28 April 2025

WISDOM -----

  विधाता  ने  स्रष्टि  की  रचना  की  l  स्रष्टि  में  जितने  भी  प्राणी  हैं  , उनमें  मनुष्य  ही  सबसे  बुद्धिमान  है   l   मनुष्य  के  पास  उसका  ' मन '  भी  है   जिस  पर  उसका  कोई  नियंत्रण  नहीं  है  l  l  मनुष्य  का  अनियंत्रित  मन  बुद्धि  को  दुर्बुद्धि  में  बदल  देता  है  l  दुर्बुद्धि  के  कारण  ही  आज  संसार  में  इतनी  अशांति  है  l   अपनी बुद्धि  के  बल  पर  पहले  मनुष्य  विकास  करता  है  फिर  दुर्बुद्धि  के  कारण    आपस  में  युद्ध , दंगे  आदि  कर  फिर  शून्य  पर  आ  जाता  है   l  इतिहास  से  शिक्षा  ही  नहीं  लेता  है  l   प्राचीन  काल   में  लोगों  में  नैतिकता  थी , संवेदना  थी    लेकिन  अब  मनुष्य  संवेदनहीन  है   l  युद्ध  , दंगे  जैसी  परिस्थिति  में  उसके  भीतर  का  राक्षस  बाहर  आ  जाता  है  l  वीरता  के  किस्सों  से  ज्यादा  कायरता  के  किस्से  होते  हैं  l  युद्ध  के  नाम  पर  सबसे  ज्यादा  दुर्गति  महिलाओं  और  बच्चों  की  होती  है  l  युद्ध  किसी  भी  समस्या  का  हल  नहीं  है  l  अपनी  ही  कमियों  को  देखो , समझो   और  उनमें  सुधार  करो    तो  समस्या  स्वत:  ही  समाप्त  हो  जाएगी      l                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   









































































































































































































































































































































































\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\
































































































        

27 April 2025

WISDOM ----

  प्रत्येक  युग  की  अपनी  कुछ  विशेषताएं  हैं  , कलियुग  की  विशेषता  कहें  या  सबसे  बड़ी  बुराई  कि  इस  युग  में  कायरता  अपने  चरम  पर  है  l   छोटे  से  लेकर  बड़े  स्तर  पर  जो  भी  अपराध  होते  हैं  , उनके  पीछे  मास्टर  माइंड  कौन  है  , यह  मालूम  करना  कठिन  है   क्योंकि  नकारात्मक  शक्तियां  बहुत  मजबूती  से  संगठित  होती  हैं   l  इन्हें  केवल  इनके  अपराध  करने  के  पैटर्न  से  समझा  जा  सकता  है  l  नकारात्मक  शक्तियां   बार -बार  उसी  पैटर्न  से  अपराध  को  अंजाम  देती  हैं  l  बुद्धिमान  लोग  इसे  समझ   भी  जाते  हैं   लेकिन  इसे  युग  का  प्रभाव  कहें  व्यक्ति  अपने  स्वार्थ , लालच , लोभ , कामना और  महत्वाकांक्षा  की  वजह  से   अपने  आँख , कान  बंद  किए  रहता  है  l   रावण  के  दस  सिर  को   लोगों  ने  अपना  आदर्श  बना  लिया  l  व्यक्ति  सामने  से  समाज  सेवा  करता  हुआ , धर्म  के  उपदेश  देता  हुआ  ,  परिवार  में  सबको  साथ  लेकर  चलने  वाला , समाज  के  प्रत्येक  प्राणी  का  हित  जानने  वाला  दिखाई  देगा   लेकिन  उसके  पीछे  कितनी  कालिख  है  l  इसे  बहुत  कम  लोग  जानते  हैं ,  जो  जान  जाते  हैं  वे  भी  अनजान   बनने  का  नाटक  करते  हैं  l  जागरूक  रहकर  और   अपने  भीतर  सकारात्मकता  को  बढ़ाकर   ही  नकारात्मक  शक्तियों  से  मुकाबला  किया  जा  सकता  है  l  जो  लोग  भी  तंत्र   आदि  किसी  भी  तरह  की  नकारात्मक  शक्तियों  की  मदद  से  अपराध  करते  हैं  ,  वे  स्वयं  तो  संगठित  होते  हैं   और  जिसको  अपना  लक्ष्य  बनाते  हैं  उसे  अकेला  कर  देते  हैं , उसके  सुरक्षा -तंत्र  को  छीन  लेते  हैं  या  कमजोर  कर  देते  हैं  l  असुरता  पूरी  दुनिया  पर  अपना  राज  चाहती  है  l  

26 April 2025

WISDOM -----

   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं ----- ' व्यक्ति  के  श्रेष्ठ  कर्म  ढाल  के  समान   उसकी  रक्षा  करते  हैं   और  दुष्कर्म  असमय  ही  उसे  मौत  के  मुँह  में   ढकेल  देते  हैं  l   एक  दिन  सभी  को   मृत्यु  के  आँचल  में   पसरना  है  ,  तो  क्यों  न  जीवित  रहते   स्वयं  को   श्रेष्ठतम  कर्मों  में   लगाए  रखा  जाये   l  श्रेष्ठ  कर्मों  से  भगवान   भी  प्रसन्न  होते  हैं  और  उनकी  कृपा द्रष्टि   बनी  रहती  है  l  बड़ी -बड़ी  दुर्घटनाएं  एक  छोटा  सा  काँटा  चुभने   में   निकल  जाती  हैं  l  "  ------ ज्योर्तिमठ  के  शंकराचार्य   के  शिष्य   कृष्ण बोधाश्रम    120  वर्ष  जीवित  रहे  l  एक  बार  वे  प्रवास  पर  थे  l  उस  इलाके  में  लगातार  चार  वर्ष  से  पानी  नहीं  गिरा  था  l  कुएं -तालाबों  का  पानी  सूख  गया  था  l  सभी  आए  और  कहा --- " महाराज  जी  !   उपाय  बताएं  ! "  वे  बोले  ---- "  पुण्य  होंगे   तो  प्रसन्न  होगा  भगवान  l "  लोगों  ने  पूछा  --- 'क्या  पुण्य  करें  ? '  तब  महाराज जी  ने  कहा --- "  सामने  तालाब  है  , उसमें  थोडा  ही  पानी  है  l  इसमें  मछलियाँ  मर  रही  हैं  ,  पानी  डालो  l "  लोग  बोले  --- "  हमारे  लिए  ही  पानी  नहीं  है  , मछलियों   को  पानी  कहाँ  से  दें  ?  "   महाराज  ने  कहा ---- " कहीं  से  भी  लाओ  , कुओं  से  भर -भरकर  लाओ    और  तालाब  में  डालो  l "  सभी  ने  पानी  तालाब  में  डालना  शुरू  किया  l  तीसरे  दिन  बदल  आए  l  घटाएं  भरकर  महीने  भर  बरसीं  l  सारा  दुर्भिक्ष --पानी  का  अभाव  दूर  हो  गया  l  

23 April 2025

WISDOM ----

  हमारे  महाकाव्य  हमें  बहुत  कुछ  सिखाते  हैं   l   रामायण  का  एक  पात्र  है ---- विभीषण  l   राक्षस  कुल  में   जन्म  लेकर  भी  उसे  सही -गलत  की  पहचान  थी  l  जहाँ  रावण  के  आतंक  से  सब  भयभीत  थे  , वहीँ  विभीषण  निडर  था   क्योंकि  वह   नीति  और  न्याय  को  समझता  था  l   विभीषण  ने  रावण  की  अनीति  के  विरुद्ध  आवाज  उठाई,  यह  जानते  हुए  भी  कि  इससे  उसका  जीवन  संकट  में  पड़  सकता  है  l  भरी  सभा  में  उसने  कहा ----- तव  उर  कुमति  बसी  विपरीता  l हित  अनहित  मानहु  रिपु  प्रीता  l    हे  अग्रज  !  आपके  अन्दर  कुमति  का  निवास  हो  जाने  से   आपका  मन  उल्टा  चल  रहा  है  , उससे  आप  भलाई  को  बुराई   और  मित्र  को  शत्रु  समझ  रहे  हैं  l   झूठी   चापलूसी  करने  वाले  सभासदों  के  बीच   अपने  भाई  विभीषण  की   नेक  सलाह  भी   रावण  को  उलटी  लग  रही  थीं  l  क्रोध   में  रावण   कह  उठा  --- ' तू  मेरे  राज्य  में   रहते  हुए  भी   शत्रु  से  प्रेम  करता  है  l  अत:  उन्ही  के  पास  चला  जा   और  उन्ही  को   नीति  की  शिक्षा  दे  l "  ऐसा  कहकर   उसने  विभीषण  को  लात  मारी   और  सभा  से  उसको  निकाल  दिया   l  समझाने  पर  भी  जो  खोटा  मार्ग  न  छोड़े ,  उससे  संबंध  ही  त्याग  देना  चाहिए   l  यही  सोचकर  विभीषण  लंका  छोड़कर   भगवान  राम  की  शरण  में  चला  गया  l  रावण  अनीति  पर  था , अत्याचारी  था  इसलिए  एक  लाख  पूत  और  सवा  लाख  नाती  समेत  उसका  अंत  हो  गया  l   विभीषण  ने   रावण  जैसे  अत्याचारी  के  साथ  रिश्ते  निभाने  के  बजाय  मर्यादा  पुरुषोत्तम  श्रीराम  की  शरण  में   रहना  उचित  समझा   l  संसार  में  आज  इतना  अत्याचार  और  अन्याय  इसीलिए  है   क्योंकि  लोग  अपने  स्वार्थ  के  लिए  अत्याचारी , अन्यायी  को  त्यागने  के  बजाय  उसकी  छत्रछाया  में  रहना  पसंद  करते  हैं   l  यही  कारण  है  की  असुरता  फलती  -फूलती  है  l  

21 April 2025

WISDOM -----

 मनुष्य के  जीवन  में  सुख -दुःख  धूप -छाँव  की  तरह  आते -जाते  हैं  l  ईश्वर  ने  धरती  पर  अवतार  लेकर   अपनी  लीलाओं  के  माध्यम  से  मनुष्य  को  जीवन  जीना  सिखाया  l  भगवान  राम  के  राज्याभिषेक  की  तैयारी  थी  लेकिन  अगले  ही  पल  उन्हें  चौदह  वर्ष  का  वनवास  हो  गया  l  श्रीराम  के  चेहरे  पर  इससे  कोई  तनाव  नहीं , क्रोध  नहीं  , कोई  विवाद  नहीं  l  जो  भी  परिस्थिति  है  उसे  सहज  स्वीकार  किया  l  एक  बार  के  लिए  यह  मान  लें  कि  भगवान  श्रीराम  और  श्रीकृष्ण  स्वयं  भगवान  थे  ,  उनके  कष्ट  उनकी  लीला  का  हिस्सा  थे  लेकिन  जो  लोग   भगवान  श्रीकृष्ण  के  परिवार  के  थे  ,  उनके  जीवन  में  कितने  कष्ट  थे  l  जो  भगवान  श्रीकृष्ण  की  माता  थीं  -देवकी  उन्हें  कंस  के  अत्याचार  सहने  पड़े  ,  उनकी  सात  संतानों  को  कंस  ने  उनके  सामने  मार  डाला  l  पांडवों  को  भगवान  श्रीकृष्ण  का  प्रत्यक्ष  आश्रय  प्राप्त  था   लेकिन  फिर  भी  उनका  सारा  जीवन  कष्ट  में  बीता  l  कृष्ण  की  बहन  सुभद्रा  के  पुत्र  अभिमन्यु  को  महाभारत  के  युद्ध  में  सात  महारथियों  ने  मिलकर  छल  से  मार  डाला  l  सुभद्रा  कृष्ण  से  कहती  हैं  ---- तुम्हे  तो  लोग  भगवान  कहते  हैं  फिर  भी  तुम  मेरे  पुत्र  को  बचा  नहीं  पाए  l  भगवान  कहते  हैं  ---- मनुष्य  के  जीवन  में  जो  भी  सुख  या  दुःख  है  उसके  पीछे   उसके  जन्म -जन्मान्तरों  के  कर्म  की  कहानी  है  l  कर्मफल  से  कोई  भी  नहीं  बचा  है  l  महारानी  कुंती  भगवान  श्रीकृष्ण  की  बुआ  थीं  ,  उनका  सारा  जीवन  कष्टों  में  बीता  l  जब  महाभारत  का  युद्ध  समाप्त  हुआ    और  श्रीकृष्ण  द्वारका  लौटने  लगे   तो  कुंती  ने  उनसे  प्रार्थना  की  ---- " हे  प्रभु  !  आप  आशीर्वाद  दें  कि हम  पर  विपत्तियाँ  सदैव  आती  रहें  l "  श्रीकृष्ण  ने  पूछा  --- " आप  लोगों  ने  जीवन  भर  विपत्तियों  का  सामना  किया  है  ,  फिर  ऐसी  विलक्षण  मांग  क्यों  ?  ' कुंती  बोलीं  ---" भगवान  !  विपत्तियाँ  आएँगी  तो   उनसे  रक्षा  के  लिए   आप  भी  आयेंगे  l  जिस  भी  कारण  से  आपका  दर्शन  हो  ,  हमारे  लिए  तो  सोभाग्यशाली  ही  होगा  l "  विपत्तियाँ  हर  एक  के  जीवन  में  आती  हैं  ,  पर  जिनकी  भगवान  पर  अटल  श्रद्धा  होती  है  ,  वे  इन  क्षणों  को  जीवन  का  सौभाग्य  मानकर  स्वीकार  करते  हैं  l   आचार्य श्री  कहते  हैं  ---"  जीवन  के  प्रत्येक  पल एवं  प्रत्येक  घटनाक्रम   सकारात्मक   एवं  सार्थक   उपयोग  करो  l  जीवन  की  हर  चोट ,  हर  पीड़ा  हमें   गढ़ती  है  , संवारती  है  l  

20 April 2025

WISDOM -----

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- " पाप  पहले  तो   आकर्षक  लगता  है  l  फिर  आसान  हो  जाता  है  l  इसके  बाद  आनंद  का  आभास  देने  लगता  है  तथा  अनिवार्य  प्रतीत  होने  लगता  है  l  क्रमशः   वह  हठी    और  ढीठ  बन  जाता  है  l  अंततः  सर्वनाश  कर  के  हटता  है  l  "   महाभारत   में  यही  सत्य  सामने  आया  l  धृतराष्ट्र  के  अंधे  मोह  ने  दुर्योधन  को  हठी  बना  दिया  ,  बाल्यकाल  से  ही  वह  पांडवों  के  विरुद्ध  षड्यंत्र  रचने  लगा  l   दुर्योधन   पितामह  भीष्म  और  गुरु  द्रोणाचार्य  की  भी  कोई  बात  नहीं  मानता  था  l    मामा  शकुनि  का  साथ  मिल  जाने  से  छल ' कपट  और  षड्यंत्र   करना  उसकी  आदत  बन  गए  l  पांडवों  को  सताने  में  उसे  आनंद  आने  लगा  l  हर  अति  का  अंत  होता  है   l  दुर्योधन  के  ऐसे  हठी  स्वभाव  के  कारण  ही  कौरव  वंश  का  सर्वनाश  हो  गया  l  

18 April 2025

WISDOM ------

   संसार  में  अच्छाई  और  बुराई  दोनों  हैं  l  सन्मार्ग  पर  चलने  वाले   हैं  तो  दूसरी  ओर   दुष्ट  प्रवृत्ति  के   लोगों  की  कमी  नहीं  l   एक  तरह  से  देखा  जाए  तो  दुष्ट  प्रवृत्ति  के  लोगों  की  संसार  में  उपस्थिति  बहुत  जरुरी  है   क्योंकि  जब  ये  लोग   सीधे -सच्चे  लोगों  को   सताते  हैं  , उन्हें  उत्पीड़ित  करते  हैं   तो  इसके  दो  फायदे  होते  हैं  --- एक  यह  कि  उत्पीड़न   लगातार  सहन  करते  रहने  से  उनकी  भीतर  की  सोयी  हुई  गुप्त  शक्तियां  जाग्रत  होने  लगती  हैं  ,  सत्य  की  ताकत  से  उनका  आत्मिक  बल  बढ़ने  लगता  है  l  जो  सन्मार्ग  पर  है  उसे  यह  विश्वास  होता  है  कि  उसके  साथ  ईश्वर  है   इसलिए  वे  निरंतर  संघर्ष  करते  हैं   , कभी  निराश  नहीं  होते  l  दुष्ट  व्यक्तियों  की  उपस्थिति  का  दूसरा  सबसे  बड़ा  फायदा  यह  होता  है  कि   ऐसी  सामूहिक  दुष्टता  के  निवारण  के  लिए  स्वयं  भगवान  को  धरती  पर  आना  पड़ता  है  l   अपने  भक्तों  को  उत्पीड़ित  करने  वाले   को  भगवान  कभी  क्षमा  नहीं  करते  l  यदि  दसों  दिशाओं  में  रावण  का  आतंक  नहीं  होता  ,  उसके  अत्याचार   की   अति  न  होती  तो  भगवन  श्रीराम   इस  धरती  पर  क्यों  आते  ?  रावण  था  ,  तभी  श्रीराम  आए  l    यदि  कंस  जैसा  पापी  न  होता   तो  भगवान  श्रीकृष्ण  क्यों  आते  ?   उस  युग  में  अधर्म , अत्याचार , अन्याय   इतना  अधिक  था  कि  ईश्वर  को  अपना  वैकुण्ठ  धाम  छोड़कर  धरती  पर  आना  पड़ा  l  हिरण्यकश्यप  ने  अपने  ही  पुत्र  प्रह्लाद  को  इतना  सताया  कि   नृसिंह  भगवान  खम्भे  से  प्रकट  हो  गए  l  इस  द्रष्टि  से  दुष्ट  व्यक्ति  भी  प्रशंसनीय  है  l    वे  बेचारे  पाप  कर्म  कर  के  अपना  पाप  का  घड़ा  भरते  जाते  हैं   और  जो  उनके  इन  दुष्कृत्यों   को  चुनौती  मानकर   उनका  सामना  करे   तो  वह  सफलता  के  पथ  पर  आगे  बढ़ता  जाता  है  l  दुष्ट  व्यक्तियों  ने  पत्थर  फेंके  और  समझदार  उनसे  सीढ़ी  बनाकर  ऊपर  चढ़  गया  l  यह  संसार  एक  रंगमंच  है  हमें  बड़ी  समझदारी  से  अपनी  भूमिका  निभानी  है  l