16 May 2019

WISDOM ---- मन में आशा का अंकुर जमा लिया जाये तो असफलता भी पराजित नहीं कर पाती---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

 आचार्य  जी  का  मत  है  कि -- बहुधा  नए  कामों  का  आरम्भ  करते  समय   अशुभ  की  आशंका  से  मन  भयभीत  होने  लगता  है  ,  ऐसी  स्थिति  में  अशुभ  आशंका  को   अपने  मन  से  झटककर  विचार  करना  चाहिए  l   सफलता  और  असफलता  दोनों  ही  संभावनाएं  खुली  हुई  हैं   l  यदि  मन  में  आशा  का  अंकुर  जमा  लिया  जाये  तो  असफलता  हमें  पराजित  नहीं  करती  , उस  स्थिति  में  व्यक्ति  को  यह  संतोष  रहता  है  कि  असफलता  कोई  नया   अनुभव  दे  गई  l  
प्रत्येक  व्यक्ति  के  जीवन  में  अच्छी  और  बुरी  दोनों  तरह  की  परिस्थिति  आती  हैं , सुख -दुःख  के  क्षण  सभी  के  जीवन  में  आते  हैं   l  असफलता , कठिनाइयों  और  कष्टों  को  याद  रखने  की  अपेक्षा   सफलताओं  और  सुखद  क्षणों  को  याद  करना  आशा  और  उत्साहजनक  होता  है  l  ये  स्मृतियां  व्यक्ति  में  आत्मविश्वास   उत्पन्न करती  हैं   और  जो  व्यक्ति   अपने  आप  में  विश्वास  रखता  है   वह  बिना  किसी  भय  के  हर  कठिनाई  का  सामना  करने  के  लिए  प्रस्तुत  रहता  है  l  आत्मविश्वास  ही  ईश्वर  विश्वास  है  l  

15 May 2019

WISDOM ----- अनीति द्वारा पाई हुई सफलता कभी भी संतोषदायक नहीं होती ---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

 आचार्य जी  का मत है  कि   अनीति  का  धन - धान्य   मनुष्य  के  मन , बुद्धि  तथा  आत्मा  का  पतन  कर  देता  है   जिससे  वह  इतना  निर्बल  और  कायर  हो  जाता  है   कि  जरा  सी  प्रतिकूलता   आने  पर  घबरा  उठता  है   और  शीघ्र  ही  जीवन  से  भागने  की  कोशिश  करता  है   l  सफलता  बहुत  बड़े  मूल्य  पर  मिलती  है   l  जो  व्यक्ति  थोड़े  प्रयत्न  से  ही  मनोवांछित  सफलता  पाना  चाहते  हैं   वे  संकीर्ण  विचार  वाले  होते  हैं   जो  किसी  चीज  का  पूरा  मूल्य  दिए  बिना  ही  उसे  हस्तगत  करना  चाहते  हैं   l   ऐसे  लोभी - लालची  व्यक्ति  का  चरित्र   किसी  समय  भी  गिर  सकता  है  l 
 यथार्थ  उन्नति  के  लिए  उचित  आदर्शों  के  साथ  अपना  कर्तव्य करते  रहना  चाहिए  ,  समय  आने  पर  सफलता  अपने  आप   उपलब्ध  हो  जाएगी  l  

WISDOM -----

आलसी और अकर्मण्य के लिए संकटों और अभावों से छुटकारे का कोई उपाय नहीं l पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने लिखा है --- जो अपनी उपेक्षा करता है , उसे हर दिशा से उपेक्षा और तिरस्कार ही हाथ लगता है l दुर्बल शरीर को नई - नई किस्म की बीमारियाँ दबोचती हैं डरपोक को डराने के लिए जीवित ही नहीं मृतक भी भूत -प्रेत बनकर ढूंढते - खोजते आ पहुँचते हैं l आततायिओं को अपना शिकार पकड़ने के लिए कायरों की तलाश करनी पड़ती है l शंकाशील लोगों को बिल्ली भी रास्ता काटकर डरा देती है l अरबों - खरबों मील दूर रहने वाले ग्रह - नक्षत्र भी अपनी प्रकोप मुद्रा उन्ही को दिखाते हैं जिन्हें अकारण भयभीत होने में मजा आता है l आचार्यजी का मत है कि अपनी दुर्बलताओं को खोजें , उनसे घ्रणा करें और उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए जुट जाएँ l

WISDOM-----

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अखंड ज्योति में लिखा है कि --- आलस्य और प्रमाद में पड़ा हुआ व्यक्ति यह देख ही नहीं पाता कि उसके सौभाग्य का सूर्य दरवाजे पर हर दिन आता है और कपाट बंद देखकर निराश वापिस लौट जाता है l आचार्य जी ने आगे लिखा है --- ईश्वर ने मनुष्य को एक साथ इकट्ठा जीवन न देकर उसे अलग - अलग क्षणों में टुकड़े -टुकड़े कर के दिया है l नया क्षण देने से पूर्व वह पुराना वापिस ले लेता है और देखता है कि उसका किस प्रकार उपयोग किया गया l इस कसौटी पर हमारी पात्रता को परखा जाता है l यदि उन क्षणों की उपेक्षा की , तिरस्कार किया तो वे दुखी और निराश होकर वापिस लौट जाते हैं किन्तु यदि उनका स्वागत किया जाये , सदुपयोग करें तो वे बहुमूल्य क्षण मूल्यवान संपदाओं का उपहार देकर ही जाते हैं l

27 April 2019

WISDOM ------ सामर्थ्य का अपव्यय - दुरूपयोग ही असंयम है ---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

 आचार्यजी  का  मत  है  कि  मनुष्य  का  सबसे  बड़ा  शत्रु  असंयम  है  l  शक्ति  तथा  सम्पन्नता  का  लाभ  तभी  मिलता  है  जब  उसका  सदुपयोग  बन  पड़े  l   दुरूपयोग  होने  पर  तो  अमृत  भी  विष  बन  जाता  है  l  माचिस  जैसी  छोटी   और  उपयोगी   वस्तु  अपना  तथा   पड़ोसियों  का  घरवार   भस्म  कर  सकती  है   l  इस  दुर्गुण  के  रहते  कुबेर  का  खजाना  भी  खाली  हो  सकता  है  l  ईश्वर प्रदत्त  सामर्थ्यों  का   सदुपयोग  कर  सकने  की  सूझ - बूझ  एवं  संकल्प शक्ति  को  ही    मर्यादा पालन   एवं  संयमशीलता   कहते  हैं   l   

17 April 2019

WISDOM ------ उत्तम ज्ञान जाग्रत देवता

पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्यजी  ने  अखंड  ज्योति  में  लिखा  है ---  '  मंदिर ,  गिरजे , गुरूद्वारे  टूटकर खंडहर  बन  जाते  हैं  , गिरकर नष्ट  हो  जाते  हैं  ,  लेकिन  उत्तम  ज्ञान  और  सच्चे  विचार  कभी  नष्ट  नहीं  होते  l  ज्ञान  वह  सीपी  है  ,  जिसमे  प्रवेश  कर मनुष्य  का  जीवन  मोती  बन  जाता  है  l '
 आचार्यजी   का  कहना  है ---- " दुर्भाग्य कभी हाथ  धोकर   पीछे  पड़  जाये  ,  ऐसा  लगे  कि   एक  भी  उपाय  प्रगति  पथ  पर   स्थिर  रखने  में  समर्थ  नहीं  है  , सभी  ओर  असफलता  ही   असफलता  ,  अंधकार  ही  अंधकार    प्रतीत  हो  रहा  हो   तब  तुम  महापुरुषों  के  ग्रन्थ  पढ़ना  l  विचारों  का  सत्संग   तुम्हारे  जीवन  में  फिर  से  प्रकाश  लायेगा  l  तुम्हारे   दुर्भाग्य  को  सौभाग्य  में   बदलने  की  शक्ति  उत्तम  ज्ञान  में    सन्निहित    है   l    जब  समस्त  शक्तियां  साथ  छोड़  दें  तब  तुम  उत्तम  पुस्तकों  को  मित्र  बनाकर   आगे  बढ़ना  l   एकाकी  और  असहायपन  के  बीच   तुम्हे  मौन  मैत्री  और  प्रकाश  की  वह  किरण  मिल  जाएगी   जो  तुम्हारा  हाथ  पकड़कर   तुम्हे  निर्दिष्ट  लक्ष्य  तक  पहुंचा  देगी  l

12 April 2019

WISDOM ------- अन्य किसी के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जैसा कि हम अपने लिए नहीं चाहते ---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

 आचार्य जी ने  अखंड  ज्योति  में  लिखा  है  - '   यह  कोई  जरुरी  बात  नहीं  कि  सब  लोग  अपना  धर्म , जातीयता , भाषा , पहनावा   छोड़कर  एक  से  बन  जाएँ   पर  अपनी  संस्कृति , धर्म  की  रक्षा  करते  हुए   हमें  दूसरे  की   संस्कृति   और    धर्म  का  आदर  करना  चाहिए  l  कलह  या  संघर्ष  की  वृद्धि   तब  होती  है  जब  मनुष्य  दुराग्रह  या  पक्षपात  के  कारण   उचित  को  छोड़कर  अनुचित  का   समर्थन  करता  है   l  इसलिए  यदि  हम  संसार व्यापी   शांति , सुख , प्रगति  के  पक्षपाती   हैं    और  चाहते  हैं  कि  हम  तथा  संसार  के  अन्य  लोग   सुखी  जीवन  व्यतीत  करें  तो  उसके  लिए   आध्यात्मिक  मार्ग  पर  चलना  ही  हमारा  कर्तव्य  है   l  इसके  लिए  हमारा  प्रथम  कर्तव्य    यही  है  कि  अपने  सुख - दुःख  के  समान  दूसरों  के  सुख - दुःख  को  समझें  l