24 July 2022

WISDOM -----

   जार्ज  बर्नार्ड  शा  के  बारे  में  प्रसिद्ध  है  कि  एक  बार   रूपवती  महिला   उनके  पास  विवाह  प्रस्ताव  लेकर  आई   और  कहने  लगी   कि    -----' हमें  आप  जैसा  बुद्धिमान  पुत्र  चाहिए    जो  मेरी  तरह  सौन्दर्य संपन्न  हो   l '   बर्नार्ड  शा  ने   विनोद  करते  हुए  कहा ---- " कहीं  उलटा  हो  गया  तो   ?  अर्थात   तुम्हारी  बुद्धि   और  हमारे  जैसा  अति  साधारण  रंगरूप   उसे  मिला  ,  तो  क्या  तुम  उसको   उतना  ही  प्यार  दे  सकोगी   ? '  महिला  बिना  कुछ  कहे  वापस  लौट  गई  

23 July 2022

WISDOM ------

   कहते  हैं   यदि  मन  व  आत्मा  में  शक्ति   हो  तो  बड़ी  से  बड़ी  मुसीबत  से  आसानी  से  निपटा  जा  सकता  है  l  कोई  राष्ट्र  केवल   अस्त्र - शस्त्र  और  साधनों  से  ही  शक्तिशाली  नहीं  होता  l  किसी  समय  में   कौन  सी  समस्या   आ  गई  है ,  उससे  निपटने  के  लिए   प्रतिभासंपन्न ,   सूझ बूझ  और  तुरंत  निर्णय  लेने  वाले   व्यक्तित्व  की  जरुरत  होती  है  --------  विश्वविजय  का  स्वप्न द्रष्टा  हिटलर    अपनी  विशाल  सेना  के  साथ    आँधी -तूफान  की  भांति  बढ़  रहा  था   l  छोटे -छोटे  देश   बिना  संघर्ष  किए   भयवश   समर्पण  करते  जा  रहे  थे  l  हिटलर  ने  हालैंड  पर  आक्रमण  का  आदेश  दे  दिया   था  l  उन  दिनों  हालैंड  को  गरीबी  के  भयंकर  दौर  से  गुजरना  पड़  रहा  था   l  पिछड़ेपन  और   गरीबी  का  एक  प्रमुख  कारण  यह  था  कि  हालैंड  की  जमीन   समुद्र  की  सतह  से  नीची  है   l  इसलिए  हालैंड वासियों  को    दीवारें  बनाकर   समुद्री  लहरों  से   सुरक्षा  करनी  पड़ती  थी   l  उनके  पास  न  सेना  थी , न  शस्त्र  l  जर्मन  सेना  ने  सोचा  कि   हालैंड  को  तो  पलों  में  जीता  जा  सकता  है  l  यह  सोचकर  जर्मन  सेना  ने  हमला  बोल  दिया   l  इस  संकट  से  जूझने  के  लिए   हालैंड वासियों  ने  निर्णय  लिया  कि  समर्पण  कर  देने  और  गुलामी  स्वीकार   कर  लेने  से   तो  बहादुरों  की  तरह  लड़ते  हुए  मर  जाना  अच्छा  है  l  सारे  देश  में  घोषणा  करा  दी  गई   कि  जिस  भी  गाँव  में  जर्मन  सेना  का  हमला  हो  ,  उस  गाँव  की  दीवार  तोड़  दी  जाये   l  इस  तरह  समुद्र  के   पानी  से  गाँव  के  डूबने  के  साथ  -साथ  जर्मन  सेना  भी  डूब  जाएगी   l  तीन  गाँव  इसी  तरह  डूब  गए   l  हालैंड  को  तो  नुकसान  हुआ  ,  पर  साथ  ही  जर्मन  सेना  को  भी  भयंकर   क्षति  उठानी  पड़ी   l  उनका  मनोबल  टूट  गया   l  हिटलर  ने   सेना  को  लौट  आने  की  आज्ञा  दे  दी  l   यह  राष्ट्र  के  प्रति  समर्पण  और  आत्मिक  शक्ति  की  विजय  थी  l  

WISDOM -----

   किसी  भी  परिवार , समाज  और  राष्ट्र  की  तरक्की  के  लिए  अनेक   कारण  उत्तरदायी  होते  हैं    लेकिन  तरक्की  के  साथ  यदि  सिर  उठाकर  जीना  है  तो  उसके  लिए  स्वाभिमान  बहुत  जरुरी  है   l   स्वाभिमान  के  अभाव  में  वह  तरक्की   मात्र  दिखावा  है    जैसे  कोई  परिवार ,    समाज  में  अपने  जीवन स्तर  को  ऊँचा  दिखाने  के  लिए    किसी  सेठ  से  बहुत   धन   उधार  लेता  है    l  ऐसा  कर  के  वह  सब  सुख -सुविधा  जोड़  लेता  है  l  समाज  में  भी  दीखने  लगता  है  कि  वह  बहुत   अमीर    है , उच्च  जीवन स्तर  है   लेकिन  इन  सबके  भीतर    एक  खोखलापन  है   l   जो  उधार  देता  है   वह  ब्याज  तो  वसूल  करता  ही  है    साथ  ही  अपनी  हुकूमत  भी  चलाता  है  ,    उधार  देने  वाला  किसी  दूसरे  लोक  का  निवासी  नहीं  है ,  वह  भी  मानवीय  कमजोरियों  से  घिरा  हुआ  है  ,वह  चाहता  है  कि  जब  हमारी  दम  पर   तुम्हारा  वैभव  है  तो  हमारी  हर   बात  को  चाहे  वह  सही  हो  या  गलत ,  उसे  स्वीकार  करो  l  उधारी  का  जीवन  चाहे  परिवार  का  हो  या  राष्ट्र   का     एक  तरह  की  गुलामी  है  ,  बिना  युद्ध  के  -----   l             कभी  ऐसा  भी  होता  है   कि  व्यक्ति  जागरूक  नहीं  है  ,  स्वयं  को  मिलने  वाली   सुविधाओं   में  खो  जाता  है ,  उसे  सुविधा  देने  वाले  की  मानसिकता  क्या  है  ,  इसे  समझ  नहीं  पाता  और  अनजाने  में  अपना  स्वाभिमान  खो  बैठता  है   l  जैसे  --- महाभारत  का  प्रसंग  है  --- जब  युद्ध  शुरू  होने  वाला  था   तब  विशाल  भारत  के  लगभग  सभी  राजा  ( एक -दो  को  छोड़कर  )  युद्ध  में  सम्मिलित  हुए   l  कोई  कौरवों  के  पक्ष  में , कोई  पांडवों  के  पक्ष   l  जब  दुर्योधन  को  पता  चला  कि  पांडवों  के  मामा  शल्य  आ  रहे  हैं   तो  उसने  गुप्त  रूप  से  शल्य  के  आने  के  पूरे  मार्ग  पर  सुख - सुविधाओं  का  अम्बार  लगा  दिया   l  सैकड़ों  सेवकों  को  नियुक्त  कर  दिया   कि  मार्ग  में  मामा  शल्य  को  कोई  कष्ट  नहीं  होना  चाहिए   l  शल्य  बहुत  प्रसन्न  थे  कि  युधिष्ठिर  ने  उनकी  सुविधा  का  इतना  ध्यान  रखा   लेकिन  जब  वे  हस्तिनापुर  पहुंचे   तो  दुर्योधन  ने  स्वागत  किया   l  तब  उन्हें  समझ  में  आया  कि    रास्ते  भर  इतना  स्वागत -सत्कार  सब  दुर्योधन  ने  किया   l  इस  एहसान  के  कारण   शल्य  और  उनके  समर्थक  सभी  राजा  ,     दुर्योधन  के  पक्ष  में  रहे   l   बुराइयां  हर  युग  में  रही  हैं   ,   व्यक्ति  को  स्वयं  जागरूक  होना   होगा   l  

21 July 2022

WISDOM -------

  एक  राजा  ने  एक  गुलाम  ख़रीदा   l   उन्होंने  गुलाम  से  पूछा --- " तेरा  नाम  क्या  है  ? "  उसने  उत्तर  दिया --- " हुजुर  ! जिस  नाम  से  पुकारें  वही  मेरा  नाम  होगा   l  "  राजा  ने  फिर  पूछा  --- " तू  क्या   खायेगा  और  क्या  पहनेगा   ?  "  उसने  कहा ---- ' हुजुर  !  जो  खिला  दें   और  जो  पहनने  को  दें   l  "  राजा  ने  पूछा ---- " तू  क्या  काम  करेगा   ? "  गुलाम  बोला --- " जो  आप  कराएँ   l "  तब  राजा  ने  पूछा  --- " आखिर  तू  चाहता  क्या  है  ? "   गुलाम  ने  कहा --- " हुजुर  !  गुलाम  की    क्या  कोई    चाहत    होती  है   ? "   यह  सुनकर  राजा  ने  गद्दी  से  उतारकर  उसे  ह्रदय  से  लगा  लिया    और  कहा ---- " मैं  आज  से  तुमको  अपना  गुरु  मानता  हूँ  ,  तुमने  मुझे  बता  दिया   कि  परमात्मा  का  सेवक  कैसा  हो   ?   ईश्वर  के  प्रति  समर्पित  समर्पित  भक्त  की     आपनी    कोई  निजी    इच्छा  नहीं  होनी  चाहिए  l 

20 July 2022

WISDOM ----

      आज  संसार  में  इतनी  अशांति  और  अस्थिरता  है  ,  युद्ध , आतंक , षड्यंत्र  ------ सब  बुराइयाँ  एक  साथ   अपने  चरम  पर  पहुँच  गई  हैं   l  इस  स्थिति  के  अनेक  कारण  होंगे  लेकिन  उनके    मूल  में  जो  प्रमुख  कारण  है   ,  वह  है  --- मनुष्य  की  मानसिक  विकृति   l   मानसिक  विकार    यदि     बहुत  साधारण    व्यक्ति  में  होंगे    तो  उससे    उसके  आसपास  के   कुछ  ही  लोग   आहत   होंगे    लेकिन  उच्च  स्थिति  में  पहुंचे  हुए  व्यक्ति  के  मानसिक  विकार    उतने  ही  विशाल  क्षेत्र  को  आहत  करेंगे    जितनी  उच्च  स्थिति  में  वह  है   l                          मनुष्य  के  मानसिक  विकारों  में   ' ईर्ष्या  '  सबसे  जटिल  मनोविकृति  है   l  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- " आज  की  परिस्थितियों  पर  द्रष्टिपात   करें   तो   चारों   ओर  ईर्ष्या  का  ही  साम्राज्य   फैला  दिखेगा   l  भाई -भाई  से  ईर्ष्या  करता  है , पड़ोसी -पड़ोसी  से   l   जातियों , संगठन  , दलों , सम्प्रदायों ,  राष्ट्रों  के  बीच  ईर्ष्या  की  आग  फैली  हुई  है   l  समाज  में  फैले  संघर्षों  का  मूल  कारण -- ' ईर्ष्या  ' है  l   "  किसी  व्यक्ति   ,  किसी  राष्ट्र  के  पास   यदि   कोई  ऐसा  गुण  है ,  कोई  विशेष  बात  है  जिससे  उसके  पास   प्रतिष्ठा , सुख - वैभव  है    तो  ईर्ष्यालु  मनोवृति  के  कारण  वह  नहीं  चाहेगा    उसके  आसपास  के   अन्य  लोग  , --- कोई  अन्य  राष्ट्र  उसके  स्तर  तक  पहुँच  जाएँ   l  जो  भी  उस  स्तर  तक  पहुँचने  के  लिए  प्रयत्नशील  होंगे    तो  उनकी  विफलता  के  लिए   षड्यंत्र , छल -कपट ,  धोखा   ----हर  तरह  के  ओछे  प्रयत्न  शुरू  हो  जायेंगे   l    ऐसे  ओछे  प्रयास  कभी  कोई  अकेला  नहीं  करता  ,  ऐसी  मानसिकता  के  लोग   बड़ी  मजबूती  से  संगठित  हो  जाते  हैं    और  अपनी  स्थिति  के  अनुरूप  समाज को , राष्ट्र  को   और  संसार   को  उत्पीड़ित  करते  हैं   l  तुलसीदास जी  ने  लिखा  है ---' समरथ  को  नहीं  दोष  गोंसाई  l '  इसलिए   संसार  अपनी  गति  से  चलता  रहता  है   लेकिन  जब  अति  हो  जाती  है    तब  प्रकृति  क्रुद्ध  हो  जाती  है ,  न्याय  के  लिए  ईश्वर  को  आना  ही  पड़ता  है   l  प्रकृति  के  प्रकोप  से  बचने  का  एक  ही  रास्ता  है ---'जियो  और  जीने  दो  '  l  यह  स्मरण  रखो '  हम  सब  एक  माला  के  मोती  हैं  l '

19 July 2022

WISDOM ------

1 .  '  परिस्थितियों   का  सामना  करें  '------- अलबानिया  की  रानी  ऐलजावेथ   एक  दिन  समुद्र  यात्रा  पर  जा  रहीं  थीं  l   तूफ़ान  आया  और  जहाज  बुरी  तरह  डगमगाने  लगा   l  मल्लाहों  का  धीरज  टूट  गया   और  वे  डूबने  की  आशंका  व्यक्त  करने  लगे   l  रानी  ने  गंभीर  मुद्रा  में में  मल्लाहों  से  कहा --- "  अलबानिया  के  राजपरिवार   का  कोई  सदस्य   अभी  तक   जलयान  की  दुर्घटना  में    डूबा  नहीं  है  l   मैं  जब  तक  इस  पर  सवार  बैठी  हूँ  ,  तब  तक  तुम  में  से   किसी  को  भी   डूबने  की   आशंका  करने  की  जरुरत  नहीं  है   l   मल्लाह  निश्चिन्त  होकर  डांड  चलाते  रहे   l  तूफान  ठण्डा  हुआ   और  जहाज  शांति पूर्वक   निश्चित   स्थान  पर  पहुँच  गया   l  यदि  उन्हें  घबराहट  रही  होती   तो  अस्त व्यस्त  काम  करते  और  जहाज  को  डुबो   बैठते   l                                                         2 .    विश्वासघात  ------  रोम  की  राज्य सभा  के  सभापति   जुलियस  सीजर   पर  षडयंत्रकारियों   ने  आक्रमण  किया    l  षडयंत्रकारी  उन  पर  आघात   कर  रहे  थे  l  सीजर  निरस्त्र  थे   फिर  भी  किसी  प्रकार  अपना  बचाव  करने   प्रयत्न  कर  रहे  थे  l  इसी  समय  उनके   परम  विश्वासी  मित्र   ब्रूटस   ने  भी  उन  पर  आक्रमण  किया   l  अब  असह्य  हो  गया   l   मित्र  के  विश्वासघात  से  उनका  दिल  टूट  गया   l  सीजर  ने  ब्रूटस   की  ओर   देखकर  कहा  ---- ' मित्र  !   तुम  भी   ----------- l  "    सीजर  ने  अपने  बचाव  का  प्रयत्न  छोड़  दिया    और  आहत  होकर  मृत्यु  की   गोद  में  गिर  पड़े   l   

WISDOM -----

   लघु -कथा ----- एक  बार  एक  ब्राह्मण  ने  किसी  सेठ  के  यहाँ  अपनी  राशि  जमा  कर  दी    ताकि  कन्या  के  विवाह  के  समय  वह  राशि  ब्याज  समेत  मिल  जाये  l   आवश्यकता  पड़ने  पर  वह  ब्राह्मण  अपने  रूपये  वापस  लेने  पहुंचा  ,  पर  सेठ  की  नियत  में  खोट  आ  गया  l   उसने  रूपये  देना  तो  दूर  उस  ब्राह्मण  को  पहचानने  से  भी  इनकार  कर  दिया   l   ब्राह्मण  बहुत  दुःखी   हुआ  और  न्याय  के  लिए  राजा  के  पास  गया   l   रूपये  के  लेन - देन  संबंधी  कोई  कागज  नहीं ,  कोई   प्रमाण  नहीं    तो  राजा  क्या कैसे  क्या  करे  ?   पर  राजा  को  एक  युक्ति  सूझी   और  उसने  दूसरे  दिन  नगर  में  अपनी  शोभा  यात्रा   निकालने  की  घोषणा  कर  दी   और  ब्राह्मण  से  कह  दिया  कि  उस  सेठ  के  मकान  के  पास  खड़े  हो  जाना   l  राजा  की  शोभा -यात्रा  निकली  ,  सभी  लोग  अभिवादन  कर  रहे  थे   l  जब  सेठ  के  घर  के   पास  से   सवारी  निकली    तो  राजा  ने  ब्राह्मण  को  देखकर  अपनी  सवारी  रुकवाई  और    ब्राह्मण  को    गुरुदेव    कहकर  सम्मान  के  साथ  अपने  पास  बैठा  लिया   l     और  आगे    जा  कर   उतार  दिया    l  जब  सेठ  ने  यह  द्रश्य  देखा  तो  वह  कांपने  लगा   कि  यह  ब्राह्मण  तो   राजा  से  परिचित  है , कहीं  शिकायत  कर  दी  तो  जाने  क्या  दंड  मिले   l  सेठ  ने  अपने  सेवक  दौड़ाये  कि  उस  ब्राह्मण  को  ले  आओ   l   ब्राह्मण   के  आने  पर  सेठ  ने  उसका  बहुत  सम्मान  किया   और  कहा  कि    बहीखाता   देखने  में  भूल  हो  गई   l   सेठ  ने  ब्राह्मण  की  पूरी  धन   राशि   ब्याज  समेत  लौटा  दी ,   कन्या  के  विवाह  के  लिए  विशेष  दान  दिया   और  भोजन , पानी , दक्षिणा  भी  दी  l    यह  सब  देखकर  ब्राह्मण  की  बुद्धि  खुल  गई   , वह  सोचने  लगा   कि   जब  थोड़ी  देर  राजा  के  पास  बैठने  से   इतना  फायदा  हुआ   तो  यदि  राजाओं  के  राजा   ईश्वर  के  पास  बैठा  जाये  , सच्चे  ह्रदय  से  उनकी  उपासना  की  जाये    तो   कितना  प्रतिफल  मिलेगा  ,  जीवन  सार्थक  हो  जायेगा  l   अब  उसका  जीवन  बदल  गया ,  वह   अब  धन  कमाने  के  लिए  कोरे  कर्मकांड  नहीं  करता  ,  सच्चे  अर्थों  में  ब्राह्मण    बन  गया   l