' जब तक शक्ति - मन्तों की भुजाओं में बल , वाणी में प्रभाव और विस्तार पर नियंत्रण रहता है , सभी उसे नमन करते हैं , उसके अत्याचार को वीरता , अनीति को चातुर्य और शोषण को आवश्यकता मानते रहते हैं l किन्तु ज्यों ही उनकी वह विशेषताएं समय पाकर क्षीण हो जाती हैं त्यों ही लोगों के मन और द्रष्टिकोण बदल जाते हैं l उनके गुण नीचे पद जाते हैं , उनके उपकार यदि कोई होते हैं तो दब जाते हैं और सारे दोष उभर आते हैं l लोग निर्णायक की तरह उसके जीवन तथा कृत्यों का लेखा - जोखा करने लगते हैं और उससे भी अधिक विपरीत हो जाते हैं , जितने कि अनुकूल थे l '
25 October 2017
23 October 2017
WISDOM -------
' अन्याय और पराधीनता के विरुद्ध आक्रोश तो हर व्यक्ति के मन में होता है , उससे मुक्ति पाने के लिए छटपटाहट भी प्रत्येक ह्रदय में होती है पर सबको किसी एक सार्वजनिक हित के लिए सूत्रबद्ध करके , एक माला के रूप में पिरोने , उनका नेतृत्व करने का साहस विरले ही जुटा पाते हैं l '
20 October 2017
WISDOM -------- अन्याय सहना अन्याय करने से कई गुना बड़ा अपराध है l
' बलवान और शक्तिशाली व्यक्ति यदि संस्कारवान भी होगा तो अनीति और अन्याय की घटनाएँ सुनकर उसका खून खौल ही उठेगा l '
पंख कटे जटायु को गोद में लेकर भगवान राम ने उसका अभिषेक आँसुओं से किया l स्नेह से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए भगवान राम ने कहा ---- " तात ! तुम जानते थे रावण महा बलवान है , फिर उससे तुमने युद्ध क्यों किया ? "
अपनी आँखों से मोती ढुलकाते हुए जटायु ने गर्वोन्नत वाणी में कहा ---- " प्रभु ! मुझे मृत्यु का भय नहीं है , भय तो तब था जब अन्याय के प्रतिकार की शक्ति नहीं जागती ? "
भगवान राम ने कहा ----- " तात ! तुम धन्य हो l तुम्हारी जैसी संस्कारवान आत्माओं से संसार को कल्याण का मार्गदर्शन मिलेगा l "
पंख कटे जटायु को गोद में लेकर भगवान राम ने उसका अभिषेक आँसुओं से किया l स्नेह से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए भगवान राम ने कहा ---- " तात ! तुम जानते थे रावण महा बलवान है , फिर उससे तुमने युद्ध क्यों किया ? "
अपनी आँखों से मोती ढुलकाते हुए जटायु ने गर्वोन्नत वाणी में कहा ---- " प्रभु ! मुझे मृत्यु का भय नहीं है , भय तो तब था जब अन्याय के प्रतिकार की शक्ति नहीं जागती ? "
भगवान राम ने कहा ----- " तात ! तुम धन्य हो l तुम्हारी जैसी संस्कारवान आत्माओं से संसार को कल्याण का मार्गदर्शन मिलेगा l "
19 October 2017
WISDOM ------- अहंकारी की प्रगति जितनी तीव्र होती है , उसका पतन उससे भी अधिक तेज होता है l
रावण का मरा हुआ शरीर पड़ा था l उसमे सौ स्थानों पर छिद्र थे l सभी से लहु बह रहा था l लक्ष्मणजी ने राम से पूछा ----- ' आपने तो एक ही बाण मारा था , फिर इतने छिद्र कैसे हुए ? '
भगवान ने कहा ---- ' मेरे बाण से तो एक ही छिद्र हुआ l पर इसके अपने कुकर्म घाव बनकर अपने आप फूट रहे हैं और अपना रक्त स्वयं बहा रहे हैं l
भगवान ने कहा ---- ' मेरे बाण से तो एक ही छिद्र हुआ l पर इसके अपने कुकर्म घाव बनकर अपने आप फूट रहे हैं और अपना रक्त स्वयं बहा रहे हैं l
18 October 2017
WISDOM
रावण ने कुटनीतिक चाल चली -- बोला --- अंगद ! जिस राम ने तेरे पिता को मारा , तू उन्ही की सहायता कर रहा है l मेरे मित्र का पुत्र होकर भी तू मुझसे वैर कर रहा है l '
अंगद हँसा और बोला ---- " रावण ! अन्यायी से लड़ना और उसे मारना ही सच्चा धर्म है l चाहे वह मेरा पिता हो अथवा आप ही क्यों न हों l "
अंगद के ऐसे तेजस्वी शब्द सुनकर रावण को उत्तर देते न बना l
' सम्बन्ध नहीं , नीति और न्याय का पक्ष ही वरेण्य है l :
अंगद हँसा और बोला ---- " रावण ! अन्यायी से लड़ना और उसे मारना ही सच्चा धर्म है l चाहे वह मेरा पिता हो अथवा आप ही क्यों न हों l "
अंगद के ऐसे तेजस्वी शब्द सुनकर रावण को उत्तर देते न बना l
' सम्बन्ध नहीं , नीति और न्याय का पक्ष ही वरेण्य है l :
16 October 2017
WISDOM ------ जीवन के प्रति सकारात्मक द्रष्टिकोण रखें
यदि कोई अपने जीवन में कुछ करने की ठान ले , तो उम्र उसके कार्य में बाधा नहीं बनती और शरीर की उर्जा उसके कार्य में रूकावट नहीं डालती क्योंकि उसका निश्चय मन से होता है , मन की शक्ति से होता है l इसलिए हर रूकावट को , हर मुश्किल व परेशानी को उसके आगे झुकने के लिए मजबूर होना पड़ता है l इसी मन की शक्ति के कारण लियोनार्डो दि विन्ची ने अपनी प्रसिद्ध पेंटिंग ' मोनालिसा ' 51 साल की उम्र में बनाई और यह उनके जीवन में सबसे अधिक प्रशंसित हुई l
इसी प्रकार प्रखर व्यक्तित्व नेल्सन मंडेला अपने जीवन में लम्बा संघर्ष करते रहे और 75 साल की उम्र के बाद दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने l
इसी प्रकार भारतीय संस्कृति के प्रसिद्ध संवाहक गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी 90 वर्ष की उम में रामचरितमानस को लिखना प्रारंभ कर दिया था l
जिन्दगी को बेहतर बनाने की संभावना सदैव होती है , बस , हमें इस और बढ़ने की जरुरत है l
इसी प्रकार प्रखर व्यक्तित्व नेल्सन मंडेला अपने जीवन में लम्बा संघर्ष करते रहे और 75 साल की उम्र के बाद दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने l
इसी प्रकार भारतीय संस्कृति के प्रसिद्ध संवाहक गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी 90 वर्ष की उम में रामचरितमानस को लिखना प्रारंभ कर दिया था l
जिन्दगी को बेहतर बनाने की संभावना सदैव होती है , बस , हमें इस और बढ़ने की जरुरत है l
15 October 2017
WISDOM ------ शिक्षा एक शक्ति है उसका सदुपयोग करें l
आज ज्ञान - विज्ञान में अग्रणी रूस की प्रमुख शक्ति वहां के प्रत्येक नागरिक का शिक्षित होना है l 1920 से पूर्व रूस में निरक्षरता की स्थिति भयावह थी , किन्तु राज्य सत्ता का हस्तांतरण होते ही निरक्षरता को मिटाने के लिए अथक प्रयत्न किये गए l देश के कोने - कोने में निरक्षरता उन्मूलन केंद्र खोले गए l हर शिक्षित व्यक्ति ने प्रत्येक अनपढ़ को पढ़ाने - लिखाने का संकल्प लिया l उस वक्त वहां के 70 प्रतिशत पुरुष और 90 प्रतिशत महिलाएं अशिक्षित थीं l 71 जन जातियों में से 40 जातियां ऐसी थीं जिनकी कोई भाषा नहीं थी , उन्हें शिक्षित करना बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी l इन लोगों के लिए भाषा का निर्माण हुआ , जगह - जगह स्कूल खोले गए l करोड़ों की संख्या में प्रौढ़ अशिक्षितों को पढ़ाने के लिए स्वयं सेवी शिक्षकों को भावनात्मक स्तर पर तैयार किया गया l प्रत्येक साक्षर एक निरक्षर को पढ़ाये ----- यह रुसी साक्षरता अभियान का प्रमुख नारा था , जिसे पूर्ण करना प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व था l इसके परिणाम स्वरुप 192 0 से 1940 के मध्य पांच करोड़ अनपढ़ों को साक्षर बना दिया l 1970 तक 99.8 प्रतिशत पुरुष और 99 .7 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित हो गईं l
लेनिन का नारा था ---- पढ़ो ! पढ़ो ! पढ़ो ! इसे वहां के नागरिकों ने सत्य करके दिखाया l
लेनिन का नारा था ---- पढ़ो ! पढ़ो ! पढ़ो ! इसे वहां के नागरिकों ने सत्य करके दिखाया l
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