21 July 2024

WISDOM -----

   ' सच्चे  गुरु  के  लिए  सैकड़ों  जन्म  समर्पित  किए  जा  सकते  हैं  l  सच्चा  गुरु  वहां  पहुंचा  देता  है   जहाँ  शिष्य  अपने  पुरुषार्थ  से   कभी  नहीं  पहुँच  सकता  है  l " --------      गुरु -कृपा   से  असंभव  भी  संभव  है  l  श्रद्धा  और  विश्वास  जरुरी  है  l  कोई  तर्क  नहीं  , कोई  संशय  नहीं  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  ने   गायत्री  मन्त्र  के  माध्यम  से   हमें  जीवन  में  सफलता  की  राह  को  बताया  l  उन्होंने  बताया   कि  अनेक  देवी -देवता  हैं  , अनेक  विधियाँ  हैं   जिनसे  हम  मन  चाही  मुराद  पूरी  कर  सकते  हैं  , लेकिन  वह  स्थायी  नहीं  होगी  , भाग्य  को  बदला  नहीं  जा  सकता   लेकिन  ' गायत्री मन्त्र ' में  वह  शक्ति  है  जो  प्रारब्ध  को  बदल  दे  l ' गायत्री   महाविज्ञान ' में  उन्होंने  इसे  विस्तार  से  समझाया  है  l  वे  कहते  हैं   कि  श्रद्धा  और  विश्वास  से  आप  गायत्री  मन्त्र  की   शुरुआत  तो  करो   , शेष  सब  ' माँ '  स्वयं  करा  लेंगी  l  आचार्य जी  ने  अपने  विचारों  से  हमें  जीवन  जीने  की  कला  सिखाई  है   जिसकी  आज  के  युग  में  सबसे  ज्यादा  जरुरत  है  l   आचार्य जी  के  अनमोल वचन ---------------------1 . l   भगवत कार्य  में  कोई  भी  कर्ता  नहीं  मात्र  निमित्त  ही  होता  है  l  अपने  से  कितना  भी  बड़ा   एवं  विशिष्ट  कार्य   संपन्न  हो  जाने  पर  भी   यदि  स्वयं  को  निमित्त  मात्र  ही  माना  जाये  तो  अहंकार  नहीं  होता  l "                  2 असीम  सत्ता  पर  गहरी  आस्था  और  विश्वास  से  हमें  ऊर्जा  मिलती  है  ,  यदि  आस्था  गहरी  हो  तो   सफलता  में  उन्माद  नहीं  होता   और  असफलता  में   अवसाद  नहीं  होता   l                                                                          3 ' अपने  चिन्तन  , चरित्र  एवं  व्यवहार  के   हर  कोने  के  परिष्कार  के  लिए  जुट  जाएँ  l  हर  घड़ी  हर  पल   स्वयं  को  इतना  धो  डालें  कि  जन्म जन्मान्तर  के  दाग  भी   छूट  जाएँ  l  हमारी  जीवन  साधना  ऐसी  हो   जो  विचारों  को  ही  नहीं   , संस्कारों   को  भी  धो  डालें  l  '

19 July 2024

WISDOM ----

   प्रसिद्ध  संत   श्री किंकर जी  महाराज   गुजरात  के  एक  गाँव  में  पहुंचे  l  वहां  अनेक  लोग  उन्हें  अपने  घर  चलने  की  जिद  करने  लगे  l  कई  सेठ -सहकर  उन्हें  अपने  साथ  ले  जाना  चाहते  थे  , परन्तु  उन्हें  छोड़कर  श्री किंकर जी  महाराज   ने  एक  कुम्भकार  के  घर  जाना  स्वीकार  किया  l  वह  भक्त  कुम्भकार  उन्हें  बड़े  आदर  के  साथ  अपने  घर  ले  गया   और  उनको  भोजन  परोसने  लगा  l  उसकी  पत्नी  संत  के  पास  बैठकर   उन्हें  पंखा  झलने  लगी  l  संत  की  द्रष्टि  महिला  के  पैरों  पर  पड़ी   तो  वे  समझ  गए  कि   कुम्भकार  की  गृहिणी  अपंग  है  l  उन्होंने  प्रेम  से  पूछा --- " बेटी  !  अपंगता  के  कारण  घर  के  कार्यों  को  करने  में  कठिनाई  होती  होगी  ? "  वह  बोलो ---- " नहीं  महाराज  !  मैं  बैठे -बैठे  भोजन  बनाती  हूँ  , बरतन  मांजती  हूँ , घर  का  आंगन  लीपती  हूँ   और  भगवान  की  पूजा  करती  हूँ  l  इन्हें  केवल  पानी  भरना  होता  है  l "  संत किंकर जी  महाराज  ने   उसके  पति  से  पूछा  ---- "  तुमने  इससे  क्यों  विवाह  किया  था   ? "  वह  बोला  ---- " महाराज  ! मैंने  सोचा  कि  जीवन  सेवा  में  लगाना  चाहिए   तो  मैंने  इससे  विवाह  करने  का  निश्चय  किया  l  मैंने  इसे  कभी  दुःख  नहीं  दिया  ,  हमेशा  हर  कार्य  में   सहयोग  देता  हूँ  l  मैंने  इसे  तीर्थयात्रा  कराई  है  नल  पालीताना  के  मंदिरों  में  दर्शन   कराने  ले  गया  तो   कंधे  पर  बिठाकर  पहाड़ी  तक  पहुँचाया  l  हम  दोनों  एक  दूसरे  के  सहयोग  से   जीविकोपार्जन   व  भगवान  की  भक्ति  में  लगे  हैं  l "   संत  श्री  किंकर जी  महाराज   उन  दोनों  आदर्श  पति -पत्नी   को  देखकर  उनके  सम्मुख  नत मस्तक  हो  गए   और  बोले  ---- "  जहाँ  तुम  दोनों  जैसे  पति -पत्नी  होते  हैं  , वहां  गृहस्थी  सदा  सुखमय  होती  है   l "  

18 July 2024

WISDOM -------

  सुंदरवन  में  एक  कौआ   रहा  करता  था   l  उसने  पहले  कभी  बगुले  को  नहीं  देखा  था  l  बरसात  का  मौसम  आया  तो  दूर  देश  से   एक  बगुला  उड़कर   वन  में  आया   l  उसे  देखकर  कौए  को  बड़ा  दुःख  हुआ  l  उसे  लगा  कि  उसका  रंग  कितना  काला  है   जबकि  बगुला  कितना  गोरा  है  l  उसने  जाकर  बगुले  से  कहा ---- " बगुले  भाई  !  आप  तो  बहुत  गोर  हो  l  यह  देखकर  आपको  बहुत  सुख  मिलता  होगा  l "   बगुला  बोला  ---- "  मैं  तो  पहले  से  ही  बहुत  दुःखी  हूँ  ,  जरा  तोते  को  देखो   वो  कितने  सुन्दर  दो  रंगों  से  रंगा  है  ,  मुझ  पर  तो  एक  ही  रंग  है  l "  अब  दोनों  मिलकर  तोते  के  पास  पहुंचे   तो  तोता  बोला  --- "  अरे ,   मैं  तो  तुम  दोनों  से  भी  ज्यादा  दुःखी  हूँ  ,  जरा  मोर  को  देखो   वो  कितने  सुन्दर  रंगों  से  रंगा  हुआ  है  l "  अब  सब  मिलकर  मोर  के  पास  पहुंचे   तो  देखा   कि  मोर  को  मारने  उसके  पीछे  शिकारी  लगा  हुआ  है  l  मोर  के  सुरक्षित  होने  पर  उन्होंने  मोर  से  अपनी  बात  कही   तो  मोर  बोला  ---- " भाइयों  !  मेरा  जीवन  तो  मेरे  रंगों  के  कारण  ही  असुरक्षित  हो  गया  है   l  ये  रंग  न  होते   तो  आज  मैं  तुम  लोगों  की  तरह  चैन  की  बंसी  बजा  रहा  होता  l "    अब  सबकी  समझ  में  आया   कि  भगवान  ने  हर  प्राणी  को  मौलिक  बनाया  है  l  किसी  को  छोटा  , किसी  को  बड़ा  नहीं  बनाया  है   l  यदि  हम  असंतुष्ट  रहना  चाहें   तो  हर  परिस्थिति  में  असंतुष्ट  रहने  के  कारण  ढूंढ  लेंगे,  लेकिन  यदि  संतुष्ट   रहना  चाहें  तो  हर  परिस्थिति  में  संतोष  के  कारण  उपलब्ध  हैं  l  

17 July 2024

WISDOM -------

   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- ' इन्द्रिय  संयम  ही  आध्यात्मिक  जीवन  का  आधार  है  l  संयम  ही  शक्ति  का  स्रोत  है  l  संयम  न  सिर्फ  आध्यात्मिक  जीवन  , वरन  भौतिक  जीवन  में  भी  सफलता  का  स्रोत  है  l '   -----   स्वामी  दयानंद  के  जीवन  की  घटना  है   l स्वामी  दयानंद  ने  दो  बैलों  को  आपस  में  लड़ते  देखा   l वे  हटाये  नहीं  हट  रहे  थे  l  स्वामी जी  ने  दोनों  के  सींगों  को  दोनों  हाथों  से  पकड़ा   और  मरोड़कर   दो  दिशाओं  में  फेंक  दिया  l   डरकर  वे  दोनों  भाग  गए  l    ऐसी  ही  एक  और  घटना  है  l  स्वामी  दयानंद   शाहपुरा  में  निवास  कर  रहे  थे  l  जहाँ  वे  ठहरे  थे  , उसी  मकान  के  निकट  एक  नई  कोठी  बन  रही  थी  l   एक  दिन  अचानक   निर्माणाधीन  भवन  की  छत  टूट  गई  और  कई  पुरुष  उस  खंडहर  में  बुरी  तरह  फँस  गए  l  निकलने  का  कोई  रास्ता  नजर  नहीं  आता  था  l  केवल  चिल्लाकर  अपने  जीवित  होने  की  सुचना  भर  बाहर  वालों  को  दे  रहे  थे  l  मलबे  की  स्थिति  ऐसी  खतरनाक  थी  कि  दर्शकों  में  से  किसी  की  हिम्मत  निकट  जाने  की  नहीं  हो  रही  थी  l  राहत  के  लिए  पहुंचे  लोग  भी  परेशान  थे  कि  थोड़ी   चूक   से  बचाने  वालों  के  साथ   भीतर  घिरे  लोग  भी   भारी -भरकम  दीवारों  में  पिस  सकते  हैं   l   तभी  स्वामीजी  भीड़  देखकर  कुतूहलवश   उस  स्थान  पर  जा  पहुंचे   और  वस्तुस्थिति  की  जानकारी  होते  ही   वे  आगे  बढ़े  और   और  अपने  एकाकी  भुजबल  से   उस  विशाल  शिला  को  हटा  दिया  l  शिला   के  पीछे  फँसे  लोग  सुरक्षित  बाहर  आ  गए  l  वहां  आसपास  एकत्रित  लोग   स्वामी जी  शारीरिक  शक्ति  का  परिचय  पाकर   उनकी  जय -जयकार  करने  लगे  l  स्वामीजी  ने  लोगों  को  समझाया  कि  यह  कोई  चमत्कार  नहीं  है  , संयम  की  साधना  करने  वाला   हर  मनुष्य   अपने  में  इससे  भी  विलक्षण   शक्तियों  का  विकास  कर  सकता  है  l  

15 July 2024

WISDOM ------

   लुकमान  से  किसी  ने  प्रश्न  किया   कि  आपने  इतनी  शिष्टता  कहाँ  से  सीखी  ?  लुकमान  ने  उत्तर  दिया  --- " भाई  ! मैंने  यह  शिष्ट  व्यवहार  अशिष्ट  लोगों  के  बीच  रहकर  ही  सीखा  है   l "  लुकमान  का  उत्तर  सुनकर  लोग  अचरज  में  पड़  गए  l  लुकमान  ने  और  आगे   स्पष्ट  करते  हुए   कहा  कि  अशिष्ट  लोगों  के  बीच  रहकर   ही  मैंने  जाना  कि  अशिष्ट  व्यवहार  क्या  है   l  मैंने  पहले  उनकी  बुराइयों  को  देखा  l  फिर  देखा  कि  कहीं  ये  बुराइयाँ  मुझ  में  तो  नहीं  हैं  l   इस  तरह  आत्म निरीक्षण  से  मैं  बुराइयों  से  दूर  होता  गया   और  आत्म सुधार  के  फलस्वरूप   लोग  मुझे   लुकमान  से  हजरत  लुकमान  कहने  लगे  l  

2 .  खलीफा  अली  जंग  के  मैदान  में  थे   l  एक  मौका  आया  , जब  उन्होंने  दुश्मन  राजा  को  उसके  घोड़े  से  गिरा  दिया   और  उसकी  छाती  पर  बैठ  गए  l  खलीफा  ने  अपनी  तलवार  तिरछी  की   और  वो  उसे  दुश्मन  राजा  की  छाती  में  भौंकने  वाले  ही  थे   कि  अचानक  दुश्मन  राजा  ने  उनके  मुँह  पर  थूक  दिया  l  खलीफा  तुरंत  एक  तरफ  हट  गए   और  बोले ---- "  आज  की  जंग  यहीं  ख़तम  l  हम  कल  फिर  लड़ेंगे  l " दुश्मन  राजा  बोला  --- "  लगता  है  आप  घबरा  गए  l  आज  आपके  पास  मौका  है   जंग  जीतने  का  ,  हो  सकता  है  कल  ऐसा  न  हो  पाए  l  "  l     खलीफा  ने  उत्तर  दिया ---- "  मजहब  का  उसूल  है  कि  कभी  जोश  में  होश  खोकर   कोई  काम  न  करो  l  जब  तुमने  मुझ  पर  थूका  तो  मुझे  गुस्सा  आ  गया  l  गुस्से  में  किया  गया  वार  हिंसा  होती  है  ,  इसलिए  मैंने  कहा  कि  आज  नहीं  कल  लड़ेंगे  l "  दुश्मन  के  अचरज  का  ठिकाना  न  रहा  l  वह  तुरंत  खलीफा  के  पैरों  में  झुक  गया   और  बोला  ---- " जो  इन्सान  जंग  भी  उसूलों  से  लड़ता  है  , उसे  मैं  क्या  दुनिया  की  बड़ी  से  बड़ी  ताकत  भी  नहीं  हरा  सकती  l  मैं  यह  जंग  आज  ही  ख़तम  करता  हूँ   l  "  यह  प्रसंग  वर्तमान  में  हो  रहे  युद्धों  के  लिए  प्रेरणा  है  l  आज  युद्ध  भी  व्यापार  है  , व्यापर  भी  ऐसा  जिसमे  कहीं  कोई  नैतिकता ,  जीवन  मूल्य  नहीं  है ,  निर्दोष  प्रजा  को , बच्चों  को  मारना , उन्हें  अनाथ  बना  देना  ,  नारी  जाति  को  अपमानित  करना  ,  प्रकृति  को  प्रदूषित  करना  ------ यह  युद्ध  है  कि  क्या  है  ?  

14 July 2024

WISDOM -----

   सुप्रसिद्ध  दार्शनिक  जानजे  से  उनके  एक  मित्र  ने  पूछा  ---- " मित्र  !  दुनिया  में  इतनी  अराजकता  फैली  हुई  है  l  यदि  यह  दुनिया  भगवान  की  बनाई  हुई  है   तो  वह  दुनिया  की  व्यवस्था  ठीक  क्यों  नहीं  करता   ? "    जानजे  ने  उत्तर  दिया ----- " मित्र  !  हमारा  कार्य   अपने  कर्तव्य  का  ईमानदारी  से  पालन  करना  है   और  भगवान  का  कार्य  संसार  की  व्यवस्था  देखना  है   l  हमें  हमारा  कार्य   ईमानदारी  से  करना  चाहिए   और  भगवान  का  कार्य  भगवान  पर  छोड़  देना  चाहिए  l  "   यदि  हर  व्यक्ति  ईमानदारी  से   उसको  दिए  गए   दायित्वों  की  पूर्ति  सही  ढंग  से  करता    रहे   तो  संसार  में  सुव्यवस्था  स्वत:  आ  जाएगी   l    आज  संसार  में   इतनी  अव्यवस्था , असंतोष , तनाव  , अशांति   है  , इसका   एकमात्र  कारण  यही  है  कि  हर  व्यक्ति  बड़ी  तेजी  से  अमीर  और  अमीर ---- होना  चाहता  है   और  अति  की  संपदा , अमीरी ,    ईमानदारी  से  तो  आ  नहीं  सकती  l  अपनी  महत्वाकांक्षाओं  और  असीमित  इच्छाओं  को  पूरा  करने  के  लिए  वह  उचित -अनुचित  सभी  तरीके  अपनाता  है   l  इसके  लिए  वह  केवल  दूसरों  का  ही  नहीं , अपनों  का  भी  शोषण  करने  से  नहीं  चूकता   l  ईश्वर  ने  मनुष्य  को  अपनी  राह  चुनने  की  स्वतंत्रता  दी  है  l  जैसी  सही  या  गलत  जो  भी  राह  व्यक्ति  चुनेगा  वैसी  ही  परिणाम  उसको  मिलेगा  l  यह  मनुष्य  का  दुर्भाग्य  है  कि  दुर्बुद्धि  के  कारण  वह   अनीति  की  राह  चुनता  है   और  जब  उसका    फल  भोगता  है  तो  दूसरों  को  और  ईश्वर  को  कोसता  है  l  

WISDOM -----

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " आकर्षक  व्यक्तित्व  का  निर्माण   शक्ति  और  संवेदना  के  सम्मिश्रण  से  होता  है  l  इन  दोनों  तत्वों  का  समन्वय  जहाँ -जहाँ  जितनी  भी  मात्र  में  होगा  , वहां  पर  उसी  के  अनुरूप  व्यक्तित्व  आकर्षक  और  चुंबकीय   होता  चला  जायेगा  l  संवेदना विहीन  अकेली  शक्ति   व्यक्ति  को  अहंकारी  और  निष्ठुर  बना  देती  है    और  व्यक्ति  यदि   केवल  संवेदनशील  है   उसमें  द्रढ़ता  व  शक्ति  नहीं  है   तो  लोग  उसे   'बेचारा  और  दया  का  पात्र  '  समझते  हैं  l  इसलिए  अपने  व्यक्तित्व  को  आकर्षक  बनाने  के  लिए  अपनी   शक्ति  व  क्षमताओं  को  संवेदनाओं  से  युक्त  कीजिए   l '    आचार्य श्री  आगे  लिखते  हैं ---   'सद्गुणों  से  और  श्रेष्ठ  विचारों  से  व्यक्ति  मानसिक  स्तर  पर  क्षमतावान  बनता  है   l  दुर्गुणी जनों  को  भी   आकर्षक  बनने  के  लिए   सद्गुणों  की  कलई  चढ़ानी  पड़ती  है    लेकिन  यह  कलई  उतरते  ही   उनकी  बड़ी  फजीहत   होती  है  l  "