30 March 2020

WISDOM ----- थोड़ी सी असावधानी मनुष्य के लिए एक बड़ा संकट उत्पन्न कर सकती है

 इस  सत्य  को  समझाने   वाली  एक  कथा  है ----  किसी  नगर  का  प्रमुख  शहद  खा  रहा  था  l  उसके  प्याले  में  से  थोड़ा  सा  शहद  टपककर  जमीन   पर  गिर  पड़ा  l
  उस  शहद  को  चाटने   मक्खियां  आ  गईं  l   मक्खियों  को  इकट्ठी  देख  छिपकली  ललचाई  और  उन्हें  खाने  के  लिए  आ  पहुंची  l   छिपकली  को  मारने   बिल्ली  पहुंची ,  बिल्ली  पर  दो - तीन  कुत्ते  टूट  पड़े  l  बिल्ली  भाग  गई   और  कुत्ते  आपस  में  लड़कर  घायल  हो  गए  l
  कुत्तों  के  मालिक  अपने - अपने  कुत्तों  के  पक्ष  का  समर्थन  करने  लगे    और  दूसरे  का  दोष  बताने  लगे  l  उस  पर  लड़ाई  ठन   गई  l  लड़ाई  में  दोनों  ओर   की  भीड़  बड़ी   और  आखिर  सारे  शहर  में  बलवा  हो  गया  l  दंगाइयों  को  मौका  मिला ,  उन्होंने  लूटपाट  की ,  कई  जगह  आग  लगा  दी  l
  नगर  प्रमुख  ने  जांच  कराई  और  इतने  बड़े  उपद्रव  का  कारण  पूछा    तो  मंत्री  ने  जांचकर  बताया  कि --- राजन  !  आपके  द्वारा  असावधानी  से  गिराया  हुआ  थोड़ा  सा  शहद  ही  इतने  बड़े  दंगे  का  कारण  बन  गया  है  l '
 यह  बात  सबको  समझ  में  आई  कि  थोड़ी  सी  असावधानी  मनुष्य  के  लिए  कितना  बड़ा  संकट  उत्पन्न  कर  सकती  है  l
 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है ---- ' सद्बुद्धि  ही  संसार  में  समस्त  कार्यों  में  प्रकाशित  है  l  यही  सबसे  बड़ी  सामर्थ्य  है  l   हम  ईश्वर  से  सद्बुद्धि  के  लिए  प्रार्थना  करें  l '

WISDOM ----- मौन रहें

 इमर्सन  ने  कहा  है --- ' आओ  हम  चुप  रहें  ,  ताकि  फरिश्तों  के  वार्तालाप  सुन  सकें  l '
  प्रकृति  निरंतर  हमसे  कुछ  कहना  चाहती  है  l  शान्त   और  एकाग्र  मन  से  ही    उनसे  वार्तालाप  संभव  है   l   मौन  रहकर  ही   अपने  अंतराल  में  उतरने  वाले  ईश्वर  के  दिव्य  संदेशों  , प्रेरणाओं  को  सुना - समझा  जा  सकता  है   l
  विश्व  के  अधिकांश  देशों  में  फैली  इस  महामारी  ने   मनुष्य  द्वारा  अपने  सामाजिक  जीवन  में  किये  जाने  वाले  व्यवहार  को  विकराल  रूप  में  प्रकट  कर  मानवता  को  एक  सन्देश  दिया  है  ----  संसार  के  विभिन्न  देशों  में    मनुष्य  ने  जाति ,  धर्म , लिंग , रंगरूप , नस्ल ,  अमीर - गरीब ,  ऊंच - नीच   आदि  पर  भयानक  भेदभाव  किया  l   स्वयं  को  श्रेष्ठ  समझकर  दूसरे  पक्ष  पर  अमानवीय  अत्याचार  किये ,  उन्हें  तिरस्कृत  किया l   सरल  भाषा  में  कहें  तो   जिसको  अपने  से  हीन   समझा ,  निम्न  श्रेणी  का  समझा   उसको  अपने  से  दूर  रहने  को  कहा  ,  उसको  छूने  से ,  उसके  साथ  उठने  बैठने  से  इनकार   किया  l
  इस  वैश्विक  महामारी  ने  सबको  एक  श्रेणी  में  ला  दिया ,  एक  दूसरे  से  दूरी   बनाकर  रहो  ,  टच  न  करो l   प्रकृति  में  कहीं  कोई  भेदभाव  नहीं  है   l   सूर्य  का  प्रकाश  सबको  समान   रूप  से  मिलता  है  l
  विशेषज्ञ  इस  महामारी  से  निपटने  के  तरीके  बताते  हैं  l   ईश्वर  सर्वोपरि  है   l   संसार  में  सब  लोग  मिलकर  ईश्वर  से  प्रार्थना  करें  और  संकल्प  लें  कि   वे  हमारी  रक्षा  करें  ,  स्थिति  सामान्य  होने  पर  हम  सब  भेदभाव  मिटाकर   सच्चे  इनसान   बनकर  रहेंगे  l
 सच्चे  दिल  से  की  गई  प्रार्थना  अवश्य  सुनी  जाती  है  ,  ईश्वर  हम  सबके  हृदय  में  है  ,  इसलिए  छल - कपट   ईश्वर  को  पसंद  नहीं  l 

29 March 2020

WISDOM ------- निष्काम सेवा ही असली सेवा है

 महर्षि  वेदव्यास  ने  अपने  अठारह  पुराणों  में  एक  ही  बात  सार  रूप  में  लिखी  है --- परोपकाराय    पुण्याय  पापाय   परपीडनम  l '  अर्थात  परोपकार  करने  से  पुण्य  और  दूसरों  को  सताने  से  पाप  मिलता  है  l   रामचरितमानस  में  भी   गोस्वामीजी  ने  लिखा  है --- ' परहित  सरिस  धर्म  नहीं  भाई  l   पर  पीड़ा  सम  नहिं   अधमाई  l '
  शास्त्रों   में  कहा  गया  है  कि  यदि  सेवा  कर्तव्यपालन   या  आत्मिक  उन्नति  के  लिए  की  जा  रही  है  तो  वह  असली  सेवा  है   और  अगर  किसी  लालच  से  की  जा  रही  है  ,  तो  वह  आडंबरमात्र  है  l
  कल्याण  मासिक  पत्रिका  के  संपादक  श्री  हनुमान प्रसाद  पोद्दार जी   भीषण  ठंड   के  दिनों  में   गीता  वाटिका  ( गोरखपुर )  से  चुपचाप  निकलते  थे  और  ठण्ड  से  सिकुड़  रहे   गरीबों  को  कम्बल - चादर  ओढ़ा  दिया  करते  थे  l   एक  बार  एक  पत्रकार  ने   गरीबों  को  कम्बल  ओढ़ाते  हुए   उनका  फोटो  ले  लिया  ,  तो  पोद्दार जी  ने  बड़ी  विनम्रता  से   उससे  कहा --- " यह  फोटो  अख़बार  में  मत  छापना   ,  न  ही  इसके  बारे  में  किसी  दूसरे  को  बताना ,  नहीं  तो   मैं  पुण्य  की  जगह  पाप  का  भागी  बनूँगा  l  प्रचार  के  उद्देश्य  से  की  गई  सेवा  पुण्य  नहीं , पाप  का  मार्ग  बताई  गई  है  l  "
  हमारे  शास्त्रों  में  लिखा  है  -- निष्काम  सेवा  यही  है  जिसमे  हम  यश - मान - अपमान  से  कोसों  दूर  होते  हैं  l  यदि  इस  सेवा  में  अहंकार  की  गंध  हो  , यश  प्राप्ति  की  कामना  और  किसी  प्रकार  का  लालच  हो   तो  वह  सेवा  ही  नहीं  है  l  
  ईसामसीह   भी  सेवा  करने  की  भावना  को  बहुत  महत्व   देते  थे  l उनके  एक  शिष्य  की  शेखी  बघारने  की  बहुत  आदत  थी  l  एक  दिन  वह  महात्मा  ईसा  के  दर्शन  को  पहुंचा   और  बोला --- " आज  मैं  पांच  गरीबों  को  खाना  खिलाकर  आया  हूँ  l  जब  तक  मैं  किसी  की  सहायता  न  कर  दूँ  ,  मुझे  चैन  नहीं    मिलता  l  "  इस  बात  पर  ईसा  ने  उसे  समझाया --- ' तुम्हारा  आज  का  सेवा - पुण्य  समाप्त  हो  गया  l   जो  दिखावे  के  लिए   किसी  की  सहायता  करता  है  , समझ  लो  कि   वह  नाटक  करता  है  l   इसलिए  किसी  की  सहायता  गुप्त  रूप  से  करनी  चाहिए  l  ' उन्होंने  आगे  कहा --- ' सेवा - सहायता  का  कार्य  तुम्हारा  इतना  गुप्त  हो  कि  तुम्हारे  बांये  हाथ  को  भी  पता  न  चल  सके  कि   दाहिने  हाथ  से  तुमने  दान  किया  है   या  किसी  की  मदद  की  है  l  परमेश्वर  तुम्हारे  गुप्त  कार्यों  को  भी  देखता  है  l  ढिंढोरा  पीटने  से  कोई  लाभ  नहीं  l ' 

WISDOM ------- शक्ति की शोभा दुर्बल पर जोर दिखाने में नहीं , गिरे हुओं को उठाने में होती है ---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

  पेड़  की  एक  डाल   पर  तोता  और  दूसरी  डाल   पर  बाज  बैठे  थे  l   तोते  को  देखकर  बाज  अकड़कर  बोलै --- "अरे  तोते  ! अच्छा  है  कि   मेरा  पेट  भरा  है  ,  नहीं  तो  क्षण  भर  में   मैं  तेरे  टुकड़े  कर  दूँ  ,  पर  तू  ऐसे  दुस्साहस  के  साथ   मेरे  सामने  खड़ा  है  l "
  तोते  ने  कहा --- " आप  ठीक  कहते  हैं  कि   आप  मुझसे  ज्यादा  शक्तिशाली  हैं  ,  पर  शक्ति  की  शोभा  दुर्बल  पर  जोर  दिखाने   में  नहीं ,  गिरे  हुओं  को  उठाने  में  होती  है  l  भक्षण  तो  कोई  भी  कर  सकता  है  ,  पर  रक्षण  करना  बलवान  का  दायित्व  है  l  "  बात  बाज  की  समझ  में  आई  और  उसकी  समझ  में  परिवर्तन  आ  गया  l 

28 March 2020

WISDOM ----- आज संसार को ' गाँधीवादी अर्थशास्त्र ' की जरुरत है

  गांधीजी  ने  कहा  था  कि   हमारी  धरती  के  पास  प्रत्येक  व्यक्ति  की  आवश्यकता  के  लिए  बहुत  कुछ  है   पर  किसी  के  लालच  के  लिए  कुछ  नहीं  l   गांधीजी  का  मन्त्र  था --- जब  भी  कोई  काम  हाथ  में  लो  ,  यह  ध्यान  रखो  कि   इससे  सबसे  कमजोर  और  गरीब  व्यक्ति  को  क्या  लाभ  होगा  l   मानव  मात्र  की  ख़ुशी  ही  उनकी  मूल  कसौटी  थी   l   
गांधीजी  चाहते  थे  प्रत्येक  गाँव  आत्मनिर्भर  हो   l  लोग  अपरिग्रह  के  सिद्धांत   को  अपनाएं  जिससे  समाज  में  आर्थिक  असमानता  दूर  हो  सके  l   उनके  विचार  केवल  भारत  के  लिए  नहीं  अपितु  समस्त  संसार  के  कल्याण  के  लिए  थे  l 

WISDOM ----- वर्तमान समस्या का सबसे बड़ा कारण मनुष्य का संवेदनहीन होना है

 लोभ , लालच ,  कामना  वासना  के  जाल  में  मनुष्य  इस  तरह  उलझ  गया  है  कि  उसके  हृदय  में  संवेदना  का  स्रोत  ही  सूख   गया  है  l   कभी - कभी  प्रकृति  भी  ऐसी  विकट   परिस्थितियां  रचकर  मनुष्य  की  परीक्षा  लेती  है   कि    उच्च    आदर्शों   की  बात  करने  वाले  मनुष्य  की  सच्चाई  क्या  है  ? 
 मनुष्य  ने   अपने  स्वार्थ  के  लिए   प्रकृति  को  उपेक्षित  किया  ,  जल , थल , वायु  समूचे  पर्यावरण  को   प्रदूषित  कर  दिया,   अपनी   मानसिक  कमजोरियों  से  , अनैतिक  और  अपराधिक  गतिविधियों  से   वातावरण  में  नकारात्मकता  भर  दी  l
  प्रकृति  हमें  विभिन्न  तरीकों  से  समय - समय  पर  सन्देश  देती  रही  की-- सुधर  जाओ ,  सन्मार्ग  पर  चलो  लेकिन  मनुष्य  ने  समझा  नहीं   l   इस  बार  प्रकृति   अपनी    उपेक्षा  सहते- सहते   बहुत  क्रुद्ध  हो  गईं  l   कब  किस  पर  प्रकोप  हो  जाये  ----  कोई  नहीं   जानता  l
  हम  प्रकृति  के  सन्देश  को  समझें  ,  शासकीय  नियमों  में  रहते  हुए    संवेदनशील  बने  ,    गरीबी , मजबूरी  ,  जाति , धर्म ,  रंग  , ऊंच - नीच   आदि  विभिन्न  आधारों  पर  किसी  को    उपेक्षित   न  करें  l 
पं. श्रीराम  शर्मा आचार्य जी  का   कहना  है  --- इस  संसार  की  सभी  समस्याओं  का  एकमात्र  हल  संवेदना  है  l   हम  किसी  को  दुःख  न   दें  l   अपनी  सामर्थ्य  के  अनुसार  उसकी  पीड़ा  का  निवारण  करें  l 

27 March 2020

WISDOM ------- हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें

   कहते  हैं --- ' मन  के  हारे  हार  है , मन  के  जीते  जीत  l '     जीवन  में  हमें   जो  पल  मिले  हैं  उन्हें  सार्थक  करने  में  ही  हमारी  भलाई  है   l   शासन  ने  तो   लॉक  डाउन  कर  दिया  अब  यह  हमारे  हाथ  में  है  कि   हम  इस  समय  का  सार्थक  उपयोग  करते  हैं   या   इसे  व्यर्थ  गँवा  देते  हैं  l   कुछ  समय   बाद  ये    दिन   इतिहास  बन     जायेंगे     ,  हमारी  यादों  में   रहेंगे  l   महामारी   से  बचने  के  लिए   प्रतिरोधक        शक्ति  जरुरी  है  जो  नियम , संयम , प्राणायाम ,  संतुलित  भोजन   के  साथ  पारिवारिक  शांति  और  मन  में  संतोष  पर  निर्भर  है  l
  महाभारत  में  प्रसंग  है  --- जब  पांडव  जुए  में  हार  गए   और  उन्हें  12 वर्ष  का  वनवास  और  एक  वर्ष  का  अज्ञातवास  हुआ   l  इस  अज्ञातवास  में  वे   निष्क्रिय  होकर  नहीं  रहे   l   वे  लोग  वेश  बदल  कर   राजा  विराट  के  यहाँ  रहे  l   अर्जुन  ने  उस  अवधि  में   वहां  नृत्य - संगीत  सिखाने   का  कार्य  किया  l   शक्तिशाली  भीम  ने  रसोइये  का  कार्य  किया  l   यज्ञ  से  उत्पन्न  हुई  द्रोपदी  ने  महारानी  की  सेवा  , उनके  साज श्रंगार  का  कार्य  किया  l इसी  तरह  नकुल , सहदेव  और   युधिष्ठिर  ने  अलग - अलग  कार्य  किये  l   सम्पूर्ण  वनवास  की  अवधि  में  और  फिर  अज्ञातवास  में  निरंतर  सक्रिय   रहकर   ही   उन्होंने  वो  ऊर्जा  संचित  की  जिससे  वह  महाभारत  के  युद्ध  में  विजयी  हुए  l   इस  अवधि  में  पांचों  पांडव  और  द्रोपदी  परस्पर  मेलजोल  से  परिस्थितियों    से  संतुलन  बनाकर  रहे  l
  दूसरी  तरफ  कौरव  भोग - विलास   और  छल - कपट  और  षड्यंत्र  जैसे    नकारात्मक   कार्यों  में  अपनी  ऊर्जा   नष्ट  करते  रहे  l   इसलिए  पराजित  हुए  l