एक मच्छर शहद की मक्खियों के छत्ते पर पहुंचा और बोला ---- " वह बड़ा संगीतज्ञ है l मक्खियों के बच्चों को संगीत सिखाना चाहता है l बदले में थोडा सा शहद लिया करेगा l रानी मक्खी तक समाचार पहुंचा , तो उन्होंने स्पष्ट इनकार कर दिया और कहा ---- " जिस प्रकार संगीत का ज्ञाता बनकर मच्छर हमारे दरवाजे पर भीख मांगने आया है l उसी प्रकार हमारे बच्चे भी परिश्रम छोड़कर भीख मांगने लगेंगे l मैं नही चाहती कि संस्कारों के स्थान पर सस्ते में कुछ पाने का लालच भरा शिक्षण इन्हें मिले l इन्हें अपने आप ही सब कुछ सीखने दो , तभी ये जीवन साधना में खरे उतरेंगे l
12 December 2023
4 December 2023
WISDOM -----
यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा ---- ' इस संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? ' युधिष्ठिर ने उत्तर दिया --- ' हर रोज आँखों के सामने कितने ही प्राणियों को मृत्यु के मुख में जाते देखकर भी शेष मनुष्य यही सोचते हैं कि वे अमर हैं , यही सबसे बड़ा आश्चर्य है l " मृत्यु तो सब की निश्चित है लेकिन सांसारिक आकर्षण इतना तीव्र है , कामना , वासना , तृष्णा , स्वाद , भय , भोग -विलास , इन सब में मनुष्य इतना बंधा हुआ है कि वह मृत्यु को भुला देता है l एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि मृत्यु को याद रखा जाए तो हर कदम फूंक -फूंक कर रखना होगा , जो सबसे कठिन कार्य है l इसलिए मनुष्य मृत्यु का विस्मरण कर बेहोशी का जीवन जीता है l एक लघु कथा है -------------- एक पेड़ पर दो बाज रहते थे l एक दिन दोनों शिकार पकड़कर लौटे तो एक की चोंच में चूहा था और दूसरे की चोंच में सांप और अभी जीवित थे l दोनों बाज शाम को मिल बैठकर खाते थे l अपना शिकार लेकर जब दोनों पेड़ पर बैठे , उस समय सांप और चूहा जीवित थे l सांप स्वयं तो मृत्यु के मुख में था लेकिन चूहे को देखकर वह अपनी मृत्यु भूल गया , और चूहे को खाने के लिए उसकी जीभ लपलपाने लगी l इधर चूहा मृत्यु शैया पर पड़ा था , बाज की चोंच से घायल अंतिम साँस गिन रहा था लेकिन अपनी जान बचाने के लिए बाज के ही पैरों में छुपने की कोशिश करने लगा l यही हाल मनुष्य का है l
WISDOM -----
लघु कथा ---- खडाऊं पहन कर पंडित जी मंदिर की ओर चले l कदम बढ़ने के साथ खडाऊं से भी खट -खट का स्वर निकल रहा था l पंडित जी को यह आवाज पसंद न आई l वह एक स्थान पर खड़े होकर खडाऊं से पूछने लगे ----" अच्छा यह तो बताओ कि पैरों के नीचे इतनी दबी रहने पर भी तुम्हारे स्वर में कोई अंतर क्यों नहीं आया ? " खडाऊं ने पैरों के नीचे दबे -दबे ही पंडित जी की जिज्ञासा शांत करते हुए कहा ---- " मैं तो जीने की इच्छुक हूँ पंडित जी , इस संसार में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो दूसरों के दबाव में आकर अपना स्वर मंद कर लेते हैं , उन्हें तो जीवित अवस्था में भी मैं मरा हुआ मानती हूँ l "
28 November 2023
WISDOM ------ लघु कथा ---'कुछ तो कर , यों ही मत मर '
एक राजा के अनेक शत्रु हो गए l एक रात शत्रुओं ने पहरेदारों को अपनी ओर मिला लिया और महल में जाकर राजा को दवा सुंघाकर बेहोश कर दिया l उसके बाद उन्होंने राजा के हाथ -पाँव बांधकर एक पहाड़ की गुफा में ले जाकर बंद कर दिया l राजा को जब होश आया तो अपनी दशा देखकर घबरा उठा l उस अँधेरी गुफा में उसे कुछ करते -धरते न बना l तभी उसे अपनी माता का बताया हुआ मन्त्र याद आ गया --- " कुछ कर , कुछ कर l " राजा की निराशा दूर हुई और उसने पूरी शक्ति लगाकर हाथ -पैर की डोरी तोड़ डाली l तभी अँधेरे में उसका पैर सांप पर पड़ गया जिसने उसे काट लिया l राजा फिर घबराया किन्तु फिर तत्काल ही उसे वही मन्त्र ' कुछ कर , कुछ कर ' याद आ गया l उसने तत्काल कमर से कटार निकालकर सांप के काटे स्थान को चीर दिया l खून की धार बहने से वह फिर घबरा गया लेकिन फिर उसे माँ का मन्त्र याद आ गया --' कुछ कर , कुछ कर ' उसने प्रेरणा पाकर अपने वस्त्र को फाड़ कर घाव पर पट्टी बाँध ली l अब उसे उस गुफा से बाहर निकलने की चिंता सताने लगी और भूख प्यास भी लगी थी l पुन: माँ के मन्त्र को याद कर वह उस अँधेरे में आगे बढ़ता रहा और गुफा के द्वार पर आ गया और उसके मुख पर लगे पत्थर को धक्का देने लगा l बहुत बार प्रयास करने पर आखिर वह पत्थर लुढ़क गया और राजा गुफा से बाहर निकलकर अपने महल में वापस आ गया l इस कथा से हमें यही शिक्षा मिलती है कि कभी हार नहीं मानो , बार -बार गिरते हो , तो बार - बार नए हौसले के साथ उठो , हिम्मत नहीं हारो l जीवन इतना सरल नहीं है , इसमें बड़े -बड़े तूफान आते हैं , उनका डटकर सामना करो और जिन्दगी की इस जंग को जीत लो l
26 November 2023
WISDOM ------
लघु कथा ---- विनाश का कारण सांसारिक आकर्षण '------ कालिंदी के महापंडित कौत्स स्नान कर प्रात: वंदना कर रहे थे l एक घड़ियाल उन्हें काफी दूर से ताक रहा था , किन्तु कौत्स ऐसी ऊँची शिला पर बैठे थे कि घड़ियाल वहां तक पहुँच नहीं सकता था l उसने युक्ति से काम लिया और यमुना की तलहटी से रत्नों का ढेर उठाकर ऊपर की ओर उछाला l अपने चारों ओर मणि -मुक्तक देखकर महर्षि कौत्स का लोभ जाग उठा l उसने कौत्स से कहा --- " आचार्य ! मैं त्रिवेणी का रास्ता नहीं जानता , यदि आप मेरी पीठ पर बैठकर मुझे त्रिवेणी का रास्ता बता दें तो मैं इन तुच्छ मोतियों से बढ़कर पांच मुक्ताहार दे सकता हूँ l कौत्स के हर्ष का ठिकाना न रहा l घड़ियाल ने उन्हें पीठ पर बैठाया l अभी वह बीच धार में पहुंचा ही था कि उसे हंसी आ गई l घड़ियाल को हँसते देख कौत्स ने पूछा --- " वत्स ! असमय आपकी हँसी का क्या कारण है ? " घड़ियाल ने कहा --- " आचार्य ! आप जीवन भर दूसरों को उपदेश देते रहे कि विनाश सांसारिक आकर्षण के रूप में आता है l मनुष्य जब एक बार वासनाओं के शिकंजे में आ जाता है तब ये वासनाएं मनुष्य को वहां ले जाती हैं , जहाँ सिवाय विनाश के कुछ नहीं होता l दूसरों को उपदेश देने के बावजूद तुम यह तथ्य न समझ सके और आज एक लालच ने तुम्हे सर्वनाश के पास पहुंचा दिया l यह कहकर उसने कौत्स को उछाला और एक ही क्षण में निगल लिया l उपदेश देना बहुत सरल होता है , लेकिन उसे आचरण में उतारना बहुत कठिन l
25 November 2023
WISDOM -----
एक बार एक राजा ने मंत्री से पूछा ---- "क्या गृहस्थ रहकर ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है ? " मंत्री राजा को एक वन में ले गए और बोले ---- " महाराज ! इस वन में एक प्रसिद्ध महात्मा रहते हैं l उनसे मिलने के लिए कीड़ों -मकोड़ों से पांव बचाकर चलना पड़ता है l एक भी कीड़े की मृत्यु हो जाए तो वे शाप दे देते हैं l " राजा ध्यान पूर्वक चलते हुए महात्मा जी के पास पहुंचे और अपना प्रश्न पूछा l महात्मा जी ने प्रत्युत्तर में प्रश्न किया ---- "मेरे पास आते हुए मार्ग में क्या -क्या देखा ? " राजा बोले ---- " भगवन ! मैं तो आपके शाप के डर से कीड़े =मकोड़ों को देखता हुआ आया हूँ l रास्ते के किसी द्रश्य की ओर मेरी द्रष्टि ही नहीं गई l " महात्मा जी हँसते हुए बोले ---- " राजन ! जिस प्रकार मेरे शाप के डर से तुम मार्ग में बचते -बचते आए हो , उसी प्रकार भगवान के दंड के डर से दुष्कर्मों से बचते हुए चलना चाहिए l इस प्रकार सावधानी से चलते हुए गृहस्थ रहते हुए भी ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है l "
23 November 2023
WISDOM ----
यह संसार एक रंगमंच है यहाँ हम सभी अपनी -अपनी भूमिका निभाने आते हैं l ईश्वर ने धरती पर जन्म लेकर हमें सिखाया कि काम कोई भी छोटा -बड़ा नहीं होता , हमें जो भी कार्य मिला है , जो भूमिका हमें मिली है उसे अहंकार रहित होकर समर्पण भाव से निभाएं l महाभारत का प्रसंग है ---- भगवान श्रीकृष्ण तो सर्वशक्तिमान थे लेकिन उन्होंने स्वयं महाभारत युद्ध में सारथी की भूमिका चयन की थी और इस भूमिका को बखूबी निभाया l एक सारथी की तरह वे सर्वप्रथम अर्जुन को ससम्मान रथ में चढ़ाते और उसके बाद स्वयं आरूढ़ होते और अर्जुन के आदेश की प्रतीक्षा करते l फिर संध्या के समय जब युद्ध बंद हो जाता तब वे पहले उतरकर फिर अर्जुन को बड़ी आवभगत के साथ उतारते l भगवान श्रीकृष्ण अपने इस अभिनय को सम्पूर्ण समर्पण के साथ निभा रहे थे l युद्ध का अंतिम दिन , युद्ध समाप्त हुआ , अब भगवान कृष्ण सदा की तरह अर्जुन से पहले नहीं उतरे और अर्जुन को संबोधित करते हुए बोले --"पार्थ ! आज तुम रथ से पहले उतर जाओ l तुम उतर जाओगे तब मैं उतरता हूँ l अर्जुन को आश्चर्य हुआ लेकिन कहना मान कर वे पहले उतर गए l अर्जुन के उतरने के बाद भगवान कृष्ण धीरे से उतरे और अर्जुन के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें रथ से दूर ले गए , उसके बाद एक भयानक विस्फोट के साथ रथ जलकर ख़ाक हो गया l अर्जुन ने आश्चर्य से पूछा --- " हे कान्हा ! आपके उतरते ही पल भर में यह रथ भस्मीभूत हो गया , ये क्या रहस्य है ? " भगवान ने कहा ---- " हे पार्थ ! यह रथ तो पितामह भीष्म के दिव्यास्त्रों के प्रहार से मृत्यु का वरण कर चुका था , इस दिव्य रथ की आयु समाप्त हो चुकी थी लेकिन आयु समाप्ति के बाद भी इसकी उपयोगिता वांछित थी इसलिए यह मेरे संकल्प बल से चल रहा था l भगवान का संकल्प अटूट और अटल होता है l यह संकल्प सम्पूर्ण स्रष्टि में जहाँ भी लग जाता है वहीँ अपना प्रभाव दिखाता है और संकल्प के पूर्ण होते ही यह शक्ति पुन: भगवान के पास चली जाती है , उसके बाद जो हुआ वो तुमने देखा l अर्जुन ने अपने जीवन की बागडोर भगवान के हाथ में सौंप दी थी , भगवान ने उसे हर मुसीबत से बचाया l यदि हम भी अर्जुन की तरह अपना कर्तव्यपालन करते हुए अपने जीवन की बागडोर भगवान के हाथ में सौंप दे , स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित करें तो जीवन से भय समाप्त हो जाये और सुख -शांति से तनाव रहित जिन्दगी जी सकें l