31 December 2012

सज्जनता ,नम्रता,उदारता ,सेवा ,आदि सद्गुणों के साथ व्यक्ति को निर्भीक और साहसी होना चाहिये अन्यथा सज्जन को लोग मूर्ख और दब्बू समझने लगतें हैं ।यह निर्भीकता और प्रखरता आती है ईश्वर विश्वास से ।ईश्वर विश्वासी व्यक्ति ही आत्मविश्वासी होता है ।एक कछुआ बीस मेढकों से भारी पड़ता है ।एक आत्मविश्वासी ,बीस गुत्थियों को एक साथ सुलझाने और बीस संकटों से पार जाने में समर्थ होता है ।

30 December 2012

एक घंटे लगातार बोलने पर व्यक्ति इतना अधिक थक जाता है कि आठ घंटे तक शारीरिक श्रम किया जाता तो थकान नहीं आती क्योंकि वाणी का सीधा संबंध मस्तिष्क से है ।शारीरिक क्रिया -कलापों में जिन कार्यों में सर्वाधिक मानसिक शक्ति खर्च होती है वह वाणी ही है ।इसलिये मौन की गणना मानसिक तप से की गयी है ।मौन का अर्थ है आन्तरिक -बाह्य क्रियाओं का अपने पर प्रभाव न होने देना ,स्वयं को उनसे निरपेक्ष रखने का नाम मौन है ।सत्य नि:शब्द होता है और कुछ प्रश्नों के उत्तर केवल मौन में दिये जा सकते हैं ।

29 December 2012

शिव भारतीय धर्म के प्रमुख देवता हैं ।त्रिवर्ग में उनकी गणना होती है ।शिव नीलकंठ हैं ।हलाहल विष को धारण किया ,न उगला ,न पिया ।शिक्षण यही है कि विषाक्तता को न तो आत्मसात करें ,न ही उसे विक्षुब्ध होकर उछालें ।
प्रतिद्वंदी को पछाड़ो मत ।अपनी महानता का परिचय देकर उसे क्षुद्र बनने दो ।वह अग्नि ,वह सूर्य ,वह समुद्र बन जाओ ।महाकाल की बनो महत्ता ,युगाकाश पर छा जाओ ।

27 December 2012

मनुष्य के व्यकितत्व का निर्माण तभी होता है जब उसकी स्वाभाविक  प्रवृतियां एक लक्ष्य को द्रष्टि में रखकर व्यवस्थित की जाती हैं ।माँझी को यदि नदी के किनारे पहुंचने की इच्छा न हो तो नौका को चलाने की प्रेरणा कौन देगा ।

PATIENCE

सब्र ज़िन्दगी के मकसद का दरवाजा खोलता है ,क्योंकि सिवाय सब्र के उस दरवाजे की कोई कुंजी नहीं है ।जो मनुष्य सुद्रढ़ता से धैर्य का आँचल थाम लेते हैं वे फिर जीवन के ऐसे गड्ढे में नहीं गिर सकते कि जहां से उठ ही न सकें ।

23 December 2012

जब मनुष्य के अन्तः करण का सौन्दर्य खुलता है ,तो बाहरी सौन्दर्य की कमी का कोई महत्व नहीं रह जाता ।हीरा और कुछ नहीं ,कोयले का ही परिष्कृत स्वरूप है ।