12 May 2020

WISDOM ----- जो ईश्वर पर विश्वास रखता है उसे मृत्यु का भय नहीं होता

  ईश्वर  सत्य  है '   जिसने  भी  इस  धरती  पर  जन्म  लिया  उसकी  मृत्यु  निश्चित  है   l   लेकिन  मृत्यु  का  भय   व्यक्ति   को  जीवित  रहते  हुए  भी  मृत्यु तुल्य  बना  देता  है  l   वह  मृत्यु  के  भय  से  इधर - उधर  भागता  है  या  छिपता  फिरता  है  ,  जीवन  का  आनंद  नहीं  ले  पाता  l   निडर  होकर  जीवन  जीने  में  ही  जीवन  जीने  का  आनंद  है   l  जो  ईश्वर  विश्वासी  हैं   वे  जानते  हैं  कि   ईश्वर  ने  उन्हें  धरती  पर  रहने  का  जितना  वक्त  दिया  है ,  उसमें   एक  पल  का  भी  हेरफेर  संभव  नहीं  है  ,  इसलिए  वे  निडर  होकर  जीवन  जीते  हैं   l 
 महाभारत  का  प्रसंग  है ---- दुर्योधन  ने  भीष्म पितामह  पर  आक्षेप  किया  कि     वे  अर्जुन  के  प्रति  मोह  रखते  हैं  ,  इसलिए  पूरा  शौर्य  प्रकट  नहीं  करते  हैं   l   इस  पर  भीष्म  ने  प्रतिज्ञा  की  ---- कल  के  युद्ध  में   मैं  या  अर्जुन  - में  से  एक  की  मृत्यु  होगी   l   भीष्म  की  प्रतिज्ञा  से  पांडवों  में  खलबली  मच  गई  l   स्वयं  कृष्ण  चिंतित  हो  उठे  l   नींद  नहीं  आई  l  अर्जुन  की  क्या  स्थिति  है  यह  देखने   उनके  डेरे  में   जा  पहुंचे  l   वहां  जाने  पर  देखा  कि   अर्जुन  निश्चिन्त  होकर  स्वाभाविक  स्थिति  में  सो  रहे  हैं   l 
  कृष्ण  ने  उन्हें  जगाया   और  पूछा  --- " पार्थ  !  तुमने  भीष्म  की  प्रतिज्ञा  सुनी  ?  "
  उत्तर  मिला  --- " हाँ ,  सुनी  l  "  कृष्ण  बोले --- " फिर  भी  निश्चिन्त  कैसे  सो  रहे  हो  ? "
  अर्जुन  बोले ---- " जो  मेरे  करने  का  है  ,  सो  तो  मैं  करूँगा  ही  ,  उसके  लिए  ठीक - ठाक   विश्राम  भी  जरुरी  है  l   इसके  अतिरिक्त  क्या  करना  है  ,  यह  मेरा  रक्षक  सोचता  है   l   उसकी  जागरूकता  पर  भरोसा  है  ,  इसलिए  निश्चिन्त  सोता  हूँ  l  "

11 May 2020

WISDOM ------

  महर्षि  अरविन्द  ने  भारत  के  संदर्भ   में  कहा  था  ---- " भारत  की  कमजोरी  का   प्रमुख  कारण  दासता , गरीबी  और  धर्म  नहीं  ,  बल्कि  वह  है --- विचार  शक्ति  का  ह्रास   और  अज्ञान  का  विस्तार  l   हमें  भारत  की  वास्तविक  आत्मा  को  जाग्रत  करना  चाहिए  l  "
  श्री  अरविन्द  का  यह  कथन   आज  सम्पूर्ण  विश्व  पर  लागू   होता  है   l   कोई  विचार  किस  तरह  समाज  पर  हावी  हो  जाता  है   और  फिर  एक  निश्चित  अवधि  के  बाद  उसका  दुष्परिणाम  संसार  के  सामने  आता  है   l   इसका   उदाहरण   है --- ' चार्वाक  दर्शन '  -- इस  साहित्य  ने  उधार  लेकर  घी  पीने  की  सीख  दी  ,  जिसे  माध्यम  वर्ग  ने  बहुत  ख़ुशी  से  स्वीकार किया  l    इसकी  दूसरी  प्रमुख  बात  यह  है   कि   सम्पति  अर्जित  करने  के  लिए  मेहनत  और  ईमानदारी  की  आवश्यकता  नहीं  ,  बल्कि  अपने  दिमाग  का  प्रयोग  कर  के  कम  - से - कम   समय  में  अमीर  हुआ  जा  सकता  है   l   इसी  का  परिणाम  हुआ  की  विश्व  में   शेयर  मार्केट   चल  पड़ा  है  l
ये  विचार  सारे  संसार  में  छा  गए   l  भारत , अमेरिका  आदि  विभिन्न  देशों  में  लोगों  ने  बैंकों  से  भारी  लोन  लेकर   घर , कार  आदि  विभिन्न  सुविधाएँ  जोड़   लीं  l   शुरू  में  तो  सब  कुछ  बहुत  अच्छा  लगा  ,  लेकिन  वर्तमान  समय  जब   संसार  में  करोड़ों  लोग  बेरोजगार  हो  गए   तो  ऐसे  उधार  में  दबे  हुए  मध्यम   वर्ग  की  स्थिति  सबसे  अधिक  दयनीय  हो  गई  l
  दूसरे  विचार  का   परिणाम  यह  हुआ   कि   कुछ   लोगों   ने     बॉन्ड , शेयर , प्रतिभूति  आदि  में  निवेश  कर  के   बहुत  धन  कमा  लिया   और  अब  उसके  ब्याज  से  बिना  परिश्रम  किए   ही  दिन - प्रति दिन  अमीर  होते  जा  रहे   हैं   दूसरी  ओर   दिन - रात  मेहनत  करने  वाले  , कठोर  परिश्रम  से  अपने  परिवार  का  पेट  पालने   वाले   भोजन  के  लिए  लाइन  में  हाथ  पसारे   खड़े  हैं  या  भूखों  मरने  की  नौबत  आ  गई  l   यह  स्थिति  विश्व  के  अधिकांश  देशों  की  है  l  इस  विकट    समय  में  भी   कुछ  लोग   दिन  दूने   रात  चौगुने  अमीर  हो  रहे   और  अधिकांश  आँखों  में  आँसू   लिए  एक - एक  दाने  को  तरस  रहे  l    आसुरी  प्रवृतियों  का  तो  मुख्य  लक्षण  ही  यह  है  कि   वे  लोगों  को  निचोड़कर  , उन्हें  सता कर  ही  प्रसन्न  होती  हैं  l
  लेकिन  गरीब  के  आँसू   व्यर्थ  नहीं  जाते ,  संसार  में  तबाही  ला  देते  हैं   l   ऐसे  भयानक  परिणाम  से  हमारे  प्राचीन  ऋषि  परिचित  थे  ,  इसलिए  हमारी  प्राचीन  संस्कृति  में  श्रम  और  ईमानदारी  से  धन- उपार्जन  को  महत्व   दिया  गया  l   अथर्ववेद  में  कहा  गया  है  -- व्यापार  में  से  श्रम  और  चरित्र  को  ही  यदि  हटा  दिया  जाये  तो  फिर  वह  व्यापार  नहीं  होता  है ,  कुछ  और  हो  जाता  है  l
आज  संसार  को  जागरूक  होने  की  ,  अपनी  आत्मशक्ति  को  जाग्रत  करने  की  जरुरत  है  l 

WISDOM ---- अति की महत्वाकांक्षा व्यक्ति को अत्याचारी बना देती है

  साधु , संत , पीर , सत्पुरुष    हमेशा  अंदर  से  प्रेम  से  भरे  होते  हैं   l   सबके  लिए   समान    रूप  से  उनके   मन  में  प्रेम  होता  है  l  हरेक  के  दुःख  में  वे  दुःखी   होते  हैं  l   तैमूरलंग   ने  हजारों  हत्याएं  कीं ,  दिल्ली  और  अन्य  कई  राज्यों  पर  कब्ज़ा  किया  l   जिस  एक  राज्य  को  जीता  ,  वहां  का  राजा  काना  था  l   तैमूर  लंगड़ा  था  l   दोनों  एक  प्रसिद्ध   फकीर   के  पास  मिलने  गए   l   दोनों  ही  भीतर  से  बहुत  अशांत  थे   l  पीर  बोले ---- " खुदा  भी  अजीब - अजीब  काम  करता  है   l   अंधे - लँगड़े   को  सल्तनत  देता  है  l   वह  फकीरों  को  बादशाह  नहीं  बनाता  l   जो  हीन   भावनाओं  वाले  होते  हैं  ,  वे  ही  जरुरत  से  ज्यादा   ख्वाहिशमंद   होते  हैं  l   बड़ा  करामाती  है  खुदा   l   अब  तुम  दोनों  भुगतो   उसके  कहर  को   l  "
          दुनिया  के  कट्टर  और  खूंखार  बादशाहों  में  तैमूरलंग  का  नाम  आता  है  l   व्यक्तिगत  महत्वाकांक्षा  , अहंकार  और  जवाहरात  की  तृष्णा  से  पीड़ित   तैमूर  ने  बगदाद   में   एक  लाख  मरे  हुए  व्यक्तियों  की   खोपड़ियों  का  पहाड़  खड़ा  कराया  था  l 

10 May 2020

WISDOM ------

 कारूँ   को  अल्लाह  ने  बहुत  बड़ा  खजाना  दिया   और  कहा ---- " इस  दौलत  को  नेकी  में  खरच  कर  l "
कारूँ   दौलत  पाकर  फूला   न  समाया  l   उसने  उस  दौलत  को  बेहिसाब  उड़ाना  आरम्भ  किया  ,  राग - रंग   और  ऐशो -आराम  में  नष्ट  करने  लगा  l खजाना  खरच  होने  लगा  l   एक  दिन  जमीन   हिली   और  कारूँ   का  मकान  मय   दौलत  के  उसमे  फंस  गया   l   बची  दौलत  का  थोड़ा  सा  हिस्सा  मिल  जाये  ,  यह  सोचकर  उसने  आवाज  लगाई  l   कोई  भी  नहीं  आया  l   खुदा  के  कहर  से  उसे  निजात  नहीं  मिली  l  कारूँ   की  तरह  ही  रातोरात   अमीर  बनने  वालों  ने   इससे  एक  सीख  ली   और  सोचा  कि   अल्लाह  की  मरजी   पर   अपनी   मरजी    नहीं  रखनी   चाहिए  l   परमात्मा  की  विभूतियाँ  सदुद्देश्यों  के  लिए  हैं  l   उनका  दुरूपयोग  विनाशकारी  ही  होता  है   l 

WISDOM ------

  जब  संसार  पर  आसुरी  शक्तियों  का  आक्रमण  होता  है  और  दैवी  प्रवृतियाँ   उसके  विरुद्ध  संगठित  नहीं  होती  हैं  ,  तब  संसार  में  इसी  तरह  का  मृत्यु  का  तांडव  नजर  आता  है  l   आसुरी  शक्तियों  का  सर्वप्रथम   आक्रमण  मनुष्य  की  बुद्धि  पर  होता  है  l    मनुष्य   की    बुद्धि  , दुर्बुद्धि  में  बदल  जाती  है  ,  फिर  आसुरी  तत्व  उसे  अपने   इशारे  पर  चलाते   हैं  l
  ऐसा  इसलिए  होता  है  कि   व्यक्ति  या  एक  देश   अपनी  योग्यता ,  अपने  भीतर  छिपे  हुए  खजाने  को  नहीं  देखता  ,   दूसरे  को  अपने  से  श्रेष्ठ  समझकर  उसके  इशारे  पर  चलने  लगता  है  l   आज  से  लगभग  सौ वर्ष  पूर्व  जब   आधुनिक  इंजेक्शन ,  दवाइयाँ , वैक्सीन  आदि  का  अविष्कार  नहीं  हुआ  था   तब  प्रत्येक  देश  की  अपनी  चिकित्सा  पद्धति   थी   जैसे  भारत  में  आयुर्वेद , यूनान की   यूनानी  चिकित्सा ---- आदि  l   उस  युग  में  प्रत्येक  देश  में  एक - से  बढ़कर  वीर  और  महान  व्यक्ति   हुए  जैसे  भारत  में  महाराणा  प्रताप ,  इटली  में  गैरीबाल्डी ,  जर्मनी  में  बिस्मार्क ,  अमरीका  में  जार्ज  वाशिंगटन    आदि   अनगिनत  महान   आत्मा  इस  धरती  पर  अवतरित  हुईं  l   वे  सब  बिना  किसी  वैक्सीन  के  ,  बिना  किसी  दवाई  के  अपने  ही  देश  की  मिट्टी   में    पालन - पोषण  पाकर  महान  बनी ,  उनके  वीरता  के  किस्से  हम  आज  भी  पढ़ते  हैं  l
  लेकिन  जब  से  कृषि  और  चिकित्सा  के  क्षेत्र  में  घाल - मेल  हुआ    तब  से  दुनिया  में  वीरता  और  महानता  का  अकाल  पड़   गया  l   कायरता  और  संवेदनहीनता  बढ़  गई  l    इन  दोनों  क्षेत्रों  में  जो  आधुनिक  तकनीक  अपनायी  गई  है  ,  उसने  मनुष्य  के  मन  पर   नकारात्मक   असर  किया  है   l   विशेषज्ञ  भी  मानते  हैं   कि    ऐसी  दवाओं   व  वैक्सीन  का  प्रभाव  6 - 8   वर्ष  बाद  दिखाई  देता  है   l   इसलिए  हम  देखते  हैं  कि   सारी   सुख - सुविधाओं  के  बावजूद  प्रतिरोधक  क्षमता  कम  हुई  है  ,  बाल  -अपराध ,  तनाव , आत्महत्या  , पागलपन  बढ़ा  है  l  मनुष्य  दिन - प्रतिदिन  निर्दयी  होता  जा  रहा  है  l   ऐसा  लगता  है  जैसे  संवेदना , करुणा   और    मानवता  को  पोषित  करने  वाली  नस - नाड़ियों   को    इस  तकनीक  ने  सुखा   दिया  है  l   सारे  संसार  को  जागरूक  होना  होगा  ,  अन्यथा  वह  दिन  दूर  नहीं   जब  मनुष्य  चलती - फिरती  लाश  बन  जायेगा  l 

9 May 2020

WISDOM -----

  मानव  शरीर  पांच  तत्वों  से  मिलकर  बना  है  --- पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु  और  आकाश  l  यह  तत्व  प्रकृति  की  देन   हैं  ,  इन  तत्वों  में  निश्चित  रूप  से  ऐसी  कुछ  विशेषताएं  हैं   जिनके  कारण  हम  किसी  व्यक्ति  को  देखते  ही  समझ  जाते  हैं  कि   यह  भारतीय  है , यह  विदेशी  है ,  यह  चीन  का  है ,  जापान  का  है   ----- l   जो  पौधा  विदेशी  धरती  में  लगा  है  ,  वह  वहां  की  जलवायु  के  उपयुक्त  है  , इसलिए  वह  वहीँ  फलेगा - फूलेगा   l   उसे  यदि  वहां  से  उखाड़  कर  दूसरे  देश  में  लगाया  जाये   तो  संभव  है  वह  सूख   जायेगा   और  जहरीला  भी  हो  जायेगा  l
जब  विभिन्न  देशों  के  मध्य  आवागमन  के  साधन  नहीं  थे  तब   प्रत्येक  देश  के  उसके  प्राकृतिक  साधनों  के  अनुरूप  कृषि  के  तरीके  थे , चिकित्सा  की  पद्धति   थी  ,  लोग  स्वस्थ  थे  , संसार  अपनी  गति  से  चल  रहा  था  l   इन  पांच  तत्वों  का  ऐसा  प्रभाव  है  कि   प्रत्येक  व्यक्ति  जिस  देश  में  पैदा  होता  है   वह  उसी  देश  के  खाद - पानी  में  उगे  हुए  अनाज , फल  आदि  खा  कर  स्वस्थ  रहेगा  l   देशी  शरीर  में    विदेशी    खाद  और  विदेशी  बीज  से  तैयार  फल , अनाज  खा कर  वह  पूर्ण  स्वस्थ  नहीं  रहेगा  l   इसी  तरह  सौंदर्य  सामग्री  है  , इसमें  जो  देशी   चीजें  है ,  और  हमारे ही  देश  के  साधनों  से  बनाई  गई  हैं  , उनके  प्रयोग  से  कोई  रिएक्श्न  नहीं  होता  l   यही  स्थिति  चिकित्सा  के  क्षेत्र  में  है  l    जो  व्यक्ति  जिस  देश  में  पैदा  हुआ  ,  वह   अपने  ही  देश  की  चिकित्सा  पद्धति   में  और  उसी  के  अनुरूप  बनी   दवा  आदि  में  स्वस्थ  रहेगा  l  विदेशी  धरती  पर  या  विदेशी  सामग्री  से  बनी  दवा , इंजेक्शन  आदि  को  उसका  शरीर  आसानी  से  स्वीकार  नहीं  करेगा  l   कुछ  समय  के  लिए  स्वस्थ  चाहे  हो  जाएँ  ,  फिर  उसका  रिएक्शन  अवश्य  होगा    l    मनुष्य  की  महत्वाकांक्षा ,  उसका  अहंकार  की  हम  विभिन्न  देशों   की   शिक्षा , कृषि , उद्दोग ,  चिकित्सा   आदि   सभी  क्षेत्रों  पर  अपना  नियंत्रण  कर  उसे  अपनी  मर्जी  से  चलाएं  ,  मनुष्य  के  इसी  शौक  की  वजह  से  संसार  में  अनेक  नई  बीमारियां  और  समस्याएं  पैदा  हुई  हैं  l
यह  सब  परिस्थिति  जल्दी  बदलने  वाली  नहीं  है  ,  अब  यह  पूर्णरूप  से  व्यक्ति  विशेष  पर  ही  निर्भर  है   कि   यदि  उसे  स्वस्थ  रहना  है  तो  वह  प्रकृति  के  अनुरूप  और  प्रकृति  के  संरक्षण  में  रहे  l   हमारे  पास  ईश्वर  की  देन   है --सूरज  का  प्रकाश  है ,  आयुर्वेद  है  , अध्यात्म  है   --- l 

WISDOM --

  बाजिल   इटली  के  प्रसिद्ध   संत  हुए  हैं  l   रोम  की  जनता  उन  पर  बहुत  श्रद्धा  रखती  थी  l  इटली  का  जो  नया  राजा  बना  , वह  बहुत  क्रूर  और  अत्याचारी  था  l   जब  जन सामान्य  पर  उसके  अत्याचार  बढ़ने  लगे   तो  एक  दिन  बाजिल   ने   राजदरबार  में  सन्देश  भिजवाया  कि   वे  राजा  के  क्रियाकलापों  का  विरोध  करते  हैं  l   राजा  के  लिए  यह  संभव  नहीं  था  कि   वह  बाजिल   जैसे  लोकप्रिय  संत  के  विरुद्ध  कुछ  कर  पाता ,  अत:  उसने  अपने  दूतों  को  संत  बाजिल   के  पास  भेजकर  प्रस्ताव  रखा  कि   यदि  वे  अपना  मुंह  बंद  रखें   तो  वे  अपार  धन - दौलत  के  स्वामी  बन  सकते  हैं  l
बाजिल   ने  उत्तर  में  कहा  --- " मैं  परमात्मा  का  दिया  खाता   हूँ   और  धर्म  की  राह  पर  चलता  हूँ  l   भगवान   का  अनुग्रह  और  सत्य  का  साथ  ,  यही  मेरे  हथियार  हैं   l   इस  पथ  से  मुझे  लालच  दिखाकर   या  मौत  का  भय   दिखाकर  हटाया  नहीं  जा  सकता  l "  उत्तर  प्राप्त  होने  पर  राजा  को  अपने  व्यवहार  पर  अंकुश  लगाना  पड़ा  एवं   जन सामान्य  के  लिए  जीना  स्वीकार  करना  पड़ा  l