11 September 2018

WISDOM ----- भारतीय संस्कृति का सम्बन्ध संवेदना से है , इस कारण यह 'आध्यात्मिक संस्कृति ' है

   प्रसिद्ध  कवि  इकबाल  ने  कहा  है ---- यूनान , मिस्र  और  रोमा ,  सब  मिट  गए  जहाँ  से  l 
                                                          अब  तक  मगर  है  बाकी,  नाम - ओ--निशाँ  हमारा   l l 
                                                           कुछ  बात  है  कि  हस्ती  मिटती  नहीं  हमारी   l 
                                                            सदियों  रहा   है  दुश्मन , दौर - ए - जहाँ  हमारा  l l 
  भारतीय  संस्कृति  को  मिटाने  के  लिए  बहुतों  ने  प्रयत्न  किये ,  षड्यंत्र  किये   परन्तु  इसे  मिटाया  जा  सकना  संभव  नहीं      क्योंकि     भारतीय  संस्कृति  का आधार    आध्यात्मिक  है  l  इसकी  नींव  ऋषियों  की  तपस्या  की  ऊर्जा  से   रखी  गई  है   l   यही  कारण  है  कि   भारत  के  गुलाम  होने  पर  भी   स्वामी  विवेकानंद   अमेरिका  में  भारतीय  संस्कृति  का  डंका  बजा  सके   l 
 स्वामी  विवेकानंद  कहा  करते  थे ---- आदर्श  को  पकड़ने  के  लिए   एक  सहस्त्र  बार  आगे  बढ़ो   और  यदि  फिर  भी   असफल  हो  जाओ   तो  एक  बार  नया  प्रयास  अवश्य  करो  l  इस  आधार  पर  सफलता  सहज  ही  निश्चित  हो  जाती  है   l  

10 September 2018

WISDOM ---- धर्म का मर्म है ----- अन्याय का प्रतिकार , अनीति का विरोध और आतंक का उन्मूलन

 ऋषियों  ने  ,  आचार्य  ने  कहा  है ---- कर्तव्य  ही  धर्म  है ,  यही  सच्चा  कर्मयोग  है  ,  लेकिन  यह  विवेकपूर्ण  होना  चाहिए   l 
  महाभारत काल  में   भीष्म  पितामह   की  धर्म  पर  गहरी  आस्था  थी ,  वे  समर्थ  और  शक्तिशाली  योद्धा  थे   लेकिन    धर्माचरण   करने  वाले  भीष्म   ने    अत्याचार  करने  वाले ,  पांडवों  के  विरुद्ध  हमेश  षड्यंत्र  रचने  वाले  दुर्योधन  का ,    अधर्म  का  साथ  दिया ,  द्रोपदी  के   चीर   हरण  पर  मूक  दर्शक बन  सिर  झुकाए  बैठे  रहे  l   अधर्म  का  साथ  देकर   न  तो  दुर्योधन  की  रक्षा  कर  सके  और  न  स्वयं  की   l 
         इसी  तरह   कुलगुरु  कृपाचार्य  थे   l  कुलगुरु  का  कर्तव्य  होता  है  --- कुल  में  धर्म  की  प्रतिष्ठा   l  कुल   के   सभी  व्यक्ति  धर्म  का  आचरण  करें ,  शुभ  कर्म  करें  l  लेकिन  धर्म  के  जानकार  होते  हुए  भी  वे    कौरवों  के    अधर्म आचरण   के    मौन  साक्षी  रहे  ,  उनका  साथ  त्यागने  की  हिम्मत  नहीं   जुटा   सके   l 
   इसी  तरह  कर्ण  महान  योद्धा  और  महादानी  था   लेकिन  उसने  भी   मित्र  मोह  में      अधर्म  का  आचरण  करने  वाले  दुर्योधन  का  साथ  दिया   l  महारानी  द्रोपदी  के  चीर - हरण  जैसी  दुर्भाग्य पूर्ण  घटना   को  भी  रोकने  का  प्रयास  उसकी  वीरता  ने  नहीं  किया  ,  वह  भी  अधर्म  के  साथ  खड़ा  रहा   l 
  इन  सभी  महारथियों  का  अत्याचार  व  अन्याय  के  सामने  प्रतिक्रिया विहीन  रहना ,  उन्हें  अधर्म  की  कसौटी  पर  खड़ा  कर  देता  है   l 
  सामान्य  अर्थ  में  पूजा - पाठ ,  कर्मकांड  करने  को  धर्म  कहा  जाता  है   लेकिन  यह  करने   की   और  धर्म  की  सार्थकता   पीड़ा  और  पतन   निवारण  करना ,  सदभाव,  सद्विचार   और  सत्कर्म  करना  है  ,  अत्याचार  और  अन्याय  से  कमजोर  की  रक्षा  करना  है   l   

9 September 2018

WISDOM ----- सुख बाहरी त्याग में नहीं , यह एक आन्तरिक स्थिति है l

 यदि  व्यक्ति  अपने  अन्तस्  को  संवार  ले   तो  किसी  भी  स्थिति  में  सुख  प्राप्त  कर  सकता  है  ,  चाहे  वह  सुविधाओं  में  रहे   अथवा  असुविधा  व  अभावों  में   वह  हर  हालत में  आनंद  की  अनुभूति  कर  सकता  है   l 

8 September 2018

WISDOM ---- इतिहास से हम शिक्षा लें

  भारतीयों  की  आपसी  फूट,  विद्वेष  और  राजनीतिक  बिखराव  के  कारण  यहाँ   विदेशी  आक्रमण  हुए   और   विदेशी  अपनी  वीरता  के  कारण  नहीं   बल्कि   हमारी  आपसी  फूट  के  कारण  सफल  हुए  l  यह  देश  का  दुर्भाग्य  रहा  कि  कई  गद्दार  भी  हुए  जिन्होंने  आक्रमणकारियों  का  साथ  दिया   और  देश  युगों  तक  गुलाम  रहा  l   15 अगस्त  1947  को  देश  आजाद  हुआ  लेकिन  अंग्रेजों  की  फूट  डालो  की   नीति   के  कारण  देश  केवल  राजनीतिक  तौर  पर  ही  नहीं  बंटा  बल्कि   सामाजिक  तौर  पर  भी  बंट  गया   l  जातीय ,  क्षेत्रीय ,   सांप्रदायिक   दीवारें  खड़ी  हो   गईं  जो    भौतिक  और  वैज्ञानिक  प्रगति  के  साथ  बढ़ती   जा  रहीं  हैं  l   स्वार्थ  और  लालच  के  कारण  संवेदना  का  स्रोत  सूख  गया  है  ,  महाभारत जैसी  स्थिति  निर्मित  हो  रही  है   l   विवेक  और  सद्बुद्धि  की  जरुरत  है  l  

7 September 2018

WISDOM ------- आलस्य से बढ़कर अधिक घातक और समीपवर्ती कोई दूसरा नहीं ----- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

 आलस्य  मनुष्य  की  सबसे  ज्यादा  घातक  वृति  है  l  आलसी  व्यक्ति  के  अन्दर  कुछ  करने  की  प्रेरणा  नहीं  होती  ,  कुछ  काम  करने  का  उत्साह  नहीं  होता  l  आलस  मन  का  एक  स्वभाव    है  जो  दीखता  मनुष्य  के  व्यवहार  में  है   l  ऐसे  आलसी  व्यक्ति  समाज  पर  बोझ  होते  हैं  l
 ब्रिटिश  लेखक  और  राजनीतिज्ञ   बेंजामिन  डिजरायली  का  इस  बारे  में  कहना  है  कि --- ' काम  से  हमेशा  ख़ुशी  मिले  , यह  जरुरी  नहीं  ,  पर  यह  तय  है  कि  ख़ुशी  बिना  काम  किये   नहीं  मिल  सकती  l '  इसलिए  जिन्दगी  को  बेहोश  करने  वाले    आलस  के  नशे  का  त्याग  कर   जिन्दगी  की  असली  खुशी  की  तलाश  करनी  चाहिए  और  यह  हमें  बिना  काम  किये  नहीं  मिल  सकती  l  काम  कर  के  ही  हम   जिन्दगी  का  असली  सुकून   प्राप्त  कर  सकते  हैं   l  

WISDOM ------ मानसिक गुलामी से आजादी जरुरी है

  केवल  शारीरिक  द्रष्टि  से  आजाद  होना  पर्याप्त  नहीं  है  l  यदि  कोई  व्यक्ति , समाज  अथवा  देश  अपने  को  गुलाम  बनाने  वाले  की  नीतियों पर  चल  रहा  है ,  उनकी  भाषा ,    उनके  तौर - तरीके  और  उनकी संस्कृति  को  अपना  रहा  है  ,  तो  इसका  अर्थ  है  कि  वह  अभी  तक  गुलाम  है  l 
 अंग्रेजों  ने  भारत  में  '  फूट  डालो  और  राज  करो  '  की  नीति  अपनाई  l   उन्होंने  भारत  की  जिन  रियासतों  अथवा  प्रान्तों  पर  विजय  पाई , वह  उन  पर  खुला  आक्रमण  कर  के  अर्जित  नहीं  की  ,  बल्कि  आपस  में  फूट  डालकर   और  बाद  में  किसी  एक  दल  का  पक्ष  लेकर  अपनी  कुटिल  नीति  के  सहारे  अपनी  जड़ें   जमाई  l   फ्रेडरिक जॉन  शीअर  नामक  एक  अंग्रेज   ने   1835  में  अपने  एक  लेख  ' इंडियन  आर्मी ' में  लिखा  था ---- " हिन्दुस्तानियों  में  राष्ट्राभिमान  तो  है  ,  पर  वे  कभी  एक  नहीं  हो  सकते  l  यही  हमारे  साम्राज्य  की  सामर्थ्य  है   l "
 अंग्रेजों  की  भेद  नीति  यानि  की  संगठन  को  विघटन  में  बदलने  की  कुटिल  नीतितीव्र  गति  से  चलती  गई  और  उसी  गति  से  उनका  साम्राज्य  भी  बढ़ता  गया  l   भारत  में  1857  में  हुए  स्वतंत्रता  संग्राम   से  ब्रिटिश  राज  कैसे  बच     गया  ,  इसकी  मीमांसा  सर  जॉन  सीली ने  इस  प्रकार की  है  ----"एक  जाति  के  खिलाफ  दूसरी  जाति  को  लड़ाकर  ही  बहुतांश  में  यह  गदर  मिटाया  गया  l "  जॉन  सीली  ने   अपने  एक  ग्रन्थ  'द  एक्सपैंशन  ऑफ  इंग्लैंड '  में  व्यक्त  किये  l  उन्होंने  आगे  लिखा  है ---- " जब  तक  यहाँ  के  लोग   सरकार  की  आलोचना  करने  और  उसके खिलाफ  बगावत  करने   के  आदी  नहीं  हो  जाते  ,  तब  तक  इंगलैंड  में  बैठकर  मजे  से  हिंदुस्तान  पर  हुकूमत की  जा  सकती  है   लेकिन  यदि  यहाँ  के  लोगों  में  संघर्ष  करने  की  भावना  पैदा  हो  गई  ,  उन्हें  संगठित  होकर  रहना  और संगठित  रहकर  काम  करना  आ  गया   तो उसके  आगे  हमें  अपने  प्रभुत्व  के  कायम  रहने  की  आशा   बिलकुल  छोड़  देनी  चाहिए  l  "
                          जब  तक  जागरूकता  न  हो  पुरानी   आदतें  छूटती नहीं  है   l   युगों  तक  भारतीय  आपस  में   लड़ते  रहे  ,  बिना  जागरूकता  के  आपस  में  लड़ने  की  यह  आदत  कैसे  छूटे   ?

5 September 2018

WISDOM -----

 नवयुवकों  को  स्वार्थ  एवं  ईर्ष्या  से  बचे  रहने  की  सलाह  देते  हुए  स्वामी  विवेकानंद  कहते  हैं ----- "  केवल  वही  व्यक्ति  सब  की  अपेक्षा  उत्तम  रूप  से कार्य  करता  है  ,  जो  पूर्णतया  निस्स्वार्थी  है ,  जिसे  न  तो  धन  की  लालसा  है  ,  न  कीर्ति  की   और  न  एनी  किसी   वस्तु  की  l  मनुष्य  जब  ऐसा  करने  में  समर्थ  हो  जाता  है   तब  वह  भी  एक  बुद्ध  स्तर  का  बन  जाता  है   और  उसके  भीतर  एक  ऐसी  शक्ति  प्रकट  होती  है  ,  जो  संसार  की  अवस्था  को  सम्पूर्ण  रूप  से  परिवर्तित  कर  सकती  है   l  "
  स्वामीजी  कहते  हैं ---- लेकिन  इसके  लिए  तुम   पहले  से  ही  बड़ी - बड़ी  योजनायें  न  बनाओ  ,  धीरे - धीरे  कार्य  प्रारम्भ  करो  ,  जिस  जमीन  पर  खड़े  हो  ,  उसे  अच्छी  तरह  से  पकड़  कर   क्रमशः  ऊँचे  चढ़ने  का  प्रयत्न  करो   l  एकाएक  मंजिल  को  पाने  का  प्रयास  मत  करो   l  '
 उन्होंने कहा --- " यदि  भारत  का  भविष्य  उज्ज्वल  करना  है   तो  इसके  लिए  आवश्यकता  है  संगठन  की ,  शक्ति  संग्रह  की  और  बिखरी  हुई  इच्छा  शक्ति  को  एकत्र  कर  उसमे  समन्वय  लाने  की  l  इसलिए  तुम  सब   एक  मत ,  एक  विचार  के  बन  जाओ  l  '