15 December 2012

POSSITIVE.........

परिष्कृत द्रष्टिकोण ही स्वर्ग है ।यदि सोचने का तरीका सकारात्मक होतो हर परिस्थिति में अनुकूलता सोची जा सकती है ।गुबरैला और भौंरा एक ही बगीचे में प्रवेश करते हैं और दो तरह के निष्कर्ष निकालते हैं _भौंरा फूलों पर मंडराता ,सुगंध का लाभ लेता और गुंजन गीत गाता है ।गुबरैला कीड़ा अपने स्वाभाव के अनुरूप गोबर की खाद के ढेर को तालाश लेता है और अपने दुर्भाग्य पर रोते हुए कहता है संसार में बदबू ही बदबू भरी पड़ी है ।

13 December 2012

JAP AUR DHYAN

गायत्री मंत्र के जप के साथ जब हम माँ का ध्यान करते हैं तो हमें अध्यात्म के साथ ही सांसारिक जीवन में भी सफलता मिलती है ।सफलता की मात्रा इस बात पर निर्भर है कि हमने कितना निष्काम कर्म किया और मन के विकारों को दूर करने का कितना प्रयास किया ।जगत माता को प्रसन्न करने के लिये इतना तो करना ही होगा ।

12 December 2012

DHYAN

ध्यान हमारा परमात्मा से मिलन है और यह मिलन इतना आसान नहीं ।ध्यान की शुरूआत निष्काम कर्म से होती है ।निष्काम कर्म से मन के विकार दूर होते हैं और मन निर्मल हो जाता है ।मन की चंचलता थमती है और निरंतर भागने वाला मन परमात्मा में लगने लगता है

11 December 2012

KRAPA

यह सारा आकाश ईश्वर केअनुदानों से भरा पड़ा है ।हमें ही पात्रता विकसित करनी है अपने भीतर की बुराइयों को दूर करके ही हम परमेश्वर की कृपा के पात्र बन सकते हैं ।

NISHKAM KARMA

गायत्री मंत्र के जप के साथ यह बहुत आवश्यक है कि हम निष्काम कर्म को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करें ।यह संसार ईश्वर की बगिया है ।इसे सुन्दर बनाने के लिये नि:स्वार्थ भाव किये गये कार्य से ही ईश्वर प्रसन्न होतें हैं ।

GAYTRI MANTRA

श्रद्धा और विश्वास के साथ समर्पण भाव से जब हम गायत्री महा मंत्र जपते हैं तो हमारे चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है और फिर संसार की कोई भी ताकत हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती बच्चा माँ की गोद में स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है इसलिये जब गायत्री मंत्र के जप के साथ हम माँ को पुकारते हैं तो सबसे पह्ले माँ हमें अपने संरक्षण में ले लेती हैं

3 December 2012

phoolo ki.........

फूलो की सुगंध हवा के प्रतिकूल नहीं फैलती लेकिन सद्गुणों कीर्ति दसों दिशाओ में फैलती है चन्दन जाति का काठ है सर्पों से घिरा रहता है फिर भी अपने गुणों के कारण मस्तक में धारण किया जाता है पुष्प की तरह खिले चन्दन की तरह सुगन्धित बने तो भगवान भी सिर पर रखेंगे