लघु -कथा ---- 1. एक संत छोटे से गुरुकुल का सञ्चालन करते थे l एक दिन वे पास के रास्ते से एक राहगीर को पकड़ लाये और शिष्यों के सामने उससे प्रश्न किया कि यदि तुम्हे सोने की अशर्फी से भरी थैली मिल जाये तो तुम क्या करोगे ? वह आदमी बोला --- " तत्क्षण उसके मालिक का पता लगाकर उसको वापस कर दूंगा , अन्यथा राजकोष में जमा करा दूंगा l " संत ने राहगीर को विदा किया और शिष्यों से कहा --- " ये आदमी मूर्ख है l " शिष्य बड़े हैरान हुए कि संत ये क्या कह रहे हैं l संत ने फिर दूसरे राहगीर को बुलाकर वही प्रश्न दोहराया l दूसरे राहगीर ने उत्तर दिया -- " मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं मुद्रा लौटाने के लिए मालिक को खोजता फिरूं , मूर्ख नहीं हूँ l " जब वह चला गया तो संत ने कहा --- यह व्यक्ति शैतान है l शिष्य बड़े हैरान हुए कि आखिर संत क्या चाहते हैं l अबकी बार संत तीसरे राहगीर को लाए और उससे वही प्रश्न पूछा l उस राहगीर ने बड़ी सज्जनता से उत्तर दिया --- " महाराज ! अभी तो कुछ कहना मुश्किल है l इस मन का क्या भरोसा , कब धोखा दे जाए l यदि परमात्मा की कृपा रही और सद्बुद्धि बनी रही तो लौटा दूंगा l " संत ने कहा --ये आदमी सच्चा है l इसने अपनी डोर परमात्मा को सौंप दी , ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में कभी असफल नहीं होते l "
30 January 2023
29 January 2023
WISDOM ---
मनुष्य शरीर होने के नाते काम . क्रोध , लोभ , मोह , ईर्ष्या , द्वेष , महत्वाकांक्षा , लालच आदि बुराइयाँ सभी में थोड़ी बहुत होती हैं लेकिन यदि किसी एक बुराई की अति हो जाये तो उसका अंत बुरा होता है l इसी तथ्य को समझाने वाली एक कथा है ---- एक आम को पेड़ से बहुत मोह था l दूसरे आम तो पककर अन्यत्र चले गए l लोगों के काम आ गए और गुठली से नए पौधे बनकर बढ़ चले l लेकिन वह मोहग्रस्त आम पत्तों की आड़ में छिप गया l छोड़ कर जाने का उसका मन हुआ ही नहीं l पेड़ पर न बौर रहा , न साथी l न कोयल की कूक न भौरों का गुंजन l पत्ते भी उसकी अवज्ञा करने लगे l छोड़ना ठीक है या पकड़े रहना उचित है --- इस असमंजस का कोई निराकरण न हो सका l संशय ने कीड़े की आकृति बनाई और उसके पेट में जा घुसा l कुछ दिन बाद देखा गया कि , वह आम नहीं रह गया l कीड़े ने उसे भीतर से खोखला बनाया l धूप ने सुखाकर घिनोना बना दिया l हवा के झोंके ने स्थिति बदली और कूड़े के ढेर ने अपने घर शरण दी l
27 January 2023
WISDOM ---
आज संसार में जितनी भी समस्याएं हैं , जाति , धर्म आदि के नाम पर जो झगड़े हैं , उनके मूल में एक ही कारण है कि मनुष्य की चेतना को उच्च स्तर पर ले जाने का कोई प्रयास नहीं हुआ l भौतिक विकास तो बहुत हुआ लेकिन मानवीय मूल्यों को विकसित करने का कोई प्रयास नहीं हुआ l स्वार्थ , लालच , महत्वाकांक्षा जैसे दुर्गुणों के कारण ही समाज में अशांति है l नेता चाहता है उसे वोट मिल जाए , उसकी गद्दी सलामत रहे , चाहे समाज बाँट जाये , जिनके पास धन -संपदा है , वे चाहते हैं पूरी दुनिया को अपना गुलाम बना लें , जो अपने को श्रेष्ठ समझते हैं , वे दूसरों को अपमानित करने में आनंद लेते हैं , और स्वयं में चाहे कितने भी ऐब हों , चाहते हैं उनका सम्मान किया जाये l मनुष्य की ये मानसिक कमजोरियां , उसके दुर्गुण उसे पशुता की ओर ले जाते है , जो स्वयं उसके लिए और सम्पूर्ण समाज के लिए घातक हैं l संसार में सुख -शांति चाहिए तो मनुष्य को इनसान बनाने का प्रयास करना होगा l
WISDOM -----
लघु -कथा ---- उत्तराखंड के एक प्राचीन नगर में सुबोध नामक राजा राज्य करते थे l महाराज का नियम था कि राजकीय कार्य प्रारम्भ होने से पूर्व वे आए हुए याचकों को दान दिया करते थे l एक दिन जब सब लोग दान पा चुके तो अंत में एक व्यक्ति ऐसा आया जो दान के लिए हाथ तो फैलाए था, पर मुंह से कुछ न कहता था l सब हैरान हुए कि इसे क्या दिया जाए ? बुद्धिमान लोगों की समिति बैठाई गई l किसी ने अन्न , किसी ने वस्त्र या आभूषण देने की सिफारिश की l राजा की कन्या भी वहां उपस्थित थी l उसने कहा --- " जो व्यक्ति बोल नहीं सकता है , , अपने भाव व्यक्त नहीं कर सकता है , उसके लिए वस्त्र -आभूषण सब व्यर्थ हैं l ऐसे लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ दान तो ज्ञानदान है l ज्ञान से मनुष्य अपनी सम्पूर्ण इच्छाएं स्वयं पूर्ण कर सकता है और दूसरों को भी सहारा दे सकता है , इसलिए इसे ज्ञानदान दीजिए l " कन्या की सलाह को सबने पसंद किया और उस व्यक्ति के लिए शिक्षा की व्यवस्था की गई l राजा ने उस दिन अपने दान की सार्थकता समझी l यही व्यक्ति आगे चलकर उस नगरी का विद्वान् मंत्री नियुक्त हुआ l यह कथा हमें बताती है कि अज्ञान का निवारण सच्चा पुण्य -परमार्थ है l बाढ़, भूकंप , युद्ध आदि कोई भी आपदा आ जाये , जिसमे व्यक्ति की धन -सम्पति नष्ट हो जाए , लेकिन ज्ञान उसकी आत्मा , उसके मन में समाया होता है , भयंकर आपदा भी उसके हुनर को , उसके ज्ञान को नहीं मिटा पाती l और अपने ज्ञान के बल पर वह स्वयं को पुन: स्थापित कर लेता है , अपने परिवार व् अन्यों को भी सहारा देने योग्य बन जाता है l