23 June 2022

WISDOM -----

   लघु -कथा ---- एक  गिद्ध  था  l  उसके  माता -पिता  अंधे  थे  l  गिद्ध  प्रतिदिन  अपने  साथ -साथ  अपने  माता -पिता  के   भोजन    की  व्यवस्था  भी  जुटाता  था   l एक  दिन  वह  किसी  बहेलिये  के  जाल  में  फंस  गया   l  वह  बेहद  दुःखी   हुआ  कि  मैं  मर  जाऊंगा  तो  माता -पिता  का  क्या  होगा   ?  वह  जोर- जोर   से   विलाप  करने  लगा  l  बहेलिये  ने  उसके  रोने  का  कारण  पूछा  तो   गिद्ध  ने  अपनी  व्यथा  कही   l  बहेलिया  बोला --- "  गिद्धों  की  द्रष्टि  तो  इतनी  तेज  होती  है   कि  सौ  योजन  ऊपर   आसमान  से  भी  देख  लेती  है  ,  लेकिन  तू  जाल  को  कैसे  नहीं  देख  पाया   ? "  गिद्ध   बोला  ---- " बुद्धि  पर  जब  लोभ  का  पर्दा  पड़  जाता  है   तो  उसे  ठीक -ठीक  दिखाई  नहीं  देता  l  जीवन  भर  मांस  के  पिंड   के  पीछे  भागते - भागते  मेरी  नजर  को  अब  उसके  सिवाय   कुछ  और  दिखाई  ही  नहीं  देता   l  इसी  कारण  मैं  तेरा  जाल  नहीं  देख  पाया   l  "  बहेलिये  को  गिद्ध  की  ज्ञान  भरी  बातें अच्छी  लगीं   l   उसने  कहा ---- ' गिद्धराज  !  जाओ  मैं  तुम्हे  मुक्त  करता  हूँ  l  अपने  अंधे  माता - पिता  की  सेवा  करो   l  तुमने  मुझे  लोभ  का  दुष्परिणाम  बता  दिया  l  '

22 June 2022

WISDOM -------

   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- ' जीवन  का  स्वरुप  कोई  भी  हो , व्यक्तिगत  अथवा  सामूहिक  ,  उसके  साथ  काल , कर्म   और  स्थान  की  निरंतरता  अनिवार्य  रूप  से  जुड़ी  है   l  सभी  को  अपने  कर्मों  के  अनुसार  स्थान  मिला  है ,  साथ  ही  नए  कर्मों  की  स्वतंत्रता  भी  ,  लेकिन  इनके  परिणाम  तो  काल  ही  तय  करता  है   l  कहते  हैं ---- परमेश्वर  ने  स्वयं  इस  युग  में  महाकाल  का  रूप  धारण  किया  है   l  वे  व्यक्ति  को  और  समूह  को  ,  राष्ट्र  और  विश्व  को   उसके  कर्मों  का  उचित  दंड  देकर   नए  युग  का  आरम्भ  करेंगे   l  युग  का  प्रत्यावर्तन  करेंगे   l    श्रीमद् भगवद्गीता  में   भगवान  अपना  परिचय  देते  हुए  कहते  हैं ---- ' मैं  काल  हूँ  l '  उन्होंने  मंदिरों  में ,  विभिन्न   देवस्थानों  में   पूजे  जाने  वाले    किसी  देवी -देवता  के  रूप  में   स्वयं  का  परिचय  नहीं  दिया   l  सीधा - सपाट  कहा ---- ' मैं  काल  हूँ  l '  महाभारत  में  परमेश्वर  काल  रूप  में   कुरुक्षेत्र  में  महायुद्ध  का  दंड   लेकर  प्रकट  हुए  हैं    l  अर्जुन  से  कहते  हैं  --- तुम  इन  प्रतिपक्षी  योद्धाओं  को   मारो  या  न  मारो  ,  पर  ये  मरेंगे  अवश्य   l  इन्हें  मारने  का  माध्यम   तुम  बनो  या  फिर   कोई  और  ,  इनका  मरना  सुनिश्चित  है  ,  क्योंकि  व्यक्ति  अथवा  समूह  को    कोई  परिस्थिति   या  घटनाक्रम  नहीं  मारता    l  उसे  मारता  है  ,  उसका  कर्म   l  भीष्म  और  द्रोणाचार्य  अपने  व्यक्तिगत   जीवन  में  भले  ही  अच्छे  हों  ,  पर  दुर्योधन  के  अनगिनत   दुष्कर्मों  के  साथ   उनकी  मौन  स्वीकृति  ने  उन्हें   दंड  का  भागीदार  बना  दिया    l  यही  स्थिति   अन्य   सभी  की  है  l    जीवन  में  शुभ  और  अशुभ  के  लिए  प्रत्यक्ष  में  जिम्मेदार   कोई  भी  हो  ,  पर  यथार्थ  में   उत्तरदायी  होता  है  कर्म  l   इस  कर्म  के  अनुसार  ही  काल  नियत  समय  और  नियत  स्थान  पर  परिस्थितियों   और  घटनाक्रमों  का  सृजन  कर  देता  है   l  कर्म  जितना  व्यापक  और  तीव्र  होता  है  ,  उसी  के  अनुरूप   काल  भी   अपना  आकार  बढ़ा  लेता  है   l   

21 June 2022

WISDOM -------

     लघु -कथा  -----  एक  बार  अमेरिका  की   एक  पचास  मंजिली  इमारत  का  लिफ्ट  खराब  हो  गया   l  सबसे  ऊपरी  मंजिल  में  स्थित  एक  कार्यालय   के  कर्मचारी   जब  सीढियाँ  चढ़कर   ऊपर  जाने  लगे   तो  उन्होंने  समय  काटने  के  लिए   तय  किया  कि   प्रत्येक  बारी -बारी  से   एक  छोटी -छोटी  कहानी   सुनाता  चलेगा  l   कहानी  सुनने  का  जब  दौर  चल  रहा  था  ,  तो  एक  कर्मचारी  बीच  में   टोकने  का  बार -बार  प्रयत्न  करता  ,  किन्तु  सब  लोग  उसे  चुप  करा  देते   l  मंजिल  निकट  आने  पर  जब  उसकी  बारी  आई   तो  लोगों  ने  उससे  कहा -- "  हाँ  भाई ,  अब  तू  सुना  ,  तब  से  क्या  बीच  में  टोक  रहा  था   l  "  उसने  बड़ी  स गंभीरता  से  कहा --- " मैं  केवल   यही  कहना  चाहता  था  कि   कार्यालय  की  चाबी  तो  नीचे   कार  में  ही  रह  गई  है   l   इतनी  देर  से  कोई  मेरी  सुनता  ही  नहीं  है   l  " ----

20 June 2022

WISDOM ------

   हकीम  लुकमान  कहते  थे ---- ' भोजन  का  असंयम  कर   मनुष्य  अपनी  जीभ  से   अपनी  कब्र  खोदता  है  l '   ---एक  सेठ जी  थे ,  वे  खाँसी  से  बहुत  परेशान  थे  l   वैद्य जी  के  पास  गए  ,  तो  वैद्य जी   ने  उनसे  परहेज  करने  को  कहा   l  सेठ जी  ने  कहा ---- " आप  चाहें   तो  जितनी  कड़वी  दवा   दें  दे,    पर  मैं  परहेज  नहीं  कर  सकता  l  "  वैद्य जी  ने  कहा --- फिर  आप  परहेज   भी  मत  कीजिए  ,  दवा   भी    मत  लीजिए  ,  क्योंकि  खांसी  के  तीन  लाभ  आपको  अवश्य  ही  होंगे  l  एक  लाभ  तो  यह   कि  आप   रात   भर  खांसते  रहेंगे  तो   ,  घर  में  चोर  नहीं  आयेंगे  l    दूसरे    आपको  कुत्ते  नहीं  काटेंगे   क्योंकि  कमजोरी  के  कारण  आप   बिना  लाठी  नहीं  चल   सकेंगे  l   तीसरा  लाभ  यह  है  कि  बुढ़ापा   नहीं  आएगा  ,  क्योंकि  खांसी  के  कारण   जीवन  जल्दी  ही  समाप्त  हो  जायेगा   l  यह  सुनकर  सेठजी  को   वैद्य जी  की  बात  समझ  में  आ  गई   और  उन्होंने  खाने -पीने  पर  नियंत्रण  कर  अपने  को  स्वस्थ  कर  लिया  l 

19 June 2022

WISDOM -----

    मोह  के  कारण  मनुष्य  की  कैसी  दुर्गति  होती  है  ,  इसे  बताने  के  लिए  पुराणों  में  अनेक  कथाएं  हैं   l  ऐसी  ही  एक  कथा  है ------   एक  आदमी  बूढ़ा  हुआ  तो  नारद जी  उसके  पास  गए   और  कहा  कि  अब  जिन्दगी  का  आखिरी  पड़ाव  है , भगवान  को  याद  कर  लो   l  शरीर  चाहे  वृद्ध  हो  जाये   ,इच्छाएं  समाप्त  नहीं  होतीं  l  वह  बोला --- अभी  सुख - वैभव  भोग  लें , नाती -पोते  देख  लें  फिर  भगवान  को  याद  करेंगे   l  कुछ  दिन  बाद  उसकी  मृत्यु  हो  गई   l   दूसरी  योनि  मिलने  से  पूर्व  नारद जी  उसके  पास  गए   और  कहा -- तुमने   अपना  जीवन  धन  कमाने  और  भोग विलास  में  बिताया ,  भगवान  को   याद    नहीं  किया , कोई  सत्कर्म  नहीं  किए    इसलिए  अब  तुम्हे  बैल   का  जन्म  मिलेगा  l  बैल  का  जन्म  लेकर  भी  बेटे - बेटी  के   यहाँ  रहा ,  उसे  पूर्व  जन्म  की  याद  थी ,  खूब  दौड़ -दौड़  कर  काम  करता   l  नारद जी  आए  और  बोले  -अब  भगवान  का  नाम  ले  लो  तो  इस  योनि  से  मुक्ति  मिल  जाएगी   l  वह  बोला -- यह  हमारी  ही  जमीन   है ,  अपने  ही  बच्चों  के  लिए  काम  कर  रहे  हैं  l   अब   मरा  तो  कुत्ते  की  योनि  मिली   l  मोह  उसी  घर  में  खींच  लाया ,  अब  अपने  बच्चों  के  घर  की  सुरक्षा  करता   l  नारद जी  फिर  आए  और  बोले -- अब  तो  भगवान  को  याद  कर  , मुक्ति  मिल  जाये जाए  l    कुत्ता  बोला ---- अब   नाती -पोते  का  घर  बस  जाये   l    अब   मृत्यु  हुई  तो  सांप  का  जन्म  मिला ,  मोह  नहीं  छूटा   तो  अपने  गाड़े  हुए  खजाने  की  रक्षा  करने  लगा   l   बच्चों  को  खजाने  का  पता  चला    तो  सब  मिलकर    उसे  मारने  लगे  जिससे  खजाना  मिल  जाये  l   अब  वह  नारद  जी  से  बोला --- हमने  आपकी  बात  मान  ली  होती  तो  यह  दुर्गति  नहीं  होती   l  अब  न  जाने  कौन  सी  योनि   मिलेगी  l   यह  कथा   मनुष्य   को  समझाने  के  लिए  है   कि  ये  मोह  कर्तव्य पालन  तक   सीमित   रहे  तो  ठीक  है  अन्यथा  दुर्गति  करा  देता  है  l  

18 June 2022

WISDOM ------

    लुकमान  से  किसी  ने  प्रश्न  किया  कि   आपने  इतनी  शिष्टता  कहाँ  से  सीखी  ?   लुकमान  ने   उत्तर  दिया  --- " भाई  ,  मैंने  शिष्ट  व्यवहार   अशिष्ट   लोगों  के  बीच  रहकर  ही  सीखा    है  l  लुकमान  का  उत्तर  सुनकर   लोग  अचरज   में  पड़  गए  l   लुकमान  ने  और  आगे  स्पष्ट  करते  हुए  कहा  कि   अशिष्ट  लोगों लोगों  के  बीच  रहकर  ही  मैंने  जाना  कि  अशिष्ट  व्यवहार  क्या  है  l  मैंने  पहले  उनकी  बुराइयों  को  देखा   l  फिर  देखा  कि  कहीं  ये   बुराइयाँ  मुझ  में  तो  नहीं  हैं   l  इस  तरह  के  आत्म निरीक्षण  से   मैं  बुराइयों  से  दूर  होता  गया   और  आत्मसुधार   के  फलस्वरूप   लोग  मुझे   लुकमान  से  हजरत  लुकमान  कहने  लगे   l  

WISDOM --------

    एक  दिन  राजा  भोज  गहरी  निद्रा  में  सोए  हुए  थे   l  उन्हें  स्वप्न  में  एक  अत्यंत  तेजस्वी   वृद्ध  पुरुष  के  दर्शन  हुए  l  भोज  ने  उससे  पूछा ----- " महात्मन  ! आप  कौन  हैं  ? "  वृद्ध  ने  कहा ---- " राजन  !  मैं  सत्य  हूँ  l  तुझे  तेरे  कार्यों  का  वास्तविक  रूप  दिखाने  आया  हूँ  l  मेरे  पीछे -पीछे  चला  आ   और  अपने  कार्यों  की  वास्तविकता   को  देख  l  "  राजा  उस  वृद्ध  के  पीछे -पीछे  चल  दिए   l  राजा  भोज  बहुत  दान , पुण्य ,  यज्ञ , व्रत , तीर्थ , कथा - कीर्तन   करते  थे , उन्होंने   अनेक  कुएं , मंदिर , तालाब , बगीचे   आदि  भी  बनवाये  थे   l  राजा  के  मन  में  इन  कार्यों   के  कारण  बहुत  अभिमान  आ  गया  था   l  वृद्ध  पुरुष  के  रूप  में  आया  सत्य   राजा  भोज  को   अपने  साथ उसकी  कृतियों   के  पास  ले  गया  l  वहां  जैसे  ही  सत्य  ने  पेड़ों  को  छुआ  ,  सब  एक - एक  कर  के  ठूंठ  हो  गए  l  राजा  आश्चर्य चकित  रह  गया   l  इसके  बाद  सत्य  राजा  भोज  को  मंदिर  ले  गया  l  सत्य  ने  जैसे  ही  उसे  छुआ  ,  वह  खंडहर  के  रूप  में   परिणत  हो  गया   l  वृद्ध  पुरुष  ने  राजा  के   यज्ञ  ,  तीर्थ ,  कथा , पूजन ,  दान  आदि  के  निमित्त  बने  स्थानों  , उपादानों , व्यक्तियों   को  जैसे  ही  छुआ  ,  वे  सब  राख  हो  गए   l   राजा  यह  सब  देखकर  विक्षिप्त  सा  हो  गया   l  सत्य  ने  कहा  ---- " राजन  !  यश  की  इच्छा  से   और    अपने  किसी  स्वार्थ  की  पूर्ति  के  लिए   जो  कार्य  किए  जाते  हैं  ,  वह  दिखावा  है  ,  उनसे  केवल  अहंकार  की  पुष्टि  होती  है   l  सच्ची  सद्भावना  से   निस्स्वार्थ  होकर   कर्तव्य  भाव  से   जो  कार्य  किए  जाते  हैं  ,  उन्ही  का  फल  पुण्य  रूप  में  मिलता  है   l  "  इतना  कहकर  सत्य  अन्तर्धान  हो  गया  l     राजा  ने  निद्रा  टूटने  पर  स्वप्न  पर  गहरा  विचार  किया    और  सच्ची  भावना  से  कर्म  करना  प्रारम्भ  कर  दिया  l