22 May 2022

WISDOM-------

   लघु -कथा -----सज्जन  होना  ठीक  है  पर    ऐसे  लोगों  की  पहचान   रखना  भी  उतनी  ही  बड़ी   आवश्यकता  है    जो  बेवजह  दूसरों  को  कष्ट  देते  हैं l  उनसे  सतर्कता  जरुरी  है ------- एक  हंस  उड़ता  हुआ  अपने  निवास  स्थान  की  ओर  जा  रहा  था  l  संध्या  का  समय  था   l  उसने  देखा  एक  चूहा  ठंड  से   ठिठुरकर   अर्द्धचेतन  हो  गया  है   l  उसे  देखकर  हंस  को  दया  आ  गई   l  वह  नीचे  उतरा  और  अपने  पंख  फैलाकर  चूहे  को  ढक  लिया   इससे  उसकी  सर्दी  रुक  गई   और  धीरे -धीरे  चूहे  के  बदन  में  गर्मी  आ  गई  l   वह  अपने  आप  को  ठीक  महसूस  करने  लगा  l  अब  क्या  था , वह  अपने  काम  में  लग  गया   और  हंस  के  मुलायम  परों  को  कुतर  दिया   l  सबेरा  हुआ , ,  हंस  ने  उड़ने  की  तैयारी  की  ,  किन्तु  वह  उड़  न  सका  ,  उसे  बहुत  दुःख  हुआ   लेकिन  उसे  यह  समझ  भी  आया   कि  हमें  हमेशा  सतर्क  और  जागरूक  रहना  चाहिए   l   जब  तक  दूसरे  पंख  न  उगे  ,  उसे  वहीँ  घूम -फिर  कर  अपने  दिन  काटने  पड़े   l 






































































 दिशाओं  में  फैलने  लगीं 

19 May 2022

WISDOM ------

    धनहीन   व्यक्ति  दरिद्र  नहीं  होता  ,  जो  ह्रदयहीन  है ,  प्रेमविहीन  है   उससे  बड़ा  दरिद्र  और  कोई  हो  नहीं  सकता   l --------- कथा ---- एक  महारानी  ने   अपनी  मौत  के  बाद  अपनी  कब्र  पर  निम्न  पंक्तियाँ  लिखाने  का  हुक्म  दिया  ------ ' इस  कब्र  में  अपार  धनराशि   गड़ी  हुई  है   l  जो  व्यक्ति  निहायत  गरीब   एवं    एकदम  असहाय  हो  ,  वह  इसे  खोदकर  ले  सकता  है  l   '   उस  कब्र  के  पास  से  हजारों  दरिद्र  एवं  भिखमंगे  निकले  ,  लेकिन  उनमे  से  कोई  भी   इतना  दरिद्र  एवं  असहाय  नहीं  था  ,  जो  धन  के  लिए  मरे  हुए  व्यक्ति  की  कब्र  खोदे  l   एक  अत्यंत   बूढ़ा  भिखमंगा   वहां  वर्षों  से  रह  रहा  था  ,  वह  हमेशा   उधर  से  गुजरने  वाले   प्रत्येक  दरिद्र  व्यक्ति  को   कब्र  की  ओर  इशारा  कर  देता    था   l    आखिर  वह  व्यक्ति  आ  ही  गया  जिसने   उस  कब्र  को  खोद  डाला   l  वह  व्यक्ति  एक  सम्राट  था  उसने  उस  देश  को  जीता  था  जिसमे  वह  कब्र  थी   l  उसने  अपनी  विजय  के  साथ  ही  उस  कब्र  की  खुदाई  शुरू   करवा   दी  थी ,  पर  उसे  उस  कब्र  में   एक  पत्थर  के  सिवाय   और  कुछ  नहीं    निकला   l  उस  पत्थर  पर  लिखा  था ---- "  मित्र ,  तू  स्वयं  से  पूछ   कि  धन  के  लिए   कब्र   में   सोये  हुए   मुर्दों  को   परेशान     करने  वाले   क्या  तुम  मनुष्य  हो   ? "   वह  सम्राट  जब  निराश  होकर  कब्र  के  पास  से  वापस  लौट  रहा  था    तब  लोगों  ने  उस  बूढ़े  भिखारी  को  जोर  से  हँसते  हुए  देखा  ,  वह  कह  रहा  था  -- ' मेरा  इंतजार  पूरा   हुआ   ,  आखिर  धरती  का  दरिद्रतम  व्यक्ति  आ  ही  गया  l  '

18 May 2022

WISDOM------

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने    अपने  लेखन  से  हमें  जीवन  जीने  की  कला  सिखाई  है  l  जब  संसार  में  चारों  ओर  हाहाकार  मचा  हुआ  है  ,  छल -कपट , षड्यंत्र , धोखे  का  बोलबाला  है  , संवेदनहीनता  है  l    ऐसी  विपरीत  परिस्थितियों  में  हम अपने  मन  को  कैसे  शांत  रख  सकते  है  ? इसका  ज्ञान   ही   जीवन  जीने  की  कला  है   l  ------- आचार्य श्री  लिखते  हैं  दूसरों  द्वारा  किए  जाने  वाले  व्यवहार  पर  हमारा  नियंत्रण  नहीं  हो  सकता   और  न  ही  दूसरों  के  विचारों  और  कार्यों  पर   हमारा  नियंत्रण  हो  सकता  है    लेकिन  हम  स्वयं  के   व्यवहार ,  विचार  और  कार्यों  पर  नियंत्रण  जरुर  ही  कर  सकते  हैं   l     यदि  हमारे  जीवन  में  ऐसे  लोग  हैं   जो  हमें  अच्छे  नहीं  लगते  ,  उनका  व्यवहार  हमारे  प्रति  अच्छा  नहीं  है    तो  हमें  इन  व्यक्तियों  से  लड़ने  के  बजाय  उनसे  निश्चित  दूरी  बना बना  लेनी  चाहिए  l l  यहाँ   दूरी  से  तात्पर्य   है  --हमें  मन  से  उन  सीमाओं  को   निश्चित  करना  है  ,  जिससे  हमें  व्यक्ति  विशेष  के  साथ  कटु  व्यवहार  के  लिए   विवश  न  होना  पड़े   l  यदि  हम  किसी  को  अपना  मित्र  नहीं  बना  सकते   तो  उसे  अपना  शत्रु  भी  नहीं  बनाना  चाहिए    l  किसी  को  भी  अपना  नजदीकी  मित्र  बनाने  से  पहले   उसे  कई  बार  परख  कर  निर्णय  लेना  चाहिए   l 

17 May 2022

WISDOM ----

   श्रीमद भगवद्गीता   में  कहा    गया  है  --- ज्ञान , कर्म  और  भक्ति  का  समुच्चय  जीवन  के  समग्र  विकास  के  लिए    अनिवार्य  है   l    लेकिन  वर्तमान  समय  में    लोग  स्वयं   को  धार्मिक   और   ईश्वर  का  भक्त  कहलाने  का  केवल  दिखावा  करते  हैं   l  यही  कारण  है  कि   संसार  में  इतनी  अशांति   और  तनाव  है  l   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- व्यक्तित्व  का  और  विचारों  का  परिष्कार  अनिवार्य  है   l  अपने  अवगुणों  को  दूर  करो  और  सद्गुणों  को    अपनाओ  l   बाहरी  जगत  में  जितनी  भी  समस्याएं  हैं   उनका  कारण  मनुष्य  के  भीतर  छिपे  दुर्गुण  ही  है   l  

16 May 2022

WISDOM-----

   जन्म  और  मृत्यु  प्रकृति  का  अनिवार्य  नियम  है  l  मृत्यु  कोई  नहीं  चाहता ,  सब  अमर  होना  चाहते  हैं   और  असुर    तो  अमर  होने  के  लिए   कठिन साधना  और  तपस्या  कर  लेते  हैं   l  आचार्य श्री  लिखते  हैं ---- ' असुर  ईश्वर  से  अमरता  की  याचना  करते  हैं   और  इसके  न  मिलने  पर   मृत्यु  को  असंभव  बना  देने  वाले  वरदान  मांगते  हैं  l  ये  वरदान  उन्हें  मिल  भी  जाते  हैं   l  फिर  सही  समय  पर ,   सही  स्थान  में   उनकी   मृत्यु  --उन्ही  के  बताये  रास्ते  के  अनुसार   उन्हें  खोज  लेती  है   l  उनके  वरदान  के  अनुसार  ही  प्रकृति  उनकी  मृत्यु  का   स्वरुप  व  स्थान  तय  करती  है  l  मृत्यु  से  बचने  का  कोई  प्रयास   उनके  काम  नहीं  आता  l  उनके  द्वारा  मृत्यु  को  असंभव  बनाने  के  लिए  किए  गए  सभी  प्रयास   ही   उनकी  मृत्यु  को   संभव  बना  देते  हैं   l  '     वर्तमान  युग  में  भी  देखें   तो   मनुष्य  की  बुद्धि  ने  अमर  होने  के  लिए   कोई  कोर - कसर    नहीं  छोड़ी   l    प्रकृति  के  नियम  में  दखल  देने  का परिणाम,   अपने  जीवन  के  लिए  प्रकृति  को  नष्ट  भ्रष्ट  करने   का  प्रयास   ,  प्रकृति  को  अपना  रौद्र  रूप  दिखाने  को  विवश  कर  देता  है   l     मृत्यु  से  बचने  के   बजाय  जीवन  को  सार्थक  करने  का  प्रयास  करना  चाहिए    लेकिन  यह  मनुष्य  की  दुर्बुद्धि  है  कि   वह  स्वयं  प्रकृति  के  हर  कण  को  प्रदूषित  करता  है    ,  अमर  होना  तो  संभव  ही  नहीं  है  ,  वह  तरह - तरह  की  बीमारियों  से  ग्रस्त  होकर  अपने  जीवन  को  भार  समझ  कर  ढोता  है   l   ऐसा  विकास  जो  विनाश  कर  दे  -- उसे  स्वीकार   नहीं  करने  के  लिए   सम्पूर्ण  मानव  जाति  को  जागरूक  होना  पड़ेगा  l   

15 May 2022

WISDOM -------

 लघु -कथा ------  कुशल  मूर्तिकार  चित्रसेन  को  बंदी  बनाने  राज्य  के  सैनिक  जब  पहुंचे  ,  तब  तक  उसने  अपनी  ही  अनेक  मूर्तियाँ  बना  डालीं   और  उनके  बीच  स्वयं  मूर्तिवत  बैठ  गया  l  पहचानना  कठिन  था  कि  असली  चित्रसेन  कौन  है   l  सैनिक  असमंजस  में  पड़  गए   l  कुछ  विचार  कर   एक  चतुर  सैनिक  ने  कहा  ---- " यह  कितनी  सुन्दर  मूर्तियाँ  हैं  l  इन्हें  बनाने  वाला   निश्चय  ही  उच्च  कोटि  का   कलाकार  है  l  "  प्रशंसा  सुनकर  मूर्तिवत  बैठे   चित्रसेन  के   चेहरे  पर  चमक  आ  गई   l  सैनिक  ने  मुस्करा  कर  कहा  ---- "  लेकिन  अभी  कुछ  कमी कमी  है   l  "  यह  सुनकर  आवेश  में  आकर  चित्रसेन  खड़ा  हो  गया  l  सैनिक   ने  तुरंत   उसे  बंदी  बना  लिया  और  बोला --  यही  एक  कमी  रह  गई  थी  कि  अहंकार  अभी  विगलित  नहीं  हुआ  l  चित्रकार  अपनी   नासमझी  पर   पछताने  लगा  l  








































































































































































































 न
















































































































































14 May 2022

WISDOM -----

   ' नशा  नाश  की  जड़  है  '  यह  कथन  केवल  इस  युग  में  ही  सत्य  नहीं  है  ,  यह  उस  युग  में  भी  सत्य  था  जब  स्वयं  भगवान  श्रीकृष्ण  इस  धरती  पर  थे  l    महाभारत  के  महायुद्ध  में  जब   कौरव  वंश  का  अंत  हो  गया   तब  क्रोध  में  आकर  गांधारी  ने  भगवान  श्रीकृष्ण  को   शाप  दिया  था   कि  जैसे  उसके  कौरव  वंश  का  अंत  हुआ  वैसे  ही   इस  महायुद्ध  के  छत्तीस  वर्ष  बाद   कृष्ण  के    वंश  का  सर्वनाश  हो  जायेगा   l   माता  गांधारी  के  शाप  की  अवधि  निकट   आ  रही  थी   l   उन  दिनों  द्वारका  में  मद्य  निषेध  था   l  नशे  के  विरोध  में  चाहे  कितने  ही  कानून  बना  दो ,  जब  इसकी  लत  लगती  है  तो  लोग  छिपकर  पीते  है  l  उसके  दुष्परिणाम  भी  जानते  हैं  लेकिन  फिर  भी  पीते  हैं   l  चाहे  हमारे  सामने  भगवान  भी  हों   लेकिन  मन  पर  वश  नहीं  ,  तो  भगवान  भी  क्या  करें  ?                                    भगवान  श्रीकृष्ण  अपने  परम  मित्र  उद्धव जी  से  चर्चा  करते  हुए  कहते  हैं  --- " उद्धव  !  यादव  सुराप्रिय  हैं  ,  स्वयं  बलराम  को  भी  यहाँ  द्वारका  में  मद्यपान  का  निषेध  अप्रिय  है   l  सब  चोरों  की  तरह  छिपकर   चुपचाप    सुरापान  करते  हैं   l   जिस  क्षण  यादवों  को  इस  बात  का  ज्ञान  हो  जायेगा  कि  मैं  कृष्ण   उनके  मद्यपान  के  कर्म  को  जानता  हूँ   फिर  भी  कुछ  नहीं  करता  ,  उसी  क्षण  मर्यादा  लुप्त  हो  जाएगी  ,  उसके  बाद  ये  यादव  कृष्ण  के  सम्मुख   सुरापान  करेंगे  ,  मैं  उसे  अनदेखा  नहीं  कर   सकूँगा  l  वह  मेरे  लिए  बहुत    भारी    पड़ेगा  l  "  उद्धव जी  ने  कहा --- "  फिर  आप  उन्हें  रोकते  क्यों  नहीं   ? "  कृष्ण जी  ने  कहा --- "  अब  उन्हें  रोकने  का  प्रयत्न  करना  व्यर्थ  है   l  अब  इन  सब  यादवों  को  लेकर  मैं  तथा  बड़े  भैया  बलराम  प्रभासक्षेत्र  को  जायेंगे  l   मद्यनिषेध   तो  द्वारका  में  है  ,  प्रभासक्षेत्र  में  नहीं    l  यहाँ  की  नियंत्रित  वृत्तियाँ   वहां  अनियंत्रित  हो  जाएँगी   l  वहां  उसका  अमर्यादित  रूप   प्रकट  होगा   l  विवेक  बुद्धि    खो  जाएगी    और  बुद्धिनाश  से  ही   माता  गांधारी  के  वचन  यथार्थ  होंगे  ,  उनका  शाप  फलित  होगा   l   इस  सर्वनाश  को  हम  जानकर  भी  रोक  नहीं  पाएंगे   l  कृष्ण , बलराम  और  सब  यादवों  के  कर्म  अब  समाप्त  हो  गए  हैं   l  जिनके  कर्म  समाप्त  हो  गए  हों  उन्हें  ही  महाकाल  छूता  है   l "   महाभारत  में  वर्णन  है  कि  किस  तरह  यादव  नशे  में  आपस  में   लड़  पड़े  ,  यह  लड़ाई  इतनी  बढ़  गई  कि  भगवान  कृष्ण  के  पुरे  वंश  का  अंत  हो  गया    l   भगवान  कृष्ण  का    राधा  के   नाम  आखिरी   संदेश   कि   ' अब  इस  धरती  पर  उन  दोनों  का  मिलन  संभव  नहीं  है  '    उद्धव जी  को  ही  गोकुल  जाकर   राधा  को  देना   था  l