24 July 2020

WISDOM ----

  श्रीमद्भगवद्गीता   में  भगवान   कहते  है --- सामान्य जन  के  जीवन  में  जब  कोई  दुःख  आता  है  ,  कोई  बीमारी  आती  है , कोई  असफलता  घटित  होती   है   तो  सामान्य - जन  यही  सोचते  हैं  कि   किन्ही  दूसरे  लोगों  की  शरारत ,  षड्यंत्र  के  कारण  हम  कष्ट  पा  रहे  हैं  l   अज्ञानी  हमेशा  दूसरों  को  दोषी  ठहराता   है  l   लेकिन  जो  ज्ञानी  है   वह  जीवन  के  प्रत्येक  दुःख  में   दूसरों  के  नहीं  अपने  दोष  ढूंढ़ता   है  l
  यदि  दुःख , पीड़ा   और रोग  आदि  में   हमें  अपनी  कमियां ,  अपने  दोष   समझ  में  आने  लगें  ,  हम  इन्हे  खोज  सकें   तो  फिर  हम   आगे  ऐसी  गलतियाँ   नहीं  करेंगे  l   जिन  दोषों  की  वजह  से  हमारा  जीवन  दुःखों   से  भर  गया  ,  हम  पुन:  वे  गलतियां  नहीं  करेंगे   और  हमारा  मन  संस्कारित  होने  लगेगा  l
   लेकिन  अज्ञानी  जो  अपने   दुःखों   के  प्रत्येक  कारण  को   दूसरों  में  ढूंढ़   रहा  है  ,  उसके  लिए  दुःखों   के  कारणों  को  हटाना  असंभव  होगा  l 

WISDOM ---- संसार की समस्त समस्याओं का एकमात्र हल है ---- संवेदना

   संवेदना  का  अर्थ  यही  है  कि   हम  दूसरे  का  दुःख ,  उसकी  पीड़ा  को  समझें  और  निःस्वार्थ   भाव  से   उसकी  पीड़ा  को  दूर  करने  का  प्रयत्न  करें  l -----  एक  किसान  अत्यंत  गरीब  था  l   एक  रात  वह  अपने  बच्चों  को  भूख  से  पीड़ित  न  देख  सका   तो  वह  पड़ोस  के  किसान  के  बाड़े   से  एक  गाय  खोलकर  ले  आया  l   सवेरा  होने  से  पहले  उसने   गाय  का  दूध  दुहकर  बच्चों  को   पिला   दिया   l
 सवेरे  पड़ोसी   किसान  ने  देखा  कि   एक  गाय  कम  है   तो   उसने  जांच - पड़ताल  की  l   ढूंढ़ने   पर  गाय   गरीब  किसान  के  आंगन  में  बंधी  मिली  l  वह  किसान  द्वारपाल   को  बुला  लाया  l   द्वारपाल  ने  पूछताछ  आरम्भ  की   तो  गरीब  किसान  ने  कहा   कि   गाय  उसी  की  है  ,  पर  ऐसा  कहते  हुए   उसकी  आँखें  नीची  हो  गईं  l   पड़ोसी   किसान  ने  देखा  कि   गरीब  किसान  के  घर  खाने  को  कुछ  भी  नहीं  है    तो  वह  बोला ---- गाय  उसकी  नहीं  है  ,  शायद  गरीब  किसान  की  ही  होगी  l   '  उसके  साथ  आए   लोगों  ने   उससे  झूठ  बोलने  का  कारण  पूछा   तो  वह  बोला  --- " मैं  सच  बोलता  तो  मेरी  गाय   मुझ  तक  लौट  आती  ,  पर  वह  किसान  और  उसके  बच्चे   भूखे  रह  जाते   l "
  किसी  की  भलाई  के  लिए  कहा  गया  झूठ  सच  से   बढ़कर  होता  है   l 

23 July 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  लिखा  है --- ' जिन्हे  हम  बुरी  वस्तुएं  समझते  हैं  ,  जिन  बातों  को  हम  अप्रिय  समझते  हैं ,  उनमे  हमारी  जागरूकता ,  चेतना  और  विवेक - बुद्धि  को  जाग्रत  करने  की  शक्ति  होती  है   l   उससे  अनुभव  बढ़ता  है , समझदारी  आती  है  l  यदि  बुरी  बातें  दुनिया  में  न  हों   तो  अच्छी  को  , श्रेष्ठता  को  अनुभव  करने  का  अवसर  लोगों  को  न  मिले   और  निष्क्रियता  अवं  जड़ता  बढ़ने  लगे  l   इस  प्रकार  जब  हम  गंभीरता पूर्वक  विचार  करते  हैं   तो  हमें  बुराई  के  गर्भ  में  भी    श्रेष्ठता  प्रतीत  होती  है  l   उसके  कारण  हमारी  अच्छाइयों  को   विकसित  होने  का  अवसर  मिलता  है   l   इस  प्रकार  वह  बुराई  भी    हमारी  श्रेष्ठता  को  बढ़ाने  का  हेतु  बनती  है  l "

WISDOM -----

  " सत्य  अकेला  नहीं ,  प्रेम  और  न्याय  को  भी  साथ  लेकर  चलता  है  l  इसी  प्रकार  असत्य  के  साथ   पतन  और  संकट  के  सहचरों  की  जोड़ी  चलती  है   l  "
      "  निर्भय  और  सबल  व्यक्ति  हिंसा  नहीं  करता  l   वह  अहिंसा  पर  विश्वास  करता  है  ,  क्योंकि  इसके  मूल  में  प्रेम  की  भावना  कार्य  करती  है  l   प्रेम  में  हिंसा  का  स्थान  कहाँ  ?  "
      हजरत  उमर   ने  एक  व्यक्ति  को  किसी  प्रदेश  का  शासक  नियुक्त  किया  l  इसके  बाद  खलीफा  एक  पड़ोसी   के  बच्चे  को  खिलाने   लगे  l   उसे   हँसाने   के  लिए  मुँह   बिचकाने   और  तरह - तरह  की  जानवरों  की  बोलियाँ   बोलने  लगे  l
  नव - नियुक्त  शासक  आश्चर्य  में  पड़   गया   l   उसने  कहा ---- " मेरे  पांच  बच्चे  हैं  l   उनमें   से  मैंने  किसी  को  भी   इतने  प्यार  से  नहीं  खिलाया  ,  जितना  कि   आप  पड़ोसी   के  बच्चे  से  लिपट  रहे  हैं  l "
  खलीफा  ने  नियुक्ति  पत्र  वापस  ले  लिया    और  कहा ---- "  जब  तुम  अपने  बच्चों  को  प्यार  नहीं  कर  सकते   तो  मेरी  प्रजा  को   प्रसन्न  रखने  की  बात  कैसे   सोच  सकोगे  ?  "

22 July 2020

WISDOM ----- जिसके भीतर जो भाव है , वही उसकी क्रिया में प्रकट होता है l

  आज  के  समय  में  जब   मनुष्य  का  दोहरा  व्यक्तित्व  है  ,  सामने  कुछ  और  दिखाई  देता  है  लेकिन  उसकी  वास्तविकता  कुछ  और  है  l   ऐसे  में   उसके  द्वारा ,  या  उसके  संरक्षण  या   आदेश  द्वारा     किए   जाने  वाले  कार्यों   और  उनके  परिणामों  का  गहराई  से   अवलोकन   करें    तो  हम   उस  व्यक्ति  की  वास्तविकता  को  समझ  सकते  हैं  l
यह  संसार  ईश्वर  का  बगीचा  है   इसमें  गंदगी  से  लेकर  मनोहर  पुष्प  तक  सभी  पदार्थ  होते  हैं  l   कोयल  इस  बाग़  में  पहुंचकर   उस  पर  मुग्ध  हो  जाती  है  ,  अपनी  सुरीली  आवाज  में  कूकती  है  ,  उस  बाग   की  मनोहरता  को  और  बढ़ा  देती  है    l   लेकिन  दूसरी  ओर   चमगादड़   उस  बाग   में  घुसता  है   तो  उसके  उत्तम  फल - फूलों  को  कुतर - कुतर  कर   जमीन   पर  ढेर  लगाता   है    और  उस  बगीचे  को  कुरूप  बनाता   है  l   हम  बगीचे  में  ऐसी  कुरूपता  देखते  ही  समझ  जायेंगें   कि   यह  चमगादड़  का  काम  है  l
 कोयल  और  चमगादड़   अपने - अपने  भाव  के  अनुसार  क्रिया  प्रकट  करते  हैं  l   जिनके  भीतर  जो  है  ,  वही   उसकी  क्रिया  में  प्रकट  होता  है  l
पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  विचार  क्रांति   की  बात  कही  है  ,  जब  हमारा  चिंतन ,  हमारे  विचार  श्रेष्ठ  होंगे  ,  परिष्कृत  होंगे  ,    तभी  हमारे  द्वारा  किए   जाने  वाले  कार्य  श्रेष्ठ  होंगे  और  श्रेष्ठ  परिणाम  देंगे   l 

21 July 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  लिखा  है ---- '  अपने  युग  की  सबसे  बड़ी  विडम्बना  एक  ही  है  कि   साधन  तो  बढ़ते  गए  ,  किन्तु  उनका  उपयोग  करने  वाली   अंत:चेतना  का  स्तर  ऊँचा  उठने  के  स्थान  पर   उलटा   गिरता  चला  गया  l   फलत:  बढ़ी  हुई  समृद्धि   उत्थान  के  लिए  प्रयुक्त  न  हो  सकी  l   आंतरिक  भ्रष्टता  ने   दुष्टता  की  प्रवृतियां  उत्पन्न  कीं  और  उनके  फलस्वरूप   विपत्तियों  की  सर्वनाशी  घटाएं   घिर  आईं  l  '
आचार्य श्री  आगे  लिखते  हैं ---  शक्ति , साधन , धन  आदि  सुविधाओं  का   उपयोग  करने  वालों  की  चेतना  का  परिष्कृत   होना  आवश्यक  है  ,  अन्यथा  बढ़े   हुए  साधन - सुविधा    दुष्ट  बुद्धि  के  हाथ  में  पड़कर   नई  समस्या  और   नई  विपत्तियाँ   उत्पन्न  करेंगे   l  
 दुष्ट  जब  शारीरिक  दृष्टि  से  बलिष्ठ  होता  है   तो  क्रूर  कर्मों  पर  उतारू  होता  है   और  आततायी  जैसा  भयंकर  बनता  है  l
  चतुर  और  बुद्धिमान  होने  पर   ठगने  और  सताने  के  कुचक्र  रचता  है  l 
  धनी   होने  पर  व्यसन  और  अहंकार   के  सरंजाम  जुटाता  है   और  अपने  तथा  दूसरों  के  लिए   क्लेश - विद्वेष  के  सरंजाम  खड़े  करता  है  l 
सुरक्षा  सामग्री  का  उपयोग  दुर्बलों  के  उत्पीड़न   और  कला - कौशल  गिराने  के  लिए  होता  है  l 
 विज्ञानं  जैसे  महत्वपूर्ण  आधार  को   विषाक्तता   और  विनाश  के  रोमांचकारी   प्रयोजन  में  प्रयुक्त  होते  देखा  जाता  है  l 
 न्याय  और  विकास  के  लिए    नियुक्त  किए   गए   अधिकारी   ' मेड़   ने  खेत  खाया  '  की  भूमिका  निभाते  देखे  जाते  हैं  l 
  इस  युग  की  सबसे  बड़ी  आवश्यकता   चेतना  को  परिष्कृत  करने , व्यक्तित्व  को  सुसंस्कृत  और  समुन्नत  बनाने  की  है  l 

20 July 2020

WISDOM ----- समय का एक नाम ' काल ' है , इसी से ' महाकाल ' शब्द बना है l

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने  लिखा  है  --- भौतिक  जगत  में  जिसने  काल  को  पहचान  लिया  और  काल  अर्थात  समय  का  सही - सही    सदुपयोग  करना  सीख  गया ,  तो  समय  की  यह  आराधना  ही    महाकाल  की  उपासना  है   l '
' अखण्ड   ज्योति '  में  प्रकाशित  एक  घटना  है   जो   एक  ऐसे  सूक्ष्म  संसार  की  है   जहाँ  का  टाइम - स्केल  स्थूल  जगत  से  भिन्न  है  ------   '  घटना  हाबड़ा  प. बंगाल  के  प्रसिद्ध   संत   शिव  रामकिंकर  योगत्रयानन्द   के  जीवन  से  संबद्ध   है  ,  उन्हें  पाणिनि  व्याकरण  पर  पतंजलि कृत   महाभाष्य  पढ़ने  की  तीव्र  इच्छा  थी  l  बंगाल  में  उन  दिनों  इसे  पढ़ाने  के  लिए  कोई  विद्वान  नहीं  मिल  सका  l  अत:  महाभाष्य  पढ़ने  के  लिए  वे  बनारस  गए  l  तब  वहां   व्याकरण  आचार्यों  में  पंडित  गोविन्द  शास्त्री  का  बड़ा  नाम  था  l   शिव रामकिंकर   ने  एक  दिन  उनसे   इस  आशय  का  निवेदन  किया  ,  तो  उन्होंने  समय  न  होने  का  बहाना  कहकर  लौटा  दिया   l   दूसरे  दिन  उन्होंने  फिर  निवेदन  किया  , तब  भी   उन्होंने  अवकाश  न  होने  का  बहाना  किया   l
तीसरे  दिन  शिव  रामकिंकर  फिर  उनके  पास  गए    और  उनके   पैर   पकड़  कर  बड़े  दीन    भाव  से   उनसे  समय  निकाल   कर  उन्हें  पढ़ाने  का  निवेदन  किया  ,  किन्तु  आचार्य  क्रुद्ध  हो  गए   और  पैर   झटकते  हुए  उन्हें  वहां  से  चले  जाने  को  कहा  l
  शिव  रामकिंकर जी  इस  अपमान  व  उपेक्षा  से  बहुत  दुःखी   हुए  ,  बिना   खाना  खाये  सो  गए ,  लेकिन  नींद  कहाँ  थी  ,  सोच  रहे  थे  कि  ' मैं   कितना  अभागा  हूँ  l  जिज्ञासा  होने  पर  भी  कोई  ज्ञान - दान  करने  वाला  नहीं  है  l  '  मध्य  रात्रि  को  उनकी  आँख  लग  गई  l   फिर  एक  घंटे  बाद  अचानक  आँख  खुली   तो  देखा  कमरे  में  दिव्य  आलोक  था ,  एक  तेजस्वी   काया   अति  सौम्य  किन्तु  बहुत  वृद्ध  उनके  सामने  थी  ,  उसने  कहा ---- " दुःख  मत  कर  l   किसी  ने  तुम्हे  महाभाष्य  नहीं  पढ़ाया  तो  क्या  हुआ  ?  मैं  पढ़ाऊंगा  l  जा  ग्रन्थ  ले  आ  l  "  शिव  रामकिंकर  जी  ने   उन  महापुरुष  को   साष्टांग  प्रणाम  किया  और   महाभाष्य  ले  आये  l  इसके  बाद  उन  दिव्य  पुरुष  ने  आरम्भ  से  अंत  तक  प्रत्येक  सूत्र  की  विशद   व्याख्या  की   और  ग्रन्थ  जब  समाप्त  हुआ  तब  आशीर्वाद  देकर  चले  गए  l   चेतना  लौटने  पर  शिव  रामकिंकर जी  बहुत  खुश  हुए  और  अपने  भाग्य  को  सराहने  लगे  l   तभी  उन्होंने  दीवार  पर  लगी  घड़ी   में  देखा    तो  आश्चर्य   !   केवल  पंद्रह  मिनट  बीते  थे   l    वह   महाभाष्य   इतना  मोटा  था   कि   पंद्रह  घंटे  में  भी   उसको  पढ़ना  और  समझना  संभव  नहीं  था  l   उन्हें  घोर  आश्चर्य  हुआ   कि   प्रत्येक  सूत्र  की  व्याख्या  उनके  मस्तिष्क  में  है  ,  देव  पुरुष  ने  उन्हें   पूरा  ग्रन्थ  पढ़ाया  लेकिन  इतने  कम  समय  में   यह  अध्यापन  कैसे  संभव  हुआ    ?  इस  उलझन  को   वे  किसी  भी  प्रकार  नहीं  सुलझा  पाए  l
  प्रभु  ईसा ,  महावीर ,   मुहम्मद  साहब    सबने   इस  एक  तथ्य  को  स्वीकार  किया  है   कि   ईश्वर  के  राज्य  में  समय  का  अस्तित्व  नहीं  रहता  l