30 March 2018

WISDOM

   वे  सारे  कर्म  जिनसे   आत्मा  का  विकास  हो ,  परमात्मा  का  सामीप्य  प्राप्त  हो  और  संसार  का  हित  साधन  हो  --- जीवन  का  सदुपयोग  है  l  जिसका  फल  पुण्य,  पावनता   और  अनन्त  शान्ति  के  रूप  में   मनुष्य    को  मिलता  है  l
   इसके  विपरीत  सारे  कर्म    और  सारे  मंतव्य   जीवन  का  दुरूपयोग  है ,  उसको  नष्ट  करना  है   l 
   संसार   की  सुख  शान्ति  तथा  सुन्दरता  बढ़ाने  के  लिए  ही   परमात्मा  ने  यह  मानव  जीवन  प्रदान  किया  है   l  इस  मंतव्य  में  ही  इसको  लगाये  रखना   जीवन  की तथा  सम्मान  करना  है   l   

29 March 2018

सजग पत्रकार , समर्थ समाज सेवी ------- पं. इन्द्र विद्दावाचस्पति

  इन्द्र जी  कहते  थे ---- "  इस  समय  आवश्यकता  इस  बात  की  है  कि  सरकारी  कर्मचारियों , मंत्रीमंडल  और  पत्रकारों   तथा   जनता    सबका  चरित्र  का  स्तर  ऊँचा  हो  l  यदि  ऐसा  न  होगा  तो  स्वराज्य  ताश  के  पत्तों   के  मकान  की  तरह  ढह  जायेगा  l  "
  इस  अनिष्टकारी   स्थिति  से   परित्राण  पाने  का  मार्ग  भी  उन्होंने  सुझाया ---- " शिक्षण , द्रष्टान्त  और  प्रचार  से  हम  स्थिति  को  सुधार  सकते  हैं  l   शिक्षा  में  सुधार  हुआ  ही  नहीं  है  l  नैतिक  और  आचरण  सम्बन्धी   बातों  के  प्रचार  की  आवश्यकता  है  l  सबसे  बड़ी  बात  है  द्रष्टान्त  की  l  जनता  वही  करेगी  जो  बड़े  करेंगे  l  त्याग  ऊपर  से  ही  आरम्भ  होना  चाहिए  ,  इसके  लिए  उपदेश  निरर्थक  है  l  "
 ' आज  देश  में  सबसे  बड़ी  आवश्यकता  चरित्र निर्माण  और  नैतिक  जागरण  की  है  l  
  इन्द्र  जी  निर्भीक  पत्रकार    और  निष्ठावान  देशभक्त  थे  l  उनके  पत्रों  ने  राष्ट्रीय  जागरण  का  जो  कार्य  किया  वह  अपने  आप  में  अनूठा  है  l   आज  तो  पत्रकारिता  के  क्षेत्र  में  स्वतंत्र  विचारों  की  हत्या  हो  गई  है  l  यह  कला  आज  पूंजीपतियों  की  क्रीतदासी  बनती  जा  रही  है   l
  इन्द्र जी  का  जीवन  पत्रकारों , आचार्यों  और  समाज सेवियों  के  लिए  आदर्श  है  l  

27 March 2018

WISDOM ---

  नीतिकारों  का  कथन  है ---- दुष्ट  शत्रु  पर  दया  दिखाना  अपना  व  दूसरों  का  अहित  करना  और  सज्जनों  को  दंड  देने  के  समान  है  l  क्योंकि  दुष्ट  तो  अपनी  क्रूरता  और  नीचता  छोड़ता  नहीं  , वह  जब  तक  स्वतंत्र  रहेगा , उसमे  शक्ति  रहेगी  वह  निर्दोष  व्यक्तियों  को  सब  तरह  से  दुःख  और  कष्ट  ही  देगा  l   इसलिए  बर्नार्ड  शा  ने  अपने  एक  लेख  में  लिखा  है --- स्वभाव  से  ही  दुष्ट  और  आततायी  व्यक्तियों  को  समाज  में  रहने  का   अधिकार  नहीं  है   l  उनका  अंत  उसी  प्रकार  कर  देना  चाहिए  जिस  प्रकार  हम  सर्प  और  भेड़िया  आदि  अकारण  आक्रमणकारी   और  घात  में  लगे  रहने  वाले  जीवों  का  कर  देते  हैं  l  

25 March 2018

WISDOM ------ मन:स्थिति बदल जाने पर परिस्थितियों का बदल जाना सुनिश्चित है --- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

  संसार  के  जितने  भी  उन्नत  और  विचारशील  देश  हैं  , वे  सब  एकाएक   ही  उन्नत  या  समृद्ध  नहीं  हो  गए  वरन  उन्हें  ऊँचा  उठाने  के  लिए  कितने  ही  प्रबुद्ध  व्यक्तियों  ने  अपना  असाधारण  योगदान   दिया  है  l   बीसवीं  शताब्दी  के  आरम्भिक  पच्चीस - तीस  वर्षों  तक  रूस  की  तीन चौथाई  से  भी  अधिक  जनसँख्या  अशिक्षित  थी  l  फिर  1917  में  वहां  क्रान्ति  हुई  , जिसे  सफल  बनाने  में  रूस  के  बुद्धिजीवियों  ने   महत्वपूर्ण  भूमिका  अदा  की  l  उस  क्रांति  की  सफलता  के  पीछे  पढ़े - लिखे  विचारशीलों  की  लगन , निष्ठा , परिश्रम  और  त्याग  था  l  उनका  एक  ही  उद्देश्य  था -- राष्ट्र  में  वैज्ञानिकों , लेखकों , कलाकारों  एवं  विशेषज्ञों  के  अभाव  की  पूर्ति  करते  हुए   राष्ट्र  का  नव निर्माण  l  इस  आन्दोलन  में  लेनिन , कोस्तांतिन , इवान  पावलोव  जैसे  व्यक्ति  अगुआ  थे  l  इनके  अथक  परिश्रम  और  अपूर्व  त्याग  का  परिणाम  यह  हुआ  कि  1960  तक  पहुँचते - पहुँचते  प्रत्येक  व्यक्ति   औसत  शैक्षणिक  योग्यता  के  साथ  राष्ट्र  प्रेम  अर्जित  कर  चुका  था  ,  और  आज  रूस  की  सुद्रढ़  स्थिति  से   समूचा  संसार  परिचित  है  l      समाज  का  मस्तिष्क  कहे  जाने  वाले   बुद्धिजीवी  ,    जनमानस  को    जिस  प्रकार  का  मार्गदर्शन  देते  हैं  ,  लोकजीवन  वैसी  ही   धारा  अपनाता  है   l 

24 March 2018

WISDOM ----- ' ऐसा धर्म जो गरीब और असहाय लोगों का गला काटता है -- धर्म नहीं कुधर्म है ---- सन्त खलील जिब्रान

 खलील  जिब्रान  ने   कहा  कि  जो  धार्मिक  सिद्धांत , कर्मकांड   मनुष्यता  से  परे  हैं ,  जिस  पूजा - पाठ  में  मानवता  को  विकसित  होने  के  द्वार  बंद  कर  दिए  हों  , वह  धर्म  नहीं  पाखण्ड  है  l
  ' बढ़ती  हुई  भौतिक  और  वैज्ञानिक  प्रगति  के  साथ   यदि  मानवता  और  अध्यात्मवादिता   को  नहीं  अपनाया  गया   तो  यह  दुनिया   किसी  भी  दिन  विनष्ट  हो  सकती  है  l  ' 
   इस  कटु   सत्य  को   दार्शनिक  खलील  जिब्रान  ने  भली  प्रकार  समझा  था  l   उन्होंने  अपने  ' निफ्स  ऑफ  वेली '  नामक  संग्रह  में  इस  सत्य  को  उद्घाटित  किया  कि --   आनंद  और  सुख  समृद्धि  मात्र  भौतिक  प्रगति  में  निहित  नहीं  है  l  
      धर्म   का  जो   आडम्बर युक्त  स्वरुप  आज  चल  रहा  है  वह  उस  विनाश  और  धरती  पर  निरंतर  बढ़ते   नारकीय  वातावरण  को  रोक  नहीं  सकता   क्योंकि   उसमे  वैचारिक  सम्पदा   और  आध्यात्मिक       प्रेरणा  शक्ति  का  अभाव  होता  है   l  

23 March 2018

WISDOM ------

  ईश्वर किसी  को  सम्पदा , विभूति  अथवा  सामर्थ्य  देता  है  तो  निश्चित  रूप  से  उसके  साथ  कोई  न  कोई  सद्प्रयोजन  जुड़ा   होता  है  l   मनुष्य  को  समझना  चाहिए  कि  वह  विशेष  अनुदान    उसे  किसी    समाज  उपयोगी  कार्य  के  लिए  ही  मिला  है  l  अत:  उस  पर  अपना  अधिकार  न  मानकर  सम्पूर्ण  समाज  का  अधिकार  मानना  चाहिए  l  जहाँ  वह  व्यक्तिगत  सम्पदा - सामर्थ्य  मान  लिया  जाता  है  वहीँ  वह  अहंकार  का  कारण  बन  जाता  है  l  यह  अहंकार  ही  व्यक्ति  के  पतन  का  कारण  बनता  है   l 

22 March 2018

WISDOM --------

 ' स्वार्थी , अनीतिवान  तथा  कायर  व्यक्ति  के  पास   छल ,  कपट  के  सिवाय  और  कोई  सम्बल  नहीं  होता  l  ऐसे  व्यक्ति  अपने  स्वार्थ  के  लिए    शत्रुओं  के  प्रति   तो  बड़े   सच्चे  और   वफादार   रहते  हैं  लेकिन  अपने  देश  और  समाज  के  प्रति  नहीं  रह  पाते   l  जिस  सच्चाई  और  भक्ति  का  प्रमाण  वे  विपक्षियों  के  हित  साधन  में  देते  हैं  ,    उसका  प्रमाण  यदि  वे  देश , धर्म  तथा  समाज   हित  में  दें   तो  उनका  अधिक  सम्मान  व  अधिक   लाभ  हो  सकता  है    लेकिन  जिनके  संस्कार  विकृत  होते  हैं   उन्हें   शत्रुओं  की  चाटुकारी     करने  और  अपनों  को   हानि    पहुँचाने  में  ही  सुख - संतोष  अनुभव   होता  है   l