18 February 2021

WISDOM ------

   एक  बार  अपने  जन्म  दिवस   12  जनवरी  को  गंगा  तट   पर  टहलते  हुए   स्वामी  विवेकानंद  ने  अपने  गुरु भाइयों  से  कहा  था  ---- " निद्रित  भारत  अब  जागने  लगा  है  ---- जड़ता  धीरे - धीरे  दूर  हो  रही  है  ,   जो अंधे   हैं  वे  देख  नहीं  सकते  ,  जो  विकृत  बुद्धि  हैं  ,  वे  ही  समझ  नहीं  सकते   कि   हमारी  मातृभूमि  अब  जाग  रही  है     ---- अब  उसे  कोई  रोक   नहीं सकता  l   --- एक  नवीन   भारत  निकल  पड़ेगा  -- हल  पकड़कर ,  किसानों  की  कुटी  भेदकर  ,  मछुए ,  माली ,  मोची  ,  मेहतरों  की  कुटीरों  से    l   निकल  पड़ेगा  बनियों  की  दुकानों  से  ,  भुजवा  के  भाड़   के पास  से  ,  कारखाने  से  ,  हाट  से  , बाजार  से   l   अपना  नवीन   भारत  निकल  पड़ेगा   --- झाड़ियों , जंगलों , पहाड़ों  , पर्वतों  से  l   इन  लोगों  ने  हजारों  वर्षों  तक  नीरव  अत्याचार  सहन  किया  है  ,  उससे  पाई  है  अपूर्व  सहनशीलता   l   सनातन  दुःख  उठाया  है  ,  जिससे  पाई  है  अटल  जीवनी  शक्ति   l   यही  लोग  अपने  नवीन  भारत  के  निर्माता  होंगे   l  "

17 February 2021

WISDOM ------

  जलियांवाला  बाग   के  बाद  गुरुदेव  रवीन्द्रनाथ  टैगोर  ने  जगह - जगह  यात्राएं   की  l   एक  यात्रा  तो   कलकत्ता  से   पेशावर   तक  बैलगाड़ी  से  की  l   जलियांवाला   कांड    से  गुरुदेव  बहुत  आहत   हुए   और  उन्होंने  ' सर '  की  उपाधि  का  त्याग  करते  हुए   तत्कालीन   वायसराय  चेम्स  फोर्ड   को  पत्र  लिखा  l    उसमे  सर  या  नाइट   की  उपाधि  को  सम्मान  का  पट्टा   बताया  था  l  उस  पत्र  का  एक  अंश   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  अपनी  नोट   बुक  में  लिख  लिया  था  l   वह  अंश  इस  प्रकार  है ------ " हमारी  आँखें  खुल  गई  हैं   कि   हमारी  अवस्था  कैसी  असहाय  है  l   भारतीय  जनता  को  इस  समय  जो  दंड  दिया  गया  ,  उसकी  मिसाल  किसी  भी   सभ्य देश  और  सभ्य  सरकार  के  इतिहास  में  नहीं  मिलती   l  विडंबना  है   कि   इस  कृत्य  के  लिए  लज्जा   और  ग्लानि  अनुभव  करने  के  स्थान  पर   आप  अपने  आपको  शाबाशी  दे  रहे  हैं   कि   आपने   भारतीयों   को  अच्छा  सबक  सिखाया  l  "       " अधिकांश  एंग्लोइंडियन   अख़बारों  ने  इस  निर्दयता  की  प्रशंसा  की  है  ----- सरकारी  अधिकारियों   ने   उन  पत्रों  पर  तो  कोई  प्रतिबंध   नहीं  लगाया  ,   उलटे  भारतीय  समाज  से   सहानुभूति  रखने  वाले   पत्रों  का  ही  गला    दबाया   l   इस  अवसर  पर  मैं   कम   से  कम  इतना  तो  कर  ही  सकता  हूँ   कि   जो  भी  दुष्परिणाम  हों ,  उन्हें  भोगने  के  लिए  तैयार  रहकर    उन  करोड़ों  देशवासियों  की  ओर   से  विरोध  व्यक्त  करूँ  ,  जो  आतंक  और   भय   के  कारण   चुपचाप  सरकारी  दमन  सहन  कर  रहे  हैं   l   सरकार   द्वारा  दिए  गए  सम्मान  के  पट्टे   राष्ट्रिय  अपमान  के  साथ  और  मेल  नहीं  खा   सकते ,  वे  हमारी  निर्लज्जता  को  और   भी  चमका  देते  हैं  l   अत:  मैं  विवश  होकर   आदर  सहित   अनुरोध  कर  रहा  हूँ   की  आज  मुझे   सम्राट  की  दी  हुई   नाइट  की  उपाधि  से  मुक्त  कर  दें   l "

WISDOM ------

   प्रसंग  रूस  के  एकछत्र  नायक  रहे  ब्रेझनेव  से  संबंधित   है   l   वे  जब  भारत  आए   तो  राजधानी  में  विभिन्न  विशिष्ट  लोगों  से  मुलाकात  की  l   रामकथा  के  प्रसिद्ध   विद्वान   और  वाचक  पंडित  कपींद्र   जी  भी  उनसे  मिले   l   उन्होंने  ब्रेझनेव  को  रामचरितमानस  भेंट  की   और  कहा  कि    इस ग्रन्थ  में    जहाँ  राम  है  वहां  ' साम्यवाद  '  रख  देना  l   सीता  के  स्थान  पर   ' शक्ति '    और  असुर  के  स्थान  पर  ' पूंजीपति  '  फिर  आपको  इस  ग्रन्थ  की  महत्ता  का  पता  चलेगा   l 

16 February 2021

WISDOM -----

  महाभारत  में  ' विदुर  नीति  '  में  एक  श्लोक  है  जिसका  भावार्थ  है ---- महात्मा  विदुर  धृतराष्ट्र   से  कहते   हैं --- " हे  राजन  !  इस  संसार  में  दूसरों  को   निरंतर  प्रसन्न  करने  के  लिए   प्रिय  बोलने  वाले   प्रशंसक  लोग  बहुत  हैं  ,  परन्तु  सुनने  में  अप्रिय  लगे   और  वह  कल्याण  करने  वाला  वचन  हो  ,  उसका  कहने  और  सुनने  वाला  पुरुष  दुर्लभ  है   l  "   महर्षि  दयानन्द   ऐसे  विरले  मनुष्य  थे  ,  वे  राजाओं -महाराजाओं  के  सामने , बड़े  अंग्रेज   अफसरों  की  उपस्थिति   में  निर्भीक  होकर   सबके  हित   की  सत्य  बात  कहा  करते  थे   l   स्वामीजी   मूर्ति  पूजा  के  विरोधी  थे  ,  वे  कहते  थे  ---- मेरा  काम   लोगों  के  मन - मंदिरों  से  मूर्तियां  निकलवाना  है  ,  ईंट  पत्थर  के  मंदिरों  को   तोड़ना  नहीं    l   महर्षि   दयानन्द  मानते  थे   कि   हमारा  नाम  आर्य  है  ,  हिन्दू  नहीं  l   आर्य  का  अर्थ  है  श्रेष्ठ  पुरुष  l  विदेशियों  ने  हमें  हिन्दू  नाम  दिया   l   उनके  द्वारा  रचित  ' सत्यार्थ  प्रकाश  '  सोई   हुई  जाति   के   स्वाभिमान  को  जगाने  वाला  अद्वितीय  ग्रन्थ  है   l 

WISDOM ------ कर्तव्य ही धर्म है

   एक  बार  महाराजा  पुरंजय  ने  राजसूय  यज्ञ  किया  l   इसमें  उन्होंने   दूर - दूर  से  ऋषि - मुनियों  को   आमंत्रित  किया  l   प्रजा  की  सुख - संमृद्धि  के  उद्देश्य  से   आयोजित  यज्ञ  में   विधि - विधान   से  आहुतियाँ  दी  जाने  लगीं   l  यज्ञ  की  पूर्णाहुति   का  दिन  आया  l   महाराज , महारानी , राजकुमार  सभी  यज्ञ मंडप  में  विराजमान  थे   l   वेदमंत्रों  की  ध्वनि  से   वातावरण  गुंजित  हो  रहा  था   l   अचानक  एक  किसान  के  रोने  की  आवाज   सुनाई  दी  l   वह  रोते   हुए  कह  रहा  था  --- " दस्युओं  ने  मेरी  सम्पति  लूट  ली  l  मेरी  गाय  छीनकर  ले  गए  l   दस्यु   अभी  कुछ  ही  दूर  गए  होंगे  l   महाराज  !   तुरंत  उनको  पकड़कर  मेरी  सम्पति  दिलाएँ  l  "  पंडितों  ने  कहा  ---- " इस  व्यक्ति  को  दूर  ले  जाओ  l   यदि  राजा  इस  पर  दया  कर  के  बिना  पूर्णाहुति   के  उठ  गए   तो  देवता  कुपित  हो  जाएंगे  l  "  राजा  दयालु  था  ,  किसान  का  रुदन  सुनकर  उसका  हृदय  करुणा  से  भर  गया   l  राजा  ने  कहा ---- " मेरा  पहला  कर्तव्य   अपनी  प्रजा  का  संकट   दूर  करना  है   l   मैंने  अनेक  यज्ञ  पूर्ण  किए   हैं   l   आज  मैं   पहली  बार   यज्ञ  पूर्ण  किए   बिना   अपने  राज्य  के  किसान   का  संकट  दूर  करने  जा  रहा  हूँ   l   "  राजा  के  ऐसा  कहने  पर   साक्षात्  यज्ञ  भगवान  प्रकट  हुए   और  बोले  --- " राजन  !  तुम्हें  कहीं  जाने  की  आवश्यकता  नहीं  l   यह  तुम्हारी  परीक्षा  थी  कि   तुम  अपनी  प्रजा  के  प्रति  कर्तव्य  का  पालन  करते  हो  या  नहीं  l   अब  तुम्हें  सौ   राजसूय  यज्ञों  का  फल  मिलेगा   l  "

15 February 2021

WISDOM -----

 कोई  भी  परिस्थिति  जिसमे  हम  वर्षों  तक  रहें ,  फिर  हमें  उसकी  आदत  बन  जाती  है   और  उसी  के  अनुरूप  व्यवहार  हो  जाता  है  l   युगों  तक  हम   गुलाम  रहे  l   आजादी  तो  मिल  गई  ,  हम  पर  राज  करने  वाले  तो  चले  गए  लेकिन  उन   परिस्थितियों  में  रहने  की  जो  आदत  बन  गई  थी ,  वह  नहीं  गई  l   पहले  हम   अपनी  कमजोरियों  के  कारण  ,  राजाओं  की  विलासिता  और   आपसी  फूट   के  कारण   गुलामी  का  जीवन  जीने  को  विवश  थे   लेकिन  आज  व्यक्ति  अपने  स्वार्थ ,   लोभ   और  लालच  के  कारण    अपने से   धनी    और  शक्तिशाली   व्यक्ति  की  गुलामी  करता  है   l   सबसे  ज्यादा  जरुरी  है  स्वाभिमान  होना   l                          मनुष्य  की  यह  कमजोरी  है  कि   वह  बुरी  आदत  जल्दी  सीखता  है ,  अच्छाई  ग्रहण  नहीं  करता  l   

WISDOM -------

   एक  बोध  कथा  है  ---- एक  बार  भगवान  बुद्ध    अपने  शिष्यों  के  साथ  एक  नगर   में पहुंचे  l   उस  नगर  के  लोग   भिक्षु - भिक्षुणियों  को  बहुत  प्रताड़ित  करते, गलियां  देते , व्यंग्य  करते  दूषित  लांछन  लगाते  l  इन  सबसे  परेशान     होकर   आनंद  ने  भगवान   बुद्ध  से  कहा  --- भगवन  !  किसी  दूसरे  नगर  चलें  l '  हँसते  हुए  भगवान  बोले ---- ' यदि  वहां  के  लोगों  ने  भी  प्रताड़ित  किया   तो  कहाँ  जाएंगे  ? ' आनंद  बोले -- ' प्रभु  !  संसार  में  नगरों  की  कमी  नहीं  है  l  '  तब  भगवान  बुद्ध  बोले  ---- " आनंद  !  तुम  बहुत  भोले  हो  l  जो  यहाँ  हो  रहा  है  वह  सभी  जगह  होगा  l   सभी  जगह  अँधेरा  हमसे  नाराज  होगा   l  इनसानियत   को  नष्ट  करने  वाली  बीमारी  सभी  जगह  हमसे  रुष्ट  होगीं  l   धर्म  के  नेतागण  हर  जगह  एक  जैसे  हैं   l   जब  भी  उनके  स्वार्थ   पर चोट  पड़ती  है   तो  वे  यही  करते  हैं   l   हमारी  रीति   है    अँधेरे  को  मिटाना   और  उनकी  रीति   है  अँधेरे  में  जीना   l   हम  अँधेरे  पर  चोट  करने  से  नहीं  चूक  सकते    और  वे  प्रतिशोध   लेने  से  नहीं  चूक  सकते   l   उनके  पास  यही  एकमात्र  उपाय  है  l   बड़ी  गहरी  तकलीफ  में  हैं   वे   बेचारे   l   वे  दया  के  पात्र  हैं   l   तू  उन  पर  नाराज  होने  के  बजाय  उनकी  पीड़ा  समझ  l '