28 July 2022

WISDOM -----

   लघु -कथा ------ ब्रह्मा जी  स्रष्टि  का  संविधान   लिख  रहे  थे   l  उन्होंने  सभी  प्राणियों  के   एक -एक  प्रतिनिधि   को  बुलाया  l  समिति  का  कार्य  ठीक  प्रकार  से  चल  पड़ा  l  जो  निर्णय  होता  वह  पीपल  के  पत्ते  पर  लिख  दिया  जाता   l  कागज  का  अविष्कार  उस  समय  तक  हुआ  न  था  l   रात्रि  होने  पर  सभी  सभासद   अपने -अपने  निवास  स्थान  पर  लौट  जाते   l  एक  गधा  ही  था   जो  छिपकर  किसी  कोने  में  बैठ  जाता   ताकि  आराम  से  पड़ा  रहे  l  व्यर्थ  इधर -उधर  घूमना  न  पड़े   l  रात्रि  को  भूख  लगी  तो  गधे  ने   वे  सभी  पीपल  के  पत्ते  खा  लिए    जिन  पर  बहुत  दिनों  से  संविधान  लिखा  जाता  था  l  प्रात:  जब  गोष्ठी  आरम्भ  हुई   तो  पीपल  के  पत्ते  तलाशे  गए   l  मालूम  हुआ  कि  उन्हें  गधे  ने  खा  डाला  l  देवताओं  को   गधे  की  मूर्खता  पर  बड़ा  क्रोध  आया   और  उन्होंने  उसे  उठाकर  स्वर्ग  से  धरती  पर  पटक  दिया   l  उसे  थोड़ी  चोट  लगी  पर  कुछ  ही  दिनों  में  चंगा  हो  गया   l  गधे  ने  सब  प्राणियों  से  कहना  शुरू  कर  दिया   कि  समस्त  शास्त्र  चाहे  वे  धर्म  के  हों  या  राजनीति  के   उसके  पेट  में  भरे  हैं  l  सुनने  वाले  हंसकर  रह  जाते  l  उसकी  आगे  की  पीढ़ियाँ  ही   उस  सत्य  को  प्रमाणित  करती  हैं  कि   ज्ञान  का  भंडार  उनके  मस्तिष्क  में  भरा  है  ,  पर  वे    उस  पर  आचरण  नहीं  करते  l  

27 July 2022

WISDOM ----

     इस  संसार  में     हमेशा  से  ही  अँधेरे  और  उजाले  में  संघर्ष  रहा  है   l   अंधकार  को  सबसे  ज्यादा  डर  प्रकाश  से  ही  लगता  है   l     देवत्व  को  मिटाने  के  लिए  सारी  आसुरी  शक्तियां  एक  जुट  हो  जाती  हैं   l   असुरता  में  एक  विशेष  बात  यह  है  कि  वे   संगठित  रूप  से   स्वयं  को  इस  तरह  प्रस्तुत  करते  हैं   जैसे  उनका  मार्ग  बिलकुल  सही  है  ,  शेष  सब  गलत  है   l  सामान्य  व्यक्ति  समझ  नहीं  पाता  और  वह  असुरता  का  ही  अनुसरण  करने  लगता  है   l  ---------- सतयुग  धरती  की  ओर  बढ़  रहा  था   l  यह  देखकर  कलियुग  को  अपने  अस्तित्व  की  बड़ी  चिन्ता  हो  गई  ,  उसने  अपने  सहायकों  की  सभा  बुलाई   l  सहायकों  ने  उसे  ढाढस   बंधाया  ,  किसी  ने  कहा ,  मैं  पृथ्वी  पर  जाकर   धन  का  लालच   फैला  दूंगा ,  किसी  ने  कहा  , हम  लोगों  को  कामनाओं  में  फंसा  देंगे   l  किसी  ने  कामिनी  का  दर्प  दिखाया  ,  पर  कलि  को  संतोष  नहीं  हुआ   l  एक   बूढ़ा  सहायक   एक  कोने  में  बैठा  था   l  वह  बोला ---- "  मैं  जाकर  लोगों  में   निराशा  और  आलस्य   पैदा  कर   दूंगा  l  उनके  साहस  को  नष्ट  कर  दूंगा  ,  बस  !  फिर  वे  किसी  काम  के  न  रहेंगे    और  न  वे  किसी  बुराई   को  दूर  करने  के  लिए  संघर्ष   कर  सकेंगे   और  न  ही  किसी  अच्छाई  को   उपार्जित  करने  का   साहस  उनमें  रहेगा  l " इस  वृद्ध  सहायक  की  बात   कलि  महाराज  को  बहुत  पसंद  आई    और    सतयुग  को  आगे  बढ़ने  से  रोकने  की  जिम्मेदारी   उन्होंने  उसी  को  सौंप  दी  l  आज  के  समय  के  निराश  और  आलसी  लोग   कलि  महाराज  की  प्रजा  बने  हुए  हैं   l  सतयुग   बेचारा  क्या  करे  ?  

WISDOM -----

     अनमोल  मोती  -----  खडाऊं  पहन  कर  पंडित जी  मंदिर  की  ओर  चले  l   कदम  बढ़ने  के  साथ  खडाऊं   से  भी  खट -खट   का  स्वर  निकल  रहा  था   l  पंडित जी  को  यह  आवाज  पसंद  न  आई   l  वह  एक  स्थान  पर  खड़े  होकर  खडाऊं  से  पूछने  लगे  ---- "  अच्छा  यह  तो  बताओ   कि   पैरों  के  नीचे   इतनी  दबी  रहने  पर  भी   तुम्हारे  स्वर  में  कोई  अंतर  क्यों  नहीं  आया   ? "  खडाऊं  ने  पैरों  के  नीचे  दबे -दबे  ही  पंडित जी  की  जिज्ञासा  शांत  करते  हुए  कहा  ----- " मैं  तो  जीने  की  इच्छुक  हूँ   l  पंडित जी   !  इस  संसार  में  ऐसे  लोगों  की  कमी  नहीं   जो  दूसरों  के  दबाव  में  आकर    अपना  स्वर  मंद  कर  लेते  हैं  ,  उन्हें  तो  जीवित  अवस्था  में  भी    मैं  मरा  हुआ  मानती  हूँ   l  "

26 July 2022

WISDOM - -----

   लघु कथा ---- एक  गुरु  के  दो  शिष्य  थे   l  दोनों  श्रम  करते  थे  l  दोनों  भजन -पूजन  भी  करते  थे   और  सफाई  और  स्वच्छता   पर  भी  दोनों  की  आस्था  थी  ,  किन्तु  एक  बड़ा  सुखी  था  और  दूसरा   बड़ा  दुःखी   था  l   गुरु  की  मृत्यु  पहले  हुई  है  ,  उसके  थोड़े  समय    बाद    उन  दोनों  की  भी  मृत्यु  हो  गई   l  दैवयोग  से  तीनो  स्वर्ग  में  भी   एक  स्थान  पर  जा  मिले   l  वहां  भी  स्थिति  पहले  जैसी  ही  थी   l  जो    पृथ्वी   पर    सुखी  था ,   वह    स्वर्ग  में  भी   प्रसन्नता  अनुभव  कर  रहा  था    और  दूसरा  व्यक्ति   जो    पृथ्वी     पर     कलह -क्श   के  कारण  अशांत  रहता  था  ,  वह  स्वर्ग  में  भी   अशांत  था   l  दुःखी   शिष्य  ने  गुरु  के  समीप  जाकर  कहा --- 'भगवन  !  लोग  कहते  हैं  ईश्वर  भक्ति  से   स्वर्ग  में  सुख  मिलता  है  ,  पर  हम  तो  यहाँ  भी  दुःखी - के -दुःखी    रहे  "  l   गुरु  ने  गंभीर  होकर  उत्तर  दिया ---- " वत्स  !   ईश्वर भक्ति  से  स्वर्ग  तो  मिल  सकता  है  ,  पर  सुख  और  दुःख  मन  की  देन  हैं   l  मन  शुद्ध  है  तो  नरक  में  भी    सुख  है   और  मन  शुद्ध  नहीं  तो   स्वर्ग  में  भी  कोई  सुख  नहीं  है   l  '

WISDOM -----

   लघु -कथा ----  एक  अँधा  भीख  माँगा  करता  था  l  जो  पैसे  मिल  जाते  उससे  अपनी  गुजर  करता  था  l   एक  दिन  एक  धनी  उधर  से  निकला  ,  उसने  ऊ७श्र्ख़  हाथ  पर  पांच  रूपये  का  नोट  रख  दिया  और  आगे  बढ़  गया   l  अंधे  ने  कागज  को  टटोला   और  समझा  कि  किसी  ने  ठिठोली  की  है   और  उस  नोट  को  खिन्न  मन  से  जमीन  पर  फेंक  दिया   l  एक  सज्जन  ने  नोट  उठाकर  अंधे  को  दिया   और  बताया  कि कि  ' यह  तो  पांच  रूपये  का  नोट  है  l '  तब  वह  प्रसन्न  हुआ   और  उससे  अपनी  आवश्यकता  पूरी  की  l       ज्ञान  चक्षुओं   के  अभाव  में   हम  भी  परमात्मा  के    अपार  दान  को   देख  और  समझ  नहीं  पाते   और  सदा  यही  कहते  रहते  हैं   कि  हमारे  पास  कुछ  नहीं  है  ,  हमें  कुछ  नहीं  मिला  है  ,  हम  साधनहीन  हैं  l    लेकिन  यदि  हमें  जो  नहीं  मिला  है ,   उसकी  शिकायत  करना  छोड़कर  ,  जो  मिला  है  ,  उसकी  महत्ता  को  समझें    तो  मालूम  पड़ेगा  कि    जो  कुछ  मिला  हुआ  है  ,  वह  कम  नहीं  अद्भुत  है   l 

25 July 2022

WISDOM ---

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ------ " किसी  को  ईश्वर   सम्पदा , विभूति  अथवा  सामर्थ्य  देता  है   तो  निश्चित  रूप  से   उसके  साथ  कोई न  कोई    सद्प्रयोजन    जुड़ा    होता  है  l  मनुष्य  को  समझना   चाहिए  कि   यह  विशेष  अनुदान    उसे  किसी  समाजोपयोगी  कार्य  के  लिए    ही  मिला  है  l   "                                              यदि   मनुष्य  का  विवेक  जाग्रत  नहीं  है   तो  उसकी   इन  विभूतियों  का  उपयोग   चालाक  लोग  अपने  स्वार्थ  के  लिए  कर  लेते  हैं   जैसे   औरंगजेब  ने  राजपूत  राजाओं  से  मित्रता  कर   उनकी  वीरता  और  पराक्रम   का  जी  भरकर  लाभ  उठाया  l  मुट्ठी  भर  अंग्रेजों  ने  भारतीयों  की  मदद  से  ही  इस  देश  को  वर्षों  तक  गुलाम  बनाए  रखा   l  आचार्य श्री  लिखते  हैं ----- " आज  के  समय  में  भी    सच्चे  और  ईमानदार   व्यक्तियों  को  दीन-हीन   देखा  जाता  है   तो  उसके  पीछे  एक  कारण  यह  भी  है   कि  उसका  लाभ  बुरे  लोग  उठा  लेते  हैं   l  "    अधिकांशत:  यह  देखा  जाता  है  कि    व्यक्ति   अपना  विशेष  जीवन  स्तर  बनाए  रखने  के  लिए    जानते - समझते  हुए  भी  गलत  लोगों  का  साथ  देता  है  l  सच्चाई   संगठित  नहीं  होती  है    इसलिए  उनकी   अच्छाइयां   निरर्थक  चली  जाती  हैं   l   

WISDOM -----

   सौभाग्य  और  दुर्भाग्य  के  पल   व्यक्ति  के  जीवन  में  आते  हैं  ,  इसी  तरह  एक  राष्ट्र    और   संसार   का  भी  अच्छा  और  बुरा  समय  होता  है   l  संसार  का  दुर्भाग्य  तब  होता  है  जब  धरती  पर  प्रतिभा संपन्न  व्यक्तियों अभाव  होता  है   l  अभाव  इस  अर्थ  में    कि     एक -से -बढ़कर  एक  प्रतिभावान    और  बुद्धिमान  व्यक्ति  धरती  पर  होते  तो  हैं  लेकिन  उनमे  से  अधिकांश  अंधेरों  में  छिप  गए  होते  हैं    और  अनेक  प्रतिभावान    अपनी  प्रतिभा  का   दुरूपयोग  कर  रहे  होते  हैं    l  एक  उदाहरण  लें ---  वर्तमान  में   नई  '   पुरानी   अनेक    बीमारियाँ   हैं    ,  इनके  इलाज  के  लिए  निरंतर     नवीन   अनुसन्धान  हो  रहे    हैं    लेकिन  समय  की  मार  ऐसी  है  कि  धन  कमाना  ,  अमीर  और  अमीर  बनना  प्राथमिकता  है   इसलिए  बीमारी  के  मूल  कारणों  की  अनदेखी  होती  है  l  आज   मनुष्य    बीमारी , तनाव , आत्महत्या -------- आदि  अनेक   समस्याओं  से  परेशान  है  ,  इसका  मूल  कारण  है  जिन  पांच  तत्वों  से  हमारा  शरीर  बना  है ,  वे   रासायनिक  पदार्थ   आदि  के  कारण  प्रदूषित  हो  गए  हैं  l    कला  और  साहित्य  में   दुर्बुद्धि   इस  तरह  हावी  है   कि  अश्लीलता  का  साम्राज्य  है   जो  मानसिक    प्रदूषण    के  लिए  जिम्मेदार  है    l    फिर  अस्त्र -शस्त्र  ,   हथियारों  आदि  का  इतना  निर्माण  हुआ  है   कि  वे  अपने  इस्तेमाल  के  लिए  बेचैन  हैं  l  जहाँ  युद्ध , दंगे  आदि  होते  हैं   वहां  का    प्रदूषण   किसी  से  छिपा  नहीं  है   l  जीवन  का  हर  क्षेत्र  व्यवसाय  बन  गया  है  ,  स्वार्थ , लालच  और  महत्वाकांक्षा   ही     सब  पर  हावी  है  l    यही  दुर्भाग्य  है   जो  सारे  संसार  के  लिए  खतरा  है  l    ईश्वर  ने  मनुष्य  को  जो  विभूति  प्रदान  की  है  , उसके  सदुपयोग  से  ही  दुर्भाग्य  को  सौभाग्य  में  बदला  जा  सकता  है   l