12 October 2022

WISDOM -----

  ईरान  के  राजा  शाह  अब्बास  को  किसी  कार्यक्रम  वृक्षारोपण  के  लिए  बुलाया  गया  था  l  वृक्षारोपण  के  समय  उस  उद्यान  का  माली  उपस्थित  नहीं  था  , अत:  शाह  ने  अपने  हाथों  से  पोधा  रोप  दिया  l   जब  माली  लौटा  तो  उसने  पौधों  की  बेतरतीब  कतारें  देखीं   l  उसने  उनको  निकाल कर  दोबारा  से  रोपना  आरम्भ  कर  दिया  l  राजा  तक  ये  बात  पहुंची  l  कुछ  चुगलखोरों  ने  उसे   दरबार  में  बुलवाया   ताकि  उसे  राजदंड  मिल  सके  l  उसे  कहा  गया  कि  शाह  ने  अच्छा  मुहूर्त  देखकर   पौधे  रोपे  थे   और  तुमने  पौधे  निकाल  कर   मुहूर्त  और  शाह  दोनों  का  अपमान  किया   है  l  माली  सिर  झुकाए  खड़ा  था  ,  पर  शाह  अब्बास  ने  उसकी  तारीफ़  करते  हुए  कहा ---- " मेहनत  करने  वाले  के  लिए   हर  मुहूर्त  शुभ  होता  है  l  जो  माली  राजदंड  की  परवाह  किए  बगैर  बाग  का  ध्यान  दिल  लगाकर  रखता  है  ,  उसे  सजा  नहीं  पुरस्कार  मिलना  चाहिए   l " माली  को  ससम्मान  विदा  किया  गया  l 

11 October 2022

WISDOM ----

   हमारे  धर्म  ग्रंथों  का  एक  मूल  मन्त्र  है ---- ' जो  नम्र  होकर  झुकता  हैं  , वही  ऊपर  उठते  हैं   l '  आज  संसार  में  धर्म , जाति , ऊँच -नीच , अमीर -गरीब   आदि  के  नाम  पर   इतनी  फूट  है  कि  अब  मनुष्यं , मनुष्य  से  ही  डरने  लगा  है  l  आज  जानवर  से  सामना  करना  फिर  भी  सरल  है   किन्तु  मनुष्य  नाम  का  प्राणी  कब  पीठ  में  छुरा  भोंक  दे ,  छल , कपट , षड्यंत्र  कर  के   आपके  अस्तित्व  को  ही  मिटा  दे  ,  कोई  नहीं  जानता  ?  केवल  ईश्वर विश्वास , दैवी  शक्ति  ही  रक्षा  कर  सकती  है l  कलियुग  की  इस  दुर्बुद्धि  के  कारण  रिश्ते  और  प्रेम  ने  अपना  अर्थ  ही  खो  दिया  है  l  कहते  हैं --,एक  तो  करेला  , ऊपर  से  नीम  चढ़ा  l'    एक  तो  कलियुग  का  प्रभाव  ,  उस  पर  से    स्वार्थी  तत्वों  ने  इस   फूट  से   चाहे  परिवार  हो , समाज  हो  या  सम्पूर्ण  संसार  की  बात  हो  ,  कहीं  भी   फायदा  उठाने ,  अपना  स्वार्थ  सिद्ध  करने  में  कोई  कसर  नहीं  छोड़ी  l  प्रकृति  दंड  भी  देती    है  लेकिन  स्वयं  का  सुधार  सबसे  कठिन  कार्य  है  l  आज  जरुरत  है  विनम्रता  की  l   विनम्रता  के  वास्तविक  अर्थ  को  समझाने  वाली  एक  कथा  है -------  एक  बार   बाबा  फरीद  से  मिलने  एक  राजा  आया  l  वह  बड़ा  अहंकारी  था    और  बाबा  के  लिए  उपहार स्वरुप  एक  नायाब  तलवार  लेकर  आया  l  बाबा  फरीद  बोले ---- " राजन  !  मैं  शुक्रगुजार  हूँ  कि  तुम  मेरे  लिए  बेशकीमती  तलवार  लेकर  आए  ,  लेकिन  यह  मेरे  किसी  काम  की  नहीं  l  मुझे  कुछ  देना  ही  चाहते  हो  तो   सुई  के  साथ  विनम्रता  का  उपहार  दो  l  वह  मेरे  लिए  ऐसी  सौ  तलवारों  से  भी  अधिक  कीमती  होगा  l "  बाबा  की  बात  सुनकर  राजा  दंग  रह  गया  और  बोला --- " बाबा  ! सुई  और  विनम्रता   ऐसी  सौ  तलवारों  का  मुकाबला  कैसे  कर  सकती  हैं ? "   बाबा  बोले --- " तलवार  लोगों  को  मारने -काटने  का  काम  करती  है   जबकि  सुई  सिलने  का  काम  करती  है  l  छोटी  सी  सुई  चीजों  को  जोड़ती  है   l  तोड़ना  आसान  है  और  जोड़ना  कठिन  है  l  इसी  तरह  विनम्रता  से  व्यक्ति  उन  सभी  को  जीत  लेता  है  ,  जिन्हें  वह  अहंकारवश  नहीं  जीत  सकता  l  इसलिए  सुई  और  विनम्रता  ज्यादा  कीमती  है  l  "  राजा  को  बाबा  की  बात  समझ  में  आ  गई   , और  बाबा  के  चरणों  में  सिर  रखकर  बोला --- " आज  से  मैं  जोड़ने  का  काम  करूँगा ,   तोड़ने  का  नहीं   और  विनम्रता  से  प्रजा  के  ह्रदय  को  जीतने  का  प्रयास  करूँगा  l  "   विनम्रता   के  पीछे  कोई  छुपा  हुआ  स्वार्थ  या  अवसरवादिता  नहीं  होनी  चाहिए  ,  फिर  वह  विनम्रता  होगी  ही  नहीं  , फिर  वह  ढकोसला  होगा  l   आचार्य श्री  लिखते  हैं --- 'सच्ची  विनम्रता  व्यक्ति  को  संवेदनशील  बनाती  है  ,  जिससे  वह  दूसरों  के  कष्ट -पीड़ा  को  महसूस  करता  है   और  उसे  दूर  करने  के  लिए  वह  सेवा -सहायता  के  कार्यों  में  निरत  होता  है  l "

10 October 2022

WISDOM -----

    ऋषियों  का  कहना  है ---- ' चींटी  का  संगृहीत  अन्न ,  मक्खी  का  संचित  शहद  और  कृपण  का  संचित  धन   उनको  छोड़  सबके  काम  आता  है  l  अत: धन  का  सदुपयोग   उसके  सार्थक  कार्यों  में  निवेश  से  है  , निरर्थक  संग्रह  से  नहीं  l ' ------ एक  अमीर  सेठ  अपनी  तिजोरी  में  सोने  की  ईंट  रखता  था   और  प्रतिदिन  उसे  खोलकर  देखता  फिर   तिजोरी  बंद  कर  देता  l   बहुत  खुश  होता  कि  उसके  पास  अपार  संपत्ति  है  l   पुत्र  ने  उसे  ऐसा  करते  देख  लिया  , वह  अपने  पिता  की  कंजूसी  से  बड़ा  परेशान  था  l  तो  उस  पुत्र  ने  तिजोरी  की  चाबी  निकाल  कर  एक -एक   सोने  की  ईंट  खिसकाना  आरम्भ  किया   और  उसके  स्थान  पर  पीतल  की  ईंट  रखता  रहा  l   इस  तरह  नाटक  करते  सारा  जीवन  बीत  गया  l  अंत  समय  जब  सेठ  मरने  लगा   तो  लड़के  ने  कहा ---- " पिताजी , एक  रहस्य  की  बात  बताऊँ  ,  जो  आपसे  अब  तक  छुपा  रखी  थी  l  "  पिता  ने  कहा ---- " जरुर  बताओ  बेटा  l  " पुत्र  ने  कहा --- " पिताजी , जिन  ईंटों  को  देखकर  आप  इतना  खुश  होते  थे ,  वे  तो  पीतल  की  हैं  l  सोने  की  ईंट  तो  हमने  कब  की  बेच  डालीं  l  "  पिता  यह  सुनकर  रोने  लगा , उसको  बहुत  धक्का  लगा ,  आँखें  खुली  की  खुली  रह  गईं  , उसका  हार्ट फेल  हो  गया  l  

WISDOM ---

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----' देवता  यदि  कहीं  हैं , तो  हमारे  ही  अन्दर  सत्प्रवृत्तियों  के  रूप  में  हैं   l  और  असुर  हैं , तो  वे  भी  हमारे  अन्दर  पाशविक  प्रवृत्तियों  के  रूप  में  हैं  l  जो  विवेकशील  हैं,  वे  विलास  उपभोग  के  मायाजाल  में  न  पड़कर   पाशविक  प्रवृत्तियों  को  स्वयं  पर  हावी  नहीं  होने  देते  l '  देवराज  इंद्र  को  असुरों  से  अनेक  बार  परस्त  होना  पड़ा  l  भगवान  की  विशेष  सहायता  से  ही   बड़ी  कठिनाई  के  साथ  अपना  इन्द्रासन  लौटाने  में  सफल  हो  सके  l  एक  दिन  इस  बार -बार  की  पराजय  का  कारण  प्रजापति  से  पूछा  ,  तो  उन्होंने  कहा --- ऐश्वर्य  की  रक्षा  संयम  से  होती  है  l  जो  वैभव  पाकर  प्रमाद  में  फंस  जाते  हैं  , उन्हें    पराभव  का  मुँह  देखना  पड़ता  है  l   एक  कथा  है ------- दो  संत  तीर्थ  यात्रा  पर  जा  रहे  थे  l  एक  विशालकाय  वृक्ष  के  नीचे  उन्होंने  आश्रय  लिया   और  आगे   बढ़े  l  यात्रा  से  जब   अगले  वर्ष  वापस  लौटे   तो  उन्होंने  देखा  कि  जिस  सघन  वृक्ष  की  छाया  में   उन्होंने  भोजन  किया  था  , विश्राम  किया  था , वह  गिरा  पड़ा  है  l   पहले  संत  ने  अपने  वरिष्ठ  संत  से  पूछा  --- " महात्मन  !  यह  कैसे  हुआ  ?  इतनी  अल्प  अवधि  में  यह  वृक्ष  कैसे  गिर  गया  ? "  संत  बोले --- " तात  !  यह  वृक्ष  छिद्रों  के  कारण  गिरा  है  l  प्राण  था --- इसका  जीवन  रस ,  जो   गोंद  रूप  में  सतत  बहता  रहा  l  उसे  पाने  की  लालसा  में  मनुष्य  ने  उसमें  छेद  कर   उसे  खोखला  बना  दिया  l  खोखली  वस्तु  कभी  खड़ी  नहीं  रह  सकती  l  झंझावातों  को  सहन  न  कर  पाने   के  कारण  ही  इसकी  यह  गति  हुई  है  l  '

9 October 2022

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---' जितनी  शक्ति  मनुष्य  के  भीतर  है  , उतनी  किसी  के  पास  नहीं  है   किन्तु  मनुष्य  भोग -विलास  में  जीवन  बिता  कर  इस  अमूल्य  संपत्ति  को  नष्ट  कर  रहा  है  l  '  एक  कथा  है ----- एक  तपस्वी  वन  में  रहकर  घोर  तप  कर  रहे  थे  l  यह  देख  इंद्र  घबराए   कि  इतना  कठोर  तप  करने  वाला  इन्द्रासन  का  हकदार  बन  सकता  है  l  इंद्र  ने  उनकी  तपस्या  भंग  करने  के  लिए  अप्सराएँ  भेजीं ,  डराने  के  लिए  राक्षस  भेजे  ,  पर  तपस्वी  ज्यों  के  त्यों   रहे  , वे  जरा  भी  डगमगाए  नहीं  l  अब   इंद्र  ने  दूसरी  चाल  चली  l  उन्होंने  एक  परी  को   बहुत  से  पकवान , मिष्ठान  लेकर  भेजा  l  तपस्वी  ने  पहले  तो  उपेक्षा  दिखाई  ,  लेकिन  फिर  उनकी  जीभ  चटोरी  हो  गई  l  वन  में  ऐसा  स्वादिष्ट  भोजन   उन्हें   पहली  बार  मिला   l  अब  वे  रोज  उस  परी  की  प्रतीक्षा  करने  लगे  l  एक  दिन  वन परी  अपने  घर  छप्पन  भोग  पकवान  खिलाने  का  निमंत्रण  देने  आई  l  तपस्वी  उसके  घर  पहुंचे  और   भोजन  कर  बहुत  प्रसन्न  हुए  l  परी  ने  कहा ---- ' आप  मेरे  घर  ही  निवास  करें  ,  इससे  भी  बढ़कर  भोजन  कराया  करुँगी  l "  तपस्वी  सहमत  हो  गए  l  रोज -रोज  पकवान  खाते  थे  l  अब  वे  परी  पर  मुग्ध  हो  गए  , उसके  साथ  गंधर्व  विवाह  करने  को  सहमत  हो  गए  l  तप  भ्रष्ट  हुआ  ,  देवराज  इंद्र  बहुत  प्रसन्न  हुए   और  बोले ---- " अन्य  रस  छोड़े  जा  सकते  हैं  ,  पर  स्वाद  बड़े -बड़ों  की  साधना  चट  कर  जाता  है  l "

WISDOM ----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- ' आकस्मिक  विपत्ति  का  सिर  पर  आ  पड़ना   मनुष्य  के  लिए  बहुत  दुखदायी  है  l  इससे  उसकी  बड़ी  हानि  होती  है  ,  किन्तु  उस  विपत्ति  की  हानि  से   अनेकों  गुनी  हानि  करने  वाला  एक  और  कारण  है  ,  वह  है  विपत्ति  में  घबराहट  l  विपत्ति  कही  जाने  वाली   मूल  घटना  चाहे  वह  कैसी  बड़ी  क्यों  न  हो  ,  किसी  का  अत्यधिक  अनिष्ट  नहीं  कर  सकती  ,  परन्तु  विपत्ति  की  घबराहट  , ऐसी  पिशाचिनी  है  कि  वह  जिसके  पीछे  पड़  जाती  है  , उसके  गले  से  खून  की  प्यासी  जोंक  की  तरह  चिपक  जाती  है   और  जब  तक  उस  मनुष्य  को   पूर्णतया  नि:सत्य  नहीं  कर  देती  ,  तब  तक  उसका  पीछा  नहीं  छोड़ती  l  "    सामान्यत:  यही  देखा  जाता  है  कि  थोड़ी  सी  भी  परेशानी  आने  पर  हम  अपना  धैर्य  खो  बैठते  हैं   और  समस्या  का  समाधान  खोजने  के  बजाय  घबराहट  में  उस  समस्या  को  और  अधिक  बढ़ा  देते  हैं  l  धैर्य  और  ईश्वर विश्वास  जरुरी  है  l     एक  कथा  है --------  एक  भैंस  थी --बड़ी  उपद्रवी  l  रस्सा  तुड़ाकर  भाग  जाती  थी   और  जिस  खेत  में  घुस  जाती  ,  उसी  को  कुचल  कर  रख  देती  l  पकड़ने  वालों  की  भी  वह  अच्छी  खबर  लेती  l  एक  दिन  तो  वह  ऐसी  हो  गई  कि  किसी  की  पकड़  में  नहीं  आ  रही  थी  l  हैरान  लोगों  के  बीच  से  एक  साहसी  लड़का  निकला  l  सिर  पर  उसने  हरी  घास  का  गट्ठर  रख  लिया   और  उपद्रवी  भैंस  की  तरफ  सहज  स्वभाव  से   आगे  चलता  चला  गया  l  ललचाई  भैंस   घास  खाने  के  लिए  आगे  बढ़ी  ,  लड़के  ने  उसके  आगे  गट्ठा  डाल  दिया   और  मौका  मिलते  ही  उछलकर   उसकी  पीठ  पर  जा  बैठा  l  डंडे  से  पीटते  हुए  वह  उसे  बाड़े  में  ले  आया   l  लोगों  ने  जाना  कि  आवेश  भरे  प्रतिरोध  से  भी  बढ़कर   उपद्रवी  तत्वों  को  काबू  में  लाने  के  लिए  कई  बार  दूरदर्शी  नीतिमत्ता  अधिक  कार्य  करती  है  l  

8 October 2022

WISDOM -----

  भारतीय  तत्ववेत्ताओं  का  कहना  है  कि मानव  के  बंधन  और  दुःख  उसके  अतीत  के  गलत  कार्यों  व  कर्मों  के  स्वाभाविक  परिणाम  हैं  l  यदि  इस  जीवन  में  शुभ  और  उचित  कर्म  निष्ठापूर्वक  किए  जाएँ  तो  भविष्य  में  उनका   शुभ  फल  प्राप्त  होने  की  पूर्ण  संभावना  है   l   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं --- " मनुष्य  का  जीवन  एक  खेत  है  ,  जिसमें  कर्म  बोए  जाते  हैं   और  उन्ही  के  अच्छे -बुरे  फल  काटे  जाते  हैं  l  जो  अच्छे  कर्म  करता  है  , वह  अच्छे  फल  पाता  है  ,  बुरे  कर्म  करने  वाला  बुराई  ही  समेटता  है   l '  आचार्य श्री  लिखते  हैं --- कर्म  करना  मनुष्य  के  हाथ  में  है  लेकिन   उसका  फल  कब  और  कैसे  मिलेगा  यह  काल  निश्चित  करता  है  l   कर्मों  का  इच्छानुसार  फल  प्राप्त  करना  हो  तो   प्रयत्न  के  अतिरिक्त  धैर्य  की  भी  आवश्यकता  होती  है   l "  यदि  आज  हम  कोई  नेक  कर्म  कर  रहे  हैं   तो   आज  या  कल  में  या  कुछ  ही  दिनों  में  हमको  उसका  सुफल  नहीं  मिल  जायेगा  ,  ईश्वर  तराजू  में  तोलकर  न्याय  करते  हैं  ,  हम  निरंतर  सत्कर्म  करें   और  ईश्वरीय  चमत्कारों  को  महसूस  करें  l    एक  कथा  है ----- ' बंदरों  का  एक  दल  आम  के  बाग  में  निवास  करता  था  l  बन्दर  जब  भी  आम  तोड़ने  का  प्रयास  करते   तो  आम  तो  कम  ही  हाथ  लगते  ,  पर  बाग  के  रखवालों  के  पत्थर  ज्यादा  झेलने  पड़ते  l  तंग  आकर  बंदरों  के  सरदार  ने  एक  दिन  सभी  बंदरों  की  सभा  बुलाई   और  उसमें  घोषणा  की   कि  ' आज  से  हम  लोग  अपना  अलग  बाग  लगाएंगे  और  उसमे  आम  के  पेड़  लगाएंगे  l  इससे  रोज -रोज  के  झंझट  से  मुक्ति  मिलेगी  l ' सब  बंदरों  को  यह  बात  जंच  गई   और  सबने  आम  की   एक -एक  गुठली  ली  और  जमीन  में  गड्ढा  खोद  कर  बो  डाली  l  सब  बंदरों  में  प्रसन्नता  की  लहर  व्याप्त  हो  गई  कि  अब  शीघ्र  ही  हर  बन्दर  आम  के  एक  पेड़  का  स्वामी  होगा  l  बंदरों  में  धैर्य  नहीं  था  , कुछ  ही  घंटे  गुजरे  थे   कि  बंदरों  ने  जमीन  खोदकर  गुठलियाँ  निकाल  कर  देखना  शुरू  किया  कि  उनमें  से  पेड़  निकले  या  नहीं   l  थोड़ी  ही  देर  में  सारा  बाग  उजाड़  गया  l