2 October 2020

WISDOM ----

  महापुरुषों  के  प्रति  सच्ची  श्रद्धांजलि  यही  है  कि   हम   उनके   विचारों   को  अपने     जीवन   में उतारें ,  उनके  आदर्शों  पर , उनके  बताए   रास्ते  पर    चलें   l    महापुरुष   कोरे    विचार    नहीं     देते ,  अपने  आचरण  से  हमें  शिक्षा  देते  हैं  l   उनके  विचारों  में ,  सिद्धांतों  में   उनकी     साधना  का ,  उनकी  तपस्या  का  बल  होता  है  l   ईश्वर  ने  हमें  चयन   की स्वतंत्रता  दी  है  ---  --- 

1 October 2020

WISDOM ------

     इस  संसार  में  भाँति  - भाँति   के  लोग  हैं   l   जब  लोगों  पर  दुर्बुद्धि  हावी  हो  जाती  है   तो  उनके  कार्य  अपने - अपने  विचार  और  संस्कारों  के  अनुसार  भिन्न - भिन्न  होते  हैं   जैसे  --- रावण  ने   अपनी  लंका  सोने  की  बनाई  ,  और  लंका  से  बहुत  दूर   वन   से  सीताजी  का  अपहरण  किया  l   सिकंदर  ने  विश्व विजय  का  संकल्प  लिया  ,  अपने  राज्य  को  नहीं   लूटा ,  दूसरे  राज्यों  में  तबाही  मचाई  l  इस  अभियान  में  वह  भारत  भी  आया   l   यहाँ  के  राजाओं  ने  दिल  खोलकर  उसकी  मदद  की  l  दुर्बुद्धि  की  कहानी  बहुत   लम्बी  है   मीरजाफर , जयचंद   इन्होने  अपने  ही  देश  को  लुटवा  दिया  l   नादिरशाह   भारत  आया  ,  यहाँ  खूब   लूटा , कत्ले  आम  किया  ,  यहाँ  का  धन  वैभव  वह  अपने  देश  ले  गया  l   दुर्बुद्धि  का  असर  ऐसा  होता  है  कि   कुछ  लोग  दूसरों   का बगीचा  लूटते   हैं  ,  कुछ  अपना  ही  बगीचा  लूटते   हैं  l   अपने  अहंकार  , अपनी  पशुता   को  पोषित  करने   के लिए   जाति ,  धर्म ,  ऊंच - नीच  के  आधार  पर   कमजोर  पर , नारी  पर  अत्याचार  कर  के  ,  उन्ही  को  मार  कर    रौब  से  रहते  हैं  l   आज  सबसे  बड़ी  जरुरत  सद्बुद्धि  की  है  l  जियो  और  जीने  दो  l 

30 September 2020

WISDOM ----

   नारी  पर  अत्याचार  की  गाथा  कोई  नई   नहीं  है  ,    विभिन्न  देश , विभिन्न  समाज   अपने अपने  तरीके  से   नारी  पर  अत्याचार  करते  हैं   l   लेकिन  हम  जब  संसार  में  शांति  की  बात  करते  हैं  ,  अहिंसा  की  बात  करते   हैं  ,   स्वयं  को  शांति प्रिय  कहकर  अन्य  देशों  पर  आक्रमण  नहीं  करते  ,  ऐसे  में    नारी  पर   अत्याचार    की  अनेक  घटनाएं   जो  मनुष्य  को  पशु  से  भी  निम्नतर  स्तर   पर ले  जाती  हैं  ,  समाज  के  लिए  कलंक  हैं   l   नारी  को   अत्याचार    सहते - सहते  एक  युग  बीत  गया   l   जिन  जातियों  ने  स्वयं  को  श्रेष्ठ  कहा  उन्होंने  ही  सती - प्रथा  के  नाम  पर  नारी   को जिन्दा  जलाया   l   कन्या - वध  के  नाम  पर  बच्ची  के  पैदा  होते  ही  उसे  मार  डाला  l   फिर  बालिका  भ्रूण  हत्या  l   दहेज़ - प्रथा  के  नाम  पर  नारी  पर  अत्याचार  ,  पारिवारिक हिंसा - उत्पीड़न   !   पहले   नारी  पर    अत्याचार  एक  सामाजिक  बुराई  थी    लेकिन  अब  उसमे  राजनीति   भी  जुड़  गई   l   बड़े - बड़े  अपराधी  अपनी   अपराधिक    गतिविधियों  को  अंजाम  देने  के  लिए  छुटभैया  लोगों  की  मदद  लेते  हैं  ,  इसके  बदले  में  उन्हें  पैसा  भी  देते  हैं   और  समाज  में  अपराध  करने  की  खुली  छूट  l   इसलिए  पकड़े   जाने  पर  भी  अपराधी  बच  जाते  हैं   l   इस    तरह  की  घटनाएं   कभी  - कभी  समाज  में  अपने  वर्चस्व  को  स्थापित  करने  के  लिए ,  लोगों  में  आतंक  पैदा  करने  के  लिए  प्रायोजित  भी  होती  हैं  l    समस्याएं  जब  बढ़कर  एक  वृक्ष  की  तरह  विशाल  हो  गई  हों  ,  तब  उसे  समाप्त  करने  के  लिए  जड़  को  ही  काटना  पड़ता  है  l   इसके  लिए  समाज  का  संगठित  और  जागरूक  होना  जरुरी  है  l 

WISDOM -----

   गुरु  नानक  प्रव्रज्या  पर  थे   l   मुखमण्डल  का  तेज  छिपाने  के  लिए  उनने  चेहरा  ढँक  लिया  एवं   कुछ  फटे - पुराने  कपड़े   पहन  लिए  l   सिपाहियों  ने  उन्हें  बेगार  में  पकड़कर  सेनापति  के  सम्मुख  प्रस्तुत  किया  l   वह  उनका  तेज  देखकर  उन्हें  बाबर  के  पास  ले  गया  l   बाबर  समझ  गया  कि   यह  खुदापरस्त  फकीर   है  l   कहीं  कोई  बददुआ   न  दे   दे  ,  यह  सोचकर  वह  उठा  और  आदरपूर्वक  उन्हें  गद्दी  दी  l   शाही  सम्मान  की  रीति   से  उन्हें  शराब  परोसी  गई  l   नानक  देव  बोले --- " बाबर  !  हमने  वह  आला  शराब  पी   है  ,  जिसका  नशा  जन्म - जन्मांतर  तक  नहीं  उतरता  l  "  बाबर  ने  शर्मिंदा  होकर  हीरे - जवाहरात  जड़े  कपड़े   मंगवाए  l   गुरु  नानक  ने  कहा ---' इन्हे  तू  गरीबों  में  बंटवा  दे  ,  जिनका  धन  चूस - चूसकर  तू  सम्राट  बना  है  l   मेरे  पास  तो  भगवान  के  नाम  का  धन  है  l   सारी   दौलत  मिटटी  है  l "  बाबर  ने  कहा --- ' मैं  आपकी  सेवा  कैसे  करूँ  ? '   इस  पर  नानक  देव  ने  कहा --- "  तेरे  यहाँ  जितने  कैदी   हैं ,  उन्हें  छोड़  दे   और  लूटपाट  बंद  करवा  दे  --- यही  हमारी  सबसे  बड़ी  सेवा  है  l '  बाबर  ने  तुरंत  आदेश  दिया  l 

29 September 2020

WISDOM -------

 इनसान   बनना  बहुत  कठिन  है  ,  लेकिन  पशु  बनना  , पाशविक  कार्य  करना  बहुत  सरल  है   l    और  ऐसा  कर  के  मनुष्य  अपनी  ही  जाति,   अपनी  ही  संस्कृति   और   अपने  ही  देश  के  गौरव  को  कलंकित   करता  है  l 

लंदन   प्रवास  में  एक  सभा  के  बीच  जब  स्वामी  विवेकानंद  भारत  के  गौरव  का  वर्णन  कर  रहे  थे  ,  तब  एक   आलोचक  ने  उठकर  पूछ  लिया  ---- " भारत  के  हिन्दुओं  ने  क्या  किया  है   ?  वे  आज  तक  किसी  जाति   पर  विजय  प्राप्त  नहीं  कर  सके  l "  तब  स्वामीजी  ने  कहा --- " नहीं  कर  सके  नहीं  ,  कहिए   कि   उन्होंने   की  नहीं  l  यही  हिन्दू  जाति       का    गौरव  है   कि   उसने  कभी  दूसरी  जाति   के  रक्त  से  पृथ्वी  को  रंजित   नहीं  किया   l   वे  दूसरों  के  देश  पर  अधिकार  क्यों  करेंगे   l   भारत  को  भगवान  ने   दाता   के  महिमामय  आसन   पर  प्रतिष्ठित   किया   l   वह  देगा  की  छीनेगा   ?  भारतवासी  आप  लोगों  की  तरह  रक्तपिपासु  दस्यु  नहीं   थे   l   इसलिए  मैं  अपने  पूर्वजों  के  गौरव  से   स्वयं  को  गौरवान्वित  महसूस  करता  हूँ    l "   ऐसा  जवाब  योद्धा  संन्यासी    स्वामी  विवेकानंद   ही   दे  सकते  थे  l 

WISDOM ----- प्राणी का आंतरिक स्तर उठाए बिना उसे उत्तम स्थिति में नहीं पहुँचाया जा सकता ----- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

      भौतिक  प्रगति  के  साथ  चेतना   का स्तर  भी   उच्च हो  l      एक  कथा  है  --- देवर्षि  नारद  सबका  सुख - दुःख  जानने  के  लिए   संसार  में  भ्रमण  करते  हैं  l   उनकी  इच्छा  हुई  कि   पृथ्वी  पर  जो  प्राणी  घिनौना  , नारकीय  जीवन जीवन  जी  रहे  हैं  , उन्हें  स्वर्ग  पहुंचा  दें  l   इस  क्रम  में  उन्होंने  सबसे  पहले  कीचड़  में   लोटते  , गंदगी  चाटते   सुअर   को  देखा  ,  उन्हें  बड़ी  दया  आई  l  नारद जी  ने  उससे  कहा  --- ' ऐसा  जीवन  किस  काम  का  ! चलो  हम  तुम्हे  स्वर्ग  पहुंचा  देते  हैं  l '  नारद जी  की  बात  सुनकर  वाराह  तैयार  हो  गया   l   रास्ते  में  उसने  पूछ  ही  लिया  ---- " वहां  खाने , भोगने  और  लोटने   के  क्या  साधन  हैं  l "  नारद जी   वहां  के  सब  सुख  बताने  लगे ,  वह  बीच  में  ही  पूछ  बैठा --- " महाराज  !   वहां  खाने  के  लिए  गंदगी , लोटने   के  लिए  कीचड़   और  साथ  में  क्रीड़ा - कल्लोल  हेतु   वाराह  कुल  वहां  है  या  नहीं  l  '  महर्षि  ने  कहा  ---- "  मूर्ख  !  इन  चीजों  की  वहां  क्या  जरुरत  है  l   वहां  तो  देवताओं  के  अनुरूप  स्वर्ग  का   वातावरण  है  l "  वाराह   ने   आगे  बढ़ने  से  मना   कर    दिया   और  कहा -- 'जहाँ  ये  सब  नहीं  ,    वहां  जाकर   मैं  क्या  करूँगा  l "  देवर्षि  ने  अपना  सिर   पीट  लिया  ,  वे  समझ  गए   कि  जब  तक  आंतरिक  स्तर   उच्च  नहीं  है  ,  प्राणी  को  उच्च  स्थिति  में  पहुँचाना    व्यर्थ  है  l  

28 September 2020

WISDOM -----

   कहते  हैं  किसी  भी  बात  की  अति  अच्छी  नहीं  होती  ,  इसे  प्रकृति  भी  बर्दाश्त  नहीं  करती  ,  अपने  तरीके  से  अपना  क्रोध  व्यक्त  करती  है  l   प्रत्येक  देश  में  कोई - न - कोई  सामाजिक  बुराई   है ,  यहाँ  जाति - प्रथा  सदियों  से  चली  आ  रही  है  l   एक  वर्ग  स्वयं  को  श्रेष्ठ  समझता  है ,  यह  ठीक  है  ,  कुछ   गुण ,  कुछ  विशेषताएं  अवश्य  हैं  ,  जिसके  आधार  पर  वे  श्रेष्ठ  हैं    लेकिन  दूसरे  वर्ग  को  चैन  से  जीने  न  देना   एक  ऐसी  बुराई  है  जो  प्रकृति  को  सहन  नहीं  होती  l   ईश्वर  ने  अवतार  लेकर  अपने  आचरण  से  सिखाया   कि   जातिगत  भेदभाव , ऊंच - नीच  की  भावना  को  त्याग  दो  l   भगवान  श्रीराम  ने  शबरी  के  जूठे   बेर  खाये ,  निषादराज  से  मित्रता  की  l   भगवान  श्रीकृष्ण  ने  दुर्योधन  के महल - मेवा  को  त्यागा  और  विदुर  जी  के  यहाँ  रूखी - सुखी  खा  कर   प्रसन्न  हुए  l   लोग  भगवान  की  जय - जयकार  तो  करते  हैं  लेकिन  उनके  आदर्श  को  स्वीकार  नहीं  करते  l   हमारी  इसी  बुराई  की  वजह  से  हम  सदियों  तक  गुलाम  रहे  l   लेकिन  हम  सुधरे  नहीं ,  इसलिए  प्रकृति   के  प्रकोप  के  रूप  में   यह  महामारी  आ  गई  l   इस  कोरोना  के  माध्यम  से  प्रकृति  हमें  संदेश   देती  है   कि   सब  बराबर  हैं , कोई  ऊंच - नीच   नहीं ,   कोई  भेदभाव  नहीं  है  l    चाहे  कोई  अमीर  हो  या  गरीब ,  नेता  हो  या  नौकर ,   उच्च  जाति   का  हो  या  निम्न  जाति   का  ,  जो  भी  इस  बीमारी  से   ग्रसित  हो  गया   वह  समाज  से  दूर  हो  गया  ,  सब  की  एक  जैसी  दशा ------  इस  महामारी  का  मूल  कारण  जो  भी  हो ,  इसका  माध्यम  कोई  भी  हो  ,  इससे  कोई  फरक  नहीं  पड़ता  ,  हम  इसकी  गहराई  में  छिपे  प्रकृति  के  संदेश   को  समझें   और  सारे  भेदभाव  भूलकर   ' जियो  और  जीने  दो '  की  नीति   पर  चलें  ,  आपस  में  प्रेम  चाहे  न  हो   पर   परस्पर  वैर भाव  भी  न  हो  l   कहते  हैं ' जब  जागो ,  तब  सवेरा  '   l   हम  अपनी  गलतियों  को  सुधार  लें  ,  इसी   में सबका  कल्याण  है  l