30 March 2023

WISDOM -----

   लघु -कथा ---- एक  मच्छर  शहद  की  मक्खियों  के  छत्ते  पर  पहुंचा   और  बोला --- " वह  बड़ा  संगीतज्ञ  है  l  मक्खियों  के  बच्चों  को  संगीत  सिखाना  चाहता  है  l  बदले  में  थोडा  सा  शहद  लिया  करेगा  l  "  रानी  मक्खी  तक  समाचार  पहुंचा   तो  उसने  स्पष्ट  इनकार  कर  दिया   और  कहा ----  "  जिस  प्रकार  संगीत  का  ज्ञाता  बनकर   मच्छर   हमारे  दरवाजे  भीख  मांगने  आया  है  ,  उसी  प्रकार  हमारे  बच्चे  भी  परिश्रम परिश्रम  छोड़कर  भीख  मांगने  लगेंगे   l  मैं  नहीं  चाहती   कि    संस्कारों   के  स्थान  पर   सस्ते  में  कुछ  पाने  का  लालच  भरा  शिक्षण  इन्हें  मिले  l  इन्हें  अपने  आप  ही  सब  कुछ  सीखने  दो  , तभी  ये  जीवन  साधना  में  खरे  उतरेंगे  l  

29 March 2023

WISDOM ----

   महाभारत   का  महायुद्ध  ईर्ष्या,   द्वेष , लालच , अहंकार ,  छल , कपट  और  षड्यंत्र  का  परिणाम  था  l  ये  बुराइयाँ  उस  समय  राजपरिवारों  तक  सीमित  थीं  लेकिन  अब  और  अधिक  विशाल  रूप  में  पूरे  संसार  में  हैं  l   छोटी -बड़ी  कोई  संस्था , कोई  परिवार , कोई  देश  इनसे  बचा  नहीं  है ,,  कुछ  अपवाद  हो  सकते  हैं  l   द्वापर  युग  में  यह  स्पष्ट  था  कि  दुर्योधन  अपने  पिता  के  संरक्षण  में  मामा   शकुनि  के  साथ  मिलकर  षड्यंत्र  रचता  था   , जिसमे  दु: शासन , कर्ण  आदि  सब  साथ  देते   थे   लेकिन  इस  युग  में   जब  नैतिक  और  मानवीय  मूल्य  सब  भूल  चुके  हैं  तब    षड्यंत्र  के  पीछे  कौन  है  यह  जानना  कठिन  है  लेकिन  महाभारत  की  समस्याएं  कलियुग  के   दिशा -निर्देश  हैं  l  षड्यंत्रकारी  एक  बार  षड्यंत्र  कर  के  चुपचाप  नहीं  बैठता  ,  वह  बार - बार  षड्यंत्र  रचता  है  और  उसका  पैटर्न  वही  बार -बार  दोहराया  जाता  है  जैसे  जब  कौरव , पांडव  बालक  थे  तभी  भीम  को  जहर  दे कर    नदी  में  डुबो  दिया  था , , फिर  वारणावत , जुआ  खेलने  का  आमंत्रण  आदि  एक  के  बाद  एक  षड्यंत्र  उन्हें    मिटाने  और  अपमानित  कर  मनोबल  कम  करने  के  लिए  थे  ,  और   द्रोपदी  के  पांच  पुत्रों  के  वध  के  साथ   ऐसे  षड्यंत्र  का  अंत  हुआ  l  नकारात्मक  और  अंधकार  की  शक्तियां  अनेक  हैं    और  उनके  अपने  भिन्न -भिन्न  तरीके  हैं  , जिन्हें  वे  बार - बार  इस्तेमाल  करते  हैं  ,   ऐसा  कर  के  उन्हें   आनंद  मिलता  है  ,  इस  तरह   उनको  पहचान  कर  जागरूक  रहा  जा  सकता  है  l  हम  संसार  को  नहीं    सुधार  सकते  लेकिन  स्वयं  जागरूक  रहकर   शांति  और  सुकून  से  जीवन  जी  सकते  हैं  l  

28 March 2023

WISDOM ----

   वैराग्य शतक  में  भतृहरि   ने  भय  की  स्थिति  का  सूक्ष्म  विश्लेषण  किया  है  ---- ' भोग  में  रोग  का  भय ,   सत्ता  में  गिरने  का  भय  , धन  में  चोरी  का  भय  ,  सामाजिक  स्थिति  में  शत्रुओं  का  भय  ,  सौन्दर्य  में   बुढ़ापे  का  भय  और  शरीर  में  मृत्यु  का  भय  है  l  इस  तरह  संसार  में  सब  कुछ  भय  से   युक्त  है   l '                                         अध्यात्मवेत्ताओं  के  अनुसार  संकीर्ण  स्वार्थ , वासना  और  अहं  से  युक्त  अनैतिक  जीवन  भय  का  प्रमुख  कारण  है   l  पुराण  की  अनेक  कथाएं   भी  इसी   सत्य  को  प्रकट  करती  हैं  कि  सब  कुछ  अपने  पास  होने  पर  भी   व्यक्ति  भयभीत  है   क्योंकि  'सब  कुछ '   के  साथ  अहंकार  भी  है  , स्वार्थ  भी  है  l  कंस  कितना  शक्तिशाली  था  , लेकिन  एक  आकाशवाणी  से   डर  गया  l  उसे  आवाज  सुनाई  दी  कि  उसकी  बहन  देवकी  का  आठवें  पुत्र  के  हाथों  उसकी  मृत्यु  होगी  l  आठवें  का  इंतजार  उसके  लिए  कठिन  था  , भय  इतना  था  कि   देवकी  और  उसके  पति  को  कैद  कर  दिया   और  उसके  छह  पुत्र  और  एक  पुत्री  को    पैदा  होते  ही  मार  दिया  l   जब  उसे  पता  चला  कि  आठवां  पुत्र  गोकुल  में  है   तो   गोकुल  में   उस  दिन  पैदा  हुए   सभी  नवजात  शिशुओं  को  मारने  का  आदेश  दे  दिया  l  l  इतना  शक्तिशाली  होते  हुए  बच्चों  से  डर  गया  l  अत्याचारी , अन्यायी  अपने  अंदर  से  बहुत  कमजोर  होता  है  l  ऋषियों  का  वचन  है ---- ' जो  ईश्वर  से  भय  खाता  है  उसे  दूसरा  भय  नहीं  सताता   l  '  ईश्वर  से  डरने  वाला  कभी  कोई  गलत  कार्य  नहीं  करता   क्योंकि  उसे  पता  है  कि  ईश्वर  देख  रहा  है  , यह  भाव  उसे  निडर  बना  देता  है  l  

27 March 2023

WISDOM -----

 '  जब -जब  होता  नाश  धर्म  का  और  पाप  बढ़  जाता  है , तब  लेते  अवतार  प्रभु  यह  विश्व  शांति  पाता   है  l  '  जब  धरती  पर  आसुरी  तत्व  प्रबल  हो  जाते  हैं  ,  युद्ध  दंगे , धर्म ,के  नाम  पर  झगडे , नारी   का  अपमान  , शोषण , हिंसा , बच्चों  के  प्रति  अपराध   बढ़  जाते  हैं  अर्थात  नैतिक  और  मानवीय  मूल्य  तेजी  से  गिरने  लगते  हैं  तब  किसी  न  किसी  रूप  में  ईश्वर  इस  धरती  पर  आते  हैं , अनीति  और  अत्याचार  का  अंत  होता  है  और  नए  युग  की  शुरुआत  होती  है  l  पुराणों  की  अनेक  कथाएं  हैं   जिनमे  यह  बताया  गया  है  कि  असुरों  में  बुराइयाँ  तो  अनेक  होती  हैं  लेकिन  ये  बड़े  तपस्वी  होते  हैं   और  अपनी  तपस्या  के  बल  पर  भगवान  से  वरदान  पाकर  शक्तिशाली  हो   जाते  हैं   और  फिर  अपनी  ताकत  के  बल  पर   स्वयं  को  ही  भगवान  समझने  लगते  हैं   , अत्याचार  और  अनीति  का  मार्ग  अपनाकर  अपनी  शक्ति  का  दुरूपयोग  करते  हैं  l   यहाँ  एक  बात  महत्वपूर्ण  है  कि  जितने  भी  असुर  हुए  जैसे  हिरन्यकश्यप ,  रावण  , भस्मासुर  आदि  सभी  असुरों  ने  शिवजी  की  तपस्या  की   और  उनसे  वरदान  पाकर  ही  शक्तिशाली  हुए   l  भगवान  श्रीराम  ने  कभी  किसी  असुर  को  वरदान  नहीं  दिया  ,  उन्होंने  तो  असुरता  के  अंत  के  लिए  ही  धरती  पर  जन्म  लिया  l  पुराने  समय  में  ऐसी  कथा  भी  प्रचलित  थी  कि  यदि  हम  मनुष्य  रूप  में  ही  भगवान  श्रीराम  के  जीवन  को  देखें  तो  धरती वासियों  ने  उन्हें  बहुत  दुःख  दिए , वनवास  दिया , रावण  से  युद्ध  में  कोई  मदद  नहीं  की , जब  राजा  बने  तो  सीताजी  को  जंगल  भिजवा  दिया  ,  जब  पुत्र  मिले   तब  सीताजी  धरती  में  समा  गईं  l  ऐसे  धरती  के  लोगों  को  वे  क्यों  वरदान  देंगे  ?   भगवान  राम  ने  तो  स्वयं  रावण  के  अंत  के  लिए  'शक्ति पूजा  '  की  थी  l  भगवान  शिव  हैं '  भोले बाबा  '   वे  देवता  हों  या  दैत्य  , जो  भी  उनकी  तपस्या  करता  है  उसे  वरदान  देते  हैं  ,  फिर  भगवान  विष्णु   अपने  विभिन्न  अवतारों  में  उन्ही  वरदान  में   कहाँ   रास्ता  है , उसे  मालूम  कर  उस  असुर  का  वध  करते  हैं  l  भगवान  श्रीराम  मर्यादा  पुरुषोत्तम  हैं  ,  उनमें  जो    गुण  थे  उनमे  से  एक  भी  गुण  इस  धरती  में  कहीं  देखने  को  नहीं  मिलेगा  l  इसलिए  भी  वे  प्रसन्न  नहीं  होते  l  यही  कारण  है  कि  द्वापर युग  में  भगवान  श्री  कृष्ण  ने  सबको  ' कर्मयोग '  का  उपदेश  दिया  ,  स्वयं  कर्मयोगी   की  तरह  जीवन  जिया   और  कलियुग  के  लिए  भी   ' कर्तव्य पालन  ' को  सबसे  बड़ा तप  कहा  l  ईश्वर  का  यही  सन्देश  है  कि  जो  जहाँ  है , जिस  स्थिति  में  है  अपना  कर्तव्यपालन   निष्पक्ष  होकर  पूरी  ईमानदारी  से  करे   तो  ईश्वर  स्वयं  उसके  ह्रदय  में  प्रकाशित  होंगे  l  

26 March 2023

WISDOM -----

  1.   असुरों  ने  अपने  बुद्धि कौशल   से  इक्कीस  बार  देवताओं  को  हराया   और  हर  बार  वे  इन्द्रासन  पर  प्रतिष्ठित  हुए  l  इतने  पर  भी  देर  तक   उस  स्थान  पर   स्थिर  न  रह  सके   और  हर  बार  उन्हें  स्वर्ग  छोड़ने  पर  विवश  होना  पड़ा  l  देवर्षि  नारद  ने  ब्रह्मा जी  से  पूछा  ---- " तात  !  विजयी  होने  पर  भी  असुर  इन्द्रासन  पर  अपना  अधिकार   क्यों  न  रख  सके  ? "   विधाता  ने  कहा ---- " वत्स  !  बल  द्वारा  ऐश्वर्य  को  प्राप्त  तो  किया  जा  सकता  है  ,  पर  उसका  उपभोग  केवल  संयमी  ही  करते  हैं  l  संयम  की  उपेक्षा  करने  वाले  असुर   जीतने  पर  भी  इन्द्रासन  का  उपभोग  कैसे  कर   सकतें   हैं   l  "  

2 .  मंगोलिया  में  चांगशेन  नाम  का  एक  न्यायधीश  रहता  था  , कभी  किसी  से  रिश्वत  नहीं  लेता  था  l  एक  दिन  उसके  एक  धनी  मित्र  ने   उससे  अपने  पक्ष  में  कुछ  काम  कराने  के  लिए   उसे  अशर्फी  की  एक  थैली  भेंट  की  और  कहा --- "  हमारे  आपके  सिवाय   इस  बात  को  कोई  तीसरा  न  जान  सकेगा  l  इस  थैली  को  रखिए  और  मेरा  काम  कर  दीजिए  l "  चांगशेन   ने  कहा  --- "  मित्र , यह  मत  कहो  कि  कोई  नहीं  देखता  l  धरती  देखती  है , आकाश  देखता  है   और  सबका  मालिक  परमेश्वर  देखता  है  l  "

25 March 2023

WISDOM ----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- "वास्तविकता  बहुत  देर  तक  छिपाए  नहीं  रखी  जा  सकती  l  व्यक्तित्व  में  इतने  अधिक  छिद्र   होते  हैं  कि  उनमें  से  होकर   गंध  दूसरों  तक  पहुँच  ही  जाती  है   l  इसलिए  कमजोरियों  पर   गंदगी  का  आवरण  न  डालकर   उनके  निष्कासन  के , स्वच्छता  के  प्रयासों  में  निरत  रहना  चाहिए   l ------- महात्मा  बुद्ध  आस्वान  राज्य  के  किसी  नगर  से  होकर  गुजर  रहे  थे  l  वह  स्थान  उनके  विरोधियों  का  गढ़  था  l  बुद्ध  को  अपमानित  करने  के  लिए  विरोधियों  ने  एक  चाल  चली  l  एक  कुलता  स्त्री  के  पेट  में  बहुत   सा  कपड़ा    बांधकर   भगवान  बुद्ध  के  पास  भेजा  गया  l  वह  वहां  पहुंची   और  जोर -जोर  से  चिल्लाकर  कहने  लगी  --- '  देखो  यह  पाप  इस  महात्मा  का  है  l  यहाँ  ढोंग  रचाए  घूमता  है  और  मुझे  स्वीकार  भी  नहीं  करता  l  "  सभा  में  खलबली  मच  गई  l  उनके  शिष्य  आनंद  बहुत  चिंतित  हो  गए   और  बोले --- " भगवान  !  अब  क्या  होगा  ? "   बुद्ध  हँसे  और  बोले ---- " तुम  चिंता  मत  करो  l  कपट  देर  तक  नहीं  चलता  l  चिरस्थायी  फलने -फूलने  की  शक्ति  केवल  सत्य  में  है  l "  इस  बीच  उस  स्त्री  की  करघनी   गई    और  जो   कपड़े    ऊपर    से  बाँध  रखे  थे   , वे  जमीन    पर  खिसक  पड़े   l  पोल  खुल  गई  , वह  स्त्री  अपने  कर्म  पर  बहुत  लज्जित   हुई   l  लोग  उसे  मारने  दौड़े  ,  पर  भगवान  बुद्ध   ने   यह  कहकर   उस  स्त्री  को  सुरक्षित  लौटा  दिया  --- "  जिसकी  आत्मा  मर  गई  हो  ,  वह  मरों  से  भी  बढ़कर  है  , उसे  शारीरिक  कष्ट  देने  से  क्या  लाभ  ? "

24 March 2023

WISDOM ------

  इस  संसार  में  आदिकाल  से  ही  देवासुर  संग्राम  रहा  है  l  आकृति  से  तो  सभी  मनुष्य  हैं  लेकिन  अपनी  दुष्प्रवृतियों  के  कारण  ही  कोई  असुर  कहलाता  है  जैसे  रावण  -- इसके  दोष , दुर्गुणों  ने   इसकी  विद्वता  को  धूमिल  कर  दिया  था   इसलिए  ब्राह्मण  कुल  में  पैदा  होकर  भी  राक्षसराज  रावण  कहलाया  l  प्रश्न  यह  है  कि  भगवान  ने  इतने  अवतार  लिए  फिर  भी   अच्छाई और  बुराई  के  बीच , देवताओं  और  असुरों  के  बीच  यह  संघर्ष  समाप्त  क्यों  नहीं  होता   इसका  कारण  यही  है   कि   संघर्ष  या  युद्ध  करने  वाला  पुरुष  समाज  है   और  इसमें  वीर ,  आन -बान और  शान  वाले   बहुत  कम  हैं  ,  लोग  अपने  सुख -वैभव  के  लिए  अन्याय  और  अधर्म  से  समझौता  कर  लेंगे ,  सत्य  का  साथ  नहीं  देते  हैं  l  उन  पर  स्वार्थ  और  लालच  हावी  है   ल   श्रीराम  स्वयं  भगवान  थे  ,  लेकिन  धरती  पर  मनुष्य  रूप  में  जन्म  लिया  l  जब  उन  पर  संकट  आया  , रावण  से  युद्ध  हुआ   तब   किसी  भी  राजा  ने ,  उनके  किसी  भी  रिश्तेदार  ने  उनकी  मदद  नहीं  की  l  रावण  जैसे  शक्तिशाली  से  युद्ध  उन्होंने  रीछ  और  वानरों  की  मदद  से  लड़ा  l  सेतु  बन  गया  था  लेकिन  किसी  राजा  ने  उनके  लिए  सेना  तो  क्या   रथ  भी  नहीं  भिजवाया  l   जब  भगवान  के   वनवास  के  बाद  सुख  के  दिन  आए   तब  ईर्ष्यालुओं  ने  उनका  सीता जी  से  बिछोह  करा  दिया  l  चाहे  भगवान  राम  हों  या  कृष्ण  , इस  धरती   पर   उन्हें  चैन  से  जीने  नहीं  दिया  l  मनुष्य  का  अपने  प्रति  ऐसे  व्यवहार  पर  भगवान  को  भी  क्रोध  आता  है  l  इतने  युग  बीत  गए  लेकिन  मनुष्य  ने  इतिहास  से  भी  कुछ  नहीं  सीखा , अपनी  चेतना  का  परिष्कार  नहीं  किया  ,  अपनी  दुष्प्रवृतियों  को  भी  दूर  करने  का  कोई  प्रयास  नहीं  किया   इसलिए  संसार  में  अशांति  है , प्राकृतिक  प्रकोप  हैं   l  केवल  आडम्बर  करने , कर्मकांड  करने   से  भगवान  प्रसन्न  नहीं  होते  , भगवान  की  कृपा  पाने  के  लिए  सन्मार्ग  पर  चलना  जरुरी  है  l