17 July 2020

WISDOM ----- अहंकारी को चैन नहीं होता

   दुर्योधन  को  अहंकार  दिखाए  बिना  चैन  नहीं  पड़ता  था  l   पांडव  वनवास  में  थे  l   दुर्योधन  को  महलों  में  भी  संतोष  नहीं  हुआ  ,  अपने  वैभव  का  प्रदर्शन  करने   जंगल  के  उसी  क्षेत्र  में  गया  ,  जहाँ  पांडव  रह  रहे  थे  l   वहां  अपने  को  सर्वसमर्थ  सिद्ध  करने  के  लिए   मनमाने  ढंग  से  जश्न  मनाने   लगा  l   अहंकारी  में  शालीनता  और  सौजन्य  नहीं  होता   l   वह  अपने  आगे  किसी  को  कुछ  नहीं  समझता  l  उसी  क्रम  में  कौरव  गंधर्वों  के  सरोवर  को  गन्दा  करने  लगे  l   क्रुद्ध  होकर  गंधर्व राज  ने  उन्हें  बंदी  बना  लिया  l   जब  युधिष्ठिर  को  इस  बात  का  पता  चला    तो  उन्होंने  अर्जुन  को  भेजकर    अपने  मित्र  गंधर्व राज  से  उन्हें  मुक्त  कराया  l   दुर्योधन  को  शर्म  से  सिर   झुकाना   पड़ा  l 

WISDOM -----

  इनसान   और  जानवरों  में  एक  बड़ा  अंतर  यह  है   कि   इनसानों   में  महत्वपूर्ण  बनने  की  आकांक्षा  होती  है  l   सहानुभूति  और  ध्यान  आकर्षित  करने  तथा  महत्वपूर्ण  होने  का   अनुभव  करने  के  लिए   कई  बार  लोग  बीमार  होने  का  बहाना  भी  करते  हैं   l
महत्वपूर्ण  होने  का  एक  तरीका  यह  भी  है   कि   अपने  आस - पास  के  लोगों  को  सच्ची  प्रशंसा  देकर   बड़ा  चमत्कार  किया  जा  सकता  है  l   चार्ल्स  श्वाब   एक  ऐसे  व्यक्ति  का  नाम  है  ,  जिसने  सहानुभूति  और  सच्ची  प्रशंसा  द्वारा   लोगों  के  दिलों  पर  राज  किया  l   एंड्र्यू  कारनेगी   ने   चार्ल्स  श्वाब   को   एक  साल  में  दस  लाख  डॉलर   से  भी  अधिक  की  तनख्वाह  दी  l   इसका  कारण  श्वाब   ने  बताया  कि   वे  लोगों  के  साथ  व्यवहार  करने  की  कला  में  निपुण  थे  l   श्वाब   का  कहना  था  कि   मैं   मानता  हूँ  कि   मेरी  सबसे  बड़ी  पूंजी    अपने  कर्मचारियों  की   उत्साह  बढ़ाने   की  कला  है    और  मैं  सराहना  और  प्रोत्साहन   के  द्वारा  लोगों  से  श्रेष्ठ   प्रदर्शन  करवा  लेता  हूँ   l "  

16 July 2020

WISDOM ------

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- ' मनुष्य  मूलत:  संवेदनशील  प्राणी  है   किन्तु    हीन   परिस्थितियों  और  संगति   में   पड़कर  वह   आक्रामक  और  पशुभावों   को  अपनाकर  पशु तुल्य  प्रतीत  होने  लगता  है  l  '
मनुष्य   स्वभावत:  कठोर  नहीं  है    परन्तु  आज  समाज  में  विषमता  इस  कदर  बड़ी  है   कि   विवशता  में  पड़कर   व्यक्ति   असुरता  और  आक्रामकता  की   ओर   फिसल  पड़ता  है  l   किसी  के  पास  कुबेर  जैसी  संपति   है   तो  कहीं  भूखों  मरने  की  नौबत  है  l   पेट  की  ज्वाला    व्यक्ति  को  बुरे  कामों  की  ओर   ले  जाती  है   और  उसे  इनसान   से  शैतान  बना  देती  है  l
सबसे  बड़ी  समस्या  यह  है  कि  जिनके  पास  शक्ति  है ,  अपार  धन - संपदा   है  ,  उनकी  तृष्णा , लोभ - लालच  किसी  तरह  कम   नहीं  होता   l   वे  अपनी  संपदा ,  अपनी  शक्ति  को  और  ---- और  अधिक  बढ़ाना  चाहते  हैं  ,  इसके    लिए  भ्रष्टाचार , बेईमानी  ,  कमजोर  का  शोषण  आदि  अनैतिक  तरीके  अपनाते  हैं  l   गरीब  और  कमजोर  तो  अपनी  रोटी - रोजी  की   चिंता   में  ही  घुल  रहा  है  ,  वह  किसी  को  क्या  परेशान    करेगा   l   आज  संसार  में  जो  समस्याएं  हैं  वे  अमीरों  और  शक्तिसम्पन्न  लोगों  की  देन   हैं   l   उनकी  विकृत  और  असीमित  महत्वाकांक्षाओं   का  परिणाम  सामान्य - जन  भुगतता  है  l
  हर  क्रिया  की  प्रतिक्रिया  होती  है  l  दमन , शोषण  , उत्पीड़न  और  अत्याचार    की  प्रतिक्रिया   समाज  में  क्रोध ,  आक्रामकता  आदि  विभिन्न  रूपों  में  दिखाई  पड़ती  है  l 

15 July 2020

WISDOM -------

पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है  कि ----' संसार  की  समस्याओं  का  एकमात्र  हल --- संवेदना  है  l   औरों  का  दुःख  जिसे  अपना  लगता  हो  ,  वही  अपनी  संवेदना  के  प्रवाह  से  औरों  को  संवेदनशील  बनाने  की  क्षमता  रखता  है  l '
  स्वयं  को   विकसित  और   सभ्य   कहलाने  वाला  मनुष्य  संवेदनहीन  है   ,   इसी कारण  वह  अपनी  शक्ति , साधन  और  ज्ञान  का  उपयोग  अपने  स्वार्थ  और  अपनी  महत्वाकांक्षा    पूर्ति  के   लिए  करने  लगा  है  l  शक्ति  के  दुरूपयोग  ने  किस  प्रकार  मानवता  को  हानि  पहुंचाई  है ,  यह  संसार  कई  बार  देख  चुका   है  l
   महान  वैज्ञानिक  आइन्स्टीन   ने  विज्ञानं  की  साधना  एक  तपस्वी  के  रूप  में  की  थी  ,  लेकिन  जब  उसे  ही  मानव  जाति   के  विनाश  में  प्रयुक्त  होते  देखा   तो  उनकी  आत्मा  बिलख  उठी  थी  l   वे  इस  दुःख  को  भुलाने  के  लिए   कभी - कभी  संगीत  का  सहारा  लिया  करते  थे  l  वे  एक  अच्छे  वायलिन वादक  थे  l   वायलिन  बजाते  तो  ऐसी  दर्दीली   धुनें  निकालते   कि   उनका  अपना  दर्द  उस  प्रवाह  में  खो  जाता  l   उन्होंने  विज्ञान   को   मानव - सेवा  का  एक  साधन  मानकर  ही  अपनाया  था  , साथ  ही  विश्व बंधुत्व  और  विश्व शांति  के  लिए   एकनिष्ठ  होकर  कार्य  किया  था  l 

13 July 2020

 डॉ. सत्येन बसु   भारत  के  उन  गिने - चुने   वैज्ञानिकों  में  माने  जाते   हैं  जिन्होंने  अपना  जीवन   विज्ञान   के  साथ   समाज - सेवा  और  पीड़ित  मानवता  के  उत्कर्ष  में  लगाया   l  1958  में  वे  लन्दन  की  रॉयल -सोसायटी  के  फैलो  भी  रहे  l   उनकी  प्रतिभा  से  प्रभावित  होकर   मैडम  क्यूरी  ने  भी  उन्हें   अपनी  प्रयोगशाला  में  काम  करने  को  आमंत्रित  किया   l   इस  आमंत्रण  पर  वे  एक  वर्ष  के  लिए  पेरिस  गए  l  उन्हें  कई  विश्वविद्दालयों  ने  मानद - उपाधियाँ  दीं ,  लेकिन  वे  कभी  भी   डिग्रियों  या  प्रशस्ति पत्र  को  लेकर   कहीं  आर्थिक  संरक्षण  मांगने  नहीं  गए   l  अपने  प्राध्यापक  जीवन  में  ही  खुश  रहकर   उन्होंने  विज्ञान   की  यथा शक्ति  सेवा  की  l
   डॉ. बसु   का  कहना  था --- 'वैज्ञानिक  होने  से  पहले  मैं  मनुष्य  हूँ   और  अपना  देश  , जिसमे  मैं  जन्मा , पला  और  बड़ा  हुआ   उसका  सेवक  रहने  में  गौरव  अनुभव  करता  हूँ  l धर्म  और  विज्ञान   के  समन्वय  से  ही  इस  देश  का   उद्धार  हो  सकेगा  l '
वैज्ञानिक  प्रतिभा  के  साथ  वे  समाज  सेवा  में  भी  सक्रिय   थे  l  1936   में  वे  जब  ढाका  विश्वविद्दालय  में  प्रोफेसर   थे , उस  वर्ष  जब  ढाका  में   साम्प्रदायिक   दंगे  हुए   तो  प्रयोगशाला  से  निकल  कर  उन्होंने  सैकड़ों  स्त्री - बच्चों  को  बचाया  l    1946   में  जब  कलकत्ता में   दंगे  हुए  तो  वे  अपनी  कार  लेकर  लोगों  को  बचाते  रहे  l   जब  नेताजी  सुभाषचन्द्र  बोस  ने   बर्लिन  से  भारत  की  जनता   के  नाम  अपना  प्रथम  रेडियो  भाषण  दिया    तो  उसे  गुप्त  रूप  से   भारत  में  प्रसारित  करने  की  व्यवस्था  डॉ. बसु   ने  ही  की  थी  l   उस  समय  डॉ. बसु   ने  ढाका  विश्वविद्दालय  की  प्रयोगशाला  में   उच्च  शक्ति  संपन्न   रिसीवर  पर  वह  भाषण  सुना   और  टेप  किया  तथा   इसके  बाद  ही   वह  भाषण  सारे  भारत   में  प्रचारित  किया  गया  l 

12 July 2020

WISDOM ------ पुरानी आदतें जाती नहीं

व्यक्ति  कोई  भी  काम  चाहे  अच्छा  हो  या  बुरा  एक  लम्बे  समय  तक  करता  है  तो  वह  उसकी  आदत  बन  जाती  है   और  यह  आदत  ही  उसकी  पहचान  बन  जाती  है   l   एक  कथा  है  ---- एक  सेठ  था  , उसका  व्यापार       दूर - दूर  तक  फैला  था   l    गाँव  के  लोग  उससे  बहुत  धन  उधार  लेते  थे  , इस  वजह  से  वह  उन  पर  दबाव  बनाकर  रखता  था   और  सीधे - सादे  ग्रामीणों  पर  अत्याचार  भी  बहुत  करता  था  l   गाँव  के  लोग  बहुत  दुःखी   थे  l  जब  आपस  में  बात  करते  तो  उसके  लिए ' कसाई ' शब्द  का  इस्तेमाल  करते  l   उनका  वार्तालाप  सुनकर  बच्चे  भी  उसे ' कसाई ' कहने  लगे   l  सब  उससे  डरते  भी  थे  l   एक  दिन   जब  वह   गांव  में  भ्रमण  के  लिए  निकला   तो   छोटे - छोटे   बच्चे  उसे  देखकर  चिल्लाकर  भागे  कि  'कसाई ' आ  गया  l   सेठ  ने  बच्चों  से  तो  कुछ  कहा  नहीं  , लेकिन  उसे  बहुत  बुरा  लगा  l
  वह  अपने  आपको  अच्छा  सिद्ध  करना  चाहता  था  l   उसने  अन्य  गांवों  के  अमीरों  के  साथ  मिलकर  एक  संस्था  बना  ली   और  सब  गांवों  में  यह  बात  लोगों  को  समझा  दी  कि   अब  वह  संस्था   सब  गांवों  की  समस्या  हल  करेगी  ,  जरुरत  पड़ने  पर  धन  भी  उधार   देगी  l
अब  उस  सेठ  ने  अपने  गांव  में  स्कूल , अस्पताल  खुलवा  दिए  ,  पानी   आदि  की  व्यवस्था  करा  दी  l   अब  गांव  में  उसकी  तारीफ  होने  लगी  , सब  उसे  सम्मान  देने  लगे  l   पुरानी   बातें  भूल  गए  l   लेकिन  गांव  में  अत्याचार , अपराध  बहुत  बढ़  गए  , जनता    त्रस्त   थी  l   उस  गांव  का  एक  युवक    शहर  से  अध्ययन  समाप्त  कर  लौटा    तो  उसने  देखा  कि   गांव  में  बहुत  सन्नाटा  है , लोग  भयभीत  हैं  l  उसने  अन्य  युवकों  के  साथ  मिलकर  सब  पता  किया  तो  समझ  में  आया  कि   संस्था   का  तो  केवल  नाम  है  ,     उसी  सेठ  की  मनमानी  चलती  है   और  संस्था  की  आड़  में  वह  और  अत्याचार  करता  है  l   अब  गांव  वालों  को  समझ  में  आया  कि    अच्छे  होने  का  दिखावा  करने  से  कोई  अच्छा  नहीं  होता  ,  बुरी  आदत  छूटती   नहीं  ,  मौका  मिलने  पर  और  बढ़  जाती  है  l   अब  सब  गांवों  के  लोग  उसके  विरुद्ध  संगठित  हो  गए  ,  तब  उन्हें  उसके  जाल  से  मुक्ति  मिली  l 

WISDOM -----

  मनुष्य  स्वयं   जाने - अनजाने  में   अपने  को  मारने  का  प्रयास  कर  रहा  है  l   कुछ  समय  पूर्व  बीमारियाँ   गंदगी  और  कुपोषण  की  वजह  से  होती  थीं  l   हैजा  आदि  से  कई  गाँव , शहर  समाप्त  हो  जाते  थे  l   आज  संसार  में  जो  भी  समस्या  है   उसके  मूल  में  कारण  विज्ञान   है  l कहते  हैं  ज्योतिषी  किसी  का  भाग्य  देखते  हैं  ,   यदि  कुछ  अशुभ  होता  है  , तो  वे  उसे  बताते  नहीं ,  अपने  मन  में  रखते  हैं  l
 यही  बात  वैज्ञानिक  आविष्कारों  पर  लागू  हो  तो   मनुष्य  सुख - शांति  से  जी  सकता  है  l
  वैज्ञानिक  अच्छी  तरह  जानते  हैं  कि  कौन  सी  तकनीक    वायुमंडल  को  प्रदूषित  कर  देगी  ,  उससे  निकलने  वाली  अदृश्य  रेडिएशन   मनुष्यों  के  अस्तित्व  के  लिए  खतरनाक  हैं  l   कौनसे  खाद , बीज , कीटनाशक  जमीन   को  बंजर  कर  देंगे ,   परमाणु - शक्ति   पशु - पक्षी , वनस्पति , मानव  सभी  के  लिए  हानिकारक  हैं  ,  तो  ज्योतिषियों  की  भांति  यह  ज्ञान  उन्हें  अपने  हृदय  में  ही  रखना  चाहिए  l   इस  संसार  में  भांति - भांति  के  लोग  हैं  l   कुछ  लोग  बहुत  महत्वकांक्षी  होते  हैं  ,  वे  वैज्ञानिकों  के  इस  ज्ञान  को  खरीद कर  , उसका  उपयोग  अपनी  महत्वाकांक्षा  की  पूर्ति  के  लिए  करते  हैं   l
 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  लिखा  है  ---- ' महत्वाकांक्षा  विकृत  होकर  घृणित   रूप  ले  लेती  है  l '
     इस  संसार  में  प्रत्येक  व्यक्ति  चाहे  अमीर   हो  या  गरीब , बीमार  हो  या  स्वस्थ , वृद्ध  हो  या  युवा  ,  किसी  भी  जाति , किसी  भी  धर्म  का  हो  सब  जीना  चाहते  हैं   और  सभी   अपने  हिसाब  से  अपने  जीवन  की  रक्षा  करते  हैं  l   पशु - पक्षी  भी  अपनी  रक्षा  करना  जानते  हैं  ,  उन्हें  किसी  के  आदेश  की  ,  किसी  से  कुछ  सीखने  की  आवश्यकता  नहीं  होती   l
 अध्यात्म  में  कोई  रूचि  और  विश्वास  न  होने  के  कारण   ऐसे    महत्वाकांक्षी     व्यक्ति  अपनी  शक्ति , धन  और  बुद्धि  का  उपयोग    लोगों  पर  अपनी  हुकूमत  कायम  करने  के  लिए  करते  हैं  l   ईश्वरीय  सत्ता  को  नकार  कर  प्रकृति  को  भी  अपने  ढंग  से  चलाना   चाहते  हैं  l   इसी  का  दुष्परिणाम  हम  संसार  में  विभिन्न  आपदाओं  के  रूप  में  देखते  हैं   l   जब    तक  बुद्धिजीवी   , विचारशील  वर्ग    आधुनिक  तकनीकी   के  दुष्परिणामों  के  प्रति  जागरूक  नहीं  होगा   , संसार  इसी  तरह  अपनी  मृत्यु ,  आत्महत्या ,  पागलपन ,  तनाव  और  घातक  बीमारियों  के  साधन   जुटाता  रहेगा  l