24 January 2023

WISDOM

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---" आज  की  परिस्थितियों  पर  द्रष्टिपात   करें  तो   चारों  ओर  ईर्ष्या  का  ही  साम्राज्य  फैला  दिखेगा   l  समाज  में  फैले  संघर्षों  का  मूल  ईर्ष्या  ही  होती  है  l  ईर्ष्या  का  जन्म  सामाजिक  जीवन  की  विषमता  से  होता  है  l  किसी  के  पास   बहुत  धन -वैभव  है  , लेकिन  उसे  समाज  में  अधिक  प्रतिष्ठा , विशेष   सुविधाएँ   नहीं  हैं  तो  उसके  प्रति  ईर्ष्या  नहीं  होगी  l  लेकिन  दूसरों  को  मिल  रही  प्रशंसाओं , -सुविधाओं  और  सम्मान  से   अपनी  कोई  वास्तविक  हानि  नहीं  हो  रही  है  , तब  भी  उसके  प्रति  ईर्ष्या  भड़क  उठती  है l '    ईर्ष्या  बलवती  होने  पर  व्यक्ति   षड्यंत्रकारी  हथकंडे  अपनाने  लगता  है  l  स्वयं  के  पास   धन -वैभव  सब  है   लेकिन  दूसरों  को   आगे  बढ़ता   हुआ   नहीं  देख  सकता ,  दूसरों  की  सफलता  से  ईर्ष्या  होती  है  l  ईर्ष्या  के  कारण   परिवार  हो  या  समाज -- सम्पूर्ण  वातावरण  जहरीला  हो  जाता  है   

23 January 2023

WISDOM------

   वन  में  खड़े  एक  वृक्ष  के  साथ  लिपटी  एक  लता  भी   धीरे -धीरे  वृक्ष  के  बराबर  हो  गई  l  वृक्ष  का  आश्रय  लेकर  उसने  भी  फलना -फूलना  आरम्भ  कर  दिया  l  बेल  को  फलते -फूलते  देख  वृक्ष  को  अहंकार  हो  गया   कि  मैं  न  होता  तो   लता  का  अस्तित्व  ही  न  होता  l  वह  लता  को  धमकाते  हुए  बोला --- " ओ  बेल  !  चुपचाप  मेरा  कहना  माना  कर  ,  मैं  जो  कह  रहा  हूँ  ,  वह  किया  कर  ,  नहीं  तो  धक्के  मार  कर  भगा  दूंगा  l "  पेड़  का  प्रलाप  जारी  था   कि  दो  पथिक  वहां  से  निकले   l  एक  बोला  --- " अरे  भाई  ! जरा  देखो  तो  ! यह  वृक्ष  कैसा  सुन्दर  है  ,  इस  पर  कैसी  सुन्दर  लता  पुष्पित  हो  रही  है  l  आओ , इसके  नीचे  थोड़ी  देर  विश्राम  करें  l "  अपना  महत्त्व  लता  के  साथ  है  ,  यह  जानकार  वृक्ष  का  अभिमान  भी  नष्ट  हो  गया  l 

22 January 2023

WISDOM ----

   काँटे  ने  फूल  से  कहा -- बंधुवर  पुष्प  ! लो  सवेरा  हुआ  , माली  इधर  ही  आ  रहा  है  ,  अपनी  सज्जनता , सौम्यता  और  उपकार  की  सजा  भुगतने  के  लिए  तैयार  हो  जाओ  l  यदि  मेरी  सीख  मानते  और  कठोरता  व  कुटिलता  का  आश्रय  ग्रहण  किए  रहते  तो  आज  यह  नौबत  नहीं  आती  l  फूल  कुछ  बोला  नहीं  ,   वह  और  भी  मोहक  हो  उठा  l  माली  आया , उसने  फूल   तोड़ा  और  डलिया  में  रखा  l  काँटा  दर्प  से  हँसा , वृद्ध  माली  की  उँगलियों  में  चुभा   और  अहंकार  में  ऐंठ  गया  l  माली  उसे  गाली  देता  हुआ  वापस  लौट  गया  l  समय  बीता  l  एक  दिन  मंदिर  में  चढ़ाये  उस  फूल  की   सूखी  काया  को  कोई   उस  वृक्ष  की  जड़ों  के  पास  डाल  गया  l   काँटे  ने  उस  फूल  को  देखा   तो  हँसा  और  बोला ---- " कहो  तात  !  अब  तो  समझ  गए  कि  परोपकारी  होना  अपनी  दुर्गति  कराना  है  l "  फूल  की  आत्मा  बोली ---- " बंधु  !  यह  तुम्हारा  अपना  विश्वास  है  l  शरीर  में  चुभकर   दूसरों  की  आत्मा  को  कष्ट   पहुँचाने  के  पाप  के  अतिरिक्त   तुम  अपयश  के  भी  भागी  बने  l  अंत  तो  सभी  का  सुनिश्चित  है  ,  किन्तु  अपने  प्राणों  को   देवत्व  में  परिणत  करने  और  संसार  को  प्रसन्नता  प्रदान  करने  का  जो  श्रेय   मुझे  मिला  ,  तुम  उससे  सदैव  के  लिए  वंचित  रह  गए  l  मैं  हर  द्रष्टि  से  फायदे  में  हूँ  और  तुम  घाटे  में  l  "

21 January 2023

WISDOM -----

   जोरों  की  आँधी  आई  l  आँधी  के  साथ   धूल   उड़कर   आसमान  तक  जा  पहुंची  l  इस  उपलब्धि  पर  इतराते  हुए   धूल  बोली ---- " भला  मेरे  समान  कोई  इस  दुनिया  में  ऊँचा  है  l  जल , थल , नभ  के  साथ  दसों  दिशाओं  में  मैं  ही  तो  व्याप्त  हूँ  l  "  बदल  ने  धूल  की  गर्वोक्ति  सुनी   तो  फट  पड़ा   और  बदल  फटते  ही   हुई  वर्षा  के  साथ   धूल  धरती  पर  जा  गिरी  l   अब  धरती  ने  उससे  पूछा  ---- "  रेणुके  !  तुमने  अपनी  यात्रा  से  क्या  सीखा ?  " धूल  बोली ---- " माँ  !  मैंने  सीखा  कि  उन्नति  पा  कर  कभी  किसी  को  अहंकार  नहीं  करना  चाहिए  l  अहंकारी  का  पतन  निश्चित  ही  होता  है  l  "  

20 January 2023

WISDOM ----

    अमावस्या  की  रात  में  दीपक  ने  देखा  कि   आकाश  में  न  चाँद है  और  न  तारे  l  बस , वह  अकेला  ही  संसार  को  प्रकाश  दे  रहा  है  l  अपने  इस  पराक्रम  पर  उसको  अभिमान  हो  गया   और  वह  समस्त  संसार  को  संबोधित  करते  हुए  बोला --- " मेरी  महिमा  तो  देखो  !  मेरी  ही  कृपा  से   तुम  सब  तुच्छ  प्राणी   अंधकार  में  कुछ  देख  पा  रहे  हो  l  मुझे  प्रणाम  करो , मेरी  दयालुता  का  गुणगान  करो  l  "  दीपक  के  इन  अहंकार युक्त  वचनों   को  किसी  ने  महत्त्व  न  दिया  , परन्तु  एक  जुगनू  से  न  रहा  गया   और  वह  बोला ---- " एक  रात  के  अस्तित्व  पर  इतना  अहंकार  l  तनिक  ठहरो  ,  प्रभात  होने  पर  तुम्हारी   वास्तविकता  पूछूँगा  l  "  अधिकार  पाकर  किसी  को   मदांध  नहीं  हो  जाना  चाहिए   l  

19 January 2023

WISDOM ----

कलियुग  की  सबसे  बड़ी  विशेषता  है --- दुर्बुद्धि  !   इस  दुर्बुद्धि  के  कारण  लोग   समाज  में  जो  भी  अच्छे  कार्य  होते  हैं  , उनमे  बुराई  खोजते  हैं ,  देवत्व  को  मिटाने  का  प्रयास  करते  हैं    और  बुराइयों  को  अनदेखा  करते  हैं  , भीष्म  पितामह  की  तरह  चुप्पी  साध  लेते  हैं   इसलिए  अब  प्रत्यक्ष  में  महाभारत  नहीं  होती  ,  अब  प्रकृति   का  क्रोध  विभिन्न  रूपों  में  देखने  को  मिलता  है  l  आज  मनुष्य  पर  लालच , अहंकार , कामना , महत्वाकांक्षा  हावी  है   इस  कारण   वह   दोहरी  जिन्दगी  जी  रहा  है  l  एक  रूप  में  समाज  के  सामने  बहुत  शरीफ , सदाचारी   है  लेकिन  एक  दूसरा  रूप  भी  है  जिसमे  वह  अपने  स्वार्थ  के  लिए    अपराध , भ्रष्टाचार , अश्लीलता ,  प्रदूषण     आदि  समाज  और  संस्कृति  को  हानि  पहुँचाने  वाले  कार्यों  के  प्रति   मौन  रहकर  उन्हें  बढ़ावा  देता  है  l  यही  कारण  है  कि  अब  मनुष्य  का  मनुष्य  पर  से  विश्वास  कम  हो  गया  है  l   ----- एक  डाकू  था  वह  फकीरों  के  वेश  में  डाके  डालता  था  l अपना  हिस्सा  वह  गरीबों  में  बाँट  देता  था  l  हाथ  में  माला  लिए  जपता  रहता  था  l  एक  बार  उसके  दल  ने   एक  काफिला  लूटा  l  एक  व्यापारी  के  पास  बहुत    पैसा  था  l  लूट  चल  रही  थी  ,  उसने  फकीर  को  देखा   तो  सारा  धन  उसके  पास  लाकर  रख  दिया  l  काफिला  लुट  जाने  के  बाद  जब  वह  धन  लेने  पहुंचा   तो  देखा  कि  वहां  तो  लूट  का  माल  बांटा  जा  रहा  है  l  सरदार  वही  था  जो  दरवेश -फकीर  बना  हुआ  था  l  उसी  के  पास  व्यापारी  का  धन  था  l  व्यापारी  बोला --- "  हमने  तो  आपको   दरवेश  समझा  था l  आप  तो  कुछ  और  ही  निकले  l  हमने  डाकुओं  के  सरदार  पर  नहीं  , फकीर  पर , खुदा  के  बन्दे  पर  विश्वास  किया  था  l  अब  यह  धन  आप  रखिए  ,  आपसे  एक  गुजारिश  है  कि  आप  दरवेश  के  वेश  में  मत  लूटिए  l  नहीं  तो  लोगों  का  विश्वास  इस  वेश  पर  से  उठ  जायेगा   l   वह  डाकू  तत्काल  वास्तव  में  फकीर  बन  गया  ,  उसके  बाद  उसने  कभी  डाका  नहीं  डाला  l