पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- " मनुष्य की अंतरात्मा उसे ऊँचा उठने के लिए कहती है लेकिन सिर पर लदी दोष दुर्गुणों की भारी चट्टानें और दुष्प्रवृत्तियों उसे नीचे गिरने को बाधित करती हैं l स्वार्थ सिद्धि की ललक उसकी बुद्धि को भ्रमित कर देती है l वह लाभ को हानि और हानि को लाभ समझता है l आचार्य श्री कहते हैं ----- ' भूल समझ आने पर उलटे पैरों लौट आने में कोई बुराई नहीं है l मकड़ी अपने लिए अपना जाल स्वयं बुनती है l उसे कभी -कभी बंधन समझती है तो रोती - कलपती भी है , किन्तु जब भी वस्तुस्थिति की अनुभूति होती है तो वह समूचे मकड़जाल को समेटकर उसे गोली बना लेती है और पेट में निगल जाती है और अनुभव करती है कि सारे बंधन कट गए और वेदनाएं सदा -सदा के लिए समाप्त हो गईं l इसी तरह मनुष्य भी अपने स्तर की दुनिया अपने हाथों रचता है , वही अपने हाथों गिरने के लिए खाई खोदता है l वह चाहे तो उठने के लिए समतल सीढ़ियों वाली मीनार भी चुन सकता है l "
2 December 2025
WISDOM ----
वैष्णव सम्प्रदाय के आचार्य संत रामानुज को गुरु मन्त्र देते हुए उनके गुरु ने सावधान किया कि --'मन्त्र को गोपनीय रखना l संत रामानुज मन्त्र जप के साथ ही यह विचार करने लगे --यह अमोघ मन्त्र मृत्युलोक की संजीवनी है , यह जन -जन की मुक्ति का साधन बन सकता है , तो गुप्त क्यों रहे ? उन्होंने गुरु की अवज्ञा कर के वह मन्त्र सभी को बता दिया l एक स्थान पर गुरु ने अपने शिष्य को सामूहिक पाठ करते हुए सुना तो वे क्रुद्ध हो गए और बोले ---" रामानुज , तूने गोपनीय मन्त्र को प्रकट कर पाप अर्जित किया है l तो नरकगामी होगा l " रामानुज ने गुरु के चरण पकड़ लिए और पूछा --- " देव ! मैंने जिन्हें मन्त्र बताया , क्या वे भी नरकगामी होंगे ? " गुरु ने कहा ---- " नहीं ये तो मृत्युलोक के आवागमन से मुक्त हो जाएंगे l उन्हें तो पुण्य लाभ ही होगा l " रामानुज के मुख -मंडल पर संतोष की आभा चमक उठी " यदि इतने लोग मन्त्र के प्रभाव से मोक्ष प्राप्त करेंगे
30 November 2025
WISDOM ----
सभी प्राणियों में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा है जिसके पास वह क्षमता है कि वह चेतना के उच्च स्तर तक पहुँच सकता है , नर से नारायण l लेकिन दुर्बुद्धि ऐसी हावी है कि उसे नीचे गिरना अधिक सरल प्रतीत होता है और वह विभिन्न पापकर्मों में लिप्त होकर नर से नराधम और नर- पिशाच बनने की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील है l खुदाई में मिलने वाले विभिन्न सभ्यताओं के अवशेष यही बताते हैं कि ये पहले कभी बहुत उन्नत सभ्यताएं थीं लेकिन कोई एक ऐसी आपदा आई कि वे धूल में मिल गईं l ये आपदाएं प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारणों से ही नहीं आतीं , इसके लिए मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले पापकर्म , अत्याचार , अनाचार , ईश्वरीय नियमों की अवहेलना करना , अनैतिकता , अपराध उत्तरदायी हैं l धरती बेजान नहीं है , यह माँ हैं , सृजन करती हैं l हमें सभी खाद्य पदार्थ , खनिज आदि जीवन के लिए आवश्यक सभी कुछ धरती के गर्भ से ही मिलता है l धरती माँ के सामने ही जब मनुष्य के पापकर्मों की अति हो जाती है तो ये प्राकृतिक आपदाएं उनका क्रोध और रौद्र रूप है l अनेकों सभ्यताओं के अवशेष देखकर भी मनुष्य सुधरता नहीं है , सन्मार्ग पर नहीं चलता , स्वयं ही अवशेष बनने की दिशा में गतिशील है l
24 November 2025
WISDOM -----
पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' आज सबसे बड़ी आवश्यकता आस्था और विचारों को बदलने की है l इन दिनों आस्था संकट सघन है l लोग नीति और मर्यादा को तोड़ने पर बुरी तरह उतारू हैं l अनाचार की वृद्धि से अनेकों संकटों का माहौल बन गया है l न व्यक्ति सुखी है न समाज में स्थिरता है l समस्याएं , विपत्तियाँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं l स्थिर समाधान के लिए जनमानस के द्रष्टिकोण में परिवर्तन , चिन्तन का परिष्कार और सत्प्रवृत्ति संवर्द्धन ,प्रमुख उपाय है l " संसार में विभिन्न देशों की सरकारें सामाजिक सुधार और कल्याण के लिए अनेकों नियम , कानून बनाती हैं लेकिन यदि जनमानस के विचार श्रेष्ठ नहीं हैं , चिन्तन परिष्कृत नहीं है तो उन नियमों से कोई विशेष समाज में परिवर्तन नहीं होता l मानसिकता नहीं बदलने से मनुष्य ऐसे कार्य जो कानून द्वारा प्रतिबंधित हैं , वह उन्हें छिपकर करने लगता है l अच्छाई में बढ़ा आकर्षण होता है इसलिए बड़े से बड़ा पापी भी स्वयं को समाज में बहुत सभ्य और प्रतिष्ठित दिखाना चाहता है l वह अपनी मानसिक विकृतियों और पापकर्मों को समाज और परिवार से छिपकर अंजाम देता है l संचार के साधनों ने पाप और अपराध का भी वैश्वीकरण कर दिया l आचार्य श्री कहते हैं --- ' यदि समस्याओं का समाधान निकालना है तो अपने जीवन का लक्ष्य ' जीवन ' को बनाना चाहिए l व्यक्ति के जीवनक्रम और चरित्र को बनाने के लिए आस्तिकता और ईश्वर भक्ति की आवश्यकता है ताकि मनुष्य जाति का व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन श्रेष्ठ व समुन्नत बना रहे l "
20 November 2025
WISDOM -------
15 November 2025
WISDOM -----
संसार में अँधेरे और उजाले का संघर्ष तो आदिकाल से ही रहा है लेकिन अब जो स्थिति है उससे यही स्पष्ट होता है कि अंधकार सम्पूर्ण धरती पर अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने की पूरी तैयारी में l मनुष्य की कामना , वासना , महत्वाकांक्षा , स्वार्थ , लालच , ईर्ष्या , द्वेष अपने चरम पर पहुँच गया है इस कारण नकारात्मक शक्तियों के लिए अपना काम करना बहुत आसान हो गया है l भूत , प्रेत , पिशाच , जिन्न ------ आदि के पास अपना शरीर नहीं होता , ये किसी न किसी प्राणी के शरीर में प्रवेश कर अपना काम करती हैं l यदि ये नकारात्मक शक्ति किसी परिवार के मुखिया के शरीर में प्रवेश कर गईं तो वह अपने साथ पूरे परिवार को पतन की गर्त में धकेल देगा l यदि ऐसा कोई डीमन किसी पावरफुल व्यक्ति , किसी साम्राज्य के अधिपति में प्रवेश कर गया , तो जो दास्ताँ सामने होगी वह बहुत दर्दनाक होगी l ऐसा कहते हैं हिटलर के भीतर कोई डीमन था l जो परिणाम हुआ वह संसार के सामने है l प्राकृतिक आपदाएं तो आकस्मिक होंगी l मनुष्य ने परिस्थितियों को सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया तो वह रोता हुआ तो इस धरती पर आया है और चीखते -चिल्लाते , कराहते और पछताते हुए धरती से जायेगा l अंधकार को पराजित करने के लिए यदि बहुत छोटे स्तर पर भी प्रयास हों , तो ऐसे सामूहिक प्रयास से नकारात्मक शक्तियों को पराजित किया जा सकता है l वर्तमान समय लोक कल्याणकारी राज्य का है l प्रत्येक सरकार अपनी प्रजा को खुश करने के लिए नि :शुल्क भोजन , अन्न , शिक्षा , चिकित्सा आदि विभिन्न कल्याणकारी कार्य करती है l जैसे कोरोना का इंजेक्शन अनिवार्य था , वैसे ही संसार में सभी सरकारें यह अनिवार्य कर दें कि इन सुविधाओं के लेने से पहले प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म का हो , अपने ईश्वर का नाम , उनका कोई मन्त्र अनिवार्य रूप से एक पेज पर लिखकर जमा करे l चाहे कोई वेतनभोगी हो , मजदूर हो , बुजुर्ग हो , कोरोना इंजेक्शन की तरह यह लिखकर जमा करना अनिवार्य हो l आचार्य श्री कहते हैं मन्त्र को लिखने का प्रभाव कई गुना अधिक होता है और जब यह प्रयास सामूहिक होगा तो यह अंधकार की शक्तियां बुरी तरह पराजित होंगी l सारे पापकर्म तो इसी धरती पर होते हैं , सोचिये , धरती माता को कितना कष्ट होता होगा l ऐसे छोटे -छोटे प्रयासों से जो लोग न चाहते हुए , मजबूरीवश विभिन्न पापकर्मों में सम्मिलित हैं उनका कल्याण होगा , अनेकों आत्माएं जो भटक रही हैं उनकी मुक्ति होगी l नकारात्मक शक्तियों की वजह से जो अद्रश्य प्रदूषण होता है , वह सब साफ़ हो जायेगा और संसार में चारों ओर खुशहाली होगी l
14 November 2025
WISDOM ------
पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' अच्छे -बुरे वातावरण से अच्छी -बुरी परिस्थितियां जन्म लेती हैं और वातावरण का निर्माण पूरी तरह मनुष्य के हाथ में है , वह चाहे तो उसे स्वच्छ , सुन्दर और स्वस्थ बनाकर स्वर्गीय परिस्थितियों का आनंद ले सकता है अथवा उसे विषाक्त बनाकर स्वयं अपना दम तोड़े l " आज संसार में जितनी अशांति , युद्ध , अस्थिरता और तनाव है उसके लिए स्वयं मनुष्य ही दोषी है l मनुष्य ने अपनी अनंत इच्छाओं , कामना और सुख -भोग की लालसा के लिए भूमि , जल , वायु सम्पूर्ण प्रकृति को प्रदूषित कर दिया है l इच्छाएं , महत्वाकांक्षा एक ऐसा नशा है जो कभी समाप्त नहीं होता l उम्र चाहे ढल जाए लेकिन मन ललचाता ही रहता है l और जब प्रत्यक्ष उपलब्ध साधनों से संतुष्टि नहीं मिलती तब मनुष्य अपनी दमित इच्छा , महत्वाकांक्षा , कामना ----- आदि की पूर्ति के लिए नकारात्मक शक्तियों की मदद लेता है l तंत्र -मन्त्र , भूत -प्रेत , पिशाच आदि को सिद्ध कर अपने मनोरथ पूरे करना , प्राणियों की ऊर्जा का गलत इस्तेमाल करना ----- इन सबसे अद्रश्य वातावरण प्रदूषित हो जाता है l नकारात्मक शक्तियों को भी अपनी खुराक चाहिए l और यही कारण है कि हत्याएं , दुर्घटनाएं , युद्ध , ह्रदयविदारक घटनाएँ , प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ जाती है l इन नकारात्मक शक्तियों की मदद से व्यक्ति अपनी इच्छाओं को पूरा कर लेता , बहुत सुख -भोग और धन लाभ भी हो जाता है लेकिन यह कभी भी स्थायी नहीं होता l एक निश्चित समय तक ही इनसे लाभ उठाया जा सकता है , ईश्वर से बड़ा कोई नहीं है l किसी का अहित करने के लिए जब इन शक्तियों का इस्तेमाल किया जाता है , तब निश्चित समयानुसार इनका स्वत: ही पलटवार भी होता है l आचार्य श्री कहते हैं ---- ' गलत रास्ते से प्राप्त की गई सफलता कभी स्थायी नहीं होती , यह अंत में कलंकित हो जाती है l ' सच्ची सफलता जिसके साथ व्यक्ति में उदारता , करुणा , भाईचारा हो , अहंकार न हो , तब व्यक्ति को जो सम्मान मिलता है , वह बड़ी कठिन तपस्या से संभव है l