21 November 2021

WISDOM --------

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  --- ' मनुष्य  शरीर  होने  के  नाते  गलतियाँ  सभी  से  होती  हैं  l  जो  उन्हें  छुपाते  हैं   वे  गिरते  चले  जाते  हैं   पर  जो  बुराइयों  को  स्वीकार  करते  हैं   उनकी  आत्महीनता  तिरोहित  हो  जाती  है   l यदि  लोग  अपने  दोषों  का  चिंतन  किया  करें,  उन्हें  स्वीकार  कर  लिया  करें   और  उनका  दंड  भी  उसी  साहस  के  साथ  भुगत  लिया  करें  तो  व्यक्ति  की  आत्मा  में   इतना  बल   है  कि  और  कोई  साधन - सम्पन्नता  न   होने  पर  भी  वह  संतुष्ट  जीवन   जी  सकता  है  l 

17 November 2021

WISDOM-----

   एक  व्यक्ति   बहुत  नकारात्मक  चिंतन  का  था  l  उसे  संसार  में  हर  जगह   बुरा  ही  बुरा   दिखाई  पड़ता  था  l  एक  दिन  उसे  समाचार  मिला  कि  शहर  में  रहने  वाले   एक  भले  व्यक्ति  के  साथ   कुछ  दुर्घटना  घट  गई   है  l  यह  जानकर   वह  अपने  मित्र  से  बोला  ---- " मित्र  !  लगता  है   इस  संसार  में   मात्र  दुर्जनों  का   ही  बोलबाला  है   l  सज्जनों  को   तो  लोग  प्रताड़ित  ही  करते  हैं  l  "  उसका  मित्र  उसे   गुलाब  का  एक  पुष्प   देते  हुए  बोलै  --- " मित्र  !   ये  बताओ  कि  कौन  गुलाब  को  उसके  काँटों  के  कारण  याद    करता  है  l   बुराई  सब  जगह  है  ,  पर  लोगों  के  हृदय  में  छाप   मात्र  अच्छाई  की  ही  छपती   है  l  उस  भले  व्यक्ति  को  लोग   उसके  सद्गुणों  के  कारण  याद  करेंगे , दुर्घटना  के  कारण  नहीं  l  सद्गुणों  की  कीर्ति  तो  सदा  रहती  है  l "

16 November 2021

WISDOM----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- जीवन  में  शुभ  अवसर  एक  बार  आता  है  और  चला  जाता  है   l शुभ  अवसर  जिंदगी  के  दरवाजे  पर  केवल  एक  बार  ही  दस्तक  देता  है   l   उसे  सुन  सकें  और  पहचान  सकें  तो  ठीक  , अन्यथा  वह  सदा  के  लिए  चला  जाता  है  ,  परन्तु  दुर्भाग्य  तब  तक  दस्तक  देता  है  ,  जब  तक  कि   दरवाजा  खुल  न  जाये   और  दरवाजा  खुलते  ही   दुर्भाग्य  ऐसे   अंदर  प्रवेश  करता  है  कि   वह  अपनी   पूरी  क्षमता  और  समर्थ  के  साथ  व्यक्ति  को  धार  दबोच  लेता  है  l जब  तक  व्यक्ति  दस - बीस  साल   उसके  नियत  भोगकाल   को  भोग  नहीं  लेता  ,  पीछा  नहीं  छूटता   है   l   यह  पल  भर  का  खेल  है  ,  यदि  शुभ  अवसर  को  पहचान  सकें   और  उसके  लिए  दरवाजा   खोल  सकें  तो   जीवन  उपलब्धियों  से  महक  उठता  है  l  "  आचार्य श्री  लिखते  हैं  ---निष्काम  कर्म  से  ,  सन्मार्ग  पर  चलने  से   ईश्वरीय  कृपा  से  हमें  विवेकदृष्टि  का  अनुदान  मिलता  है   l  विवेक  दृष्टि  से  ही  उचित  चीजों  का  निर्णय  हो  पाता   है  ,  हम  अवसर  को  पहचानते  हैं  और  उचित  निर्णय  ले  पाते  हैं   l 

15 November 2021

WISDOM----

 संसार  में  दुःख  और  तनाव  का  प्रमुख  कारण  है  --सद्बुद्धि  की  कमी   l सद्बुद्धि  न  होने  के  कारण  ही   व्यक्ति   लड़ाई ,झगड़े , दंगें - फसाद  और  छोटे  - छोटे  लाभ - लालच  में  फंसकर  अपने  लिए  तनाव  मोल  ले  लेता  है  l   समस्या  यह  है  कि   यह  सद्बुद्धि  आये  कहाँ  से   ?  किसी  स्कूल  , कॉलेज  या  किसी  संस्था  में  अध्ययन  से  सद्बुद्धि  नहीं  आती  ,  यह  तो  ईश्वर  की  देन   है  l जब  व्यक्ति  निरंतर  सन्मार्ग  पर  चलता  है ,  निष्काम  कर्म  करता  है   तब  उसे  सद्बुद्धि  का  वरदान  मिलता  है  l 

14 November 2021

WISDOM----

 अमेरिका  के  प्रसिद्ध  न्यायधीश  होम्स  जब  सेवा निवृत्त   हुए  तो  उस  अवसर  पर  एक  पार्टी  का  आयोजन   किया  गया  l  इस  पार्टी   में  विभिन्न  अधिकारी  , उनके  मित्र , पत्रकार  तथा  संवाददाता   सम्मिलित  हुए  थे   l   पद  से  निवृत्त  होने  के  बावजूद  भी  उनके  चेहरे  पर  बुढ़ापा  नहीं  था  l   पार्टी  के  दौरान   ही  एक  संवाददाता  ने  उनसे  पूछा ---- "  अब  इस  वृद्धावस्था  में  तो  आप  आराम करेंगे   या  कुछ  और  ? "   बड़े  आश्चर्य  से  होम्स  ने  कहा  ---- " क्या  मैं  वृद्ध  दिखाई  दे  रहा  हूँ  l   मेरी  जवानी  तो  अब  आई  है  ,  क्योंकि  लम्बे  समय  से  जिन  कार्यों  को   मैं  टालता  रहा   था  ,  उन्हें  अब  प्रारम्भ  करूँगा   l पहला  काम  तो  यह  है  कि  मैं  बढ़ई  का  काम  सीखूंगा  , इसके  साथ   विज्ञानं  का  अध्ययन  करूँगा  ,  नए - नए  खेल  सीखूंगा  और  अपनी  मानसिक  क्षमताओं    का  और  विकास  करूँगा  l  होम्स  बोले  --- "  भले  ही  मैं  बूढ़ा  हो  जाऊं  तो  क्या  काम  करना  छोड़  दूंगा   l  काम  करना  छोड़ने  की  अपेक्षा  मैं  मर  जाना   पसंद  करूँगा   l   "  कर्म  निष्ठा  में  विश्वास  करने  वाले   निरंतर  उत्साह से  कर्तव्यपालन  में  लगे  रहते  हैं   l 

12 November 2021

WISDOM -------

  

श्रीमद भगवद्गीता   में  भगवान  कृष्ण  अर्जुन  को  कहते  हैं  कि  ' अशांतस्य कुत:  सुखम   अर्थात   अशांत  व्यक्ति  कभी  सुखी   नहीं  रह  सकता   l   धन  और  सुविधाएँ   व्यक्ति  को  शारीरिक  सुख   तो  दे  सकते  हैं  ,  किन्तु  आत्मिक  आनंद  नहीं  l   सच्ची  शांति  व  आनंद  तो  केवल  संयम   और  संतोष  से  ही  मिलता  है   l  पं. श्रीराम  शर्मा   आचार्य जी  लिखते  हैं  -- संयम  के  माध्यम  से   हमें    शारीरिक  और  मानसिक  स्वास्थ्य  के  साथ   सद्विवेक  का  जागरण  होता  है  , जिससे  हम      अपनी  ऊर्जाओं   और  क्षमताओं  का   सदुपयोग   कर  पाते  हैं  l संयमी  व्यक्ति  ही  जीवन  में  सच्चे  अर्थों  में  सफल  होता  है  , स्वस्थ  रहता  है   और  अपने  जीवन  को  सार्थक  करता  है   l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         


30 October 2021

WISDOM

     असुरता  को  मिटाने  के  लिए  अध्यात्म  की  , दैवी  शक्तियों  की  आवश्यकता  है  l   व्यक्ति  का  जन्म  चाहे  किसी  भी  वंश  में  हो  ,  वह  अपनी  दूषित  प्रवृतियों  के  कारण  असुर  कहलाता  है   l  रावण  ऋषि  का  पुत्र  था   लेकिन  उसकी  प्रवृतियां  दूषित  थीं   इसलिए  वह  असुर  कहलाया   l   इस   असुरता  का  अंत  भगवान   राम  ने  किया  l   उसी  कुल  में  पैदा  हुआ  रावण  का  भाई  विभीषण   रावण  के  बिलकुल  विपरीत   था  , अत्याचारी  नहीं  था  ,  उसे  भगवान  राम  ने  शरण  दी  l     महाभारत  का  एक  पात्र  है  --घटोत्कच   l  पांडव  पक्ष  का  था  भीम  और  हिडिम्बा  का  पुत्र  था   l  वह  आसुरी ,  मायावी   तरीके  से  युद्ध  करना  जानता  था  ,  रात्रि  में  उसकी  ये  शक्तियां  और  प्रखर  हो  जाती  थीं  l   उसकी  असुरता  का  अंत  कर्ण  ने  उस  दैवी  शक्ति  से  किया  जो  देवराज  इंद्र  ने  उसे  दी  थी  l   उस  युग  की  मायावी  शक्तियों  का  ही  एक  रूप  कलियुग  में   तंत्र ,  जादू - टोना  ------ आदि  है  l    ऐसा  करने   - कराने  वाले   आसानी  से  पकड़े  नहीं  जाते   इसलिए      अनेक   लोग  ईर्ष्या -द्वेष , स्वार्थ   आदि  अनेक  कारणों  से  इन  नकारात्मक  शक्तियों  का  प्रयोग  करते   हैं  l    संसार  में  कायरता   बढ़  जाने  के  कारण   लोग  पीठ  पीछे  ,  छुपकर  वार  करते  हैं   l    यही  असुरता  है   l   असुरता   का अंत  हमेशा  ही  भयानक  होता  है   l     ये   असुरी  शक्तियां   व्यक्तियों  के  जीवन   को    तो  अनेक   समस्याओं  से   ग्रस्त  कर  देती  हैं  ,  इनसे  पर्यावरण    में  नकारात्मक      तत्व    बढ़  जाते  हैं  l    अशांति , तनाव  ,  लाइलाज  बीमारियाँ     इसी   का घातक  परिणाम  है   l    इस  नकारात्मकता  को  पराजित  करने  के  लिए   भी  दैवी  शक्तियों   की आवश्यकता  है   l