1 August 2024

WISDOM ------

   पाताल  नरेश  शंभर  बड़ा  शक्तिशाली  असुर  था  l  उसने  देवलोक  के  सभी  देवताओं  को  जीतकर   अपने  साम्राज्य  का  विस्तार  किया  l  देवता  चिंतित  होकर  प्रजापति  ब्रह्मा  के  पास  गए   और  उनसे  मुक्ति  का  उपाय  पूछा  l  ब्रह्माजी  बोले  ---- "  देवों  !  असुरों  का  एक  अस्त्र  है   हिंसा  l  वे  प्राणियों  का  वध  कर  के  अपनी  शक्ति  बढ़ाते  हैं  l  यही  पाप  एक  दिन  उनके  विनाश  का  कारण  बनेगा  l "  फिर  ऐसा  ही  हुआ  l   शंभर   के  तीन  प्रधान  सेनापतियों  ---दाम ,  व्याल  और  कष्ट   ने  सारे  राज्य  में  मांसाहार  का  प्रचार  किया   l  एक  दिन  एक  वधिक  ने   व्याल  से  कहा ----- "  जब  आप  भी  मांस  खाते  हो   तो  पशुओं  का  वध  स्वयं  अपने  हाथ  से  किया  करें   l  "   वधिक  की  बात  मानकर  जब  तीनों  ने  एक -एक  पशु  का  वध  किया   तो  मरते  समय  पशु  की  छटपटाहट   देखकर   तीनों  के  मन  में  मृत्यु  का   भय  समा  गया   l  भय  के  उत्पन्न  होते  ही  उनकी   घटने  लगी   और  एक  दिन  देवताओं  ने   फिर  से  उन  पर  धावा  बोल  दिया   l  इस  बार  वे   भयवश  वीरता पूर्वक  नहीं  लड़  सके   और  युद्ध  में  मारे  गए   l  हिंसा  का  पाप  अंतत:  विनाश  का  कारण  बनता  है  l  दूसरों  को  पीड़ित   देखकर   स्वयं  का  भी  मनोबल  टूटता  है   l  

31 July 2024

WISDOM -----

 1 . पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- " शुभ  भाव  , पवित्र  भाव   और  सबके  प्रति   प्रेम  का  भाव  सघन  हो  तो  किसी  को  भी  बदला  जा  सकता  है  l  सच्चे  साधक  हमेशा  अन्दर  से   अहिंसा  के  भाव  से  , प्रेम  से  भरे  होते  हैं  l  हिंसक  पशु  भी  उनके  सामने   अपनी  हिंसक  वृत्ति  छोड़  देते  हैं   l  "  ----- हरिहर  बाबा  बनारस  के  प्रसिद्ध  योगी  हुए  हैं  l  एक  हाथी  पागल  हो  गया  था   l  उसी  गली  में  भागा  जिसमे  हरिहर  बाबा  जा  रहे  थे  l  लोगों  ने   चिल्लाकर  कहा ---- "  बाबा  !  हट  जाइए  l  हाथी  थोड़े  ही  समझेगा  कि  आपकी  किसी  से   दुश्मनी   नहीं  है  ,  हट  जाएँ  l "   पर  बाबा  खड़े  रहे  l  हाथी  आया  बाबा  के  पास   आकर  खड़ा  हो  गया  l  बाबा  ने   सूँड़  पर  हाथ  फेरा  l  हाथी  आँसू  बहता  रहा  , फिर  बैठ  गया   l  थोड़ी  देर  वे  उसे  प्यार  करते  रहे  ,  फिर  वह  उठकर  चला  गया   l   उसका  पागलपन  ठीक  हो  गया  l  

30 July 2024

WISDOM ------

   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ----' अपने  जीवन  में  चाहे  जितने  भी  रिश्ते  हों  , लेकिन  एक  रिश्ता  भगवान  से  भी  रखना  चाहिए  l  और  अपने  मन  की  हर  बात  को  उनसे  बताना  चाहिए  l  यह  संवाद  भले  ही  एकतरफा  होता  है  ,  लेकिन  जिन्दगी  की  बहुत  सारी  उलझनों  को  सुलझाता  है  l  इससे  हमारी  भावनाओं  को  संबल  मिलता  है   कि  कहीं  कोई  है  ,  जो  हमारा  ध्यान  रखता  है   और  मुसीबत  के  समय  में  हमें  गिरने  नहीं  देता  है  , संभाल  लेता  है  l  '   आचार्य श्री  आगे  लिखते  हैं  ---- '  इसके  साथ   अपने  कर्तव्य  का  पालन  और  प्रबल  पुरुषार्थ   करने  से  भी  पीछे  नहीं  हटना  चाहिए  l  जिन्दगी  स्वयं  में  एक  शिक्षक  की  तरह  है  ,  जो  हर  कदम  पर  शिक्षण  देती  है   और  देर -सबेर  हमें  भावनाओं  के  स्वस्थ  विकास  में  मदद  करती  है  l '

28 July 2024

WISDOM -----

   मनुष्य  जीवन  क्या  है   ?  यदि  सरल  शब्दों  में  कहें  तो  यह    'कर्मों  का  लेन -देन  '  है  l  इस  धरती  पर  प्रत्येक  व्यक्ति  अपने  कर्मों  का  हिसाब  चुकाने  आता  है  l  मनुष्य  के  जितने  भी  रिश्ते  हैं  चाहें  वह  परिवार  से  हों , जानवरों  से , पशु -पक्षियों  से  , भूमि  से  हो  ----इन  सबका  व्यक्ति  पर  ऋण  होता  है  जिसे  किसी  न  किसी  रूप  में  चुकाना  होता  है  l  मनुष्य  ने  अपनी  बुद्धि  का  इस्तेमाल  कर  के   रिश्तों  को  विभिन्न  नाम  दिए , विभिन्न  श्रेणियां  बना   दीं  लेकिन  वास्तविकता  यही  है  कि  जन्म -जन्मान्तर  का  कोई  ऋण  होता  है   जिसे  चुकाना  पड़ता  है  l   जो  इस  सत्य  से  परिचित  हैं   वे  जीवन  में  आने  वाली  कठिनाइयों , अपमान , दुःख , तकलीफ   में  अपने  मन  को  समझा  लेते  हैं  कि  किसी  जन्म  का  कोई  ऋण  था , कोई  जाने -अनजाने  पाप  हुआ  था  ,  वह  कट  गया  l   जो  समझदार  हैं   वे  अपना  जीवन  ही  इस  ढंग  से  जीते  हैं  कि  उन  पर  किसी  का  कोई  ऋण  बकाया  न  रहे  l   एक  कथा  है -------- एक  सेठ जी  थे   वे  दिल्ली  से  अपना  व्यापार , हवेली  आदि  छोड़कर  अग्रोहा  नामक  स्थान  पर  आकर  रहने  लगे   l  उन्होंने   यह  घोषणा  करा  दी  कि  जो  भी  अग्रोहा  में  आकर  बसेगा  उसे  सब  सुख -  सुविधा  दी  जाएगी  l   लखी  नामक  एक  बंजारा  अग्रोहा  पहुंचा   और  उसने   सेठ  से  व्यापार  करने  के  लिए  रूपये  उधार  मांगे  l   सेठ  ने  पूछा  ---- " किस  जन्म  में  यह  कर्ज  चुकाओगे  ? "  बंजारा  कुछ  समझा  नहीं   l  तब  सेठ  ने  कहा --- " भाई  !  इस  जन्म  में  चुकाने  का  वायदा  करते  हो  तो   हिसाब  करके  रोकडिया  से  रूपये  ले  लो   l  लेकिन  यदि  अगले  जन्म  में  चुकाना  हो  तो   ऊपर  वाले  खंड  में  चले  जाओ   और  जितना  चाहे  ले  लो   l  हम  उस  रूपये  की  कोई  लिखा -पढ़ी  नहीं  करते  l  लखी  ने  सोचा  सेठ  कैसा  मूर्ख  है , अगले  जन्म  को  किसने  देखा  l  इसलिए  उसने  सेठ  से   कहा  कि  वह  अगले  जन्म  में  चुकाएगा  और   हवेली  के   ऊपर  वाले  खंड  में  जाकर  एक  लाख  रूपये  ले  लिए  l  लखी  अपने  डेरे  पर  पहुंचकर  बहुत  खुश  था  l  उसी  समय  एक  संत  वहां  से  निकले   l  लखी  ने  उन्हें  प्रणाम  किया  और  अपने  यहाँ  विश्राम  करने  को  कहा  l  भोजन , विश्राम  के  बाद  लखी  ने  उन्हें  कर्ज  लेने  का  पूरा    वर्णन  सुनाया   और   पूछा  कि  क्या   अगले  जन्म  में  चुकाना  होगा , कौन  किसे  पहचानेगा  l  तब  महात्मा जी  ने  उसे  पुनर्जन्म  का  विधान  बताया   और  कहा  कि  कर्म  अविनाशी  होते  हैं , कभी  नष्ट  नहीं  होते  जन्म -जन्मान्तर  तक  अच्छी -बुरी  परिस्थितियों  के  रूप  में  इन्हें  भुगतना  पड़ता  है  l  उन्होंने  पुराण  का  प्रसंग  सुनकर  कहा  कि  तुम्हे  बैल  बनकर   यह  कर्ज  चुकाना  पड़ेगा  l  महात्मा  की  बात  सुनकर  लखी  बहुत  डर  गया  और  सारा  रुपया  लेकर  सेठ  के  पास  पहुंचा   और  बोला  ---- ये  रूपये  आप  वापस  ले  लो , अगले  जन्म  में  चुकाने  की  क्षमता  मुझ  में  नहीं  है  l  ' लेकिन  अब  सेठ  ने  रूपये  लेने  से  इनकार  कर  दिया  ,  लखी  ने  बहुत   विनती  की  लेकिन  सेठ  ने  रूपये  लेने  से  मना  के  दिया   क्योंकि  वे  तो  बिना  किसी  लिखा -पढ़ीं  के  दिए  गए  थे  l  अब  लखी  पुन:  महात्मा जी  के  पास  गया  , बहुत  परेशान  था  कि  क्या  करें  ?  महात्मा जी  ने  सलाह  दी  कि  अग्रोहा  में  कोई  सरोवर  नहीं  है  , तुम  इन  रुपयों  से  यहाँ  एक  सरोवर  बनवा  दो   l  सरोवर  बनकर  तैयार  हो  गया  , सब  नगरवासी  बहुत  प्रसन्न  थे  l  लखी ने  कहा   कि  यह  सरोवर  सेठ  का  है  l  जब  सेठ जी   तक  यह  बात  पहुंची  तो  वे  तुरंत  लखी  के  यहाँ  गए   और  कहा  कि  यह  सरोवर  तुम्हारा  है  , तुमने  इसे  जनता  के  कल्याण  के  लिए  बनवाया  है  l  तब  लखी  ने  कहा ---- आपसे  अगले  जन्म  में  चुकाने  का  कहकर  जो  एक  लाख  रूपये  उधार  लिए  थे  ,  उस  से  यह  सरोवर  बनवाया   , आप  ही  इसके  स्वामी  हैं  l   सेठजी  सारी  बात  समझ  गए  , सरोवर   निर्माण    में  जो  अतिरिक्त  खर्च  हुआ  था  , उसकी  उन्होंने  तुरंत  भरपाई  की  और  उस  सरोवर  का  नाम  ' लखी सरोवर ' रख  दिया   l  लखी  का  जीवन  लोगों  के  लिए  प्रेरणा  है   और  कर्मफल  विधान  स्रष्टि  का  अनिवार्य   सच  है   l  

27 July 2024

WISDOM -----

  आज  मनुष्यों  के  जीवन  में   सबसे  बड़ी  समस्या  तनाव  की  है  l  यह  तनाव  ही  अनेक  समस्याओं  और  बीमारियों  को  जन्म  देता  है  l   यह  तनाव  कहीं  बाहर  से  नहीं  आया  है  ,  यह  व्यक्ति  की  स्वयं  के  जीवन  की  गलत  शैली   के  कारण  उत्पन्न  होता  है  l  लोगों  की  इच्छाएं , आवश्यकताएं  और  महत्वाकांक्षा  अनंत  है  ,  स्वयं  को  दूसरों  से  श्रेष्ठ  दिखाने  की  अंधी  दौड़  है  l   ये  सब  यदि  मर्यादित  हों  तो  व्यक्ति  के  , समाज  के  विकास  में  सहायक  होती  हैं   लेकिन  अनंत  हो  जाने  पर  सर्वप्रथम  व्यक्ति  को  ही '  तनाव  '  उपहार  में  देती  हैं  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- "  व्यक्ति  की  इच्छाएं  जब  बहुत  बढ़   जाती  हैं   तो  उन्हें  पूरा  करने  के  लिए   वह  उन्ही  के  अनुरूप  भाग -दौड़  करता  है  l  चिंता  करते  हुए  तनाव  में  रहता  है  l  दुनिया  में  कुछ  ऐसे  लोग  होते  हैं   जिन्हें  चाहे  जितना  मिल  जाए   वो  उससे  कभी  संतुष्ट  नहीं  होते   और  इस  तरह  अपनी  इच्छाओं  को  बढ़ाने  के   साथ  अपनी  असंतुष्टि  का  दायरा  भी   वो  बढ़ाते  ही  रहते  हैं  l   आचार्य श्री  लिखते  हैं  --- ' सादगी  का  अर्थ  केवल  खान-पान   या  सरल  जीवन  शैली  नहीं  है   बल्कि  यह  वास्तव  में  एक  सोच  है  , क्योंकि  इस  सोच  के  कारण  हमारा  जीवन  को  देखने  का  नजरिया   बदल  जाता  है  l  यदि  यह  नजरिया  सीधा -सादा  होगा   तो  फिर  ज्यादा  झूठ  बोलने  की  जरुरत  नहीं  होगी  , झगड़ा  नहीं  होगा  , कुछ  चुराने , छिपाने  की  जरुरत  नहीं  होगी  , फिर  जीवन  में   दूसरों  से  आगे  निकलने   या  महत्वाकांक्षा वश  कुछ  पा  लेने  की   होड़  में  शामिल  होने  की  जरुरत  भी  महसूस  नहीं  होगी  l  संसार  में  बाहरी  आकर्षण  का  प्रभाव  इतना  अधिक  है  कि  लोग  सादगी  को   जीवन  में  उतार  ही  नहीं  पाते  l  आचार्य श्री  कहते  हैं --- सादगी  से  भरा  जीवन  जीने  वाले  लोग  अपनी  जरूरतें  नहीं  बढ़ाते   और  वही  खरीदते  हैं  जिसकी  उन्हें  जरुरत  होती  है   l  वे  भविष्य  की  परवाह  तो  करते  हैं   लेकिन  अपने  वर्तमान  को  भरपूर  आनंद  के  साथ  जीते  हैं  l  ऐसे  लोग  सच्चाई  के  करीब  होते  हैं   और  उनके  निर्णय  भी  समझदारी पूर्ण  होते  हैं   l  स्वयं  पर  महत्वाकांक्षाओं  को  हावी  नहीं  होने  देते  l  इस  तरह  सादा  जीवन  व्यक्ति  को  मानसिक  शांति  और  स्वास्थ्य   की  अमूल्य  संपदा  प्रदान  करता  है  l  

26 July 2024

WISDOM ------

     लघु कथा ------- 1 .   मानसून  का  समय  आया  तो  एक  साल  भर  से  सुखी  नदी  उफान  के  साथ  बहने  लगी   l  गर्व  से  उन्मत  होकर  वह  समीप  बसे  गाँव   के  कुएं  से  बोली ---- " कुएं  भाई  !  जरा  मेरी  चौड़ाई  तो  देखो  l  मैं  एक  नहीं  दसियों  गाँव  को   अपने  अन्दर  समा  सकती  हूँ  l  तुम  तो  सहज  ही  मेरे  अन्दर  समा  जाओगे  l "  कुएं  ने  नदी  की  बात  का  कोई  उत्तर  नहीं  दिया  l  मौसम  बदला  तो  बरसाती  नदी    सूखकर   पतली  सी  धारा  में  बदल  गई  l   कुआं  उसे  संबोधित  करते  हुए  बोला ---- " बहन  !  जीवन  में  मात्र  विस्तार  ही  सब  कुछ  नहीं  होता  , गुणवत्ता  भी  आवश्यक  है  l  बिना  उदेश्य  के  बहुत  बढ़  जाने  से  भी  कोई  लक्ष्य  प्राप्त  नहीं  होता  l  जीवन  में  सफलता  तो  व्यक्तित्व  में  गहराई  लाने  से  ही  प्राप्त  होती  है   l "  

 2 .   एक   व्यापारी  रेगिस्तान  के   रास्ते  से    व्यापार  कर  के  लौट  रहा  था  l  उसने  अपनी  झोली  में  कई  कीमती  हीरे , जवाहरात   आदि  भर  रखे  थे   l  उसके  मित्रों  ने  समझाया  कि  कुछ  जवाहरात  छोड़  दे   और  उनके  बदले  पानी  की   चिश्तियां    बाँध  ले  ,  पर  उसने  उनकी  सलाह  को  दरकिनार  कर  अपनी  यात्रा  जारी  रखी  l  रास्ते  में  उसकी    भोजन  सामग्री  और  पानी  समाप्त  होने  पर   जब  वह  निढाल  हो  गया  ,  तब  उसे  एहसास  हुआ  कि   हीरे -जवाहरातों  से  पेट  नहीं  भरा  जा  सकता  l  मनुष्य  अपनी  कभी  न  समाप्त  होने  वाली  तृष्णा  के  कारण  धन- दौलत   के  पीछे  अंधाधुंध  भागकर   अपना   जीवन  बरबाद  कर  देता  है  l  

25 July 2024

WISDOM ------

  एक   साहूकार  भगवान  बिट्ठलनाथ  का  भक्त  था  l  उसे  पुत्र  हुआ  तो  उसने  भगवान  बिट्ठलनाथ   के  विग्रह  के  लिए  सोने  का  एक  कमरबंद  बनाने  का  संकल्प  किया  l  नगर  का  श्रेष्ठतम  सुनार  नरहरि  था  , सो  साहूकार  ने  नरहरि  सुनार  से  संपर्क  किया  l  नरहरि  सुनार  भगवान  शिव  का  अनन्य  भक्त  था   और  वह  कभी  भगवान  बिट्ठलनाथ जी  के  मंदिर  नहीं  गया  था   इसलिए  सुनार  ने  साहूकार  से  भगवान  की  कमर  का  नाप  लाने  को  कहा   l  साहूकार  द्वारा  दिए  गए  नाप  के  आधार  पर   नरहरि  ने  कमरबंद  बना  दिया  ,  पर  वह  कुछ  छोटा  रह  गया  l  तब  साहूकार   के  कहने  पर  नरहरि  सुनार  ने  उसे  कुछ  बड़ा  कर  दिया  l  इस  बार  वो  कुछ  ढीला  हो  गया  l  ऐसी  स्थिति  में  साहूकार  ने   नरहरि  से  स्वयं  मंदिर  चलकर  नाप  लेने  को  कहा   l  नरहरि  सुनार  ने  साहूकार  से  कहा  कि  वह  चलने  को  तैयार  है  ,  लेकिन  वह  केवल  शिवजी  के  मंदिर  ही  जाता  है   इसलिए  उसकी  आँखों  पर  पट्टी  बाँधकर   उसे  ले  जाया  जाए   l  साहूकार  ने  उसकी  बात  मान  ली  l  जब  नरहरि  सुनार  मंदिर  में  भगवान  बिट्ठलनाथ   की  मूर्ति  का  नाप   लेते  समय  उनके  पैरों  में  झुका   तो  उसे  लगा  कि   वहां  भगवान  शिव  नृत्य  कर  रहे  हैं    और  जब  उसने  कमर  को  छुआ  तो   उसे  लगा  कि  मूर्ति  की   कमर  में  सांप   लिपट  रहे  हैं  l  उसे  लगा कि  यह  तो  भगवान  शिव  की  पूर्ति  है   यह  सोचकर  उसने  आँखों  की  पट्टी  हटाई   तो  वहां  भगवान  बिट्ठलनाथ  खड़े  थे  l  उसने  फिर  पट्टी  बांधकर   नाप  लेने  का   प्रयास  किया  तो   उसे  भगवान  शिव  की  उपस्थिति  प्रतीत  हुई  l  तभी  आकाशवाणी  हुई   कि  --- सभी  भगवान  एक  हैं  नरहरि  ,  तू  भेद  क्यों  करता  है  ?   नरहरि  के  मन  का  भ्रम  दूर  हो  गया  और  उसने   भगवान  बिट्ठलनाथ  के  लिए   एक  सुन्दर  सा  कमरबंद  तैयार  कर  दिया   l