एक लालाजी थे ,गांव में रहते थे | हर किसी के खिलाफ मुकदमा लगाते रहते थे | कभी ब्याज के नाम पर कभी झूठे मुकदमे | जब बीमार पड़े तो गांव वालों से कहा -"अब हम मरने वाले हैं ,हमने तुम्हे बहुत कष्ट दिया | सोच रहे हैं प्रायश्चित कर लें | मरने के बाद आप सब हमारी छाती में खूंटा गाड़ देना ,यह सोचकर कि यह दुष्ट आत्मा है ,इसे शांति मिले | तभी हमारी आत्मा को शांति मिलेगी | वह मर गये | गांव वालों ने वैसा ही किया ,जैसा वे कह गये थे | तुरंत पुलिस आ गई ,बहुतों को पकड़ कर ले गई | वास्तव में मरने से पहले वे पुलिस में रिपोर्ट लिखा गये थे कि गांव के लोग हमारी छाती में खूंटा गाड़कर मारने का प्लान बना रहे हैं | मर कर भी लालाजी ने पूरे गांव को छोड़ा नहीं | दुष्ट आत्मा ऐसी ही होती हैं |
14 March 2013
TACT
अंत;करण में विवेक और मन में संतोष ही स्थायी सुख शांति और प्रसन्नता
देते हैं | प्रत्येक मनुष्य ,यहां तक कि प्रत्येक जीवधारी अपनी प्रकृति के अनुसार आचरण करता है | जैसे सर्प की प्रकृति क्रोध है ,इस क्रोध के कारण ही वह फुफकारते हुए काटता है और अपने अंदर का जहर उंडेल देता है | कोई उसे कितना ही दूध पिलाये ,उसकी प्रकृति को परिवर्तित नहीं किया जा सकता | इसी तरह नागफनी और बबूल को काँटों से विहीन नहीं किया जा सकता ,जो भी इनसे उलझेगा उसे ये काँटे चुभेंगे ही | जो विवेकवान हैं ,जिनका द्रष्टिकोण परिष्कृत है ,जो इस सत्य को जानते हैं ,वे प्रत्येक घटनाक्रम का जीवन के लिये सार्थक उपयोग कर लेते हैं | जैसे अमृत की मधुरता तो उपयोगी है ही ,परन्तु यदि विष को औषधि में परिवर्तित कर लिया जाये तो वह भी अमृत की भांति जीवन दाता हो जाता है |
देते हैं | प्रत्येक मनुष्य ,यहां तक कि प्रत्येक जीवधारी अपनी प्रकृति के अनुसार आचरण करता है | जैसे सर्प की प्रकृति क्रोध है ,इस क्रोध के कारण ही वह फुफकारते हुए काटता है और अपने अंदर का जहर उंडेल देता है | कोई उसे कितना ही दूध पिलाये ,उसकी प्रकृति को परिवर्तित नहीं किया जा सकता | इसी तरह नागफनी और बबूल को काँटों से विहीन नहीं किया जा सकता ,जो भी इनसे उलझेगा उसे ये काँटे चुभेंगे ही | जो विवेकवान हैं ,जिनका द्रष्टिकोण परिष्कृत है ,जो इस सत्य को जानते हैं ,वे प्रत्येक घटनाक्रम का जीवन के लिये सार्थक उपयोग कर लेते हैं | जैसे अमृत की मधुरता तो उपयोगी है ही ,परन्तु यदि विष को औषधि में परिवर्तित कर लिया जाये तो वह भी अमृत की भांति जीवन दाता हो जाता है |
WILL POWER
सफलता के लिये अनुकूल परिस्थितियों की बाट नहीं जोही जाती | संकल्प शक्ति को जगाया ,उभारा और विकसित किया जाता है | आशातीत सफलता जीवन के हर क्षेत्र में प्राप्त करने का एक ही राज मार्ग है -प्रतिकूलताओं से धैर्य और विश्वास के साथ टकराना और अपने अंदर छिपी सामर्थ्य को उभारना | जीवन हर पल जीने ,उत्साह -उमंग के साथ उसे अनुभव करने का नाम है | हर दिन का शुभारम्भ उत्साह के साथ ऐसे हो ,जैसे नया जन्म हुआ हो | यदि चिंतन सकारात्मक ,मात्र सकारात्मक हो तो सफलताओं के शीर्ष तक पहुंचने में ज्यादा विलंब नहीं होगा |
13 March 2013
LABOUR----LAW OF SUCCESS
'धीरे धीरे चलती हुई चींटी भी हजार योजन तक चली जाती है और न चलता हुआ गरुड़ एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाता | '
मानव में छिपी अनंत सामर्थ्य तथा गौरव गरिमा के बहिरंग में प्रकटीकरण का एक ही उपाय है -अनवरत श्रम | ठाली न बैठे रह स्थूल शरीर का पूर्ण उपयोग कर ईश्वर के इस उद्द्यान को और भी सुंदर बनाना | श्रम एक प्रकार की साधना है जिसमे निराकार को साकार में परिणत किया जाता है और साकार को सुविकसित बनाया जाता है | श्रम से ही व्यक्ति का अहंकार गलता है तथा सेवा -साधना की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है | पदार्थ का छोटे से छोटा परमाणु भी बिना विश्राम किये अनवरत गति से सक्रिय है | पवन को एक क्षण के लिये भी चैन नहीं है ,वह सतत प्रवाहित होता रहता है | सूर्य और तारे सभी अपने -अपने नियत कर्मों में संलग्न है ,अवकाश लेने की नहीं सोचते | वस्तुत;पसीने से पवित्र और कुछ नहीं ,जिस ललाट पर वह झलकता है उसे समुन्नत बनाता चला जाता है | अनगढ़ पत्थरों को देव प्रतिमा के रूप में पूजनीय बनाने का श्रेय श्रम के देवता को ही दिया जा सकता है | जो भी कुछ इस संसार में शुभ है ,सुखद है ,श्रेष्ठ है उसे केवल श्रम साधना से ही पाया जा सकता है |
मानव में छिपी अनंत सामर्थ्य तथा गौरव गरिमा के बहिरंग में प्रकटीकरण का एक ही उपाय है -अनवरत श्रम | ठाली न बैठे रह स्थूल शरीर का पूर्ण उपयोग कर ईश्वर के इस उद्द्यान को और भी सुंदर बनाना | श्रम एक प्रकार की साधना है जिसमे निराकार को साकार में परिणत किया जाता है और साकार को सुविकसित बनाया जाता है | श्रम से ही व्यक्ति का अहंकार गलता है तथा सेवा -साधना की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है | पदार्थ का छोटे से छोटा परमाणु भी बिना विश्राम किये अनवरत गति से सक्रिय है | पवन को एक क्षण के लिये भी चैन नहीं है ,वह सतत प्रवाहित होता रहता है | सूर्य और तारे सभी अपने -अपने नियत कर्मों में संलग्न है ,अवकाश लेने की नहीं सोचते | वस्तुत;पसीने से पवित्र और कुछ नहीं ,जिस ललाट पर वह झलकता है उसे समुन्नत बनाता चला जाता है | अनगढ़ पत्थरों को देव प्रतिमा के रूप में पूजनीय बनाने का श्रेय श्रम के देवता को ही दिया जा सकता है | जो भी कुछ इस संसार में शुभ है ,सुखद है ,श्रेष्ठ है उसे केवल श्रम साधना से ही पाया जा सकता है |
12 March 2013
ART OF LIVING
'जिसे जीना आ गया ,वही है सच्चा कलाकार '
मानव जीवन एक बहुमूल्य निधि है | यह हमारा सौभाग्य है कि जो सुअवसर स्रष्टि के किसी प्राणी को नहीं मिला ,वह हमें मिला | हमारे जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम परमेश्वर की इस श्रेष्ठ संरचना ,दुनिया के सौंदर्य का रसास्वादन करते हुए निज को धन्य बनाये और इस तरह जियें जिसमे पुष्प जैसी मृदुलता ,चन्दन जैसी सुगंध ,और दीपक जैसी रोशनी भरी हो | जीवन को सही ढंग से जीना एक कला है ,एक कौशल है | जीवन कला जिसे आती है वह कलाकार अपने पास के स्वल्प साधनों से ही महान अभिव्यंजना प्रस्तुत करते हैं | जिसे जीना आ गया वही सच्चा शिल्पी है ,जीवन रूपी खेल का श्रेष्ठतम खिलाडी है |
मानव जीवन एक बहुमूल्य निधि है | यह हमारा सौभाग्य है कि जो सुअवसर स्रष्टि के किसी प्राणी को नहीं मिला ,वह हमें मिला | हमारे जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम परमेश्वर की इस श्रेष्ठ संरचना ,दुनिया के सौंदर्य का रसास्वादन करते हुए निज को धन्य बनाये और इस तरह जियें जिसमे पुष्प जैसी मृदुलता ,चन्दन जैसी सुगंध ,और दीपक जैसी रोशनी भरी हो | जीवन को सही ढंग से जीना एक कला है ,एक कौशल है | जीवन कला जिसे आती है वह कलाकार अपने पास के स्वल्प साधनों से ही महान अभिव्यंजना प्रस्तुत करते हैं | जिसे जीना आ गया वही सच्चा शिल्पी है ,जीवन रूपी खेल का श्रेष्ठतम खिलाडी है |
KNOWLEDGE
ज्ञान प्रकाश है ,जबकि अज्ञान अंधियारा है | इस अंधियारे में औरों का प्रकाश काम नहीं आता ,प्रकाश अपना ही हो ,तो भरोसेमंद साथी है | -बाबा फरीद ने अपने शिष्य से कहा -"ज्ञान को उपलब्ध करो | इसके अतिरिक्त कोई दूसरा मार्ग नहीं है | "शिष्य नम्र भाव से बोला -"बाबा !रोगी तो हमेशा वैद्दय के पास जाता है ,स्वयं चिकित्सा शास्त्र का ज्ञान अर्जित करने के फेर में नहीं पड़ता | आप मेरे मार्गदर्शक हैं ,गुरु हैं | यह मैं जानता हूं आप मेरा कल्याण करेंगे ,तब फिर स्वयं के ज्ञान की क्या आवश्यकता है | "यह सुनकर बाबा फरीद ने बड़ी गंभीरता पूर्वक एक कथा सुनाई | वे बोले -"एक गांव में एक वृद्ध रहता था मोतियाबिंद के कारण वह अंधा हो गया ,तो उसके बेटों ने उसकी आँख की चिकित्सा करानी चाही ,लेकिन वृद्ध ने अस्वीकार कर दिया | वह बोला -"भला मुझे आँखों की क्या जरुरत !तुम आठ मेरे पुत्र हो आठ पुत्रवधु हैं ,तुम्हारी माँ है | ये 34 आँखे तो मुझे मिली हैं | मेरी दो नहीं हैं तो क्या हुआ | "पिता ने पुत्र की बात नहीं मानी | कुछ दिन बाद एक रात अचानक घर में आग लग गई ,सभी अपनी जान बचाने के लिये भागे ,वृद्ध की याद किसी को नहीं रही | वह उस आग में जलकर भस्म हो गया |
कथा सुनाने के बाद बाबा ने अपने शिष्य से कहा -"बेटा !ज्ञान स्वयं की आँखे हैं ,इसका कोई विकल्प नहीं है | सत्य न तो शास्त्रों में मिलता है ,न शास्ताओं में | इसे तो स्वयं ही पाना होता है ,स्वयं का ज्ञान ही असहाय मनुष्य का एकमात्र सहारा होता है |
कथा सुनाने के बाद बाबा ने अपने शिष्य से कहा -"बेटा !ज्ञान स्वयं की आँखे हैं ,इसका कोई विकल्प नहीं है | सत्य न तो शास्त्रों में मिलता है ,न शास्ताओं में | इसे तो स्वयं ही पाना होता है ,स्वयं का ज्ञान ही असहाय मनुष्य का एकमात्र सहारा होता है |
11 March 2013
कैसी भी स्थिति हो धैर्य रखकर अनिवार्य दुःख को वीरता पूर्वक झेलता हुआ भी कोई परेशान ,अधीर न हो उसे शांत व्यक्ति कहते हैं | राजा बालीक ने अपने प्रधान सचिव विश्वदर्शन को पद से हटाकर राज्य से निकाल दिया | विश्वदर्शन एक गांव में आकर बड़े परिश्रम का जीवन बिताने लगे | एक दिन राजा बालीक वेष बदलकर विश्वदर्शन के गांव पहुंचे ,यह देखने कि उनकी कैसी स्थिति है | राजा ने देखा विश्वदर्शन बड़े प्रसन्न हैं उनके घर के सामने अनेकों आदमी बैठे बातचीत कर रहे हैं | वेष बदले हुए राजा ने उनसे पूछा -"महोदय !आपको तो राजा ने पद से हटा दिया फिर भी आप इतने प्रसन्न हैं ,इसका रहस्य क्या है ?"विश्वदर्शन राजा को पहचान गये और बोले -"महाराज !पहले तो लोग मुझसे डरते थे ,पर अब वह डर नहीं है ,इसलिए लोगों से खुल कर बात करने सेवा ,सहयोग ,आत्मीयता व्यक्त करने में बड़ा आनंद आता है | "राजा बालीक ने अनुभव किया ,सचमुच पद से लोग डर सकते हैं ,सम्मान तो मनुष्यता के श्रेष्ठ गुणों का होता है | लौटते समय राजा विश्वदर्शन को अपने साथ ले आये और उन्हें उनका पद फिर दे दिया |
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