं हुई , ईर्ष्या उन्हें बेतरह सताने लगी l वे सोचने लगे कि हमने ही उन्हें यश दिलाया , हमारे ही आगमन से उन्होंने इतना श्रेय कमाया l अब हम अपना पुरुषार्थ दिखाकर उन्हें नीचा भी दिखाएंगे l षड्यंत्र रचा गया l रातों - रात मृत गाय आश्रम के आंगन में डाली गई l कुहराम मच गया l यह गौतम ने मारी है , हत्यारा है , पापी है , इसक्का भंडाफोड़ सर्वत्र करेंगे l महर्षि गौतम योग साधना से उठे और यह कुतूहल देखकर अवाक रह गए l आगंतुकों को विदा करने का निश्चय हुआ l ऋषि बोले ---- ' मूर्द्धन्य जनों की ईर्ष्या अन्यों की अपेक्षा अधिक घातक और व्यापक परिणाम उत्पन्न करती है l आप लोग जहाँ रहते थे , वहां चले जाएँ l अपनी ईर्ष्या से जिस क्षेत्र को कलुषित किया था , उसे स्नेह - सौजन्य के सहारे सुधारने का नए सिरे से प्रयत्न करें l
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी कहते हैं ---- ' मनोबल ही जीवन है l वही सफलता और प्रसन्नता का उद्गम है l मन की दुर्बलता ही रोग , दुःख और मौत बनकर आगे आती है l ' एक समय था जब संसार के अधिकांश देश पराधीन थे l अपनी आजादी के लिए दृढ़ संकल्प लिया और संगठित प्रयास किया , अपने मनोबल को जगाया तो सब को पराधीनता से मुक्ति मिली , गुलामी की जंजीरें टूटी और आजादी मिली l आत्मबल से गुलामी से मुक्ति तो संभव है लेकिन यदि मन: स्थिति कमजोर है , आत्मबल नहीं है , परावलंबी हैं तो शक्तिशाली तत्व और असुरता उन्हें ' कठपुतली ' बना देती है l ऐसे में स्वयं निर्णय लेने की शक्ति नहीं होती l यदि आत्मबल नहीं है , अपनी कोई सोच ही नहीं है तो डोरी जिसके हाथ में होगी , वैसा ही दृश्य दिखाई देगा l
11 January 2021
WISDOM ----
जिसके पास जितना अधिक है वह उतना ही भयभीत है l पुराणों में ऐसी कई कहानियां हैं , जिनमें इंद्र को सबसे ज्यादा भयभीत बताया गया है l किसी ने थोड़ी भी तपस्या की , उनका सिंहासन डोलने लगता है l विश्वामित्र की तपस्या को भंग करने के लिए उन्होंने अप्सरा मेनका को भेज दिया l कोई तनिक - सा भी ऊपर उठे , उसे गिराने की हर संभव कोशिश l यही स्थिति आज संसार में देखने को मिलती है l प्रसिद्ध विचारक लाओत्से ने कहा है --- अगर मजे से रहना हो तो आखिरी में रहना l जो अंतिम में खड़ा है , उसे धक्का देने कोई नहीं आएगा l यदि प्रथम होने की कोशिश होगी तो फिर अनेकों आ जायेंगे , पीछे खींचने के लिए l
WISDOM -----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी कहते हैं ---- " खुशियाँ यदि तलाशनी है तो दूसरों को खुशी देने में तलाशिए , अपनेपन में तलाशिए l जो खुशियों को दौलत कमाने या अपने अहं की संतुष्टि में तलाशते हैं , उनकी तलाश हमेशा अधूरी व अपूर्ण होती है l वे बहुत कुछ पाकर भी खाली हाथ रह जाते हैं l " इस समय में यदि कोई काम सबसे कठिन है तो वह है ---- किसी को ख़ुशी देना l आज दुर्बुद्धि का ऐसा तांडव है कि लोग दूसरों की खुशियाँ छीनने को उतारू हैं l कहते हैं जब जागो तब सवेरा l प्रसिद्ध वैज्ञानिक एल्फ्रेड नोबेल के जीवन का वह किस्सा सुप्रसिद्ध है , जब उनकी मृत्यु का झूठा समाचार फैलने पर फ़्रांस के एक समाचार पत्र ने उनका शोक संदेश ' मौत के सौदागर की मृत्यु ' के नाम से प्रकाशित किया था क्योंकि उन्होंने डायनामाइट की खोज की थी l जब एल्फ्रेड नोबेल को यह पता चला तो उन्होंने अपने शेष जीवन और अपनी सारी संपदा को जनहित में लगाने का निर्णय लिया , ताकि मृत्यु के बाद उन्हें श्रेष्ठ कर्मों के लिए याद किया जाए l आज सारे विश्व में उनका सम्मान है और सारा संसार उन्हें प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार के लिए जानता है , मात्र डायनामाइट की खोज के लिए नहीं l श्री लिखते हैं ---- ' मनुष्य के जीवन की श्रेष्ठता इसी में है कि उससे जितना भी बन पड़े , वह अपनी शक्ति , सामर्थ्य , संपदा को समाज कल्याण में , जनहित में और उच्च उद्देश्यों के लिए लगाए , जिससे अपने जीवन का पथ प्रशस्त करने के साथ, वह औरों के जीवन लिए भी प्रेरणा बन सके l