एक बार अपने जन्म दिवस 12 जनवरी को गंगा तट पर टहलते हुए स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु भाइयों से कहा था ---- " निद्रित भारत अब जागने लगा है ---- जड़ता धीरे - धीरे दूर हो रही है , जो अंधे हैं वे देख नहीं सकते , जो विकृत बुद्धि हैं , वे ही समझ नहीं सकते कि हमारी मातृभूमि अब जाग रही है ---- अब उसे कोई रोक नहीं सकता l --- एक नवीन भारत निकल पड़ेगा -- हल पकड़कर , किसानों की कुटी भेदकर , मछुए , माली , मोची , मेहतरों की कुटीरों से l निकल पड़ेगा बनियों की दुकानों से , भुजवा के भाड़ के पास से , कारखाने से , हाट से , बाजार से l अपना नवीन भारत निकल पड़ेगा --- झाड़ियों , जंगलों , पहाड़ों , पर्वतों से l इन लोगों ने हजारों वर्षों तक नीरव अत्याचार सहन किया है , उससे पाई है अपूर्व सहनशीलता l सनातन दुःख उठाया है , जिससे पाई है अटल जीवनी शक्ति l यही लोग अपने नवीन भारत के निर्माता होंगे l "
18 February 2021
17 February 2021
WISDOM ------
जलियांवाला बाग के बाद गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने जगह - जगह यात्राएं की l एक यात्रा तो कलकत्ता से पेशावर तक बैलगाड़ी से की l जलियांवाला कांड से गुरुदेव बहुत आहत हुए और उन्होंने ' सर ' की उपाधि का त्याग करते हुए तत्कालीन वायसराय चेम्स फोर्ड को पत्र लिखा l उसमे सर या नाइट की उपाधि को सम्मान का पट्टा बताया था l उस पत्र का एक अंश पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अपनी नोट बुक में लिख लिया था l वह अंश इस प्रकार है ------ " हमारी आँखें खुल गई हैं कि हमारी अवस्था कैसी असहाय है l भारतीय जनता को इस समय जो दंड दिया गया , उसकी मिसाल किसी भी सभ्य देश और सभ्य सरकार के इतिहास में नहीं मिलती l विडंबना है कि इस कृत्य के लिए लज्जा और ग्लानि अनुभव करने के स्थान पर आप अपने आपको शाबाशी दे रहे हैं कि आपने भारतीयों को अच्छा सबक सिखाया l " " अधिकांश एंग्लोइंडियन अख़बारों ने इस निर्दयता की प्रशंसा की है ----- सरकारी अधिकारियों ने उन पत्रों पर तो कोई प्रतिबंध नहीं लगाया , उलटे भारतीय समाज से सहानुभूति रखने वाले पत्रों का ही गला दबाया l इस अवसर पर मैं कम से कम इतना तो कर ही सकता हूँ कि जो भी दुष्परिणाम हों , उन्हें भोगने के लिए तैयार रहकर उन करोड़ों देशवासियों की ओर से विरोध व्यक्त करूँ , जो आतंक और भय के कारण चुपचाप सरकारी दमन सहन कर रहे हैं l सरकार द्वारा दिए गए सम्मान के पट्टे राष्ट्रिय अपमान के साथ और मेल नहीं खा सकते , वे हमारी निर्लज्जता को और भी चमका देते हैं l अत: मैं विवश होकर आदर सहित अनुरोध कर रहा हूँ की आज मुझे सम्राट की दी हुई नाइट की उपाधि से मुक्त कर दें l "
WISDOM ------
प्रसंग रूस के एकछत्र नायक रहे ब्रेझनेव से संबंधित है l वे जब भारत आए तो राजधानी में विभिन्न विशिष्ट लोगों से मुलाकात की l रामकथा के प्रसिद्ध विद्वान और वाचक पंडित कपींद्र जी भी उनसे मिले l उन्होंने ब्रेझनेव को रामचरितमानस भेंट की और कहा कि इस ग्रन्थ में जहाँ राम है वहां ' साम्यवाद ' रख देना l सीता के स्थान पर ' शक्ति ' और असुर के स्थान पर ' पूंजीपति ' फिर आपको इस ग्रन्थ की महत्ता का पता चलेगा l
16 February 2021
WISDOM -----
महाभारत में ' विदुर नीति ' में एक श्लोक है जिसका भावार्थ है ---- महात्मा विदुर धृतराष्ट्र से कहते हैं --- " हे राजन ! इस संसार में दूसरों को निरंतर प्रसन्न करने के लिए प्रिय बोलने वाले प्रशंसक लोग बहुत हैं , परन्तु सुनने में अप्रिय लगे और वह कल्याण करने वाला वचन हो , उसका कहने और सुनने वाला पुरुष दुर्लभ है l " महर्षि दयानन्द ऐसे विरले मनुष्य थे , वे राजाओं -महाराजाओं के सामने , बड़े अंग्रेज अफसरों की उपस्थिति में निर्भीक होकर सबके हित की सत्य बात कहा करते थे l स्वामीजी मूर्ति पूजा के विरोधी थे , वे कहते थे ---- मेरा काम लोगों के मन - मंदिरों से मूर्तियां निकलवाना है , ईंट पत्थर के मंदिरों को तोड़ना नहीं l महर्षि दयानन्द मानते थे कि हमारा नाम आर्य है , हिन्दू नहीं l आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ पुरुष l विदेशियों ने हमें हिन्दू नाम दिया l उनके द्वारा रचित ' सत्यार्थ प्रकाश ' सोई हुई जाति के स्वाभिमान को जगाने वाला अद्वितीय ग्रन्थ है l
WISDOM ------ कर्तव्य ही धर्म है
एक बार महाराजा पुरंजय ने राजसूय यज्ञ किया l इसमें उन्होंने दूर - दूर से ऋषि - मुनियों को आमंत्रित किया l प्रजा की सुख - संमृद्धि के उद्देश्य से आयोजित यज्ञ में विधि - विधान से आहुतियाँ दी जाने लगीं l यज्ञ की पूर्णाहुति का दिन आया l महाराज , महारानी , राजकुमार सभी यज्ञ मंडप में विराजमान थे l वेदमंत्रों की ध्वनि से वातावरण गुंजित हो रहा था l अचानक एक किसान के रोने की आवाज सुनाई दी l वह रोते हुए कह रहा था --- " दस्युओं ने मेरी सम्पति लूट ली l मेरी गाय छीनकर ले गए l दस्यु अभी कुछ ही दूर गए होंगे l महाराज ! तुरंत उनको पकड़कर मेरी सम्पति दिलाएँ l " पंडितों ने कहा ---- " इस व्यक्ति को दूर ले जाओ l यदि राजा इस पर दया कर के बिना पूर्णाहुति के उठ गए तो देवता कुपित हो जाएंगे l " राजा दयालु था , किसान का रुदन सुनकर उसका हृदय करुणा से भर गया l राजा ने कहा ---- " मेरा पहला कर्तव्य अपनी प्रजा का संकट दूर करना है l मैंने अनेक यज्ञ पूर्ण किए हैं l आज मैं पहली बार यज्ञ पूर्ण किए बिना अपने राज्य के किसान का संकट दूर करने जा रहा हूँ l " राजा के ऐसा कहने पर साक्षात् यज्ञ भगवान प्रकट हुए और बोले --- " राजन ! तुम्हें कहीं जाने की आवश्यकता नहीं l यह तुम्हारी परीक्षा थी कि तुम अपनी प्रजा के प्रति कर्तव्य का पालन करते हो या नहीं l अब तुम्हें सौ राजसूय यज्ञों का फल मिलेगा l "
15 February 2021
WISDOM -----
कोई भी परिस्थिति जिसमे हम वर्षों तक रहें , फिर हमें उसकी आदत बन जाती है और उसी के अनुरूप व्यवहार हो जाता है l युगों तक हम गुलाम रहे l आजादी तो मिल गई , हम पर राज करने वाले तो चले गए लेकिन उन परिस्थितियों में रहने की जो आदत बन गई थी , वह नहीं गई l पहले हम अपनी कमजोरियों के कारण , राजाओं की विलासिता और आपसी फूट के कारण गुलामी का जीवन जीने को विवश थे लेकिन आज व्यक्ति अपने स्वार्थ , लोभ और लालच के कारण अपने से धनी और शक्तिशाली व्यक्ति की गुलामी करता है l सबसे ज्यादा जरुरी है स्वाभिमान होना l मनुष्य की यह कमजोरी है कि वह बुरी आदत जल्दी सीखता है , अच्छाई ग्रहण नहीं करता l
WISDOM -------
एक बोध कथा है ---- एक बार भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक नगर में पहुंचे l उस नगर के लोग भिक्षु - भिक्षुणियों को बहुत प्रताड़ित करते, गलियां देते , व्यंग्य करते दूषित लांछन लगाते l इन सबसे परेशान होकर आनंद ने भगवान बुद्ध से कहा --- भगवन ! किसी दूसरे नगर चलें l ' हँसते हुए भगवान बोले ---- ' यदि वहां के लोगों ने भी प्रताड़ित किया तो कहाँ जाएंगे ? ' आनंद बोले -- ' प्रभु ! संसार में नगरों की कमी नहीं है l ' तब भगवान बुद्ध बोले ---- " आनंद ! तुम बहुत भोले हो l जो यहाँ हो रहा है वह सभी जगह होगा l सभी जगह अँधेरा हमसे नाराज होगा l इनसानियत को नष्ट करने वाली बीमारी सभी जगह हमसे रुष्ट होगीं l धर्म के नेतागण हर जगह एक जैसे हैं l जब भी उनके स्वार्थ पर चोट पड़ती है तो वे यही करते हैं l हमारी रीति है अँधेरे को मिटाना और उनकी रीति है अँधेरे में जीना l हम अँधेरे पर चोट करने से नहीं चूक सकते और वे प्रतिशोध लेने से नहीं चूक सकते l उनके पास यही एकमात्र उपाय है l बड़ी गहरी तकलीफ में हैं वे बेचारे l वे दया के पात्र हैं l तू उन पर नाराज होने के बजाय उनकी पीड़ा समझ l '