6 January 2025

WISDOM -----

  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- "  झूठ  और  बेईमानी  के  मार्ग  पर  चलने  वाले  व्यक्ति  के  मन  में  ग्लानि   , भय , चिंता  भरी  हुई  होती  है  ,  जिससे  वह  मानसिक  बीमारियों   का  शिकार  हो   अस्वस्थ  रहने  लगता  है  l  वह  शारीरिक -मानसिक  विकारों  का  शिकार  होता  है  l  उसका  मनोबल  आत्मबल  कमजोर  होता  है  , जिससे  उसे  हर  काम  में  असफलता  मिलती  है  l  उसे  पल -पल  अपने  झूठ  और  बेईमानी  के  पकड़े जाने  का  भय  सताता  रहता  है  l  इसलिए  वह  झूठ  और  बेईमानी  से  प्राप्त  सुख  के  साधनों  के  होते  हुए  भी  अंदर  से  दुःखी  ही  रहता  है     जबकि  सत्य  के  मार्ग  पर  चलने  वाला   व्यक्ति    आत्मग्लानि  और  भय  से   मुक्त    हमेशा  हर्षित , प्रसन्नचित   और आशावादी   बना  रहता  है  l  इसके  परिणामस्वरूप  वह  जीवन  में   सर्वत्र  सफल  होता  है  l "                                                                                                                                                                                                                                         

5 January 2025

WISDOM -----

   धर्म  के  नाम  पर  संसार  में  कितना  लड़ाई  झगड़ा  है  l  थोडा  बहुत   झगड़ा  तो  ठीक  है    लेकिन   बड़े  स्तर  पर  झगड़ें  करने  से  पहले   सच्चा  धर्म  क्या  है  ?  यह  जानना  बहुत  जरुरी  है   l  एक  कथा  है  ----- एक  राजा  के  तीन  पुत्र  थे  l  राजा  हर  तरह  से  परख  कर  ही  अपने  उत्तराधिकारी  का  चयन  करना  चाहता  था  l  इसलिए  एक  दिन  राजा  ने  उन्हें  बुलाकर  कहा  --- "जाओ , किसी  धर्मात्मा  को  खोजकर  लाओ  l "  तीनों  राजकुमार  धर्मात्मा  की  खोज  में  निकल  पड़े  l  कुछ  दिनों  बाद  एक  पुत्र  , एक  सेठ  को  लेकर  राजा  के  पास  पहुंचा   और  बोला  --- :  पिताजी  !  इन  सेठ जी  ने  अनेकों  धर्मशालाएं  व  मंदिर  बनाए  हैं  l "  राजा  ने   सेठ  से  ऐसा  करने  का  कारण  पूछा  तो  उसने  कहा ---"  मैंने  सुना  है  ऐसा  करने  से  पुण्य  मिलता  है   और  हमारा  नाम  भी  चलता  रहता  है  l  "  राजा  ने  उनका  सम्मान  किया  और  आदर  सहित  विदा  किया  l  दूसरा  राजकुमार  एक  ब्राह्मण को  लेकर  लौटा   और  राजा  से  उनका  परिचय  देते  हुए  बोला --- "  यह  बहुत  ज्ञानी  और  तपस्वी  हैं  l "  राजा  ने  उनसे  धर्म  की  परिभाषा  पूछी  तो  उन्होंने  कहा ---- " शास्त्र  के   अनुसार   सब  कर्मकांड  करने  से  स्वर्ग  की  प्राप्ति होती  है  ,  उसका  पालन  करना  ही  धर्म  है  l "  राजा  ने  उन्हें  भी  दक्षिणा  देकर  सम्मानपूर्वक  विदा  किया  l   तीसरा  राजकुमार  एक  गरीब  से  व्यक्ति  को  लेकर  पहुंचा  l  राजा  के  पूछने पर  वह  बोला --- " पिताजी  !  यह  व्यक्ति  एक  घायल  गाय  की  सेवा  कई  दिनों  से  कर  रहा  था  l  मुझे  लगा कि  इस  व्यक्ति  के   अन्दर  सही  धर्मात्मा  होने  का  भाव  है  l  "  राजा  ने  उससे  पूछा  --- "  तुम  कोई  धर्म  का  काम  करते  हो  ? "  वह  आदमी  बोला  -महाराज  !  मैं  एक  गरीब  किसान    हूँ  , अनपढ़  हूँ  , धर्म , कर्म  कुछ  जानता  नहीं  हूँ  l  यदि  कोई  जरूरतमंद , रोगी , दुःखी , अभावग्रस्त  दीख  पड़ता  है  तो  यथाशक्ति  उसकी  मदद  अवश्य  करता  हनल "  यह  सुनकर  राजा  ने  उस  तीसरे  पुत्र  से  कहा --- "  कुछ  पाने  की  आशा  किए  बिना  सचे  ह्रदय  से  दूसरों  की  सेवा  करना  ही  धर्म  है  l  तुम  ही  सच्चे  धर्मात्मा  को  लेकर  लौटे  हो  l  तुम्हे  मनुष्यों  की  पहचान  है  , इसलिए  तुम्हे  ही  राजगद्दी  का  उत्तराधिकारी  नियुक्त  किया  जाता  है  l "  

WISDOM -----

  एक  व्यक्ति  ने  सुन  रखा  था  कि  तप  करने  से  अहंकार  मिट  जाता  है  l  क्रोध  चला  जाता  है  l  वह  घर  छोड़  के  हिमालय  चल  दिया  l   जंगलों  के  पार  बर्फीली गुफाओं  में  बैठकर  साधना  करने  लगा  l  उसे  ऐसा  करते  बीस  वर्ष  बीत  गए ,  वह  अकेला  ही  रहता  था  l   उसे  अहंकार  व  क्रोध  का  मौका  ही  नहीं  मिलता  था  l  उसने  सोचा  ---चलो  अहंकार  से  छुटकारा  मिला  l  अब  वापस  लौट  चलना  चाहिए  l  वह  गुफा  से  निकलकर  नीचे  आया  ,  जब  लोगों  को  पता  चला  कि  वह  बीस  वेश  तक  हिमालय  की  गुफाओं  में  तप  का  के  आया  है  ,  तो  भीड़  इकट्ठी  होने  लगी  l  उसके  दर्शनों  के  लिए  लोग  आते ,  पैर  छूते , परिक्रमा  करते  l  महात्मा  के  मन  में   ऐसा  सम्मान  पाकर  गुदगुदी  होती  l  एक  दिन  भक्तों  ने  कहा  --- चलें  कुम्भ  स्नान  कर  के  आएं  l  महात्मा  चल  पड़े  l  मेला -ठेला  की  भीड़  में   उनके  पैर  पर   जमकर   किसी  का  भूलवश  पैर  पड़  गया  l  महात्मा  तिलमिला  गए  और  उछलकर  उस  व्यक्ति  की  गर्दन  पकड़  ली   और  बोले  ---- "  जानता   नहीं  दुष्ट  , मैं  कौन  हूँ  ? "  महात्मा  के  अंदर  छुपा  अहंकार  और  क्रोध  भी  उछलकर  ऊपर  आया  l  लोग  हैरान  हो  गए   कि  ये  कैसा  महात्मा  है  ?  कोई  जानबूझकर  पैर  तो  नहीं  रखा  है  , जो   इतना  आगबबूला   हो  गया l     ऋषि  कहते  हैं  ---- यदि  व्यक्ति  अपने  पर  ही   नियंत्रण  न  कर  पाए  तो  उसकी   एकांत  साधना , तप  तितिक्षा  सब  व्यर्थ  है  l  सच्ची  साधना  जंगल  में  नहीं  संसार  में  रहकर  होती  है  , जहाँ  मन  को  विचलित  करने  के  अनेक  साधन  हैं  ,  उनके  बीच  रहकर  मन  को  नियंत्रित  कर  शांति  से  रहना  ही  तप  है  l  और  मन  भी  स्वाभाविक  रूप  से  नियंत्रित  होना  चाहिए  ,  उसे  बलपूर्वक  नियंत्रित  करने  के  दुष्परिणाम  हो  सकते  हैं  l  

3 January 2025

WISDOM -----

   सुख -शांति  से   और  तनावरहित  जीवन  जीने  का  एक  महत्वपूर्ण  सूत्र  हमारे  धर्मग्रंथों  में  और  पुराण  की  विभिन्न  कथाओं  के  माध्यम  से  हमें  समझाया  गया  है  l----  तनावरहित  जीवन  जीने  के  लिए  हमें  यह   स्वीकार  करना  होगा  कि  हमारा  वर्तमान  जीवन  केवल  यह  एक  ही  जीवन  नहीं  है  बल्कि  युगों  से  चली  आ  रही  हमारी  यात्रा  का  एक  पड़ाव  है  l  इस  वर्तमान  जीवन  में  हमें  जो  भी  सुख -दुःख , मान -अपमान , हानि -लाभ   मिल  रहा  है  वह  हमारे  ही  कर्मों  का  परिणाम  है  l  कभी -कभी  ऐसा  भी  होता  है  कि  हम  किसी  का  अहित  नहीं  कर  रहे , सन्मार्ग  पर  चल  रहे  हैं   फिर  भी   हमें    जीवन  में  बड़े  दुःख , अपमान , तिरस्कार , धोखा , छल -कपट , मानसिक  उत्पीड़न   सहन  करना  पड़ता  है  l  इस  सत्य  को  स्वीकार  करने  से  आत्मा  में  वह  शक्ति  आ  जाती  है  जिससे  हम  बड़े  धैर्य  के  साथ  अपना  कर्तव्यपालन  करते  हुए  और   सत्कर्म  करते  हुए  अपने  कर्मों  के  भार  को  काटते  हैं  l  मन  में  यह  अटूट  विश्वास  होता  है  कि  वर्तमान  के  सत्कर्म   जन्म -जन्मान्तर  के  कर्म  भार को  कम कर  देंगे  और  फिर  जीवन  में  सुनहरा  सूर्योदय  अवश्य  होगा l  जो  पुनर्जन्म  और  इस  यात्रा  में  विश्वास  नहीं  रखते   उनके  लिए  भी  यह तर्क  अपने  तनाव  को  कम  करने  के  लिए  अच्छा  है  क्योंकि  दवाई  और  इंजेक्शन  से   तनाव  को  जड़  से   समाप्त  नहीं  किया  जा  सकता  , मन  को  समझाना  जरुरी  है  l  दूसरा  पक्ष  जो  अत्याचार   करता  है  , लोगों  को  उत्पीड़ित  करते  हैं  ,  उन्हें  भी  यह  समझना  चाहिए  कि  वे  भगवान  नहीं  हैं  जो  किसी  को  उसके  किसी  जन्म  में  किए  गए कर्मों  का  फल  दे  रहे  हैं l  यही   व्यवहार    जब  उनके  साथ  दोहराया   जाए  तो  उन्हें  कैसा  लगेगा  l  मनुष्य  केवल  कर्म  कर  सकता  ,  उन  अच्छे  या  बुरे  कर्मों  का  फल  हमारी  जीवन  यात्रा  के  किस  पड़ाव  पर  ,  किसके  माध्यम  से   और  किस  प्रकार  मिलेगा  यह  काल  निश्चित  करता  है  l  मनुष्य  के  हाथ  में  उसका  वर्तमान  है  ,  सत्कर्म  करते  हुए  सन्मार्ग  पर  चलकर  सुन्दर  भविष्य  का  निर्माण  किया  जा सकता  है  l  

WISDOM ------

   स्वामी  रामतीर्थ  अमेरिका  पहुंचे  l  कस्टम  पर  मौजूद  अधिकारी  ने  उनसे  उनके  व्यवसाय  के  बारे  में  पूछा  l  रामतीर्थ  हँसे  और  बोले  ---- "  मैं  बादशाह  हूँ  और  ये  सारी  दुनिया  मेरी  सल्तनत  है  l "  अधिकारी  चकित  हुआ  और  बोला  ---"  आपके  पास  निज  संपत्ति  के  रूप  में   सिर्फ दो  लंगोटियां  हैं  तो  आप  अपने  आपको  बादशाह  कैसे  बोल  सकते  हैं l "  रामतीर्थ  बोले  ----- " अरे  मित्र  ! मैं  बादशाह  इसलिए  नहीं  हूँ  कि  मेरे  पास  अपार  दौलत  है  या  मुझे  उसकी  चाह  है  l  मैं  बादशाह  इसलिए  हूँ  कि  न  मुझे  किसी  चीज  की   चाह    है   और  न  ही  उसकी  आवश्यकता  l  भगवान  ने  मुझे  जैसा  बनाया  है  ,  मैं  उसमे  पूरी  तरह  संतुष्ट  हूँ  l  "                इस  प्रसंग  से  यही  शिक्षा  मिलती  है  कि   हम  सर्वप्रथम  स्वयं  से  प्रेम  करना  सीखें  l  ईश्वर  ने  हमें  जो  कुछ  दिया  ,  हमें  जैसा  भी  बनाया   उसमे   संतुष्ट  रहकर   निरंतर  सत्कर्म  और  कर्तव्यपालन  करते  हुए   अपने  जीवन  को  और  सुन्दर  बनाने  का  प्रयास  करें  l  

2 January 2025

WISDOM -----

 लोगों  के  जीवन  में  तनाव  और  अशांति  का  एक  बड़ा कारण  यह  है  कि  वे  अपनी  उपलब्धियों  को  देखने  के  बजाय  दूसरों  के  जीवन  में  झांकते  रहते  हैं   l  दूसरों  के  पास  जो  कुछ  है  वह  उन्हें  क्यों  मिला  , कैसे  मिला  ,  यह  उन्हें  नहीं  मिलना  चाहिए  l  कोई  खुश  क्यों  है  ?  यही  ईर्ष्या  का  भाव  लोगों  के  तनाव  का  बड़ा  कारण  है  l   इस  ईर्ष्या  के  भाव  में  वे  हर  पल  जलते  रहते  हैं   और  अपनी  सारी  ऊर्जा   स्वयं  को  आगे  बढ़ाने  में  न  लगाकर  दूसरों  को  नीचे  गिराने  में  लगाते  हैं  l  यदि  मनुष्य  ' जियो  और  जीने  दो  '  की  भावना  रखे  और  दूसरों  की  ख़ुशी  में  खुश  होना  सीख  ले  तो  अधिकांश  समस्याएं  हल  हो  जाएँ  l  

1 January 2025

WISDOM ----

   ' जाको  राखे  साइयाँ  मार  सके  न  कोय  ,  बाल  न  बांका  करि  सके  जो  जग  बैरी  होय  l '   यह  भी  एक  आश्चर्य  है  कि  जो इस  संसार  में  निश्चित  है  , मनुष्य  उसी  से डरता  है  l    ' जिसका  जन्म  हुआ  है  उसकी  मृत्यु  निश्चित  है  , फिर  भी  सब मृत्यु  से  ही  डरते  हैं   l  यह  डर  भी  दूर हो  सकता  है   यदि  मनुष्य  सत्कर्म  करे  ,  ईश्वर  की  सत्ता  में  विश्वास  करे  l  प्रत्येक   प्राणी  को  ईश्वर  ने  गिनती  की  साँसे  दी  हैं  जिन्हें कोई  भी  छीन  नहीं  सकता  l    मृत्यु  के  देवता  कभी  भी  जाति , धर्म , ऊँच -नीच , छोटे -बड़े , अमीर -गरीब  का  कोई  भेदभाव  नहीं  करते   l  सब  एक  ही  तरीके  से  खाली  हाथ  जाते  हैं  l  इस  व्यवस्था  से  ईश्वर  संसार  को  यह  समझाना  चाहते  हैं  कि  ऐसे  बिना  वजह के  भेदभावों  में  , लड़ाई -झगड़ों  में अपने  अनमोल  मानव  जीवन  को    व्यर्थ  में न  गंवाओं  l  ऐसे  लड़ाई -झगडे , दंगों  में  मरने  और  मारने  वालों  की  कभी  मुक्ति नहीं  होती  , अकाल  मृत्यु , बीमारी , महामारी  से  मरने  वालों  की  संख्या  बढ़  जाती  है  l  मुक्त  न  होने  के  कारण   भूत   -प्रेत , पिशाच  जैसी  नकारात्मक  शक्तियों  की  संख्या  बढ़ जाती  है  l   ये  नकारात्मक  शक्तियां  अपनी  भूख  मिटाने  के  लिए  लोगों  के  मन  पर  हावी  होकर  ऐसे  ही  युद्ध , हत्या   आदि  अमानवीय   कार्यों  को  जन्म  देती  हैं  l  इतिहास  में  इसके  अनेक  उदाहरण  भी  हैं  l  फिर  आज  के  इस  वैज्ञानिक  युग  में   मनुष्य  की  बुद्धि   का  और  बुद्धि  के  साथ   स्वार्थ  का  इतना  अधिक  विस्तार  हो  गया  है  कि    रावण , मारीच , घटोत्कच जैसे  असुरों  की   ' माया '  अब  वैज्ञानिक  तरीकों  से   संसार  को  त्रस्त कर  रही  है  l  मनुष्यों  में  दूसरों  को  अपना  गुलाम  बनाने  की  प्रवृत्ति  होती  है  ,  अब  वे  इन  नकारात्मक  शक्तियों  को  कंट्रोल  कर  अपना  गुलाम  बनाकर   उनसे  अपना  स्वार्थ  सिद्ध  कराते  हैं  l  इन  सबसे  पूरा  वातावरण  प्रदूषित  हो  गया   है  l  इसलिए  हमारे  ऋषियों  ने  , आचार्य  ने  कहा  है  कि  गायत्री  मन्त्र  और  महामृत्युंजय  मन्त्र  से  प्रकृति  को  पोषण  मिलता  है , वातावरण  शुद्ध  होता  है  l  कलियुग  में  मानवता  की  रक्षा  के  लिए  इनका  जप  जरुरी  है  l