इटली के सुविख्यात संत अलफांसस लिग्योरी अपनी युवावस्था में वकालत किया करते थे l न्यायालय में जब वे दलीलें देकर बहस करते थे, तब सभी उनकी तर्क्शैली से हतप्रभ रह जाते थे l एक दिन वे न्यायालय में अपने मुवक्किल के पक्ष में पैरवी कर रहे थे l मुवक्किल ने उनसे एक ऐसा तथ्य छिपाया जिसके आधार पर वह दोषी सिद्ध होता l अदालत की कार्रवाई के दौरान दूसरे पक्ष के वकील ने कहा ---- " माननीय अलफांसस महोदय !बहस करते समय यदि इस तथ्य का अवलोकन कर लें तो शायद उनकी आत्मा उन्हें स्वयं सत्य का आभास दिलाने में सफल होगी l " अलफांसस उस तथ्य को जानते ही समझ गए कि वे असत्य और अनीति की वकालत कर रहे हैं l उन्होंने वकालत का चोला शरीर से उतारा और बोले --- " सर ! मैं इसी वक्त से यह कार्य छोड़ रहा हूँ l मैं तर्क शक्ति के बल पर अपराधी को निरपराध तथा निरपराध को अपराधी बनाने का अनैतिक कार्य जीवन पर्यंत नहीं कर सकता l ' उन्होंने उसी दिन से अपना जीवन ईश्वर उपासना और सेवा में लगाने का संकल्प लिया और आगे चलकर संत के रूप में विख्यात हुए l
27 February 2023
26 February 2023
WISDOM ----
स्रष्टि में निरंतर संघर्ष है --- दिन और रात के बीच , अंधकार और प्रकाश के बीच , देव और दानव के बीच निरंतर संघर्ष चलता रहता है l देवता देवत्व का उदय चाहते हैं और दानव आसुरी साम्राज्य का आधिपत्य l संघर्ष चाहे कितना भी लम्बा हो विजय हमेशा धर्म की , सत्य की होती है l रामायण काल हो या महाभारत काल , उस समय सबके सामने स्पष्ट था कौन देवता है , कौन असुर है ? कौन धर्म और न्याय पर चल रहा है और कौन अनीति , अत्याचार और अधर्म के मार्ग पर है l लेकिन कलियुग की सबसे बड़ी समस्या है कि कौन देवता है , कौन असुर है ? यह पहचानना बड़ा कठिन और असंभव सा है क्योंकि मनुष्य ने एक चेहरे पर कई चेहरे लगा रखे हैं l कहते हैं अच्छाई में गजब का आकर्षण होता है इसलिए बुरे से बुरा कार्य करने वाला भी समाज में स्वयं को बहुत शालीन और सभ्य दिखाता है लेकिन ईश्वर हम सब के ह्रदय में बैठे हैं वे हमारे बाहरी कार्यों के अलावा हमारे मन -मस्तिष्क में क्या चल रहा है , इसे भी अच्छी तरह जानते हैं l वैज्ञानिक तकनीकों से केवल व्यक्ति के बाह्य क्रिया -कलापों की जासूसी की जा सकती है लेकिन ईश्वर सबसे बड़ा जादूगर है , सम्पूर्ण स्रष्टि में प्रत्येक व्यक्ति के मन में क्या है , उसके हर पल की खबर ईश्वर को है क्योंकि हम सबके मन के तार ईश्वर से जुड़े हैं l जो इस सत्य को जानता है और कर्मफल सिद्धांत में विश्वास रखता है , उसका एक ही चेहरा होता है , उसका जीवन एक खुली किताब होता है l इसलिए उनके जीवन में शांति और सुकून होता है l लेकिन जिनकी आँखों पर लोभ , लालच , स्वार्थ , अहंकार , महत्वाकांक्षा का परदा पड़ा होता है , वे बहुत कुछ छुपाने के चक्कर में अपने जीवन का सुख -चैन गँवा बैठते हैं और तनाव की जिन्दगी जीते हैं l
25 February 2023
WISDOM ------
1 . महात्मा रामानुजाचार्य अपनी शारीरिक दुर्बलता के कारण नदी स्नान करने जाते हुए लोगों का सहारा लेकर जाया करते थे l जाते समय वे ब्राह्मण के कन्धों का सहारा लेते और आते समय शूद्र के कन्धों पर हाथ रखकर आते l लोगों ने आश्चर्य पूर्वक पूछा ---- " भगवान ! शूद्र के स्पर्श से तो आप अपवित्र हो जाते हैं , फिर स्नान का महत्त्व क्या रहा ? " महात्मा ने कहा --- " स्नान से तो मेरी देह मात्र शुद्ध होती है l मन का मैल तो अहंकार है l जब तक मनुष्य में अहंकार शेष है , तब तक उसे मन का मलीन कहा जाता है l मैं शूद्र का स्पर्श कर के अपने मन की मलीनता स्वच्छ करता हूँ l मैं किसी से बड़ा नहीं, सब मुझसे म बड़े हैं , शूद्र भी मुझसे श्रेष्ठ हैं , इसी भावना को स्थिर रखने के लिए शूद्र का सहारा लिया करता हूँ l " उनका कहना था कि शरीर ही नहीं मन को भी पवित्र रखने की व्यवस्था करनी चाहिए l
24 February 2023
WISDOM ------
1 . जीवन के संघर्ष और आँधियों से दुःखी एक नाविक जहाज से उतारकर बाहर आया l समुद्र के मध्य अडिग और अविचलित चट्टान को देखकर उसे कुछ शांति मिली l वह वहां खड़ा होकर चारों ओर देखने लगा l उसने देखा समुद्र की तेज लहरें चारों ओर से उस चट्टान पर निरंतर आघात कर रही हैं l तो भी चट्टान के मन में न रोष है और न ही विद्वेष है l संघर्ष पूर्ण जीवन पाकर भी उसे कोई ऊब , कोई दुःख नहीं है l मरने की भी उसने कभी कोई इच्छा नहीं की l यह देखकर नाविक का ह्रदय श्रद्धा से भर गया l उसने चट्टान से पूछा == " तुम पर चारों ओर से आघात लग रहे हैं , फिर भी तुम निराश नहीं हो l " चट्टान बोली ---- " तात ! निराशा और मृत्यु दोनों एक ही वस्तु के दो पक्ष हैं l यदि हम निराश हो गए होते , तो एक क्षण ही सही दूर से आए अतिथियों को विश्राम देने , उनका स्वागत करने से वंचित रह जाते l " नाविक को एक प्रेरणा मिली ---- जीवन में कितने ही संघर्ष आयें , अब मैं चट्टान की तरह जिऊंगा ताकि भावी पीढ़ी और मानवता के आदर्शों की रक्षा हो सके l
23 February 2023
WISDOM -----
पुराण में कथा है कि समुद्र मंथन में कालकूट विष निकला , शिवजी ने उसे अपने कंठ में धारण किया l उसे पीते समय उस विष की कुछ बुँदे मिटटी पर गिर गईं l वह वही मिटटी थी जिससे ब्रह्मा जी मनुष्यों की देह बनाया करते थे l उस विषैली मिटटी से बने शरीर में वही विष ईर्ष्या , द्वेष की आग बन कर सबका अहित करता है और यह आग पूरे वातावरण को जहरीला बना देती है l यह दुर्गुण ऐसा है जो सब में चाहे वह सामान्य व्यक्ति हो , राजा हो , अधिकारी हो या कोई ऋषि , तपस्वी हो सब में थोड़ी -बहुत मात्रा में पाया जाता है l इस कारण ही परिवार में , समाज में और पूरे संसार में अशांति है l पुराण में एक कथा है --- ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र में द्वेष के कारण ऐसा शत्रुता का भाव उत्पन्न हो गया कि एक दूसरे को देखते ही अपशब्द कहने लगते थे l एक बार इंद्र के यज्ञ में जाने के लिए वशिष्ठ जी आश्रम से बाहर निकले कि उनका सामना विश्वामित्र से हो गया l अब दोनों एक दूसरे पर अपशब्दों की बौछार करने लगे l बात इतनी बढ़ गई कि वशिष्ठ ने विश्वामित्र को बगुला बन जाने का शाप दिया l विश्वामित्र ने भी उनको ' आडी ' नामक पक्षी बना दिया l दोनों ही सरोवर के तट पर घोंसला बनाकर रहने लगे लेकिन वे पुराना वैर भूले नहीं और नित्य प्रति युद्ध करने लगे l उनके बच्चे , सम्बन्धी भी युद्ध में शामिल हो गए l यह युद्ध बहुत वर्षों तक चला जिससे वह सरोवर और उसके आस -पास का रमणीक प्रदेश घ्रणित रूप में परिवर्तित हो गया l इस दुर्दशा को देख पितामह ब्रह्मा वहां पधारे और दोनों को शाप मुक्त कर के बहुत डांटा - फटकारा कि ज्ञानी , तपस्वी होकर तुम मूर्खों जैसा कार्य कर रहे हो तो फिर सामान्य जन की क्या कहें l
22 February 2023
WISDOM ----
कलियुग का साम्राज्य कैसे बढ़ा ? सतयुग धरती की ओर बढ़ रहा था l यह देखकर कलियुग ने अपने सहायकों की सभा बुलाई l किसी ने कहा --- मैं पृथ्वी पर जाकर धन का लालच फैला दूंगा , किसी ने कहा --- हम लोगों को कामनाओं में फंसा देंगे l किसी ने कहा --- नशे की लत लगा देंगे l पर कलि को संतोष नहीं हुआ l एक वृद्ध सहायक एक कोने में बैठा था l वह बोला --- मैं जा कर लोगों में निराशा और आलस पैदा कर दूंगा l उनके साहस को नष्ट कर दूंगा , बस ! फिर वे किसी काम के नहीं रहेंगे l वे अन्याय , अत्याचार के विरुद्ध खड़े नहीं होंगे और किसी बुराई को दूर करने के लिए संघर्ष भी नहीं कर सकेंगे l किसी अच्छाई को उपार्जित करने का साहस भी उनमें नहीं होगा l इस वृद्ध सहायक की बात कलि महाराज को बहुत पसंद आई l उन्होंने उसे अपना प्रधान बना लिया l आज के निराश और आलसी लोग कलि महाराज की प्रजा बने हैं l सतयुग आने के लिए आवश्यक शर्तें ही नहीं हैं l
21 February 2023
WISDOM -----
नगर सेठ अथाह धनराशि का स्वामी था l विपुल धन -वैभव के होते हुए भी उसके मन में तनिक भी शांति नहीं थी l कई रातें बीत जातीं , पर वह बिस्तर पर करवटें ही बदलता रहता और उसका मन बेचैन बना रहता l एक दिन वह अपने बिस्तर पर लेता हुआ था कि उसे एक मधुर आवाज सुनाई पड़ी , कोई व्यक्ति बाहर ईश्वर का भजन गा रहा था l उस संगीत को सुनकर सेठ का मन ऐसा शांत हुआ कि उसे नींद आ गई l अगले दिन उसने उस व्यक्ति को बुलाया , जो भजन गा रहा था l वह व्यक्ति नगर का मोची था , सेठ ने उसे एक स्वर्ण मुद्रा दी l स्वर्ण मुद्रा पाने के बाद उस व्यक्ति का भजन कई रातों तक सुनाई नहीं पड़ा l सेठ ने उसे बुलवाया तो पता चला कि उसने जीवन में पहली बार स्वर्ण मुद्रा देखी थी और उसे पाने के बाद उस की रक्षा में ऐसा व्यस्त हुआ कि उसकी स्वयं की नींद चली गई l यह सुनकर सेठ को भान हुआ कि वैभव की चाह एवं स्वार्थ ही सारी समस्याओं का मूल है l उसने अपनी धन -संपदा को परोपकार के कार्यों में उपयोग करने का निश्चय किया l ऐसा करने से उसके मन को शांति मिली l