29 January 2026

WISDOM ------

   लघु  कथा  ------ एक  महात्मा  के  पास  तीन  मित्र  गुरु  -दीक्षा  लेने  गए  l  तीनों  ने  बड़े  भक्तिभाव  से  प्रणाम  कर  के  अपनी  जिज्ञासा  प्रकट  की  l  महात्मा  ने  उनको  शिष्य   बनाने  से  पूर्व  पात्रता  की  परीक्षा  कर  लेने  के  उदेश्य  से  पूछा  ---- " बताओ  कान  और  आँख  में  कितना  अंतर  है  ? '  एक  ने  उत्तर  दिया ---- ' केवल  पांच  अंगुल  का  भगवन  l ' महात्मा  ने  उसे  एक  ओर  खड़ा  कर  के  दूसरे  से  उत्तर  के  लिए  कहा  l  दूसरे  ने  उत्तर  दिया  --- " महाराज  !  आँख  देखती  है  और  कान  सुनते  हैं  ,  इसलिए  किसी  बात  की   प्रमाणिकता  के  विषय  में  आँख  का  महत्त्व  अधिक  है  l "  महात्मा  ने   उसको  भी  एक ओर  खड़ा  कर  के   तीसरे  से  उत्तर  देने  के  लिए कहा  l  तीसरे  ने  कहा --- '  भगवान्  !  कान  का  महत्त्व  आँख  से  अधिक  है  l  आँख  केवल  लौकिक  एवं   द्रश्यमान  जगत  को  ही  देख  पाती  है  ,  किन्तु  कान  को  परलौकिक    एवं  पारमार्थिक  विषय  का  पान  करने  का  सौभाग्य  प्राप्त  है  l "  महात्मा  ने  तीसरे  को  अपने  पास  रोक  लिया  l  पहले  दोनों  को  कर्म  एवं   उपासना  का  उपदेश  देकर  अपनी  विचारणा   शक्ति   बढ़ाने के  लिए  , विदा  कर  दिया  l  

27 January 2026

WISDOM -----

 मानव  जीवन  अनेक  समस्याओं  से  घिरा  हुआ  है  l  अमीर  हों  या  गरीब  कठिनाइयाँ  सभी  के  जीवन  में  है  ,  उनके  रूप   भिन्न -भिन्न  हैं  l  समस्याओं  से  छुटकारा  नहीं  मिलता   और  अनेक  लोगों  के  जीवन  में  ऐसा  भी  होता  है  कि  एक  ही  तरह  की  समस्या   निश्चित  समय  बाद  बार -बार  आती  है  l  हम  समझ  नहीं  पाते  कि   हमारे  भाग्य  में  ऐसा  क्या  है  कि  एक  ही  तरह  की  समस्या   बार -बार   आ  रही  है  ,  किसी  तरह  पीछा  ही  नहीं   छूट  रहा l  सब  उपाय  कर  लिए  लेकिन  कोई   स्थायी  समाधान  नहीं  मिला  l  ये  समस्याएं  हमारे  व्यापार , व्यवसाय , स्वास्थ्य ,  वैवाहिक  जीवन ,  विभिन्न  रिश्तों  से  संबंधित  होती  हैं  l  हमारा  जीवन   इन  सब  में  उलझा  हुआ  है  l  जब  मन  बहुत  परेशान  होता  है  तब  हम  सोचते  हैं  कि  हमारे  जीवन  में  ऐसा  क्यों  हुआ  ?  आखिर  क्यों  ?    ऐसे  सभी  अनसुलझे  प्रश्नों  के  उत्तर   यूनिवर्स  में   हैं  l   हमारे  जीवन  की  प्रत्येक  क्रिया , प्रत्येक  श्वास  का  उत्तर  यूनिवर्स  में  है   जिन्हें  हम  '  TAROT  CARDS  '  की  मदद  से  मालूम  कर  सकते  हैं  l  आप  भी  अपने जीवन  के  ऐसे  अनसुलझे  प्रश्नों  का  उत्तर    जानने  के  लिए   ' TAROT  CARDS READER  '   ANJALI  से  संपर्क  कर  सकते  हैं  l  यह  एक  ईश्वरीय  विद्या  है  ,  हम   ईश्वर  की  कृपा   से  ही   समस्या  के  पीछे  छुपे  सत्य  को  समझ  सकते  हैं  l  मेरा  WHATS APP  NO .  है --- 9425142092   समय   2 PM - 4 PM 

24 January 2026

WISDOM ----

 संत  का  एक  शिष्य  उनके दर्शन  को  पहुंचा  और  बोला  ----' आज  मैं  गरीबों  को  खाना  खिलाकर  आया  हूँ  l  जब  तक  मैं  किसी  की  सहायता  न  कर  दूँ  , मुझे चैन  नहीं  मिलता  l  बिना   प्रार्थना  किए  मुझे  नींद   भी  नहीं  आती  l "  संत  उसे  समझाते  हुए बोले  --- "  वत्स  !  तुम्हारा  आज  का  पुण्य  समाप्त  हो  गया  l  जो  दिखावे  के  लिए  किसी  की  सहायता  करता  है  , समझ  लो वह  नाटक  कर  रहा  है  ,  किसी  की  सहायता  गुप्त  रूप  से करनी  चाहिए  l  सेवा  इतनी गुप्त  रूप  से   होनी  चाहिए  कि  दांया  हाथ  दान  दे  तो  बांये  हाथ  को  भी  पता  न  चले  l  इस  निष्काम  भाव  से  किया  गया  कर्म  ही  पुण्य  का  माध्यम  बनता  है  l  "                                              युग  का  प्रभाव  प्रत्येक  वर्ग  पर पड़ता  है  l  वर्तमान  में  विश्व  के  लगभग  सभी  देशों  में  प्रजातंत्र  है   l  बड़ी  विषम  स्थिति  है  l  एक  ओर  सांसारिक  आकर्षण  है  , त्याग  और  वैराग्य  बहुत  कठिन  है   दूसरी  ओर  वोट  के  लिए  लालच , महत्वाकांक्षा  , सुख -भोग  का  जाल  बिछाया  जाता  है  l  संत  चाहे  किसी  भी  जाति -धर्म  का  हो  , किसी  भी  देश  का  हो  , उसके  लिए  इस  जाल   में  फँसने  से  बचना  लगभग  असंभव  है  ,  शरीर  से  पहाड़  पर  चले  भी  जाओ  , तो  क्या  यह  चंचल  मन  तो  संसार  में  ही  भटकता  है  l  भगवान  ने  गीता  में  कहा  भी  है  --कोई  विरला  ही  , लाखों , करोड़ों  में  कोई  एक  ही  उन  तक  पहुँच  पाता  है  l  यही  सत्य  है  क्योंकि  जो  भी  ईश्वर  की  ओर  कदम  बढ़ाता  है  , आसुरी  शक्तियां  उसकी  टांग  खींचती  है , उसका  जीना  मुश्किल  कर  देती  है  , वे सबको  अपनी  तरह  राक्षस  बनाना  चाहते  हैं  l  इतिहास    में  ऐसे  अनेक  उदाहरण  हैं  , महात्मा  ईसा  को  सूली  पर  चढ़ा  दिया , मीरा  को  जहर  दे  दिया  ---- ऐसे  उदाहरणों  से   इतिहास   भरा  पड़ा  है  l  कलियुग  में  चाहे  लाख  बुराइयाँ  हों  ,  लेकिन  अब  ऐसा  नहीं  होगा  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  ने  भी  कहा  है  ---युग  परिवर्तन  होगा ,  आसुरी  प्रवृत्ति  के  लोगों  को  हारना  ही  होगा  ,  उन्हें  सिर  उठाने  की  जगह  ही  नहीं  मिलेगी  l  

19 January 2026

WISDOM -------

    प्रत्येक  व्यक्ति  के  जीवन  की   यात्रा    उसके  परिवार  से  ही  आरम्भ  होती  है  l  संस्कार  तो  उसके  होते  ही  हैं   और  परिवार  जीवन  की  प्रथम  पाठशाला  है    इसलिए  गुण -दुर्गुण  के  बीज  परिवार  में  ही   बोये  जाते  हैं  जो  उसकी  उम्र  के  साथ  बढ़कर  विशाल  वृक्ष  बन  जाते  हैं l  बाहरी परिस्थितियां  और  संगत    उसमें  अपना  प्रभाव  डालती  हैं l  ये  परिवार  ही हैं  जो  मनुष्य  को  देवता  या  असुर बना  देते  हैं  l  यह  कलियुग  का  दुर्भाग्य  है  कि  इस  समय  असुरता  परिवार , समाज , संस्थाएं  और  सम्पूर्ण  संसार  में   अपना  आधिपत्य   स्थापित  करने  में    अपनी  पूरी  शक्ति  लगा  रही  है  l  असुरों  का  अहंकार  और  महत्वाकांक्षा   रावण  से  भी  ज्यादा  है   इसलिए  संसार  में  तनाव  और  युद्ध  है  l  अब  यदि  निष्पक्ष   रूप  से  इसकी जिम्मेदारी  की  बात  कहें   तो   मानव  जाति  में  बच्चे  हैं , युवा  हैं  , प्रौढ़  और  उम्र  की  ढलान  पर  पहुँचने  वाले  वृद्ध  हैं  l  बच्चे  मन  के  सच्चे  हैं  , वे  अहंकर  और  महत्वाकांक्षा  से  दूर  हैं  , वे  निश्छल  और  मासूम  हैं  , युद्ध  , पारिवारिक  कलह  से  उन्हें  कोई  मतलब  नहीं  है  l  जो  युवा  पीढ़ी  है   उनके  सपने  हैं  ,  वे  सुख  से  जीना  चाहते  हैं  , उन्हें  सही  दिशा  देने  वाला  कोई  नहीं  है  इसलिए  चालाक  लोग  उनकी    ऊर्जा  का  अपने  स्वार्थ  के  लिए  उपयोग  कर  लेते  हैं  l  अब  शेष  बचे  प्रौढ़  और  उम्र  की  ढलान  वाले  लोग  ,  इनकी  कामना , वासना , महत्वाकांक्षा , अहंकार  कम  नहीं  हो  रहा  l  इन  लोगों  को  लगता  है  क्या -क्या  ,  भोग  लें  , कोई  सुख   छूट  न  जाए  , अहंकार  की  पताका  नीची  न  हो  जाये  l  इसके  लिए  ये लोग  धन , वैभव  यानि  भौतिक  शक्तियों  के  साथ  हर  तरह  की  नकारात्मक  शक्तियों  का  भी  भरपूर  उपयोग  करते  हैं  l  संसार  में   , परिवार  में ,   हर  क्षेत्र  में  अशांति , तनाव , शारीरिक , मानसिक  उत्पीड़न  के  लिए  यही  लोग  उत्तरदायी  हैं  l   इन्हें  कौन समझा  सकता   है  , न्याय  करने  अब  ईश्वर  को  ही  आना  पड़ेगा   l  संसार  में  यदि  कहीं  कुछ  अच्छा  है  , तो  उसके  लिए  भी  इसी  उम्र  के  त्यागी , महात्मा  हैं  लेकिन  उनकी  संख्या  सागर  में  एक  बूंद  के  समान  है  l   आचार्य श्री  कहते  हैं  -- अंधकार  को  मिटाने  के  लिए  एक  किरण  ही  पर्याप्त  है  l  इसलिए  हमें  निराश  नहीं  होना  है  , हर  रात  के  बाद  सुबह  होती  है , वो  सुबह  अवश्य  होगी  l  

18 January 2026

WISDOM -----

 लघु कथा  ---- बिना  नाव  की  सहायता  के  योगी  ने  जल  पर  चलकर  नदी  को  पर  किया  l  उसे  अपनी  सिद्धि  पर  बहुत  गर्व  हुआ  और  संतोष  भी  l   अहंकार  से  तने  हुए  उस  योगी  को   एक  बूढ़े  मछियारे ने  देखा  l  उसने  समीप  जाकर  प्रणाम  करते  हुए  उनसे  पूछा  ---- " भगवन  !  जल  पर  चलने  की  यह  सिद्धि   आपने  कितने  समय  में  प्राप्त  की  ? "   योगी  ने  गर्व  से  अपना  मस्तक  ऊँचा  उठाते  हुए  कहा  ---- "  पूरे  बीस  वर्ष  कठोर  तपस्या  कर   के  मैंने  यह  सिद्धि  प्राप्त  की  है  l "  बूढ़े  ने  खिन्न  होकर  कहा  ---- "  आपका   इतना  लम्बा  समय  व्यर्थ  ही  चला  गया  l  जो  काम  नाव  वाले को  दो  पैसा  देकर  पूरा  हो  सकता  था  ,  उसके  लिए  इतना  कष्ट  उठाने  की  क्या  जरुरत  थी  ?  आचार्य  श्री कहते  हैं  --- ' मनुष्य  को  तपस्या  , साधना  विचारों  के  परिष्कार  और  सद्बुद्धि  के  लिए करनी  चाहिए   l   क्योंकि सद्बुद्धि  ही  प्रत्येक कार्य  में  प्रकाशित  है  l  

14 January 2026

WISDOM -----

 1. लघु कथा ----- भिखारी  दिन  भर  भीख  मांगता  -मांगता   शाम  को  एक  सराय  में  पहुंचा  और  भीतर  की  कोठारी  में  भीख  की  झोली  रखकर  सो  गया  l  थोड़ी  देर  में  एक  किसान  आया  ,  उसके  पास  रुपयों  की  एक  थैली  थी  ,  वह  बैल खरीदने  गया  था  l  वह  किसान  भी  रात  को  उसी  सराय  में  रुका  , जहाँ  भिखारी  था   और  वह  पोटली सिराहने  रखकर  सो  गया  l  भीख  की  झोली  रुपयों  की  झोली  से  बोली  --- "  बहन  !  हम  तुम  एक  ही  बिरादरी  के  हैं  ,  इतनी  दूर  क्यों  हो  ,  आओ  , हम  तुम  एक  हो  जाएँ  l  रुपयों  की  थैली  ने  हँसकर  कहा  -----"  बहिन  !  क्षमा  करो  ,  यदि  मैं  तुमसे  मिल  गई   तो  संसार  में   परिश्रम  और  पुरुषार्थ  का  मूल्य  ही   क्या  रह  जायेगा  ? "  

 2 .   लघु  कथा  --- एक  दिन  छाया  ने  मनुष्य  से  कहा  --- "  लो  देखो  ,  तुम  जितने  थे   उतने  ही  रहे   और  मैं  तुमसे  कई  गुना  बढ़  गई  l  मनुष्य  मुस्कराया  और  बोला  ----- "  सत्य  और  असत्य  में  यही  तो  अंतर  है  l  सत्य  जितना  है  उतना  ही  रहता  है   और  असत्य  पल -पल  में  घटता -बढ़ता  रहता  है  l "

4 January 2026

WISDOM -----

 '  कहते  हैं  ----- ' जब -जब  होता  नाश  धर्म  का  और  पाप  बढ़  जाता  है  , तब  लेते  अवतार  प्रभु  और  विश्व  शांति  पाता  है  l '     लेकिन  कलियुग  में  इतना  पाप , अधर्म , अत्याचार  बढ़  गया  है   फिर  ईश्वर  ने  अवतार  क्यों  नहीं  लिया  ?   कारण   स्पष्ट  है --- त्रेतायुग  में  रावण  बहुत  अत्याचारी , अन्यायी  , अधर्मी  था  , परनारी  का  अपहरण  किया  था  l  इन  दुर्गुणों  के  साथ  वह  परम  शिवभक्त  था  , वेद  , पुराण  का  ज्ञाता  था  l  वीर , साहसी , कूटनीतिज्ञ  आदि  अनेक  गुणों  से  संपन्न  था  l  ऐसे  अनेक  श्रेष्ठ  गुणों  के  कारण   उसे    निम्न  योनि  में  नहीं  ले  जाया  जा  सकता  था  l  रावण  के  कल्याण  के  लिए  ईश्वर  ने अवतार  लिया  क्योंकि  भगवान  के  हाथों  जिसका  वध  होगा  उसकी   मुक्ति  हो जाती  है  l  इसी  तरह  द्वापर  युग  में   दुर्योधन  ने  पांडवों  के  साथ  अन्याय  किया  लेकिन  वह  प्रजापालक  था  , प्रजा  उससे  खुश  थी  , वह  बहुत  वीर  और  बलराम जी  का  शिष्य  था  भगवान  श्रीकृष्ण  के  सामने  ही  उसकी  मृत्यु  हुई  l  ईश्वर  के  दर्शन  से  उसकी  मुक्ति  निश्चित  थी  l  कहने  का  तात्पर्य  यह  है  कि  त्रेतायुग  और  द्वापर  युग  में   पाप  की   तुलना    में  पुण्य  का  , सद्गुणों  का  प्रतिशत  लोगों  में  अधिक  था  लेकिन  कलियुग  में  पाप  और  मानसिक  विकृतियां  अपने  चरम  पर  हैं  l  ऐसे  पापियों  को   ईश्वर  कभी  मुक्ति  नहीं   देना  चाहते  , इसलिए  अवतार  नहीं  लेते  l  कलियुग  में  पापियों  को  उन्ही  के कर्मों  की  लौटकर  मार  पड़ती  है  l  अपने ही  किए  गए  कुकृत्यों  का  बोझा  वे  ढोते  हैं  l