पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी कहते हैं ----' पतन की राह बहुत आसान है l पानी नीचे की ओर तेजी से गिरता है लेकिन ऊपर चढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करना पड़ता है l बुराई में एक आकर्षण है , लाभ तुरंत मिलता है इसलिए लोग बुराई की ओर बढ़ जाते हैं l ' महाभारत के दुर्योधन औए दु:शासन आज असंख्य मिल जाएंगे लेकिन पांच पांडवों जैसा कोई मिलना लगभग असंभव ही है l यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह भी है l कि जब दुर्योधन , दु:शासन पैदा हुए थे तब ऐसे नहीं थे l वे सुयोधन और सुशासन थे l उन्हें अनीति और अधर्म के मार्ग पर चलने वाला और छल , कपट , षड्यंत्र रचने वाला दुर्योधन और दु:शासन किसने बना दिया ? इनके मामा ' शकुनि ' ने ही दुर्योधन , दु: शासन के बाल्यकाल से ही उनके मन में पांडवों के विरुद्ध जहर भरना शुरू कर दिया था l आज संसार में ' मामा शकुनि ' जैसे लोगों की भरमार है l ऐसे लोग दूसरों का माइंड वाश करके , उन्हें मेनुप्लेट कर के गलत राह पर धकेल देते हैं l किसी के सुखी परिवार में कलह पैदा करना , पति -पत्नी में मनमुटाव कर उन्हें अलग करा देने में ऐसे शकुनि बड़ी भूमिका अदा करते हैं l वैश्वीकरण के इस युग में शकुनि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छा गए हैं l ईश्वरीय विधान में भी दखल करने लगे हैं l ईश्वर ने किसी को लड़का बनाया तो कोई न कोई शकुनि उनके दिमाग में भर देगा कि उन्हें तो लड़की होना चाहिए l शारीरिक परिवर्तन तो हो गया लेकिन मन और चेतना तो नहीं बदली , जीवन का संतुलन बिगड़ गया l ऐसे शकुनि विभिन्न क्षेत्रों में फैले हैं , संसार में होने वाली विभिन्न अपराधिक गतिविधियों में उनकी बहुत बड़ी भूमिका है l दुर्योधन को अपने अंतिम समय में होश आया था कि हस्तिनापुर का युवराज होते हुए भी उसने अपना सारा जीवन छल ,कपट और षड्यंत्र करते ही बिता दिया , जीवन व्यर्थ हो गया l महाभारत के विभिन्न पात्रों का चरित्र हमें जागरूक करने के लिए है , हम होश में रहकर जीवन जियें , जीवन को सार्थक करें l
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