27 December 2018

WISDOM ------

 रावण    सीताजी  का  अपहरण  कर  जा  रहा  था  ,  जटायु  ने   जब  यह  अत्याचार  देखा  तो   अपनी  भरपूर  शक्ति  से  रावण  पर  आक्रमण  किया  l  युद्ध  में  रावण  ने  जटायु  के  पंख  काट  दिए  ,  जिससे  वह  घायल  होकर  जमीन पर  गिर  पड़ा  l
  पंख  कटे  जटायु  को  गोद  में  लेकर    भगवान  राम  ने   स्नेह  से  उसके   सिर  पर  हाथ  फेरते  हुए  कहा ---- " तात ! तुम  जानते  थे    रावण  मह बलवान  है  ,  फिर  उससे  तुमने  युद्ध  क्यों  किया  ? "
 जटायु  ने  गर्वोन्नत  वाणी  में   कहा ---- " प्रभु  !  मुझे  मृत्यु  का  भय  नहीं  है  ,  भय  तो  तब  था  जब  अन्याय ,  अत्याचार  के  प्रतिकार  की  शक्ति  नहीं  जागती  l  "
  भगवान  राम  ने  कहा ---- " तात  !  तुम  धन्य  हो  l  तुम्हारी  जैसी  संस्कारवान   आत्माओं  से  संसार  को   कल्याण का   मार्ग दर्शन     मिलेगा     l  "

26 December 2018

WISDOM ----- अपने मनोबल को टूटने न दें

   हमारे महाकाव्य हमें  जीना  सिखाते  हैं ----
 आत्मविश्वास   टूटा  तो  सामर्थ्य  चाहे  कितनी ही  प्रचंड - अजेय  क्यों  न  हो  ,  काम  नहीं  आती   और  पराजय  का  मुंह  देखना  पड़ता  है  l 
  अपनी फूटनीति  से    महाभारत  युद्ध  में   दुर्योधन  ने  शल्य  को   कर्ण  का  सारथी बनने  के  लिए   सहमत  कर  लिया  l  कर्ण  ने  कहा  था ---- " यदि  मुझे  शल्य  जैसा  सारथी  मिल  जाये    तो  एक  अर्जुन  तो  क्या  ,  सैकड़ों  अर्जुन  जैसे  वीरों  को  मार  दूंगा  l " 
पांडवों  को मालूम  हुआ  कि  मामा  शल्य  ने  कर्ण  का  सारथी  बनना  स्वीकार  कर  लिया  है  l  शल्य  का  सारथी  बनना  पांडवों  के  लिए  खतरे  से  खाली  न  था   l  बात  कृष्ण  को  मालूम  हुई  l  नीति  निपुण  कृष्ण  ने  शल्य  से  निवेदन  किया  ---- "  कर्ण  का  सारथी    बनने  के  लिए  आप वचनबद्ध  हैं   l  युद्ध  में  कौरवों  का  साथ  दीजिए,  पर  धर्मयुद्ध  के  लिए   आप  मात्र  कर्ण  को  हतोत्साहित  करते  रहिएगा  l  "  शल्य  ने   कृष्ण    का  निवेदन   स्वीकार  कर  लिया   l  इतिहास प्रसिद्ध  है   कि  शल्य  के  हतोत्साहित  करते   रहने  के  फलस्वरूप   ही  कर्ण  का  मनोबल    टूटता  रहा ,   फलत:  वह  हारा  और  मारा  गया  l 
       इस प्रसंग  से  हमें  शिक्षा  मिलती  है   कि  हम  सबके  जीवन  में ,  हमें  उन्नति  के  पथ  पर  आगे  बढ़ने  से  रोकने  के  लिए  अनेकों  शल्य  आते  हैं ,  जो  अपने    छल - बल  से   हमें  हतोत्साहित  करने  का ,  मनोबल  को  गिराने  का  प्रयास  करते  हैं  l  हम  ईश्वर  विश्वासी  बने ,  ईश्वर  विश्वासी  ही  आत्मविश्वासी  होता  है  l  

25 December 2018

WISDOM ---- प्रतिभाशीलों को अपना जीवन बड़ी सावधानी से जीना चाहिए ---- श्रीमद्भगवद्गीता

    गीता में   भगवान  श्रीकृष्ण  कहते  हैं  --- " जैसा  आचरण  एक  श्रेष्ठ  पुरुष  का  होता  है  ,   अन्य    पुरुष  भी  वैसा  ही  आचरण  करते  हैं  l  वह  जैसा भी  कुछ   आदर्श   उपस्थित   करता  है   ,  लोग  उसी  का  अनुसरण  करते  हैं  l 
 जो  मनुष्य   विशिष्ट  श्रेणी  के  हैं  , उनका  आचरण  सारे  समाज  के  उत्थान - पतन  का  कारण बन  सकता  है  क्योंकि  अधिकांश  मनुष्य  अपनी  जीवनचर्या  के   लिए  भी  द्रष्टि   औरों  पर  डालते  हैं  l  आज  समाज  का   इतना  अधिक  नैतिक  पतन  हुआ  ही  इसलिए   है  कि  जनता  भ्रष्ट  आचरण   ही  चारों  ओर  देखती  है  ,  उसे  कहीं  कोई  मार्गदर्शक  तंत्र  दिखाई  ही  नहीं  पड़ता  है   l 
  गीता  में  भगवान  स्पष्ट  रूप से  कहते  हैं  कि  आम  जनता ,   नेता  लोग  जो  कहते  हैं   उसका  नहीं  ,  लेकिन  जो  कुछ  भी  करते  हैं  ,  उसी  का   अनुकरण  करती  है  l
 स्वयं  भगवान  श्रीकृष्ण   अपने  बारे  में  भी  यही  बात  कहते  हैं   कि ---   यद्दपि    संसार  में  उनके  लिए   प्राप्त  करने   को  कुछ  भी  नहीं  है  ,  उन्हें  सभी  कुछ  सुलभ  है   तो  भी  वे  अथक  रूप  से   निरंतर कार्य  करते  रहते  हैं  l  यदि  वे  प्रमाद  करेंगे    तो   अन्य   लोग  भी  उनका  अनुसरण  कर  अपना  जीवन  नष्ट  कर  बैठेंगे   l  भगवान्  कहते  हैं  कि  मैं  अवतार हूँ ,  मैं   जो   चाहूँ  वह  प्राप्त कर  सकता  हूँ  ,  फिर  भी  मैं  कर्म  करता  हूँ   l  वे  कहते  हैं  कि  यदि  मैं  सावधानीपूर्वक  हर  तरह  से  सोच - समझकर  कर्म  न  करूँ  तो   बड़ी  हानि  हो  जाएगी   क्योंकि  मनुष्य  सब  प्रकार  से  मेरे  ही  मार्ग  का  अनुसरण  करते  हैं   l     

24 December 2018

WISDOM ---- भावनाओं और संवेदनाओं के बिना विकास अधूरा है l

 विज्ञानं  की उपलब्धियां   कितनी  ही  व्यापक  और  चमत्कारिक  क्यों  न  हों  ,  पर  यही  सब  कुछ नहीं  है  l  इसके अलावा भी  कुछ    चाहिए  ,  जिसके   अभाव  में  जिन्दगी  पंगु  हो  जाएगी   और वह  है --- गहरी मानवीय  संवेदना   l 
 विज्ञानं  और  तकनीकी  ज्ञान  रेलगाड़ी  और  विमान  की  गति  बढ़ा  सकते  हैं  ,  मारक  यंत्र  बना  सकते  हैं  ,  लेकिन  किसी  समाज  की   चेतना  को  जाग्रत  कर  के   आदर्श  के  बीज  नहीं  बो  सकते   l  संवेदनहीन  मनुष्य  पशुतुल्य  है  l  

23 December 2018

WISDOM ---- जीवन एक व्यवसाय है , इसमें परमात्मा के साथ साझेदारी में घाटे की संभावना नहीं है

   अहंकारी    स्वयं  को  कर्ता  मानता  है  --- जैसे  वही   ब्रह्मा , वही  विष्णु   और   वही    शिव  है   l   अहंकार  उसके  विवेक  का   हरण  कर  लेता  है   l  इस  अहंकार  के  कारण  इतना  बलशाली  होने  पर  भी  रावण  पराजित  हुआ  l   लेकिन  जो  ईश्वर  से  साझेदारी  करते  हैं  ,  जिनमे  कर्तापन  का  अभिमान  नहीं  होता  ,  स्वयं  को  ईश्वर  के  हाथों  का  यंत्र  मानते  हैं  ,  उनके  जीवन  में असफलता  की  कोई  संभावना  नहीं  होती  l                                महाभारत  का  युद्ध  आरम्भ  होने  से  पहले   अर्जुन  और  दुर्योधन  दोनों  ही  भगवान  श्रीकृष्ण  के  पास  मदद  हेतु  गए    l  एक  और   भगवान  श्रीकृष्ण  थे   जो  युद्ध  में  शस्त्र  नहीं  उठाएंगे  और  दूसरी  और   उनकी  विशाल  ,  सुसज्जित  सेना   l  अर्जुन   में  समर्पण  भाव  था  , उसने    सेना  की  और  नहीं  देखा   l भगवान  श्रीकृष्ण   के  हाथों  में  अपने  जीवन  डोर  सौंप दी  l  दुर्योधन  अहंकारी  था  ,  स्वयं  को  सब  कुछ  समझता  था  ,  श्रीकृष्ण  विशाल  सेना  पाकर  गर्व  से  फूला  नहीं  समाया  l
        कर्ण  ने  दुर्योधन  से मित्रता  निभाई  ,  इस  कारण  वह  भी   सेना  के  साथ  था  ,  ईश्वर  के  संरक्षण  से  वंचित  रह  गया  l
  महाभारत  का  युद्ध  समाप्त  हुआ   l  महर्षि  जरत्कारू  के  आश्रम  में    दो  शिष्यों  में  चर्चा  चल  रही  थी   कि---- ' कर्ण  युद्ध  विद्दा  में  अर्जुन  से  श्रेष्ठ  थे ,  दानियों  में  भी  अग्रगण्य  थे  ,  आत्मबल  के  धनी  थे  ,  फिर  भी  क्यों  अर्जुन  से  हार  गए  ?   गुरदेव  ने  स्पष्ट  किया ---- ' अर्जुन  को  नर  और  कृष्ण  को   नारायण  कहा  गया  है   l   नर - नारायण  का  जोड़ा  ही  असुरता  से  जीतता  है   l 
  कर्ण  अर्जुन  की  अपेक्षा  श्रेष्ठ  नर   भले  हो  ,  पर  उसने  अपने  आपको  ही  सब  कुछ  माना  ,  नारायण  को  पूरक  नहीं  बनाया  ,  इसलिए  पूरक  सत्ता  का लाभ  उसे  नहीं  मिल  सका   l  वही  उसकी  पराजय  का  मुख्य  कारण  रहा   l  '
                

22 December 2018

WISDOM ----- संसार की सभी समस्याओं का एकमात्र हल है ---- संवेदना ----- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

 आचार्य  जी का मत  है   कि  अहंकारी  व्यक्ति  संवेदनहीन  होता  है  ,  वह  किसी  की  पीड़ा  को  महसूस  नहीं  कर  सकता   l  अहंकार  आतंक  को  जन्म  देता  है  ,  आत्मीयता   को  नहीं   l    इसलिए    अहंकारी को लोग  ह्रदय से  नहीं  चाहते   l   
 समाज  में  सुख - शान्ति,  खुशहाली  तभी  होगी  जब  लोग  संवेदनशील  होगे   l   समर्थ  और  संपन्न  व्यक्ति  लोगों  के  कष्ट  और  पीड़ा निवारण  का  ह्रदय  से  प्रयास  करेंगे   l  भेदभाव ,  नफरत ,  हिंसा ,  आदि  नकारात्मक   भावनाओं  को  उपेक्षित  कर    संवेदना  और  सद्गुणों  को   महत्व    देने  से  ही  स्वस्थ  समाज  का  निर्माण  संभव  है   l  

21 December 2018

WISDOM ---- नशा ' नाश ' का कारण होता है '

  नशा   चाहे  धन  का  हो , पद  का  हो  या  शराब  का   हानिकारक  है   l  '  सत्ता  का  नशा  संसार  की  सौ  मदिराओं  से  भी   अधिक  होता  है  l  उसकी  बेहोशी  सँभालने  में  एकमात्र   आध्यात्मिक  द्रष्टिकोण  ही   समर्थ  हो  सकता  है   l  अन्यथा  भौतिक  भोग  का  द्रष्टिकोण  रखने  वाले   असंख्य  सत्ताधारी   संसार  में  पानी  के  बुलबुलों  की  तरह   उठते  और  मिटते  रहे  हैं   और  इसी  प्रकार   बनते  और  मिटते  रहेंगे   l  '
     पुराण  की  यह  कथा   बताती  है  कि  व्यक्ति     चाहे  धरती  पर  हो  अथवा  स्वर्ग  में   ,  यदि  उसमे  अहंकार  पैदा  हो  गया  है   तो  उसकी  बुद्धि ,  दुर्बुद्धि    बदल  जाती  है  l  दुर्बुद्धि ग्रस्त  व्यक्ति    स्वयं  ही  अपने   नाश  का  जिम्मेदार  होता  है  -------
       त्वष्टा     का  वध  करने  के  कारण  इंद्र  को  पाप  लगा   l  तपस्या     करने  का  आदेश  मिला    l  नहुष  को  इंद्र  बनाया  गया  l  इन्द्रासन  पाते  ही  उसमे  अहंकार  आ  गया   l  बोला --- "  अब  मैं  इंद्र  हूँ  ,  इसलिए  शची  को मेरी  सेवा  में  भेजो ,  वह  इन्द्राणी  है  l  " 
  शची  ने    युक्ति  से  काम  लिया  और  कहला  भेजा  कि---' यदि   नहुष   पालकी  में  बैठकर   जिसे  सप्त ऋषि  ढोयें,   उसके  महल  में  आयें   तो  वह   उनका  आदेश  स्वीकार  करेंगी  l  "
  एक  तो  सत्ता  का  नशा    और  कामांध ,  उसने  सप्त ऋषियों  को  पालकी  ढोने  का  आदेश  दिया   और  पालकी  में  बैठकर  शची  से  मिलने  चला   l  व्याकुलता  इतनी  कि  उसने  अगस्त्य  ऋषि  को  एक  लात   मारी  और  कहा  ---- सर्प - सर्प ,  तेज  चलो , तेज  l  "  ऋषियों  को  क्रोध  आ  गया  , उन्होंने  पालकी  पटक  दी   और  कहा --- " मूर्ख  राजा  !  जा  तू  सर्प  बनकर  धरती  पर  जन्म  ले   और  कोटर  में  निवास  कर  l  तेरी  यही  सजा  है  l  " 
  अहंकारी  व्यक्ति  अपना  ही  अहित  कर  लेता  है  l