11 September 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- ' धनी   होने  में  बुराई  नहीं  है  l   बुरा  है  यह  समझना  कि   धन  अपने  साथ  हर   सुख - सुविधा  का  साधन  लेकर  आएगा  ,   क्योंकि  ऐसा  होना  संभव  नहीं  है  l   व्यक्ति  चाहे  कितना  भी  धनी   हो  , लेकिन  ख़ुशी ,  शान्ति   और  प्रेम  के  लिए   उसे  अलग  से  प्रयास  करने  होंगे  l '

  मशहूर  हास्य  अभिनेता  चार्ली  चैपलिन   का  बचपन  अभावों  में  व्यतीत  हुआ  ,   लेकिन  बाद  में   बहुत  अमीर  होते  हुए  भी   उन्होंने  हमेशा  यह  याद  रखा   कि   पैसा  ही  सब  कुछ  नहीं  होता  l   अमेरिका  के   प्रसिद्ध   उद्दोगपति    ऐंड्र्यू   कारनेगी   ने  ब उन्होंने  हुत  पैसा  कमाने  के  बाद  भी   अपना  सारा  धन   गरीबों  के  लिए  पुस्तकालय  बनाने  में  खरच  कर  दिया  l   अमेरिका  के  चौथाई  से  ज्यादा  सार्वजनिक  पुस्तकालय   कारनेगी   के  दान  से  ही  खड़े  हो  पाए  l   बाद  में    उन्होंने   एक  साक्षात्कार  में  यह  कहा  भी  था  कि   उन्हें  जीवन  में  सबसे  ज्यादा  संतोष   दुनिया  का  सर्वाधिक  अमीर   बनने  में  नहीं  ,  बल्कि  गरीबों  के  लिए  पुस्तकालय  बनाने  से  मिला  l 

10 September 2020

WISDOM----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है ---  केवल  विचारों  पर  संयम  करना  पर्याप्त  नहीं  है   l   विचारों  के  साथ  वाणी  पर  संयम  करना  अनिवार्य  है  l   वाणी  की  वाचालता  शक्ति  के  क्षरण  के  अतिरिक्त   संबंधों  में  कटुता  भी  पैदा  करती  है   l   वाणी  के  माध्यम  से  हमारी  मानसिक  शक्तियों  का  सर्वाधिक  क्षरण  होता  है   l   अहंकार , कामुकता , क्रोध , द्वेष  से  लेकर   तृष्णा , वासना   की  अभिव्यक्ति  का  माध्यम  भी  वाणी   बन  जाती  है   l   अंदर  के  कुत्सित    उद्वेग   वाणी  के  माध्यम  से  शब्दों  का  आकार   पाते  हैं  l   इसलिए  वाणी  की  शक्ति  का   संरक्षण , संयम  व  सदुपयोग   भी  शक्ति  संरक्षण  का  एक  महत्वपूर्ण   आधार  कहा  जा  सकता  है l 

WISDOM -------

  मृत्यु   होने पर  अपनी  धन - दौलत  छोड़कर  जाना   हमारी  मज़बूरी  है   क्योंकि  यही  प्रकृति  का  नियम  है  कि   व्यक्ति  खाली   हाथ  आता  है  और  खाली  हाथ  जाता  है  l   इसलिए  ऋषियों  ने , आचार्य  ने  सिखाया  है  कि   जीवन  को  उदारतापूर्वक  जिएं  l   यही  शिक्षण  देने  वाली  एक  कथा  है  -----   एक  गाँव  में  एक  सेठ  था ,  वह  बहुत  धनवान  था  लेकिन  बहुत   दुःखी   रहता  था   क्योंकि  उसके  गाँव वाले   उससे बहुत  नफरत  करते  थे  l   एक  दिन  उसने  गाँव  वालों  से  कहा  --- ' तुम   सब मुझसे  इतनी  नफरत  क्यों  करते  हो   l  मैं  अपनी  सारी   सम्पति  दान  में  दे  दूंगा  जिससे  सारा  गांव  खुशहाल  हो  जायेगा  ,  लेकिन  मरने  के  बाद  दूंगा  l  तुम  लोग  कुछ  साल  इंतजार  भी  नहीं  कर  सकते  l  "  गाँव  के  लोग  उसका  उपहास  करते , भला - बुरा  कहते  l   एक  दिन  सेठ  को   किसी  काम  से  दूसरे  गाँव  जाना  था  ,  वह  एक  जंगल  से  होकर  गुजर  रहा  था   l  रास्ते  में  थककर   पेड़  के  नीचे   विश्राम  करने  लगा  l   उस  पेड़  से  थोड़ी  दूरी   पर   एक  गाय  और  सुअर   आपस  में  बात  कर  रहे  थे   l   सेठ  जानवरों  की  भाषा  समझता  था  सो  ध्यान  से  सुनने  लगा   l --- सुअर   गाय  से  कह  रहा  था --- " मुझे  समझ  में  नहीं  आता  कि   सभी  तुमसे  ``इतना  क्यों  प्यार  करते  हैं   और  मुझे  कोई  पूछता  तक  नहीं  , जबकि   मेरे    तो  मरने  के  बाद   मेरा   गोश्त , चर्बी , चमड़ा   सभी  कुछ  इनके  काम  आता  है  ,  फिर  भी  जीते  जी  मुझे  नफरत  की  नजर  से  देखा  जाता  है  l   और  तुमको  सदा  सम्मान   मिलता है  ,  लोग  इतने  प्यार  से  पालते  हैं  l  "  गाय  सुअर   से  बोली --- ' भाई  देखो , मैं  जीते जी  उन्हें   दूध  देती  हूँ  , और  वह  सब  मैं  उन्हें  उदारता पूर्वक  देती  हूँ  l  तुम  तो  जीते जी  उन्हें  कुछ  नहीं  देते  l   तुम्हारे  मरने  के  बाद  ही  उन्हें   कुछ मिलता  है   l   दुनिया  का  एक  दस्तूर  जान  लो  ' लोग  भविष्य  में  विश्वास  नहीं  करते  ```` वे  वर्तमान  में  विश्वास  करते  हैं   l  अत:  यदि  तुम  उन्हें  जीते जी  कुछ    दो    तो   वे  तुम्हे  बेहतर  ढंग  से  अपनाएंगे  l "  यह   सुनकर सेठ  को  अपनी  गलती  का  एहसास   हुआ  , वह  वापस   गाँव आया  और  अपनी  आय   का  एक  अंश  गरीब  और  जरूरतमंदों    के  लिए  खर्च  करने   लगा  l  गाँव  वालों  को  भी  उससे  अपनापन  हो  गया  और  सेठ   का जीवन  भी  संतोष  व  ख़ुशी  से  भर  गया  l 

9 September 2020

WISDOM -----

  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- ' इस  संसार  में   अंधकार   भी  है  और  प्रकाश   भी ,  स्वर्ग  भी  है  और  नरक  भी  ,  पतन  भी  है  और  उत्थान  भी ,  त्रास   भी  है   और  आनंद  भी  l   इन  दोनों  में  से  मनुष्य   अपनी  इच्छानुसार   जिसे  चाहे  चुन  सकता  है   l   कुछ  भी  करने  की  सभी  को  छूट  है  ,  पर  प्रतिबन्ध  इतना  ही  है   कि   कृत्य  के  प्रतिफल  से  बचा  नहीं  जा  सकता  l   स्रष्टा  के  निर्धारित  क्रम  को   तोड़ा   नहीं   जा  सकता   l 

WISDOM----- कलियुग का एक लक्षण है --- लोग अच्छाई में भी बुराई खोज लेते हैं

   एक  कथा  है ---- एक  बार  एक  आदमी  एक  ऐसे  गाँव  में  पहुँच  गया  ,  जहाँ  सब  अंधे  रहते  थे  l  नेत्रहीन  होते  हुए  भी  वे  सभी  काम  आसानी  से  कर  लेते  थे  l   वहां  उसे  एक  लड़की  मिली  बहुत  सुन्दर  थी , शिष्ट  थी  l   उस  गाँव  में  सभी  अंधे  थे  ,  वह  भी  अंधी  थी  l  उस  आदमी   को  उससे  प्रेम  हो  गया  l   वह  उसे  उसके  सौंदर्य  का  भान  कराता  l  सुन्दर  दृश्यों  का  वर्णन  करता , रंग  बताता   तो  वह  पूछती  कि   कैसा  होता  है  ये  रंग   ?  वह  बार - बार  यही  कहता  कि   इसके  लिए  आँखे  होनी  चाहिए  l   उस  लड़की  ने    उससे   विवाह  करने  के  लिए  घर  के  बुजुर्गों   से    बात  की   ,  पर  साथ  में  यह  भी  बताया  कि   उसमे  एक  बहुत  बड़ी  कमी  है  कि   उसे  दिखाई  देता  है  l   वह  हम  लोगों  की  तरह  नहीं  है  l   सभी  अंधे  बुजुर्ग  बोले --- " यह  बड़ी  भयावह  बीमारी  है  l   सारी   तकलीफें  इसी  से  पैदा  होती  हैं  l   तुम  चिंता  न  करो , हम  उसका  इलाज   कर देंगे  ,  फिर  तुम्हारी  शादी   उससे  करा  देंगे  l  "  सब  अंधे  उसके  पीछे  पड़   गए  ,  उनका  चक्रव्यूह  इतना  प्रबल  था    कि   वह   उनके  जाल  में  फँस   गया  l       लेकिन उसकी  आँखे  थी ,  उसमे  विवेक  था ,  वह  जागरूक  था   इसलिए  उन  अंधों  के ,  उसके  विवेक  को  नष्ट  करने  के  ,  उसकी  जागरूकता  को  पनपने  न  देने  के  सारे  प्रयास  विफल  हो  गए   l   वह  किसी  तरह  बच  कर  निकल  भागा  l  लड़की  कहती  रही  ,  हम  तुमसे  प्रेम  करते  हैं , मत  भागो  ,  लेकिन  वह  उस  चक्रव्यूह  से  बच  निकला  l    

अंधों    के  गाँव  में  देखना  भी  एक  बीमारी  है  l   आज  के  संसार  की  स्थिति  भी  ऐसी  है   l  विवेकवान  होना , जागरूक  होना  भी  एक  बीमारी  है  ,   बनो  तो  उनके  जैसे  l   

8 September 2020

WISDOM ----- पत्रकारिता -----

 भारत   की  आजादी   में   पत्रकारिता  का  महान  योगदान  है   l   पत्रकारों  की  आग्नेय  भाषा    ने  जन - जन  में  वैचारिक  चेतना  जगाने  का  कार्य  किया  l   विलियम  वोल्ट्स   प्रथम  व्यापारी  था  ,  जिसने  1764  में   प्रथम  विज्ञापन   प्रसारित  किया  कि   ईस्ट  इंडिया   कंपनी   की गतिविधियों  से  जन सामान्य  को  अवगत   कराने  के  लिए  वह  पत्र  निकलना  चाहता  है   किन्तु  कंपनी  ने  इसे  अपने  विरुद्ध  विद्रोह   का  षड्यंत्र   पाकर   उसे  देश  से  निर्वासित  कर   इंग्लैण्ड  वापस  भेज  दिया  l   उसके  बाद   आगस्ट्स   हिक्की  ने  1780  में  ' बंगाल गजट ' एवं     पहला    अख़बार    निकाला  , इसे  हिक्की  गजट  के  नाम  से  खूब  लोकप्रियता  मिली  l  भारत  के  तत्कालीन  गवर्नर  जनरल वारेन हेस्टिंग्स  ने   इस  अख़बार  को   अपनी  और  अपनी  सत्ता  का  घोर  निंदक  घोषित  किया   और  आगस्ट्स    को देशद्रोह  के  झूठे  आरोप  में  जेल  भेज  दिया  l   भारत  में  पत्रकारिता  के   प्रसार  पर  अंकुश  लगाने  के  लिए  1799  में  लार्ड  वेलेस्ली  ने  सबसे  पहले  प्रेस एक्ट   लागू   किया  l   1 857     के  बाद  अंग्रेजों  का  दमन  चक्र   और  भी  बढ़   गया  तब    अनेकों  देशभक्तों  ने    अपनी  जान  जोखिम  में  डालकर  पत्रकारिता  द्वारा  जनता  को  जागरूक  किया  l  उस  समय   पत्रकारों के  सामने  उज्जवल  आदर्श  था  ,  वे  सभी  स्वहित  नहीं ,  राष्ट्र  के  लिए  समर्पित  थे   l   उनका  यही  जज्बा  भारतीय  स्वतंत्रता  आंदोलन  का  मुख्य  आधार  बना  l 

7 September 2020

WISDOM

   मान्यता  है  कि   वाल्मीकि जी  ने  ही    तुलसीदास जी  की   देह  धरकर   सहज , सरस   और  सरल  भाषा  में   रामचरितमानस  का  सृजन  किया  था  l  रामचरितमानस  की  रचना  से  तुलसीदास जी  जन - जन  के  हृदय  में  प्रतिष्ठित  हो  गए  ,  उनकी  ख्याति  तथा  प्रतिष्ठा  में  आशातीत  वृद्धि  हुई   और  उनके  दर्शनों  के  लिए   अनेक  राजा - महाराजे     तथा  भक्तगण   उनका  आशीर्वाद   प्राप्त  करने  के  लिए  आने  लगे  l   यह  सब  देख  एक  व्यक्ति  ने  उनसे  पूछा ---- " आजकल  इतने  बड़े  लोग  उनके  पास   क्यों  आते  हैं   ? "  इसके  उत्तर  में  तुलसीदास जी  ने  कहा --- " यह  सब   भगवान  श्रीराम जी   की  कृपा  है   -- लहइ   न   फूटी  कौड़िहू   को  चाहै   केहि  काज  l   सो  तुलसी  महँगो   कियो  ,  राम  गरीब   निवाज   l