' नशा नाश की जड़ है ' यह कथन केवल इस युग में ही सत्य नहीं है , यह उस युग में भी सत्य था जब स्वयं भगवान श्रीकृष्ण इस धरती पर थे l महाभारत के महायुद्ध में जब कौरव वंश का अंत हो गया तब क्रोध में आकर गांधारी ने भगवान श्रीकृष्ण को शाप दिया था कि जैसे उसके कौरव वंश का अंत हुआ वैसे ही इस महायुद्ध के छत्तीस वर्ष बाद कृष्ण के वंश का सर्वनाश हो जायेगा l माता गांधारी के शाप की अवधि निकट आ रही थी l उन दिनों द्वारका में मद्य निषेध था l नशे के विरोध में चाहे कितने ही कानून बना दो , जब इसकी लत लगती है तो लोग छिपकर पीते है l उसके दुष्परिणाम भी जानते हैं लेकिन फिर भी पीते हैं l चाहे हमारे सामने भगवान भी हों लेकिन मन पर वश नहीं , तो भगवान भी क्या करें ? भगवान श्रीकृष्ण अपने परम मित्र उद्धव जी से चर्चा करते हुए कहते हैं --- " उद्धव ! यादव सुराप्रिय हैं , स्वयं बलराम को भी यहाँ द्वारका में मद्यपान का निषेध अप्रिय है l सब चोरों की तरह छिपकर चुपचाप सुरापान करते हैं l जिस क्षण यादवों को इस बात का ज्ञान हो जायेगा कि मैं कृष्ण उनके मद्यपान के कर्म को जानता हूँ फिर भी कुछ नहीं करता , उसी क्षण मर्यादा लुप्त हो जाएगी , उसके बाद ये यादव कृष्ण के सम्मुख सुरापान करेंगे , मैं उसे अनदेखा नहीं कर सकूँगा l वह मेरे लिए बहुत भारी पड़ेगा l " उद्धव जी ने कहा --- " फिर आप उन्हें रोकते क्यों नहीं ? " कृष्ण जी ने कहा --- " अब उन्हें रोकने का प्रयत्न करना व्यर्थ है l अब इन सब यादवों को लेकर मैं तथा बड़े भैया बलराम प्रभासक्षेत्र को जायेंगे l मद्यनिषेध तो द्वारका में है , प्रभासक्षेत्र में नहीं l यहाँ की नियंत्रित वृत्तियाँ वहां अनियंत्रित हो जाएँगी l वहां उसका अमर्यादित रूप प्रकट होगा l विवेक बुद्धि खो जाएगी और बुद्धिनाश से ही माता गांधारी के वचन यथार्थ होंगे , उनका शाप फलित होगा l इस सर्वनाश को हम जानकर भी रोक नहीं पाएंगे l कृष्ण , बलराम और सब यादवों के कर्म अब समाप्त हो गए हैं l जिनके कर्म समाप्त हो गए हों उन्हें ही महाकाल छूता है l " महाभारत में वर्णन है कि किस तरह यादव नशे में आपस में लड़ पड़े , यह लड़ाई इतनी बढ़ गई कि भगवान कृष्ण के पुरे वंश का अंत हो गया l भगवान कृष्ण का राधा के नाम आखिरी संदेश कि ' अब इस धरती पर उन दोनों का मिलन संभव नहीं है ' उद्धव जी को ही गोकुल जाकर राधा को देना था l
14 May 2022
13 May 2022
WISDOM-----
एक संत पानी के जहाज से यात्रा कर रहे थे l यात्रा लम्बी थी , यात्री उनके सत्संग का लाभ उठाते l वे सत्संग में एक बात अवश्य याद दिलाते कि --- याद रखो , संसार नश्वर है l सदैव मृत्यु को याद रखो l गलत काम नहीं बन पड़ेगा l संत का सूत्र था ---- मृत्यु का सदैव ध्यान , किन्तु मुसाफिरों को संत की बात जमी नहीं और वे अपने ढर्रे की बातों में , आदत के अनुसार निमग्न रहते l एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान उठा l समूचे जहाज में कोहराम मच गया , सब प्राणों को बचाने की चिंता में थे l असहाय थे , सभी प्रार्थना करने लग गए l सभी ने देखा कि संत बड़े सहज भाव से शांत बैठे हैं l धीरे - धीरे समुद्र का तूफान शांत हुआ l एक यात्री ने संत से पूछा ---- " आपको मृत्यु का डर नहीं लगा ? आप बड़े शांत बैठे रहे l ' संत ने कहा ---- " मृत्यु का फंदा समुद्र में ही नहीं नहीं , पृथ्वी पर भी सदैव झूलता रहता है l फिर डरना किस बात का l अज्ञानी - अविवेकी ही मृत्यु से डरते हैं , फिर भी डरकर वे बचते नहीं l
12 May 2022
WISDOM-------
कट्टरपंथी हिन्दू और मुसलमान दोनों कबीरदास जी के विरोधी थे l एक बार दोनों मिलकर बादशाह सिकंदर लोदी के पास गए l दोनों की शिकायत यह थी कि वह हमारे धर्म में हस्तक्षेप कर रहा है l मुसलमान होकर राम -राम जपकर हमारे धर्म का अपमान कर रहा है l कट्टरपंथी हिन्दुओं ने कहा --- मुसलमानों को राम -राम नहीं कहना चाहिए l कबीरदास जी को दरबार में हाजिर किया गया l दरबार में आकर उन्होंने एक बार चारों और देखा और जोर से अट्टहास कर उठे l सभी दरबारी चौंक गए l बादशाह की आँखें क्रोध से लाल हो गईं l उन्होंने पूछा ---- ' तुम्हारे हँसने का मतलब क्या है ? ' कबीरदास जी ने कहा --- " जहाँपनाह ! मैं यही चाहता था कि हिन्दू और मुसलमानों में मेल हो l मेरे इस प्रयत्न की लोग हँसी उड़ाते उड़ाते आए हैं l आज यह संभव हो गया , लेकिन मैं इन्हें ईश्वर के दरबार में मिलाना चाहता था , मगर ये लोग जहाँपनाह के दरबार में मिल रहे हैं l बस , ठिकाना जरा गलत हो गया l इसलिए मैं हँसा था l यह सिंहासन छोटा है l मैं तो उस परमेश्वर के सिंहासन के पास इन्हें ले जाना चाहता था, जो सारी दुनिया का मालिक है l ' धर्म के नाम पर लोग युगों से लड़ते चले आ रहे हैं l पीढ़ी - दर -पीढ़ी l मामला सुलझता ही नहीं l यह भी एक प्रकार का नशा है , जो ये सब कराते हैं उन्हें इसी में आनंद आता है l यह मानव जाति का दुर्भाग्य है कि अपनी ऊर्जा को लोग जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लड़ -झगड़ कर , छल -कपट , ईर्ष्या -द्वेष , लोभ -लालच में गँवा देते हैं , इसलिए चेतना के स्तर पर मनुष्य अभी भी किस स्तर पर है ? इसका चिंतन -मनन स्वयं करे l
11 May 2022
WISDOM------
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार उनका साहित्य हमें जीवन जीने की कला सिखाता है l लघु कथाओं के माध्यम से बहुत गहरी बात सिखा देते हैं l उनके विचारों को अपने आचरण में लाकर हम जीवन में सफल हो सकते हैं l एक कथा है ------ एक अत्यंत विद्वान् और सदाचारी व्यक्ति था , परन्तु उसका पुत्र विपरीत स्वभाव का था l गलत मित्रों की सांगत होने से वह बिगड़ गया था l पिता ने पुत्र को कुसंग से दूर होने के लिए कहा , पर अनेक बार समझाने का कोई लाभ नहीं हुआ l पिता ने एक युक्ति सोची, उन्होंने पुत्र को बुलाया और उसे एक हाथ में कोयला और दूसरे हाथ में चंदन लाने के लिए कहा l वह लेकर आया तो पिता ने दोनों वस्तुओं को यथा स्थान रख आने को कहा l जब पुत्र उन दोनों को रख आया तब पिता ने पुत्र से उसके दोनों हाथों को देखने के लिए कहा l उसने देखा कि उसके एक हाथ में कालिख लगी है और दूसरे हाथ से सुगंध सुगंध आ रही है l पिता ने पुत्र को समझाते समझाते हुए कहा ---- " बेटा ! सज्ज्नों का संग चंदन के जैसा होता है l उनका साथ छूट जाने पर भी उनके अच्छे विचारों की सुगंध बनी रहती है l लेकिन दुर्जनों का संग कोयले जैसा होता है , उनका साथ छूटने पर भी उनके आचरण की कालिमा हमारे जीवन को दुष्प्रभावित किए बगैर नहीं रहती l इसलिए हमें जीवन में सदैव चन्दन जैसे संस्कारी व्यक्तियों का साथ स्वीकारना चाहिए चाहिए और दुर्जनों दुर्जनों से दूर रहना चाहिए l पुत्र को पिता की बात बात समझ में आ गई l
10 May 2022
WISDOM -----
लघु -कथा ------ एक राजा को असाध्य रोग हो गया l वैद्यों ने बताया कि राजहंसों का मांस खाना चाहिए l हंस मानसरोवर पर रहते थे और साधु - संतों के ही निकट आते थे l कोई भी संत इस पापकर्म के लिए तैयार नहीं हुआ l एक बहेलिया पैसे के लालच में संत का बाना पहनकर वहां जाकर हंसों को पकड़कर लाने के लिए तैयार हो गया l मानसरोवर के हंस साधू -संतों को देखकर उड़ते नहीं थे इसलिए बहेलिये ने संत का वेश रखकर छल से उन्हें पकड़ लिया और राजा के सामने प्रस्तुत किया l राजा ह्रदय से उदार था , छल से पकड़े हुए उन हंसों को देखकर राजा को बहुत ग्लानि हुई कि वो ये कैसा भयंकर पाप करने जा रहा है l उसने तुरंत सब हंसों को मुक्त कर दिया और सोचा कि भगवान को ठीक करना होगा तो करेंगे l बहेलिये पर इस घटना का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा l उसने सोचा जिस संत वेश के लिए हंसों तक में श्रद्धा है , उसे कलंकित नहीं करना चाहिए l उसने संन्यास ले लिया और संत बन गया l उधर राजा भी चमत्कारिक ढंग से ठीक हो गया l आचार्य श्री लिखते हैं ---- 'वेश की जब इतनी महत्ता है , तो उस चोले को धारण करने वाले लोग भी कर्म वैसे ही करें , तो ही सार्थकता है l आज तो ऐसे वेशधारी बहेलिया बने बैठे हैं l '
9 May 2022
WISDOM-----
लघु कथा ----- रोगी ने डॉक्टर को अपनी परेशानी बताई कि जब वह रात को पलंग पर सोता है तब ऐसा लगता है जैसे उसके नीचे कोई छिपकर बैठा है l नीचे झांककर देखता हूँ तो वह गायब हो जाता है और जब पलंग के नीचे सोता हूँ तो लगता है कि ऊपर बिस्तर पर आकार बैठ गया है l कृपया मेरी हैरानी मिटाइए अन्यथा मैं पागल हो जाऊँगा l रात भर सो नहीं पाता l डॉक्टर ने कहा मामला बहुत गंभीर है , रोग पुराना है l समय और पैसा बहुत लगेगा l रोगी के पूछने पर डॉक्टर ने कहा --- दो हजार रूपये प्रति सप्ताह और इलाज लम्बा चलेगा , दो वर्ष भी लग सकते हैं l रोगी पत्नी के पास दौड़कर आया , डॉक्टर की पूरी बात बताई l पत्नी ने मन ही मन सोचा कि वहम की दवा तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं थी l जरुर इन्हें किसी ठग से पाला पड़ गया l पत्नी बोली यह इलाज तो बहुत महंगा पड़ेगा , अपनी इतनी हैसियत भी नहीं है किन्तु आप निश्चिन्त रहें अब आपके पलंग के ऊपर -नीचे कोई नहीं आएगा l वह गई और पलंग के चारों पाए कटवा दिए l अब न कोई नीचे बैठा दिखाई देता न ऊपर l रोगी को वापस न आता देख डॉक्टर का फोन आया कि आप आये नहीं l रोगी ने कहा --- डॉक्टर ! घर में ही इलाज हो गया l कम समय में और बिना किसी खरच के l डॉक्टर बोला --- वह कैसे ? उसने कहा --- वहम के भूत की बैठक का स्थान ही नहीं छोड़ा पत्नी ने l पलंग के चारों पाए काट दिए पत्नी ने l अब मुझे अच्छी नींद आती है , चैन से हूँ l हम में से कितने ही लोग वहम के कारण ऐसे किसी चक्कर में फंस जाते हैं और जान - माल से हाथ धो बैठते हैं l
WISDOM -----
एक बार पत्रकारों की गोष्ठी में बापू राजनीतिक प्रसंगों पर उत्तर दे रहे थे l उसी समय हास्य - विनोद की मुद्रा में एक पत्रकार ने पूछा कि यदि आपको एक दिन के लिए भारत का डिक्टेटर बना दिया जाये तो आप क्या करेंगे ? बापू ने कहा ----- " मैं सभी विचारशील व्यक्तियों और सरकारी कर्मचारियों को सफाई में जुटा दूंगा l सफाई ही सुव्यवस्था है l इसका जब तक महत्त्व न समझा जायेगा , तब तक किसी व्यक्ति या देश की वास्तविक उन्नति होना असंभव है l "